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साफ़ छुपते भी नहीं, सामने आते भी नहीं

व्यंग्य आलोक पुराणिकचांदनी चौक जाना जैसे कई पीढ़ियों के इतिहास से गुजरना है। मनु कौशल और आलोक पुराणिक का बस चले, तो सुबह से रात...

शेख हसीना को मृत्युदंड: दक्षिण एशियाई कूटनीति में भारत की नई चुनौती

बांग्लादेश के न्यायिक संकट और भारत का कूटनीतिक संतुलन  शेख हसीना को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा के बाद दक्षिण एशियाई राजनीति में उभरते नए...

भारत सरकार के श्रम सुधारों के नए युग में पत्रकार क्यों छूट गए पीछे ?

भारत सरकार द्वारा श्रम कानूनों में किए गए व्यापक नीतिगत बदलावों से देश के 40 करोड़ से अधिक श्रमिकों के जीवन में नई उम्मीद...

बिहार के बाद बंगाल में भी भाजपा ने फूंका चुनावी बिगुल

बाल मुकुन्द ओझा बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की बंफर जीत से भाजपा उत्साहित है। भाजपा नेताओं ने 'बिहार के बाद अब बंगाल की बारी'...

व्यंग्यः जब कुकर में खीर बनी

अस्सी का दशक था। बाजार में सीटी बजाने वाला प्राणी आया। इसको नाम मिला कुकर। मोहल्ले में खबर हो गई... कुकर आ रहा है।...

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