जाको राखें साईंया: बंदर ने मां की गोद से 20 दिन की बच्ची को कुएं में फेंका, नर्स की सूझबूझ से बची मासूम की जान

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जांजगीर-चांपा, 22 जनवरी (हि. स.)।छत्तीसगढ के जांजगीर-चांपा जिले के नैला क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सिवनी में गुरुवार दोपहर एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। यहां एक बंदर ने मां की गोद से महज 20 दिन की दूधमुंही बच्ची को छीनकर पास के कुएं में फेंक दिया। गनीमत रही कि बच्ची ने डायपर पहन रखा था, जो इस हादसे में उसके लिए लाइफ जैकेट साबित हुआ। ग्रामीणों की सतर्कता और गांव में मौजूद एक नर्स की त्वरित कार्रवाई से मासूम की जान बच गई।

ग्राम सिवनी, नैला निवासी अरविंद राठौर की 20 दिन की पुत्री को उसकी मां गोद में लेकर खाना खिला रही थी। इसी दौरान अचानक एक बंदर वहां पहुंचा और बच्ची को मां की गोद से छीनकर भागने लगा। बच्ची को छिनता देख मां जोर-जोर से चिल्लाने लगी। आवाज सुनकर घर के अन्य सदस्य और आसपास के ग्रामीण तुरंत बाहर निकले और बंदर का पीछा करने लगे।

बंदर बच्ची को लेकर इधर-उधर भागता रहा। करीब 10 से 15 मिनट तक ग्रामीणों ने उसकी तलाश की, लेकिन बच्ची कहीं नजर नहीं आई। इसी बीच ग्रामीणों की नजर पास के एक कुएं पर पड़ी, जहां बच्ची पानी में तैरती हुई दिखाई दी। बताया गया कि बच्ची करीब 10 मिनट तक कुएं के पानी में रही और उसने काफी पानी भी पी लिया था। डायपर पहनने की वजह से वह पूरी तरह पानी में नहीं डूबी, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

स्थिति की गंभीरता को समझते हुए ग्रामीणों ने तुरंत बाल्टी की मदद से बच्ची को कुएं से बाहर निकाला। उसी समय गांव में कथा सुनने आई नर्स राजेश्वरी राठौर भी मौके पर मौजूद थीं। उन्होंने बिना समय गंवाए मासूम को तत्काल सीपीआर देना शुरू किया। नर्स की त्वरित प्रतिक्रिया और ग्रामीणों के सहयोग से बच्ची की सांसें धीरे-धीरे लौटने लगीं। यह दृश्य देखकर परिजन और ग्रामीण भावुक हो गए और सभी ने राहत की सांस ली।

प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया। अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची की हालत अब स्थिर है और किसी गंभीर खतरे की स्थिति नहीं है।

बच्ची के पिता अरविंद राठौर ने बताया कि वे मड़वा पावर प्लांट में काम करते हैं और घटना के समय ड्यूटी पर थे। उन्होंने बताया कि 20 दिन पहले ही उनके घर बेटी का जन्म हुआ था, लेकिन मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे यह भयावह घटना घट गई। उन्होंने कहा कि डायपर पहनने की वजह से बच्ची पानी में नहीं डूबी और गांव में मौजूद नर्स राजेश्वरी राठौर द्वारा समय पर प्राथमिक उपचार देने से उनकी बेटी की जान बच सकी।

अरविंद राठौर ने बताया कि गांव में बंदर अक्सर दिखाई देते हैं, लेकिन इस तरह की खतरनाक घटना पहले कभी नहीं हुई। उन्होंने इसे सभी के लिए चेतावनी बताते हुए कहा कि छोटे बच्चों को कभी भी खुले में या अकेला न छोड़ें। अगर ग्रामीणों और नर्स की मदद समय पर नहीं मिलती, तो अनहोनी हो सकती थी।

यह घटना न सिर्फ एक चमत्कारिक बचाव की कहानी है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चेतावनी भी है, जिसने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

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