ध्वस्तीकरण की मनमानी कार्रवाई,एसडीएम व तहसीलदार पर भारी पड़ी

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–हाईकोर्ट ने मांगी सफाई, क्यों किया सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन–नौ फरवरी को हाजिर होने का निर्देश

प्रयागराज, 29 जनवरी, (हि.स)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी के राजा तालाब के एसडीएम व तहसीलदार को नौ फरवरी को दस बजे कोर्ट में इस स्पष्टीकरण के साथ हाजिर होने का निर्देश दिया है कि ध्वस्तीकरण मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का उल्लंघन करते हुए उन्होंने याची की बेदखली आदेश व कार्रवाई कैसे की। क्यों न उनके खिलाफ आदेश की अवहेलना करने की कार्रवाई की जाय।

यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने लल्लन प्रसाद यादव व आठ अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। याचीगण के खिलाफ 2006 में राजस्व संहिता की धारा 34 मे बेदखली की कार्यवाही शुरू की गई। एसडीएम ने बेदखली आदेश पारित किया। जिसके खिलाफ याची ने अपर आयुक्त वाराणसी के समक्ष अपील दाखिल की है जो विचाराधीन है। उसमें कोई अंतरिम राहत नहीं दी गई तो हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बेदखली पर रोक लगाने की मांग की गई है।

सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि 25 सितम्बर 2025 के एसडीएम के आदेश पर तहसीलदार ने 11 दिसम्बर 25 को राजस्व अधिकारियों की एक टीम गठित की और याची की बेदखली कर दी गई है।

कोर्ट ने ध्वस्तीकरण मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लेख करते हुए कहा कि बेदखली प्रक्रिया के तहत नोटिस और सुनवाई का पूरा मौका दिया जाय, फिर फाइनल आदेश के खिलाफ अपील का अवसर दिया जाय। इसके फैसले के बाद ध्वस्तीकरण कार्यवाही की जाय।

कोर्ट ने कहा एसडीएम व तहसीलदार की कार्यवाही न केवल विधि विरुद्ध है अपितु सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खुला उल्लंघन है। और दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत या वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सफाई के लिए हाजिर होने का निर्देश दिया है।

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