अनिंद्रा ने सेहत और इकोनॉमी को पहुँचाया भारी नुक्सान

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बाल मुकुन्द ओझा

फिटबिट वैश्विक की एक ताज़ा स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर की 16 प्रतिशत आबादी अनिंद्रा की शिकार है। इनमें हमारे देश की 59 प्रतिशत आबादी भी शामिल है जो 6 घंटे की सुखपूर्वक नींद से जूझ रही है। भारत दुनिया के सबसे कम सोने वाले लोगों में शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार अनिंद्रा की महामारी लगातार अपने पैर पसार रही है जो मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए तो नुकसानदेय तो है ही अपितु देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था को भी बिगाड़ रही है। इससे अमेरिका की 411 और भारत  की 150 डालर इकोनॉमी को हानि पहुँच रही है। इसका एक बड़ा कारण स्मार्टफोन और वर्क लाइफ असंतुलन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। वैश्विक मेडिकल पत्रिका लेसेंट ने भी अनिंद्रा से दुनिया को चेताया है।

नींद की कमी धीरे-धीरे एक साइलेंट हेल्थ क्राइसिस बन चुकी है। पहले नींद को आराम या आदत माना जाता था, लेकिन अब शोध यह दिखाते हैं कि कम नींद का सीधा असर दिमाग, दिल, इम्यून सिस्टम और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है।  अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल (सीडीसी) ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य की उभरती हुई समस्या बताया है। उनकी रिपोर्ट के अनुसार लगभग हर तीन में से एक वयस्क रोजाना पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहा। भारत में किए गए एक बड़े सर्वे में पाया गया कि युवा वर्ग में यह समस्या सबसे अधिक बढ़ी है, जहां रात देर तक फोन का इस्तेमाल, ओवरवर्क, तनाव और अनियमित दिनचर्या नींद का सबसे बड़ा दुश्मन बन चुके हैं। आजकल की खराब लाइफ स्टाइल, वर्क फ्रॉम होम, स्क्रीन से चिपटे रहने और काम के बढ़ते दबाव के कारण लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल चुकी है। बदलते वर्किंग स्टाइल के कारण लोगों के पास पर्याप्त नींद लेने का समय भी नहीं बचता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की रिसर्च बताती है कि जो लोग 5 घंटे से कम सोते हैं, उनमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा 30–40 फीसदी बढ़ जाता है। नींद की कमी शरीर में सूजन बढ़ा देती है, जिससे ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल गड़बड़ा सकते हैं। कई डॉक्टर बताते हैं कि नींद की कमी मोटापे को भी बढ़ाती है, क्योंकि देर से सोने पर भूख बढ़ाने वाला हार्मोन “घ्रेलिन” बढ़ जाता है और शरीर को गलती से कैलोरी की जरूरत महसूस होने लगती है। यही कारण है कि कम सोने वाले लोग रात में जंक फूड ज्यादा खाते हैं।

भारत में नींद की कमी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। एक ऑनलाइन वैश्विक सर्वे की माने तो देश पर्याप्त नींद नहीं लेने के कारण स्वास्थ्य सम्बन्धी विकारों से जूझ रहा है। देश के लगभग 60 प्रतिशत लोग छह घंटे की नींद नहीं लेने के कारण विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ रहे है। इनमें बड़ी संख्या में युवा भी शामिल है। नींद का असर न केवल शारीरिक स्वास्थ्य पर बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। जहाँ तक युवा भारत की बात है, आजकल युवाओं में तनाव की समस्या को लेकर देशवासी बेहद चिंतित है। तनाव की वजह से कम उम्र में ही युवा डिप्रेशन के शिकार होने लगे हैं। खासतौर से काम करने वाले युवा यानि को नौकरी कर रहे हैं उनके अंदर ठहराव, लगन और काम के लिए पैशन बहुत कम है। जरा-जरा सी बातों पर स्ट्रेस लेने लगते हैं। हाल की में हुई एक स्टडी में भी ऐसे ही आंकड़े सामने आए हैं। जिसमें 25 साल के युवा कर्मचारियों में से 90 प्रतिशत का मन और दिमाग बेचैन पाया गया है। जिसकी वजह से कई बार अपने आप को हानि पहुंचाने तक के ख्याल इनके मन में आने लगते हैं। तनाव और डिप्रेशन से बचना है तो सबसे पहले हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। नींद की कमी के चलते कर्मचारियों की कार्य क्षमता भी प्रभावित हो रही है।

आज की भागदौड़ भरी लाइफ स्टाइल में काम का दबाव और समय का प्रबंधन हम पर इस कदर हावी हो चुके हैं कि हमारा मानसिक स्वास्थ्य गड़बड़ा रहा है। सोशल मीडिया के बारे में यह कहा जाता है विशेषज्ञों ने अच्छी नींद के लिए कैफीन का कम सेवन करने, सोने का निश्चित समय तय करने, सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी जैसी स्क्रीन का इस्तेमाल न करने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है एक्सपर्ट्स का कहना है कि अपनी दिनचर्या में  छोटे-छोटे बदलावों को अपनाकर लोग अपनी नींद की क्वालिटी सुधार सकते हैं और इससे उनकी तबीयत और उत्पादकता बेहतर हो सकती है।

बाल मुकुन्द ओझा

वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार

डी-32, मॉडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर

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