संघ किसी विचारधारा के विरुद्ध नहीं,उसका कार्य राष्ट्र निर्माण −डॉ. भागवत

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मुंबई, 07 फरवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शनिवार को मुंबई में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किसी व्यक्ति, संगठन या विचारधारा के विरुद्ध नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से निरंतर कार्य कर रहा है।

संघ प्रमुख डॉ. भागवत आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुंबई में आयोजित “नए क्षितिज” कार्यक्रम में बोल रहे थे। संघ प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संघ किसी व्यक्ति, संगठन या विचारधारा के विरुद्ध नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि संघ न तो अर्धसैनिक संगठन है और न ही सत्ता, प्रतिष्ठा या लोकप्रियता की आकांक्षा रखता है।

संघ प्रमुख डॉ. भागवत ने कहा कि संघ का कार्य अपने आप में अद्वितीय है, जिसे समझने के लिए न केवल देश बल्कि विदेशों से भी लोग आते हैं। उन्होंने बताया कि विश्व के पांचों महाद्वीपों से लोग संघ की गतिविधियों का अध्ययन करने आते हैं और इसके कार्यों को लेकर जिज्ञासाएं प्रकट करते हैं। संघ का कार्य न किसी प्रतिस्पर्धा के परिणामस्वरूप शुरू हुआ और न ही किसी अन्य संगठन के विरोध में। उन्होंने कहा कि संघ की तुलना अक्सर अन्य संगठनों, संस्थानों या राजनीतिक दलों से कर दी जाती है, जिससे अनेक बार भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ में स्वयंसेवकों को शारीरिक प्रशिक्षण के अंतर्गत लाठी चलाना सिखाया जाता है, लेकिन संघ न तो सैन्य संगठन है और न ही कुश्ती का अखाड़ा। यहां भारतीय परंपरा पर आधारित गीत, संगीत, अनुशासन और संस्कारों के माध्यम से व्यक्तित्व निर्माण तथा सामाजिक समरसता पर बल दिया जाता है।

इतिहास का उल्लेख करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि अंग्रेजों ने कांग्रेस की स्थापना एक ‘सुरक्षा वाल्व’ के रूप में की थी, लेकिन भारतीयों ने उसे स्वतंत्रता संग्राम का सशक्त माध्यम बना दिया। इसी प्रकार संघ भी समाज के भीतर सकारात्मक और रचनात्मक परिवर्तन के लिए सतत प्रयासरत है। हिंदू पहचान पर विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि देश में हिंदुओं के चार वर्ग दिखाई देते हैं। पहला वर्ग गर्व से स्वयं को हिंदू कहता है, दूसरा सहज रूप से अपनी पहचान स्वीकार करता है, तीसरा संकोच के साथ अपनी पहचान व्यक्त करता है और चौथा वह है जो अपनी पहचान भूल चुका है या जिसे भुला दिया गया है। उन्होंने कहा कि कुछ शक्तियां इस अंतिम वर्ग को पूरी तरह विस्मृत करने का प्रयास कर रही हैं।

धर्मनिरपेक्षता पर टिप्पणी करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि “धर्मनिरपेक्षता” के स्थान पर “पंथनिरपेक्षता” शब्द अधिक उपयुक्त है, क्योंकि धर्म जीवन का मूल आधार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संघ से सीधे जोड़कर देखना उचित नहीं है। भारतीय जनता पार्टी एक राजनीतिक दल है, जिसमें स्वयंसेवक कार्य करते हैं, लेकिन वे संघ के सदस्य नहीं बल्कि समाजसेवी के रूप में कार्यरत हैं।

भाषा और संस्कृति के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है, जहां अनेक भाषाएं, देवी-देवता, खान-पान और परंपराएं हैं, किंतु एक साझा सांस्कृतिक चेतना सभी को जोड़ती है, जिसे हिंदू संस्कृति कहा जाता है।

कार्यक्रम में देश के प्रमुख उद्योगपति और मनोरंजन जगत की अनेक प्रसिद्ध हस्तियां उपस्थित रहीं। उद्योग जगत से राधाकृष्ण दमानी, अजय पीरामल, दीपक पारेख, सज्जन जिंदल, नीलेश शाह और आशीष कुमार चौहान शामिल हुए। वहीं फिल्म एवं मनोरंजन क्षेत्र से सलमान खान, हेमा मालिनी, रोनी स्क्रूवाला, विनीत जैन, सुभाष चंद्रा, नितेश तिवारी, मोहित सूरी, रमेश टूरानी, बोनी कपूर, अदनान सामी, ओम राउत, विपुल शाह, प्रसाद ओक और इंद्र कुमार की उपस्थिति रही। इसके अतिरिक्त स्वामी स्वरूपानंद, अक्षत गुप्ता तथा इजराइल, ब्रिटेन और इटली के राजनयिक भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

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