भारत-ईयू समझौते ने दुनिया को दिया स्पष्ट संदेशः यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष

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नई दिल्ली, 27 जनवरी (हि.स.)। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा ने मंगलवार को भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता वार्ता के सम्पन्न होने को दुनिया के लिए एक स्पष्ट संदेश बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब वैश्विक व्यवस्था मौलिक रूप से बदल रही है, यूरोपीय संघ और भारत रणनीतिक और भरोसेमंद साझेदार के रूप में एक साथ खड़े हैं।

भारत और ईयू के बीच हैदराबाद हाउस में आयोजित 16वीं शिखर वार्ता में आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा की और साझेदारी को और प्रगाढ़ करने के तरीकों पर चर्चा की।

प्रधानमंत्री मोदी के साथ साझा प्रेस वक्तव्य में कोस्टा ने कहा कि व्यापार एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक स्थिरता लाने वाला कारक है और आर्थिक विकास का मूलभूत स्रोत है। व्यापार समझौते नियम-आधारित आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करते हैं और साझा समृद्धि को बढ़ावा देते हैं। आज के मुक्त व्यापार समझौता का ऐतिहासिक महत्व है। यह अब तक हुए सबसे महत्वाकांक्षी समझौतों में से एक है। यह 2 अरब लोगों का एक बाज़ार बनाता है।

कोस्टा कहते हैं, “आज एक ऐतिहासिक पल है। हम व्यापार, सुरक्षा और लोगों के बीच संबंधों में अपने रिश्तों में एक नया अध्याय खोल रहे हैं।”

उन्होंने व्यापक रक्षा और सुरक्षा ढांचे को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि दोनों पक्ष सुरक्षा खतरों का मुकाबला करने के लिए मिलकर काम करेंगे। अपने नागरिकों और हमारे साझा हितों की बेहतर सुरक्षा के लिए अपने सहयोग को मजबूत करेंगे।

उन्होंने कहा, “दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और बहुपक्षवाद के समर्थक के रूप में यूरोपीय संघ और भारत, संयुक्त राष्ट्र चार्टर को केंद्र में रखकर अंतरराष्ट्रीय कानून को बनाए रखने की जिम्मेदारी साझा करते हैं। आज सुबह, मुझे और राष्ट्रपति उर्सुला को महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने का अवसर मिला। मैंने उनके शब्दों पर विचार किया, जो आज भी सच हैं। वे कहते थे, शांति हथियारों की लड़ाई से नहीं बल्कि मुश्किल हालात में निहत्थे देशों द्वारा अपनाए गए और किए गए न्याय से आएगी।”

अपने वक्तव्य से पूर्व अध्यक्ष कोस्टा ने प्रवासी भारतीय नागरिक (ओसीआई) कार्ड दिखाया और इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि वे विदेश में रहे भारतीय नागरिक हैं। उन्होंने कहा, “मुझे गोवा में अपनी जड़ों पर बहुत गर्व है, जहां से मेरे पिता का परिवार आया था और यूरोप और भारत के बीच का संबंध मेरे लिए कुछ पर्सनल है।”

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वक्तव्य के दौरान उनकी सादगी की प्रशंसा की थी।

साथ मिलकर वैश्विक मुद्दों पर नेतृत्व दिखाने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि हम एक न्यायपूर्ण और स्थायी शांति हासिल करने के सभी प्रयासों का समर्थन करते हैं। इस संबंध में उन्होंने यूक्रेन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन में हमने यूक्रेन में एक व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की दिशा में प्रयासों का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। यह यूक्रेन की स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूरी तरह से सम्मान करती है। यूक्रेन ने मुश्किल समझौते की कीमत पर भी अपनी तैयारी दिखाई है। हम बातचीत और कूटनीति के ज़रिए शांति के लिए हालात बनाने में मदद पर भरोसा कर सकते हैं।

उत्तरायण के साथ जुड़ा दोस्ती में एक नया अध्यायः उर्सुला

दूसरी ओर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत-ईयू साझेदारी को मकर सक्रांति पर्व से जुड़ा और कहा कि उत्तरायण के साथ ही अब नई गति के साथ दोस्ती में एक नया अध्याय जोड़ने का सही समय है। यह हमें अंधेरे से रोशनी की ओर, ठहराव से विकास की ओर ले जाएगा।

उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते से दोनों पक्ष अपनी अर्थव्यवस्थाओं को मज़बूत बनाने के साथ तेज़ी से असुरक्षित होती दुनिया में अपने लोगों को सुरक्षा दे रहे हैं। आज दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और लोकतंत्रों ने अपनी पहली सुरक्षा और रक्षा साझेदारी शुरू की है।

उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि व्यापार समझौता दोनों पक्षों की सप्लाई चेन को जोड़ेगा और संयुक्त उत्पादन क्षमता को मज़बूत करेगा। इससे सभी आकार के एक्सपोर्टर्स के लिए सालाना चार अरब यूरो तक का टैरिफ कम होगा और भारत और यूरोप में लाखों वर्कर्स के लिए अच्छी नौकरियाँ पैदा होंगी। साथ ही, यह समझौता हमारी अर्थव्यवस्थाओं की स्वाभाविक पूरकता पर आधारित होगा।

जनता को सबसे बड़ी संपत्ति बताते हुए उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि “दोनों देशों के बीच हम मोबिलिटी एग्रीमेंट साइन कर रहे हैं। हम स्टूडेंट्स, रिसर्चर्स, मौसमी और उच्च कुशल वर्कर्स की आवाजाही को आसान बनाएंगे। यही वजह है कि हम भारत में पहला ईयू लीगल गेटवे ऑफिस शुरू कर रहे हैं। यह ईयू सदस्य देशों की नीतियों के साथ पूरी तरह से तालमेल बिठाते हुए यूरोप जाने वाले भारतीय टैलेंट को सपोर्ट करने के लिए एक वन-स्टॉप हब होगा। यह हमारी अर्थव्यवस्थाओं के लिए अच्छा है। यह हमारे लोगों के बीच दोस्ती के लिए अच्छा है और इस खुलेपन से हम सभी को फायदा होता है।”

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