‘मर्दानी 3’ में रानी मुखर्जी ने सधे अभिनय से फिर जमाया पर्दे पर दबदबा

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फिल्म समीक्षा :

मूवी रिव्यू : ‘मर्दानी 3’

कलाकार : रानी मुखर्जी, मल्लिका प्रसाद, प्रजेश कश्यप, जानकी बोड़ीवाला, मिखाइल यवलकर, दिग्विजय श्रीकांत रोहिदास, जिम्पा संगपो भूटिया और इंद्रनील भट्टाचार्य

लेखक : आयुष गुप्ता , दीपक किंगरानी और बलजीत सिंह मारवाह

निर्देशक : अभिराज मीनावाला

निर्माता : आदित्य चोपड़ा

रेटिंग: ⭐⭐⭐ (3/5)

जनवरी के आखिरी शुक्रवार को रिलीज़ हुई रानी मुखर्जी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘मर्दानी 3’ सिनेमाघरों में पहुंच चुकी है। ‘मर्दानी’ फ्रेंचाइजी की शुरुआत 2014 में हुई थी, जबकि दूसरा भाग 2019 में आया था। तीसरी किस्त का निर्देशन अभिराज मीनावाला ने किया है। फिल्म में रानी मुखर्जी के साथ जानकी बोदीवाला और मल्लिका प्रसाद अहम भूमिकाओं में नजर आती हैं। जहां एक ओर ‘बॉर्डर 2’ पहले से बॉक्स ऑफिस पर मजबूती से टिकी हुई है, वहीं ‘मर्दानी 3’ अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करती है। फिल्म पूरी तरह परफेक्ट तो नहीं है, लेकिन इसमें इतना दम जरूर है कि यह दर्शकों को एक संतोषजनक सिनेमाई अनुभव दे सके।

कहानी

कहानी बुलंदशहर से शुरू होती है, जहां लड़कियों के किडनैप होने की घटनाएं सामने आती हैं। ‘अम्मा’ नाम की महिला एक गैंग चलाती है, जो बच्चियों का अपहरण करता है। मामला तब गंभीर हो जाता है जब एक बड़े अफसर की बेटी भी इस गिरोह का शिकार बन जाती है। इसके बाद शिवानी शिवाजी रॉय (रानी मुखर्जी) केस की जांच में जुट जाती हैं। जांच के दौरान सामने आता है कि यह सिर्फ किडनैपिंग नहीं, बल्कि एक खौफनाक नेटवर्क का हिस्सा है। फिल्म का विषय मजबूत और संवेदनशील है। हालांकि स्क्रीनप्ले कई जगह अनुमानित हो जाता है और सस्पेंस उतना चौंकाता नहीं, जितनी उम्मीद थी। फिर भी कहानी अपनी गंभीरता बनाए रखती है और दर्शकों को अंत तक जोड़े रखने की कोशिश करती है।

निर्देशन

निर्देशक अभिराज मीनावाला ने कहानी को डार्क और गंभीर टोन में पेश करने की कोशिश की है। ‘अम्मा’ के किरदार के जरिए खौफ का माहौल बनाने की मंशा साफ दिखती है। हालांकि विलेन का प्रभाव और ज्यादा गहरा हो सकता था। फिल्म का पेस कुछ हिस्सों में धीमा पड़ता है, लेकिन क्लाइमैक्स की ओर कहानी फिर से पकड़ बनाती है।

अभिनय

रानी मुखर्जी एक बार फिर शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में दमदार दिखती हैं। उनकी स्क्रीन प्रेज़ेंस और इमोशनल इंटेंसिटी फिल्म को संभालती है। कुछ दृश्यों में उनका गुस्सा ज्यादा लाउड लगता है, लेकिन कुल मिलाकर वह किरदार को मजबूती देती हैं। विलेन ‘अम्मा’ का किरदार ठीक-ठाक प्रभाव छोड़ता है, हालांकि और गहराई दी जा सकती थी। सहायक कलाकारों का काम संतोषजनक है, लेकिन कोई किरदार बहुत यादगार नहीं बन पाता।

तकनीकी पक्ष

फिल्म का बैकग्राउंड म्यूज़िक सस्पेंस को उभारने में अहम भूमिका निभाता है। कैमरा वर्क डार्क और गंभीर माहौल को प्रभावी ढंग से स्थापित करता है। हालांकि, एडिटिंग में थोड़ी और कसावट होती तो फिल्म का असर और ज्यादा दमदार हो सकता था।

फाइनल वर्डिक्ट

‘मर्दानी 3’ एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर बनी फिल्म है, जो परफेक्ट थ्रिलर तो नहीं बन पाती, लेकिन रानी मुखर्जी की दमदार मौजूदगी और कहानी की गंभीरता इसे देखने लायक बनाती है, लेकिन अगर आप बेहद तेज रफ्तार, चौंकाने वाला सस्पेंस ढूंढ रहे हैं, तो फिल्म थोड़ी कमज़ोर लग सकती है।

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