एमपी में बच्चों काे एलर्जी में देने वाले अल्मॉन्ट कफ सिरप की बिक्री पर रोक

0

– अल्मॉन्ट सिरप में भी मिला जहरीला केमिकल, जिससे छिंदवाड़ा में गई थी 25 से ज्यादा बच्चों की जान

जबलपुर/भोपाल, 13 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश में बच्चों को एलर्जी में दिए जाने वाले अल्मॉन्ट किड सिरप की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। मंगलवार को राज्य सरकार ने इसको लेकर एडवाइजरी जारी कर दी है। दरअसल, इस सिरप में भी जहरीला इंडस्ट्रियल केमिकल (खराब एथलीन ग्लायकॉल) मिला है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से गाड़ियों के कूलेंट में किया जाता है। कोल्ड्रिफ कफ सिरप में भी यही जहरीला कैमिकल मौजूद था, जिसके सेवन के बाद मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में किडनी फेल होने से 25 से ज्यादा मासूमों की जान चली गई थी।

मध्य प्रदेश ड्रग कंट्रोलर दिनेश श्रीवास्तव ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि अल्मॉन्ट किड सिरप में जहरीला केमिकल मिलने के बाद तेलंगाना सरकार ने इसे अपने राज्य में बैन कर दिया और अन्य राज्यों को भी इसकी जानकारी भेजी है। तेलंगाना से नोटिस सभी राज्यों के पास शनिवार को आ गया था। इसके बाद इसे आगे बढ़ाते हुए हमने राज्य के हर जिले में मौजूद ड्रग इंस्पेक्टर को जानकारी भेजी है। साथ ही संबंधित सिरप को सीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पूरे राज्य में यह प्रक्रिया चल रही है।

उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने अल्मॉन्ट किड सिरप को लेकर एडवाइजरी जारी करते हुए स्टाक और बिक्री पर रोक लगा दी है। जबलपुर में भी ड्रग इंस्पेक्टर ने सभी मेडिकल दुकान संचालकों को निर्देश दिए हैं कि अगर कहीं पर इस सिरप को रखा है, तो उसे जमा कर दें। हालांकि ड्रग इंस्पेक्टर का कहना है कि अभी तक जिले में स्टाक होने की जानकारी नहीं मिली है।

गौरतलब है कुछ माह पहले मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कफ सिरप कांड देशभर की सुर्खियों में छाया हुआ था। यहां कोल्ड्रिफ कफ सिरप के सेवन के बाद किडनी फेल होने से 25 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई थी। इस दौरान राज्य सरकार ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप की जांच कराई थी, जिसमें केमिकल डायएथिलीन ग्लाइकॉल पाए जाने की पुष्टि हुई थी। अब वही जहरीला केमिकल बच्चों को एलर्जी में दिए जाने वाले अल्मॉन्ट किड सिरप में मिला है।

तेलंगाना औषधि नियंत्रण प्रशासन ने बच्चों को दी जाने वाली अल्मॉन्ट-किड सिरप पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं। विभाग ने इस संबंध में अर्जेंट एडवाइजरी जारी करते हुए बताया कि इस सिरप में इथाइलीन ग्लाइकॉल नामक अत्यंत जहरीला रसायन पाया गया है। यह कार्रवाई केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन से प्राप्त लैब रिपोर्ट के आधार पर की गई है।

तेलंगाना सरकार की रिपोर्ट में यह भी पुष्टि हुई है कि बिहार स्थित कंपनी ‘ट्रिडस रेमेडीज’ द्वारा निर्मित बैच नंबर एएल-24002 की यह दवा मिलावटी और जानलेवा है। यह सिरप आमतौर पर बच्चों में एलर्जी, फीवर और अस्थमा के इलाज के लिए डॉक्टरों द्वारा लिखी जाती है। मामला सामने आने के बाद मध्य प्रदेश के सभी जिलों का खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग भी अलर्ट मोड पर है। दवा के विक्रय पर रोक लगाने के लिए दवा विक्रेताओं को निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, संबंधित दवा का कोई स्टॉक फिलहाल किसी के पास नहीं मिला है।

जबलपुर केमिस्ट एवं ड्रग एसोसिएशन के पूर्व सचिव चंद्रेश जैन ने बताया कि अल्मॉन्ट सिरप का बैच नंबर एएल-24002, जिसे प्रतिबंधित किया गया है, जबलपुर के किसी भी मेडिकल स्टोर या आसपास के जिलों में फिलहाल उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि एडवाइजरी जारी की गई है कि यदि किसी दुकान पर यह सिरप मौजूद हो, तो उसे तुरंत सरेंडर कर दिया जाए। ड्रग इंस्पेक्टर देवेंद्र जैन ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से निर्देश मिले हैं कि जिले की हर मेडिकल शॉप पर जांच की जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं अल्मॉन्ट सिरप की बिक्री नहीं हो रही है। साथ ही डीलरों से भी जानकारी जुटाई जा रही है कि यदि एएल-24002 बैच का सिरप स्टॉक में हो, तो उसे तुरंत अलग कर लिया जाए।

अमेरिका ने लेबनान, मिस्र −जॉर्डन में मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े संगठनों को आतंकी घोषित किया

0

वॉशिंगटन, 13 जनवरी (हि.स.)। अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए लेबनान, मिस्र और जॉर्डन में मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े तीन संगठनों को आतंकवादी संगठन घोषित किया है। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जारी कार्यकारी आदेश के तहत शुरुआती कार्रवाई के रूप में उठाया गया है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बयान में कहा कि यह निर्णय उन मुस्लिम ब्रदरहुड इकाइयों की गतिविधियों और क्षमताओं को समाप्त करने की दिशा में पहला कदम है, जो अमेरिका के लिए खतरा मानी जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन इस दिशा में आगे भी सख्त कदम उठाता रहेगा।

निर्णय के तहत अमेरिकी विदेश विभाग ने लेबनानी मुस्लिम ब्रदरहुड को ‘विदेशी आतंकवादी संगठन’ और ‘विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी’ (एसडीजीटी) की श्रेणी में रखा है। इसके साथ ही संगठन के प्रमुख मोहम्मद फवजी तक़्कोश को भी एसडीजीटी घोषित किया गया है।

अमेरिकी वित्त विभाग ने मिस्र और जॉर्डन की मुस्लिम ब्रदरहुड इकाइयों को एसडीजीटी के रूप में नामित किया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन दोनों संगठनों पर हमास को भौतिक और वित्तीय सहायता देने के आरोप हैं।

रुबियो ने कहा कि यह कार्रवाई एक व्यापक और सतत अभियान की शुरुआत है, जिसका उद्देश्य दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़ी हिंसक और अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका प्रतिबंधों और अन्य उपायों के जरिए इन संगठनों पर दबाव बनाए रखेगा।

इन नामांकन के बाद संबंधित संगठनों और व्यक्तियों पर कड़े कानूनी और आर्थिक प्रतिबंध लागू होंगे। इनमें अमेरिकी नागरिकों के साथ लेन-देन पर रोक, संपत्तियों को फ्रीज करना और अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर पाबंदियां शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य आतंकी नेटवर्क की फंडिंग और संचालन क्षमताओं को कमजोर करना है।

यह घोषणा राष्ट्रपति ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश के बाद आई है, जिसमें अमेरिकी एजेंसियों को ऐसे संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे, जिन्हें अमेरिकी सुरक्षा हितों के लिए खतरा माना जाता है।

नदियों की स्वच्छता -जलीय जैवविविधता संरक्षण प्राथमिकता :सीआर पाटिल

0

देहरादून, 13 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने मंगलवार को कहा कि नदियों की स्वच्छता और जलीय जैवविविधता का संरक्षण देश की राष्ट्रीय प्राथमिकता है।

देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) परिसर में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने राष्ट्रीय नदी अनुसंधान केन्द्र का लोकार्पण करते हुए कहा कि यह केन्द्र नदियों और मीठे पानी के पारिस्थितिकीय तंत्रों से जुड़े वैज्ञानिक अनुसंधान को सुदृढ़ करेगा औए नदी संरक्षण के राष्ट्रीय प्रयासों को मजबूती देगा।

पाटिल ने गंगा नदी को भारत की सांस्कृतिक, पारिस्थितिक एवं आर्थिक जीवनरेखा बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय नदी अनुसंधान केन्द्र से प्रारंभ हुए प्रयास देश की सिमटती जैवविविधता के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने संस्थान से जुड़े वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को इस राष्ट्रीय दायित्व के लिए बधाई दी।

इस अवसर पर उन्होंने गंगा भवन का भी लोकार्पण किया और संस्थान की प्रयोगशालाओं का निरीक्षण किया। बाद में गंगा सभागार में आयोजित संवाद कार्यक्रम में गंगा संरक्षण, जलीय जैवविविधता, सामुदायिक सहभागिता और आजीविका आधारित संरक्षण मॉडलों पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने गंगा नदी में जलीय जीवों के संरक्षण के लिए डॉल्फिन रेस्क्यू वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधरोपण भी किया।

इस अवसर पर संस्थान के प्रेक्षागृह में भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक द्वारा स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया गया। वहीं, डीन एवं परियोजना की नोडल अधिकारी डॉ. रूचि बडोला ने एनएमसीजी–डब्ल्यूआईआई गंगा एवं जैवविविधता संरक्षण परियोजना के अंतर्गत अब तक की उपलब्धियों एवं भावी कार्ययोजना पर प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन किया गया, जिनमें “गंगा बेसिन में अत्यंत संकटग्रस्त घड़ियाल की जनसंख्या स्थिति एवं संरक्षण कार्ययोजना, ‘मिलेट्स फोर लाइफ’ पुस्तक और टीएसए फाउंडेशन इंडिया की ओर से तैयार की गई कछुआ संरक्षण से संबंधित रिपोर्ट शामिल है। साथ ही, इंडियन स्किमर संरक्षण परियोजना का औपचारिक शुभारम्भ किया गया और कछुआ संरक्षण परियोजना की जानकारी भी साझा की गई।————

दिल्ली में पांच दिवसीय ‘कला यात्रा 2026’ का भव्य शुभारंभ

0

‘कला यात्रा’ केवल एक आयोजन नहीं बल्कि परंपरा की स्मृति और नवीनीकरण के साहस का उत्सवः डॉ सोनल मानसिंह

​नई दिल्ली, 13 जनवरी (हि.स.)। ​राजधानी दिल्ली के सांस्कृतिक परिदृश्य में मंगलवार की शाम कामानी ऑडिटोरियम में पांच दिवसीय ‘नए कोरियोग्राफी महोत्सव-कला यात्रा 2026’ का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम दिल्ली सरकार के कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग और ‘सेंटर फॉर इंडियन क्लासिकल डांसेज’ (श्री कामाख्या कलापीठ) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया है।

इस मौके पर पद्म विभूषण से सम्मानित नृत्यांगना डॉ. सोनल मानसिंह ने कहा कि ‘कला यात्रा’ केवल एक आयोजन नहीं बल्कि परंपरा की स्मृति और नवीनीकरण के साहस का उत्सव है।

​महोत्सव का आगाज डॉ. सोनल मानसिंह के निर्देशन और कोरियोग्राफी में तैयार नृत्य-नाट्य ‘अमृत-मंथन’ से हुआ। इस प्रस्तुति में पौराणिक समुद्र मंथन के जरिए समाज के अंतर्द्वंद्व: धर्म-अधर्म और सद्-असद् को बेहद प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। भव्य मंच-सज्जा और कलाकारों के जीवंत अभिनय ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।

​दिन की दूसरी प्रस्तुति ‘इंटरनेशनल कथकली सेंटर’ द्वारा पेश की गई। ‘अथिजीवनम’ नामक इस कथकली नाटक ने पर्यावरण संरक्षण और मानवीय लोभ से धरती को बचाने का मार्मिक संदेश दिया। गुरु टी.बी. जगदीशन के निर्देशन में प्रस्तुत इस कथकली नृत्य-नाट्य का विषय मानव लोभ से पृथ्वी की रक्षा था। रंगीन वेशभूषा, सशक्त अभिनय और पारंपरिक संगीत के साथ 400 वर्ष पुरानी इस कला-शैली ने पर्यावरण संरक्षण का गहन संदेश दिया। प्रस्तुति के उपरांत कलाकारों को सम्मानित किया गया।

यह महोत्सव 13, 14, 15, 28 और 29 जनवरी तक चलेगा। इस दौरान देशभर की 10 प्रतिष्ठित नृत्य संस्थाएं अपनी नवीन कोरियोग्राफी पेश करेंगी। ​इसका उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय नृत्य की शुद्धता को बनाए रखते हुए उसमें नए प्रयोगों को मंच देना है।

माघ मेले के सेक्टर पांच में लगी आग, कोई हताहत नहीं

0

प्रयागराज, 13 जनवरी (हि.स.)। प्रयागराज के माघ मेले के सेक्टर पांच में झूंसी थानाक्षेत्र के संगम लोवर चौराहा स्थित नारायण शुक्ल धाम में मंगलवार की शाम शार्ट सर्किट से आग लग गई। हालांकि अग्निशमन विभाग एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्काल आग पर काबू पा लिया, जिससे किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

माघ मेला प्रभारी (पुलिस अधीक्षक) नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि जिले के थरवई थानाक्षेत्र के गारापुर गांव निवासी भरत शंकर शुक्ला माघ मेला के सेक्टर पांच के झूंसी थानाक्षेत्र संगम लोअर चौराहे के पास नारायण शुक्ला धाम शिविर में मंगलवार की शाम शार्ट सर्किट से आग लग गई। घटना की सूचना 17:45 बजे प्राप्त होते ही घटनास्थल के निकट ड्यूटी पर तैैनात दो-पहिया फायर वाहन तत्काल मौके पर पहुंचे। इसके बाद दो मिनट के भीतर फायर सर्विस के कुल 06 वाहन घटनास्थल पर पहुंच गए तथा तत्परता से अग्निशमन कार्यवाही प्रारम्भ की। इस आगजनी की घटना में 02 छोलदारियां जलने की सूचना है, लेकिन किसी भी प्रकार की जनहानि अथवा अन्य संपत्ति की क्षति नहीं हुई है। फायर सर्विस की त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई से आग पर पूर्णतः काबू पा लिया गया है। स्थिति पूर्ण रूप से नियंत्रण में है।

मेले की हर व्यवस्था और सिस्टम को किया गया अपडेट

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार माघ मेले की सुरक्षा व्यवस्था काे लेकर बराबर नजर बनाए हुए है और हर प्रकार की व्यवस्था काे पुख्ता कर रही है। माघ मेला शुरू होने के बाद अग्नि शमन विभाग के वाहनों को रवाना करने के दौरान एडीजी फायर पद्मजा चौहान ने जानकारी देते हुए बताया था कि महाकुंभ में हुई आगजनी की घटना को देखते हुए टीम का रिस्पांस टाइम को और करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा था कि अब अग्नि शमन का दस्ति दो मिनट में घटनास्थल पर पहुंच जाएगा। मंगलवार को कुछ ऐसा ही देखने में आया। आग लगने की सूचना पर दो मिनट में मोटरसाइकिल सवार अग्निशमन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पा लिया।

0

माँ-बाप की नीयत, परवरिश और टूटते घर 

0

– डॉ. प्रियंका सौरभ

भारतीय समाज में माता-पिता को सर्वोच्च नैतिक स्थान प्राप्त है। उन्हें त्याग, तपस्या और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक माना जाता है। बचपन से ही यह सिखाया जाता है कि माँ-बाप कभी गलत नहीं हो सकते। उनकी हर बात आदेश है, हर निर्णय अंतिम सत्य। लेकिन बदलते सामाजिक परिदृश्य में यह धारणा अब कई सवालों के घेरे में है। माँ-बाप की नीयत, परवरिश और टूटते घर 

सबसे पहले बात करते हैं भेदभाव की संस्कृति की। भारतीय परिवारों में यह कोई नई बात नहीं है कि बच्चों के बीच तुलना और पक्षपात होता रहा है। बड़ा बेटा “वारिस” माना जाता है, छोटा “समझौता” करता है, बेटी “पराया धन” होती है और बहू “बाहरी”। यही सोच जब व्यवहार में उतरती है, तो घर में स्थायी तनाव पैदा हो जाता है। माता-पिता अनजाने में या जानबूझकर एक बेटे के पक्ष में खड़े हो जाते हैं, दूसरे को उपेक्षित कर देते हैं। बहू को हर विवाद की जड़ मान लिया जाता है, जबकि बेटी के दोष पर पर्दा डाल दिया जाता है। यह असमानता रिश्तों को धीरे-धीरे तोड़ देती है। विवाह के बाद बहू का स्थान आज भी कई घरों में संदिग्ध बना रहता है। उससे उम्मीद की जाती है कि वह बिना सवाल किए हर परंपरा को स्वीकार करे, हर निर्णय माने और अपनी पहचान को त्याग दे। यदि वह अपने अधिकार, सम्मान या स्वतंत्रता की बात करती है, तो उसे “घर तोड़ने वाली” करार दे दिया जाता है। जबकि सच्चाई यह है कि कई बार घर पहले ही भीतर से टूट चुका होता है—सिर्फ दिखावा बचा होता है।

माता-पिता का अत्यधिक हस्तक्षेप भी आज पारिवारिक विघटन का बड़ा कारण बन रहा है। बेटे-बहू के निजी मामलों में दखल देना, छोटी-छोटी बातों को तूल देना, बहू की शिकायतों को नजरअंदाज करना और बेटे को भावनात्मक दबाव में रखना—ये सब स्थितियाँ विवाह को बोझ बना देती हैं। बेटा अक्सर दो पाटों के बीच फँस जाता है—एक ओर पत्नी, दूसरी ओर माता-पिता। और समाज उसे यही सिखाता है कि माता-पिता का साथ देना ही धर्म है, चाहे इसके लिए दांपत्य जीवन की बलि क्यों न देनी पड़े। यह भी देखने में आता है कि बेटी की शादी के बाद भी माता-पिता उसे अपने नियंत्रण में रखना चाहते हैं। बेटी को बार-बार मायके बुलाकर, उसके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप कर, दामाद के खिलाफ राय बनाकर, वे अनजाने में बेटी का घर कमजोर कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि बेटी और दामाद के बीच अविश्वास पनपता है, और अंततः रिश्ता टूटने की कगार पर पहुँच जाता है।

एक और गंभीर पहलू है भावनात्मक ब्लैकमेल। “हमने तुम्हारे लिए क्या-क्या नहीं किया”, “हमारे कारण तुम इस मुकाम पर हो”, “अगर हमारी बात नहीं मानी तो लोग क्या कहेंगे”—ऐसे वाक्य बच्चों को मानसिक रूप से जकड़ लेते हैं। वे अपनी खुशी, अपने रिश्ते और अपने सपनों की कीमत पर भी माता-पिता को खुश रखने की कोशिश करते हैं। लेकिन यह दबा हुआ असंतोष किसी न किसी दिन विस्फोट बनकर सामने आता है। समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब समाज भी इस मानसिकता को बढ़ावा देता है। हर विवाद में सबसे पहले सवाल बहू से किया जाता है—“क्या किया तुमने?” बेटे को “मजबूर” मान लिया जाता है और माता-पिता को “पीड़ित”। इस सामूहिक पूर्वाग्रह के कारण सच्चाई कभी सामने नहीं आ पाती। जिन घरों में माता-पिता की भूमिका नकारात्मक होती है, वहाँ भी उन्हें प्रश्नों से ऊपर रखा जाता है।

यह कहना भी जरूरी है कि हर माता-पिता दोषी नहीं होते। असंख्य माता-पिता ऐसे हैं जो संतुलित, संवेदनशील और न्यायप्रिय होते हैं। वे बच्चों को स्वतंत्र निर्णय लेने देते हैं, बहू-दामाद को सम्मान देते हैं और संवाद को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन समस्या उन माता-पिता की है जो अपने अनुभव को अंतिम सत्य मान लेते हैं और बदलते समय को स्वीकार करने से इनकार कर देते हैं। आज का युवा अलग सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों में जी रहा है। उसके सामने करियर का दबाव है, आर्थिक असुरक्षा है, बदलते रिश्तों की चुनौतियाँ हैं। ऐसे में उसे सहयोग चाहिए, नियंत्रण नहीं। उसे समझ चाहिए, आदेश नहीं। माता-पिता यदि यह समझने में असफल रहते हैं, तो टकराव स्वाभाविक है। परिवार संस्था को बचाने के लिए सबसे जरूरी है आत्ममंथन। माता-पिता को यह स्वीकार करना होगा कि उम्र के साथ-साथ अधिकार नहीं, जिम्मेदारी बढ़ती है। मार्गदर्शन और हस्तक्षेप में अंतर होता है। बच्चों की शादी का अर्थ यह नहीं कि वे हमेशा माता-पिता की इच्छाओं के अनुसार ही जिएँ। उन्हें अपनी गलतियों से सीखने का अवसर देना भी परवरिश का हिस्सा है।

साथ ही, बच्चों को भी यह समझना होगा कि संवाद ही समाधान है। टकराव, कटुता और अलगाव स्थायी समाधान नहीं हैं। लेकिन संवाद तभी संभव है जब माता-पिता भी सुनने को तैयार हों—बिना जजमेंट, बिना अहंकार।

आज जरूरत है कि हम “माँ-बाप हमेशा सही होते हैं” जैसी भावनात्मक लेकिन अव्यावहारिक धारणाओं से बाहर आएँ। सम्मान और प्रश्न एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। माता-पिता का सम्मान करते हुए भी उनकी भूमिका की समीक्षा की जा सकती है। यही स्वस्थ समाज की पहचान है।

घर टूटने का कारण कभी एक व्यक्ति नहीं होता। यह कई गलत फैसलों, दबे हुए दर्द और अनसुनी आवाज़ों का परिणाम होता है। यदि सच में हम परिवारों को टूटने से बचाना चाहते हैं, तो हमें साहस के साथ यह स्वीकार करना होगा कि कभी-कभी आईना माता-पिता को भी दिखाना पड़ता है। यही कड़वा सच आगे चलकर मीठे रिश्तों की नींव बन सकता है।

-प्रियंका सौरभ 

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,

कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार,

कॉल बाइपास में संलिप्त सात चीनी नागरिक गिरफ्तार

0

काठमांडू, 13 जनवरी (हि.स.)। कॉल बाइपास में शामिल 7 चीनी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। नेपाल पुलिस के केंद्रीय अनुसंधान ब्यूरो (सीआईबी) की टीम ने मंगलवार को ठमेल के ज्याठा स्थित एक रेस्टोरेंट से उन्हें गिरफ्तार किया।

सीआईबी के प्रवक्ता एसएसपी शिवकुमार श्रेष्ठ के अनुसार गिरफ्तार किए गए चीनी नागरिकों में 33 वर्षीय लिउ पान, 31 वर्षीय गाओ झिकुन, 41 वर्षीय लिउ जियानवेई, 41 वर्षीय ही दु शुआंगसेंग, 38 वर्षीय पेङ काङ, 49 वर्षीय चाई झिचिङ और 42 वर्षीय झाङ हाओ शामिल हैं।

नेपाल टेलिकॉम और एनसेल के समन्वय से सीआईबी ने मंगलवार को ज्याठा में चीनी नागरिक लिउ पान द्वारा संचालित रेस्टोरेंट पर छापा मारा और सभी को हिरासत में लिया।

जांच में सामने आया है कि इस रेस्टोरेंट को शेल्टर बनाकर एक चीनी गिरोह कॉल बाइपास का संचालन कर रहा था। सीआईबी ने उनके खिलाफ आगे की जांच शुरू कर दी है।

मजदूर किसान−गांव के विकास का मंत्र है वीबी-जी राम जी:पंकज चौधरी

0

वीबी-जी राम जी पर ग्राम चौपालों में जनसंवाद करेगी भाजपा

लखनऊ, 13 जनवरी (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी वीबी-जी राम जी अधिनियम के बारे में जनता को बताने के लिए लेकर गांव, गली, मजरो, चौपालों पर पहुंचकर जनसंवाद करेगी। मंगलवार को केन्द्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू की उपस्थिति में लखनऊ के इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में वीबी-जी राम जी अधिनियम 2025 पर संवाद आयोजित हुआ।

इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि विकसित भारत वीबी-जी राम जी मजदूर किसान और गांव के विकास का मंत्र है और कांग्रेस के भ्रष्टाचार का अंत है। उन्होंने कहा कि वीबी-जी राम जी से भ्रष्टाचार खत्म होगा गांव का विकास होगा ग्रामीण क्षेत्र में नए इंफ्रास्ट्रक्चर खड़े होंगे। जब गांव का विकास होगा तो देश का भी विकास होगा और देश विकसित भारत की ओर तेजी से अग्रसर होगा।

पंकज चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने पिछले 11 वर्षों में ग्रामीण भारत की दशा और दिशा दोनों को बदलने का ऐतिहासिक कार्य किया है। आज देश में 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं, यह केवल आंकड़ा नहीं बल्कि नीतियों की सफलता और गरीब के प्रति सरकार की संवेदनशीलता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि हर गरीब को रोजगार मिले, उसकी गरिमा का सम्मान हो और विकास का लाभ पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि आज सवाल यह है कि आखिर कांग्रेस और इंडी गठबंधन को विकसित भारत और भगवान श्रीराम के नाम से इतनी नफरत क्यों है? कांग्रेस चाहे कितनी भी साजिशें कर ले, भारत 2047 तक विकसित भारत बनकर रहेगा। इस संकल्प को कोई नहीं रोक सकता।

श्री चौधरी ने कहा कि वीबी-जी राम जी के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को हर वर्ष 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। वन क्षेत्रों में कार्य करने वाले कामगारों को अतिरिक्त 25 दिन का रोजगार मिलेगा। काम के दिन बढ़ेंगे और साथ ही मजदूरी का भुगतान भी पहले से कहीं अधिक तेज़ होगा। मनरेगा के विपरीत, इस नए कानून में हर सप्ताह भुगतान का प्रावधान किया गया है।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कार्यशाला में उपस्थित पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे पार्टी संगठन की योजनानुसार गांव-गांव व जन-जन तक वीबी-जी राम जी से आमजन को मिलने वाले लाभ के बारे में बताकर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम और झूठ का पर्दाफाश करें।

मेकर्स ने जारी किया ‘लाइकी लाइका’ का पहला पोस्टर

0

अभिनेत्री रवीना टंडन की बेटी राशा थडानी अब अपने बॉलीवुड करियर को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही हैं। जनवरी 2025 में रिलीज हुई फिल्म ‘आजाद’ से डेब्यू करने वाली राशा को दर्शकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली थी। अब वह अपनी दूसरी फिल्म ‘लाइकी लाइका’ के साथ एक बार फिर बड़े पर्दे पर वापसी करने जा रही हैं। फिल्म का पहला आधिकारिक पोस्टर जारी कर दिया गया है, साथ ही इसकी रिलीज टाइमलाइन का भी ऐलान हो चुका है।

पहले पोस्टर में दिखा अलग और बोल्ड अंदाज

सौरभ गुप्ता के निर्देशन में बन रही ‘लाइकी लाइका’ के पोस्टर ने आते ही ध्यान खींच लिया है। पोस्टर में घिसे हुए स्नीकर्स की एक जोड़ी, लाल रंग के छींटे और उखड़ी हुई नीली दीवार पर ग्रैफिटी स्टाइल में लिखा फिल्म का टाइटल नजर आ रहा है। यह विजुअल साफ इशारा करता है कि फिल्म एक इंटेंस रोमांटिक-एक्शन कहानी लेकर आने वाली है, जो युवाओं को खास तौर पर आकर्षित कर सकती है।

इस फिल्म में राशा थडानी के साथ ‘मुंज्या’ से पहचान बना चुके अभय वर्मा मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। दोनों की फ्रेश जोड़ी को पहली बार बड़े पर्दे पर देखने के लिए फैंस काफी उत्साहित हैं। मेकर्स के मुताबिक, ‘लाइकी लाइका’ साल 2026 की गर्मियों में सिनेमाघरों में रिलीज होगी। माना जा रहा है कि यह फिल्म राशा के करियर के लिए एक अहम पड़ाव साबित हो सकती है।