क्या कोई शिक्षण संस्थान अधिसूचित किये बगैर माॅइनारिटी संस्था हो सकती है या नहीं

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-हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य से मांगा जवाब

प्रयागराज, 09 फरवरी (हि.स)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सनबीम ओमैंस काॅलेज अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान है या नहीं, इस वैधानिक मुद्दे पर केंद्र व राज्य सरकार सहित अन्य विपक्षियों से चार हफ्ते में जवाब मांगा है और याचिका के निस्तारण की तिथि 23 मार्च नियत की है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार तथा न्यायमूर्ति स्वरुपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने सनबीम ओमैंस काॅलेज वाराणसी की याचिका पर दिया है।

याची काॅलेज का कहना है कि माॅइनारिटी वेनेफिट एक्ट 1961 किसी शिक्षण संस्थान पर तब तक लागू नहीं होता जब तक कि केंद्र सरकार से अनुमोदन लेकर राज्य सरकार ने गेट में अधिसूचित न कर दिया हो। याची काॅलेज को माॅइनारिटी एक्ट के तहत अधिसूचित नहीं किया गया है। इसलिए अल्पसंख्यक आयोग को हस्तक्षेप करने और विपक्षी संख्या पांच की बहाली करने का आदेश देने का क्षेत्राधिकार नहीं है। आयोग ने अधिकार से बाहर जाकर आदेश दिया है जिसे अवैध होने के कारण रद्द किया जाय।

याची ने चेयरमैन पी एस एम काॅलेज आफ डेंटल एण्ड रिसर्च केस के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना और राज्य सरकार से पूछा कि माॅइनारिटी एक्ट लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। विस्तृत जवाब दाखिल करें। तब तक विपक्षी की नियुक्ति मामले की यथास्थिति कायम रखने का निर्देश दिया है।

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