मुरादाबाद, 14 जनवरी (हि.स.)। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मुरादाबाद ने बुधवार को बताया कि जनपद में अत्यधिक शीतलहर, सर्दी और घने कोहरे के कारण नर्सरी से कक्षा 8 तक के विद्यालयों में 17 जनवरी तक अवकाश रहेगा।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मुरादाबाद विमलेश कुमार ने आज जारी पत्र में कहा कि मुरादाबाद में अत्यधिक शीतलहर, सर्दी और घने कोहरे के कारण छात्र-छात्राओं की सुरक्षा व स्वास्थ्य के दृष्टिगत जिलाधिकारी अनुज सिंह की अनुमति के उपरांत जिले के समस्त परिषदीय, मान्यता प्राप्त, सहायता प्राप्त, राजकीय, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय व अन्य समस्त बोर्ड के कक्षा नर्सरी से कक्षा 8 तक के विद्यालयों में 17 जनवरी तक अवकाश रहेगा।
पश्चिमी सिंहभूम, 14 जनवरी (हि.स.)। जिला स्थित चाईबासा इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित युवा महोत्सव के दौरान मैराथन दौड़ में शामिल एक छात्र की मौत हो गई। मृतक की पहचान बीटेक के छात्र विक्रम टुडू (20) के रूप में हुई है। वह ग्राम कनाटांड़, थाना निरसा, धनबाद का निवासी था। इस घटना के बाद कॉलेज प्रशासन की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
मंगलवार को कॉलेज प्रशासन की ओर से युवा महोत्सव के अवसर पर दो किलोमीटर की मैराथन दौड़ और वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। मैराथन दौड़ में कुल 58 छात्रों ने भाग लिया था। दौड़ के दौरान विक्रम टुडू की अचानक तबीयत बिगड़ गई और वह गिर पड़ा। आरोप है कि मौके पर कोई मेडिकल टीम या प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था मौजूद नहीं थी, जिससे समय पर इलाज नहीं मिल सका।
छात्र की हालत बिगड़ने पर आनन-फानन में उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल, चाईबासा ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बुधवार को परिजनों ने कहा कि कॉलेज प्रशासन ने उन्हें फोन कर घटना की जानकारी दी और बताया कि दौड़ के दौरान विक्रम की हृदय गति रुक गई, जिससे उसकी मौत हो गई। परिजनों ने सवाल उठाया कि इतने बड़े आयोजन में बिना मेडिकल व्यवस्था के छात्रों को मैराथन में क्यों शामिल किया गया।
कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर डी राहा ने बताया कि युवा महोत्सव के उपलक्ष्य में 2 किलोमीटर की मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया था। दौड़ के दौरान विक्रम टुडू की तबीयत अचानक बिगड़ गई और हृदय गति रुकने से उसकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि जैसे ही छात्र गिरा, वहां मौजूद छात्र-छात्राओं ने पानी का छिड़काव किया और प्राथमिक रूप से मदद की गई। इस घटना से कॉलेज प्रशासन काफी मर्माहत है।
मृतक के चचेरे भाई नीतीश टुडू ने आरोप लगाया कि यह पूरी तरह से कॉलेज प्रशासन की लापरवाही का मामला है और परिजनों को सही जानकारी नहीं दी गई। घटना को लेकर छात्र नेताओं और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने भी नाराजगी जताई है।
घटना की जानकारी मिलने पर भारतीय जनता पार्टी की नवनिर्वाचित जिला अध्यक्ष गीता बालमुचू सदर अस्पताल पहुंचीं और परिजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने कॉलेज प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए केस दर्ज करने की बात कही।
भाजपा के वरिष्ठ नेता देवी शंकर दत्ता उर्फ काबू दत्ता ने घटना को दुखद बताते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन से पहले समुचित मेडिकल व्यवस्था होनी चाहिए थी। उन्होंने सरकार और कॉलेज प्रबंधन से मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की।
घटना के बाद कॉलेज परिसर में शोक और आक्रोश का माहौल है। छात्र की मौत ने कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
फिल्म ‘राहु केतु’ को लेकर इंडस्ट्री में उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है और अब इसे बड़े-बड़े सितारों का समर्थन भी मिल रहा है। अमिताभ बच्चन, सलमान खान, संजय दत्त, अली फ़ज़ल और ऋत्विक धनजानी जैसे दिग्गजों की सराहना के बाद फिल्म को लेकर माहौल और गर्म हो गया है। ट्रेलर रिलीज़ के बाद से ही फिल्म चर्चा में बनी हुई है और इसे दर्शकों के साथ-साथ फिल्म इंडस्ट्री से भी भरपूर प्रतिक्रिया मिल रही है।
फिल्म के लिए यह खुशी का पल तब और खास बन गया, जब कॉमेडी के माहिर निर्देशक अनीस बज़्मी ने ‘राहु केतु’ की टीम को बधाई दी। ‘वेलकम’, ‘नो एंट्री’ और ‘सिंह इज़ किंग’ जैसी सुपरहिट फिल्मों के निर्देशन के लिए पहचाने जाने वाले अनीस बज़्मी का समर्थन मिलना फिल्म के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अभिनेत्री कृति सेनन ने ट्रेलर को हंसी से भरपूर और पूरी तरह मनोरंजक बताया, जबकि बॉबी देओल ने भी टीम को शुभकामनाएं देकर उत्साह बढ़ाया है।
जैसे-जैसे फिल्म की रिलीज़ नज़दीक आ रही है, दर्शकों की उत्सुकता भी तेज़ी से बढ़ रही है। जब पूरी इंडस्ट्री एक साथ समर्थन में खड़ी नजर आए और माहौल में कॉमेडी व उत्साह की झलक हो, तो साफ है कि ‘राहु केतु’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक खास सिनेमाई अनुभव बनने जा रही है। ज़ी स्टूडियोज़ की प्रस्तुति, ज़ी स्टूडियोज़ और बीलाइव प्रोडक्शंस द्वारा निर्मित यह फिल्म 16 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने के लिए तैयार है।
जौनपुर, 14 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद जौनपुर में लाइन बाजार थाना क्षेत्र के पचहटियां के पास बुधवार दोपहर चाइनीज मांझे की चपेट में आने से एक डॉक्टर क गर्दन कट गई और अत्यधिक खून बहने से अस्पताल में मौत हो गई। वह हेलमेट लगाकर अपनी बाइक चला रहे थे और केराकत से किसी कार्य से जौनपुर आए थे। वापस अपने घर केराकत की तरफ जा रहे थे, तभी यह घटना हुई।
बुधवार को केराकत तहसील क्षेत्र के शेखजादा मोहल्ला निवासी डॉ. समीर हाशमी (25) किसी कार्य से जौनपुर आए थे। काम पूरा हाेने के बाद दोपहर अपने घर वापस जा रहे थे। वह पचहटिया में प्रसाद तिराहे के पास पहुंचे ही थे कि उनके गले में चाइनीज मांझा फंस गया और जब तक कुछ समझ पाते चाइनीज मांझे से गला कट गया। गला कटते ही वह नीचे गिर पड़े और अत्यधिक खून बहने लगा। जब तक वह कुछ समझ पाते तब तक वह अचेत हो गए। आननफानन में स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें एम्बुलेंस के जरिए जिला अस्पताल में लाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक चार भाई और तीन बहन है।ये सबसे छोटा था।घटना की सूचना पर तत्काल पुलिस मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस संबंध में जानकारी देते हुए क्षेत्राधिकारी शहर गोल्डी गुप्ता ने बताया कि चाइनीज मांझे के खिलाफ अभियान जारी है। इस मामले में अज्ञात के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करवाया जाएगा।
युवक की चाइनीज मांझे की चपेट में आने से युवक की मौत हुई है।उन्होंने कहा कि यह अभियान जन अभियान है इसमें सभी लोगों को साथ आने की जरूरत है।
(मेरिट के नाम पर चयन या चयन के नाम पर मेरिट की हत्या?)
इतिहास में यह शायद पहली बार है कि किसी चयन परीक्षा का उत्तीर्ण मानदंड और मेरिट, परिणाम देखने के बाद तय किए जाने की स्थिति में रखे गए हों। हरियाणा सरकार की राजकीय मॉडल संस्कृति एवं पीएम श्री विद्यालय शिक्षक तैनाती नीति–2025 को काग़ज़ों में पारदर्शिता और निष्पक्षता का दस्तावेज़ बताया जा रहा है, लेकिन इसके प्रावधानों का गहन अध्ययन कई गंभीर और असहज प्रश्न खड़े करता है।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
पीएम श्री विद्यालय शिक्षक तैनाती नीति की सबसे बड़ी और बुनियादी कमी यह है कि स्क्रीनिंग परीक्षा के लिए न्यूनतम उत्तीर्ण अंक निर्धारित ही नहीं किए गए हैं। जब यह स्पष्ट नहीं है कि परीक्षा में पास होने के लिए कितने अंक आवश्यक होंगे, तो चयन को योग्यता आधारित कैसे कहा जा सकता है? यह कोई साधारण तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधा आघात है। नीति के अनुसार स्क्रीनिंग परीक्षा को कुल चयन में साठ प्रतिशत वज़न दिया गया है, लेकिन पास–फेल का कोई स्पष्ट मानक न होने के कारण यह परीक्षा पूरी तरह प्रशासनिक विवेक पर निर्भर हो जाती है।
जब विवेक के लिए कोई लिखित, सार्वजनिक और बाध्यकारी मानक नहीं होते, तो चयन प्रक्रिया स्वतः ही संदेह के घेरे में आ जाती है। यहीं से बैकडोर एंट्री की संभावना जन्म लेती है—जिसे चाहें उत्तीर्ण और जिसे चाहें बाहर।
इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि नीति में अनिवार्य मेरिट सूची बनाने का कोई प्रावधान नहीं है। न रैंकिंग का उल्लेख है, न कट-ऑफ अंकों का और न ही यह स्पष्ट किया गया है कि समान अंक होने की स्थिति में प्राथमिकता कैसे तय होगी। इससे पहले जब केंद्रीय स्तर पर आयोजित परीक्षाओं के माध्यम से चयन हुआ था, तब स्पष्ट मेरिट सूची, सार्वजनिक प्राप्तांक और तुलनात्मक मूल्यांकन की व्यवस्था मौजूद थी।
वर्तमान नीति में चयन प्रक्रिया चुनौती योग्य न होकर, केवल औपचारिक वैधता का साधन बनती प्रतीत होती है—मानो निर्णय पहले हो चुके हों और अंक बाद में उन्हें सही ठहराने के लिए जोड़े गए हों। स्क्रीनिंग परीक्षा की पारदर्शिता स्वयं एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। यह स्पष्ट नहीं किया गया कि प्रश्नपत्र कौन तैयार करेगा, मूल्यांकन किस संस्था या एजेंसी द्वारा और किस पद्धति से किया जाएगा, तथा अंकों के सामान्यीकरण जैसी कोई व्यवस्था होगी या नहीं। जब चयन का सबसे बड़ा भाग इसी परीक्षा पर आधारित हो और वही सबसे अधिक अस्पष्ट हो, तो यह आशंका स्वाभाविक है कि योग्यता से अधिक पहचान, पहुँच और सिफारिश निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
नीति के पीछे की पृष्ठभूमि पर नज़र डालें तो तस्वीर और स्पष्ट होती है। वास्तविकता यह है कि इन पीएम श्री एवं मॉडल संस्कृति विद्यालयों के लिए अपेक्षित संख्या में आवेदन ही नहीं आए। विभाग स्वयं जानता है कि जिस स्क्रीनिंग परीक्षा का आयोजन किया गया, उसमें सभी अभ्यर्थी निर्धारित स्तर पर उत्तीर्ण नहीं हो पाए। यही कारण रहा कि शुरुआती चरणों में ही इन विद्यालयों में अनेक पद रिक्त रह गए। रिक्त पद विभागीय साख के लिए असहज स्थिति पैदा करते हैं। “मॉडल” विद्यालयों में खाली पद शिक्षा व्यवस्था की सफलता के दावों को कमजोर करते हैं।
इसी दबाव में विभाग ने प्रारंभिक चरणों में चयन प्रक्रिया के मापदंडों में शिथिलता बरती। दूर-दराज़ जिलों में कार्यरत शिक्षकों को उचित मापदंड, साक्षात्कार और मेरिट की कठोरता में ढील देकर इन विद्यालयों में समायोजित किया गया। इस प्रक्रिया से अनेक ऐसे शिक्षकों को, जो वर्षों से दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात थे, अपने गृह या समीपवर्ती जिलों में आने का अवसर मिल गया। बाद के चरणों में स्थिति और असंगत हो गई। जो अभ्यर्थी बाद में आए, वे उन मापदंडों से अलग थे जो प्रारंभ में इन विद्यालयों के लिए निर्धारित किए गए थे। चयन प्रक्रिया में यह असमानता स्वयं इस बात का प्रमाण है कि नीति का क्रियान्वयन न तो एकरूप रहा और न ही निष्पक्ष।
इसी पृष्ठभूमि में वर्तमान नीति में न्यूनतम उत्तीर्ण अंक न रखना, परिणाम और मेरिट सूची को सार्वजनिक न करना किसी भूल का परिणाम नहीं लगता। विभाग को यह भय स्पष्ट रूप से है कि यदि कठोर मापदंड, स्पष्ट कट-ऑफ और पारदर्शी मेरिट लागू की गई, तो बड़ी संख्या में सीटें खाली रह जाएँगी। वास्तविकता यह भी है कि अधिकांश शिक्षक इन विद्यालयों में जाना नहीं चाहते—न कार्य परिस्थितियाँ आकर्षक हैं और न ही स्थानांतरण नीति में कोई दीर्घकालिक सुरक्षा। यही कारण है कि पूरी प्रक्रिया को जानबूझकर लचीला, अस्पष्ट और प्रशासनिक विवेक पर आधारित रखा गया है।
यदि सीटें खाली रह जाती हैं, तो बिना मेरिट, बिना तुलनात्मक मूल्यांकन और बिना सार्वजनिक जवाबदेही के किसी को भी—विशेषकर “अपने लोगों” को—इन विद्यालयों में भेजा जा सके। यहीं पर योग्यता आधारित चयन की अवधारणा समाप्त होती है और नियंत्रित चयन की व्यवस्था शुरू होती है। नीति का एक और गंभीर पहलू यह है कि चयन के बाद शिक्षक दस वर्षों तक इन्हीं विद्यालयों में बने रह सकते हैं। यदि चयन प्रक्रिया ही त्रुटिपूर्ण या पक्षपातपूर्ण हुई, तो उस गलती को सुधारने की कोई व्यावहारिक संभावना शेष नहीं रहती। इसका नुकसान केवल योग्य शिक्षकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विद्यार्थियों और पूरी शिक्षा व्यवस्था को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
यदि सरकार की मंशा वास्तव में निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण चयन की होती, तो पदों की संख्या के अनुपात में तीन या पाँच गुना अभ्यर्थियों की स्पष्ट मेरिट सूची तैयार की जा सकती थी। यह प्रक्रिया संवैधानिक, न्यायसंगत और कानूनी दृष्टि से कहीं अधिक मजबूत होती, लेकिन नीति में इस विकल्प को जानबूझकर शामिल नहीं किया गया। अक्सर किसी नीति की असली मंशा उसमें लिखी बातों से नहीं, बल्कि उन बातों से समझ में आती है जो उसमें नहीं लिखी होतीं। न्यूनतम उत्तीर्ण अंकों का अभाव, मेरिट सूची की अनिवार्यता न होना और चयन प्रक्रिया को चुनौती देने के स्पष्ट प्रावधानों का न होना—ये सभी संकेत देते हैं कि उद्देश्य योग्यता आधारित चयन नहीं, बल्कि सीटें भरने और चयन को नियंत्रित करने का है।
अंततः यह नीति मेरिट आधारित चयन की अपेक्षा मेरिट के नाम पर बैकडोर एंट्री की अधिक प्रतीत होती है। यदि सरकार वास्तव में शिक्षा की गुणवत्ता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर है, तो उसे न्यूनतम उत्तीर्ण अंक स्पष्ट रूप से निर्धारित करने होंगे, मेरिट सूची को अनिवार्य बनाना होगा और पूरी चयन प्रक्रिया को सार्वजनिक निगरानी के दायरे में लाना होगा। अन्यथा यह नीति भविष्य में चयन नहीं, बल्कि चयन के नाम पर मेरिट की हत्या के उदाहरण के रूप में याद की जाएगी।
-सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम बिछौली में हुई कार्यवाही
संभल , 14 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद संभल की सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम बिछौली में सरकारी भूमि पर किए गए कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। तहसीलदार संभल धीरेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में राजस्व विभाग की एक टीम गठित कर गांव में स्थित विभिन्न सरकारी भूमि का सीमांकन के बाद कब्जा हटाने की कार्यवाही शुरू कर दी ।
तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि ग्राम बिछौली में गाटा संख्या 1242 रकबा 0.769 हेक्टेयर (पशुचर), 1241 रकबा 0.510 हेक्टेयर (उद्यान), 1240 रकबा 0.166 हेक्टेयर (खाद के गड्ढे), 1238 रकबा 0.041 हेक्टेयर (रास्ता), 1237 रकबा 0.182 हेक्टेयर (खाद के गड्ढे), 1236 रकबा 0.081 हेक्टेयर (खेल का मैदान), 1235 रकबा 0.040 हेक्टेयर (स्कूल) तथा 1234 रकबा 0.040 हेक्टेयर (पंचायत घर) की भूमि पर स्थानीय निवासियों द्वारा किए गए अवैध कब्जों को चिन्हित किया जा रहा है। सीमांकन की कार्रवाई के दौरान मौके पर राजस्व कर्मियों के साथ प्रशासनिक टीम मौजूद रही।
तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि कुल लगभग 20 बीघा सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त कराया जाएगा। चिन्हित अवैध निर्माणों और कब्जों को हटाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस कार्रवाई से गांव में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं तहसीलदार ने चेतावनी दी है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आगे भी इस तरह की कार्रवाई जारी है।
तहसीलदार धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि आज यहां पैमाइश पूरी हो जाएगी यह लगभग 20 बीघा जमीन है जो कि पंचायत घर , स्कूल आदि के नाम से दर्ज है इस पर कब्जे पाए गए हैं इनके खिलाफ तमाम न्यायालयों में मुकदमे तय हो चुके हैं उसमें बेदखली के आदेश पारित हो चुके हैं लेकिन यह लोग कब्जा नहीं छोड़ रहे थे । आज इस पर कब्जा हटाने की कार्यवाही की जा रही है इसमें कुछ कब्जे आवासीय और कुछ धार्मिक कब्जे भी है यह कब्जे हटाए जा रहे हैं।
फिल्म ‘तुम्बाड’ से अपनी अलग पहचान बनाने वाले निर्देशक अनिल बर्वे एक बार फिर रहस्य और डर की दुनिया में दर्शकों को ले जाने के लिए तैयार हैं। उनकी अगली फिल्म ‘मायासभा’ काफी समय से चर्चा में बनी हुई है। पिछले साल नवंबर में रिलीज हुए इसके पोस्टर में जावेद जाफरी के रहस्यमयी अवतार ने दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी थी। अब साल 2026 की शुरुआत में मेकर्स ने फिल्म का टीजर जारी कर दिया है, साथ ही इसकी नई रिलीज डेट का भी ऐलान कर दिया गया है।
टीजर में दिखी रहस्य और तिलिस्म से भरी दुनिया
‘मायासभा’ के टीजर की शुरुआत जावेद जाफरी की गंभीर और रहस्यमयी आवाज से होती है। वह कबीरदास का दोहा पढ़ते सुनाई देते हैं, “माटी कहे कुम्हार से तू क्या रौंदेगी मोहे, एक दिन ऐसा आएगा कि मैं रौंदूंगी तोए।” इसके बाद टीजर में कई डरावने और रहस्य से भरे दृश्य दिखाई देते हैं, जो फिल्म के अंधेरे और तिलिस्मी माहौल की झलक देते हैं। जावेद जाफरी का अवतार बेहद गंभीर, गहन और डर पैदा करने वाला नजर आता है।
1980 के दशक की पृष्ठभूमि में रची गई है कहानी
फिल्म ‘मायासभा’ की कहानी 1980 के दशक के दौर में सेट की गई है। इसके जरिए मेकर्स जादू-टोना, तंत्र-मंत्र और एक रहस्यमयी दुनिया को बड़े पर्दे पर उतारने वाले हैं। पहले फिल्म की रिलीज तारीख 16 जनवरी, 2026 तय की गई थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाते हुए 30 जनवरी, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज करने का फैसला लिया गया है। टीजर सामने आने के बाद से ही फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और भी बढ़ गई है।
रांची, 14 जनवरी (हि.स.)। झारखंड पुलिस ने राजधानी रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र से लापता हुए दो मासूम बच्चों अंश और अंशिका को बुधवार सुबह रामगढ़ जिले के चितरपुर से सकुशल बरामद कर लिया। इस मामले में शामिल दो आरोपितों को भी गिरफ्तार किया गया है, जो बिहार के औरंगाबाद जिले के निवासी हैं। बच्चों के सुरक्षित मिलने से परिजनों के साथ-साथ पुलिस प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है।
इन दोनों बच्चों का सुराग देने वालों के लिए पुलिस की ओर से दो-दो लाख रुपये, यानी कुल चार लाख रुपये के इनाम की घोषणा की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड पुलिस ने विशेष टीम गठित कर व्यापक स्तर पर सघन अभियान चलाया।
झारखंड पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा ने बताया कि अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) मनोज कौशिक की विशेष मॉनिटरिंग में तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राकेश रंजन के नेतृत्व में 48 पुलिस पदाधिकारियों की एक विशेष टीम गठित की गई थी।
डीजीपी ने कहा कि यह मामला केवल अपहरण तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव तस्करी से जुड़े एक अंतरराज्यीय सिंडिकेट की ओर संकेत करता है। इसमें कई और लोग भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस की जांच अभी जारी है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 2 जनवरी को शालीमार बाजार से बच्चों के लापता होने के बाद रांची पुलिस ने हर संभव प्रयास शुरू कर दिया था। अंश और अंशिका की तस्वीरों वाले पोस्टर पूरे शहर और सार्वजनिक वाहनों में लगाए गए। पुलिस अधिकारियों ने अपने व्हाट्सएप स्टेटस के माध्यम से भी आम जनता से सहयोग की अपील की। बच्चों के पिता और हटिया के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (डीएसपी) सहित तीन मोबाइल नंबर सार्वजनिक किए गए, जिनके माध्यम से पल-पल की सूचनाएं एकत्र की गईं।
डीजीपी ने बताया कि मामले की जांच के दौरान 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया गया और संदिग्ध गतिविधियों का सत्यापन किया गया। इसके अलावा 5,000 से अधिक वाहनों की जांच कर उनकी संभावित संलिप्तता की पड़ताल की गई। विभिन्न राज्यों में ऐसे मामलों से जुड़े आरोपितों का सत्यापन कर इस घटना से उनके संबंधों की भी जांच की गई।
बच्चों की बरामदगी के लिए झारखंड के विभिन्न जिलों में रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, टेंपो स्टैंड, हाट-बाजार सहित अन्य प्रमुख स्थानों पर पोस्टरों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया। जगरनाथपुर और धुर्वा थाना क्षेत्र के संभावित एवं संदिग्ध इलाकों में ड्रोन के जरिए सघन निगरानी की गई। मामले के खुलासे में डॉग स्क्वॉयड की टीम की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। सीआईडी एडीजी मनोज कौशिक की ओर से पूरे देश में ‘ह्यू एंड क्राई’ नोटिस जारी किया गया। साथ ही विभिन्न बाल संगठनों ने भी सूचना प्रसारण में सराहनीय योगदान दिया।
डीजीपी ने इस कठिन और संवेदनशील अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली टीम को बधाई देते हुए कहा कि इसमें शामिल सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को उनकी तत्परता और साहस के लिए पुरस्कृत किया जाएगा।
प्रेस वार्ता के दौरान बच्चों के माता-पिता भी मौजूद थे। 13 दिनों के बाद अपने बच्चों को सुरक्षित वापस पाकर उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने पुलिस प्रशासन और इस अभियान में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपितों से गहन पूछताछ कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मानव तस्करी के इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट के तार और किन-किन राज्यों तथा स्थानों से जुड़े हैं। पुलिस को आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है
जोधपुर, 14 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली पुलिस भर्ती ऑन लाइन परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग कराने वाले तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। परीक्षा का आयोजन 12 जनवरी को बनाड़ स्थित एक ऑनलाइन सेंटर पर हुआ था। आरोपियों द्वारा रिमोट डेस्कटॉप एप्लिकेशन का उपयोग करना पता लगा है। कार्रवाई दिल्ली पुलिस और जोधपुर कमिश्ररेट की बनाड़ पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से की गई। दिल्ली पुलिस के हैड कांस्टेबल (मिनिस्टीरियल) भर्ती के लिए आयोजित हुई थी।
पुलिस आयुक्त ओमप्रकाश ने बताया कि जोधपुर में स्थित एक परीक्षा केंद्र, जहाँ दिल्ली पुलिस के हैड कांस्टेबल (मिनिस्टीरियल) भर्ती के लिए आयोजित ऑनलाइन परीक्षा, जोकि ऑनलाइन के माध्यम से संचालित की जा रही के संबंध में गोपनीय सूचना प्राप्त हुई कि परीक्षा केंद्र पर प्रतियोगी परीक्षाओं में सम्मिलित अभ्यर्थियों की सहायता के लिए रिमोट डेस्कटॉप एप्लिकेशन का उपयोग किया जा रहा था।
सूचना के आधार पर दिल्ली पुलिस तथा जोधपुर पुलिस की टीम द्वारा मारवाड़ इंस्टीट्यूट, शिजीत पेट्रोल पंप के पास, खोखरिया, बनाड़ रोड, जोधपुर में स्थित परीक्षा केन्द्र का निरीक्षण किया गया। तब वहाँ एक व्यक्ति पेमाराम पुत्र सिमरथा राम, निवासी ग्राम कांतिया, खींवसर, नागौर हाल प्लॉट न.ं 9, रमजान हत्था, शांति पेट्रोल पपं के पास स्वयं को परीक्षा केंद्र का सेंटर सुपरिंटेंडेंट तथा लैब का मालिक बताया। मगर उसका आचरण एवं व्यवहार संदिग्ध प्रतीत हुआ। जिस पर उससे पूछताछ की गई तो पता चला की वह केन्द्र पर परीक्षा में सम्मिलित होने वाले विशेष उम्मीदवार को पैसों के लालच में सहायता प्रदान कर रहा है उसके पास उम्मीदवारों के एडमिट कार्ड मिले तथा उससे संबध्ंा इस में हुआ बातचीत का विवरण प्राप्त हुआ जिससे प्रतीत हुआ कि वह परिक्षार्थियों की अनुचित सहायता कर रहा था।
इसी प्रकार केंद्र में साँवला राम पुत्र किशन राम निवासी जालोर की गतिविधियां भी संदिग्ध लगी। जो स्वयं को इसी एग्जामिनेशन सेंटर का नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर बता रहा था। वहीं महेन्द्र पुत्र भंवरलाल निवासी खोखरिया, बनाड़ की गतिविधियां भी संदिग्ध लगी। जिस पर उन सभी के खिलाफ केस दर्ज गिरफ्तार किया गया।
नई दिल्ली, 14 जनवरी (हि.स.)। मकर संक्रांति के दिन आज घरेलू सर्राफा बाजार में तेजी का रुख नजर आ रहा है। सोना आज 350 रुपये प्रति 10 ग्राम से लेकर 380 रुपये प्रति 10 ग्राम तक महंगा हो गया है। इसी तरह चांदी ने भी आज पांच हजार रुपये प्रति किलोग्राम से भी अधिक की छलांग लगाई है। सर्राफा बाजार में आई तेजी के कारण सोना ओर चांदी दोनों चमकीली धातुओं ने आज लगातार दूसरे दिन ऑल टाइम हाई का नया रिकॉर्ड बनाया है।
कीमत में आज आई उछाल के कारण देश के ज्यादातर सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना 1,42,540 रुपये से लेकर 1,42,690 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह 22 कैरेट सोना आज 1,30,660 रुपये से लेकर 1,30,810 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच बिक रहा है। सोना की तरह चांदी की कीमत में भी तेजी आने के कारण दिल्ली सर्राफा बाजार में आज ये चमकीली धातु 2,75,100 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर बिक रही है।
दिल्ली में आज 24 कैरेट सोना 1,42,690 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत 1,30,810 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 24 कैरेट सोना 1,42,540 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,30,660 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। इसी तरह अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने की रिटेल कीमत 1,42,590 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,30,710 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है।
इन प्रमुख शहरों के अलावा चेन्नई में 24 कैरेट सोना आज 1,42,540 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर और 22 कैरेट सोना 1,30,660 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर बिक रहा है। इसी तरह कोलकाता में 24 कैरेट सोना 1,42,540 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,30,660 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। भोपाल में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,42,590 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,30,710 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।
लखनऊ के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना आज 1,42,690 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर और 22 कैरेट सोना 1,30,810 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। पटना में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,42,590 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,30,710 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। जयपुर में 24 कैरेट सोना 1,42,690 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,30,810 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।
देश के अन्य राज्यों की तरह कर्नाटक, तेलंगाना और ओडिशा के सर्राफा बाजार में भी आज सोने के भाव में तेजी आई है। इन तीनों राज्यों की राजधानियों बेंगलुरु, हैदराबाद और भुवनेश्वर में 24 कैरेट सोना 1,42,540 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह इन तीनों शहरों के सर्राफा बाजारों में 22 कैरेट सोना 1,30,660 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।