फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी की जमानत याचिका खारिज

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डॉक्टर से तीस करोड़ की धोखाधड़ी का मामला

जोधपुर, 31 जनवरी (हि.स.)। करोड़ों की धोखाधड़ी के मामले में फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी सहित तीन लोगों की जमानत याचिका राजस्थान उच्‍च न्‍यायलय ने खारिज कर दी है। उच्‍च न्‍यायलय ने माना कि इस स्तर पर जमानत की सुविधा दिया जाना उचित नहीं है।

राजस्थान उच्‍च न्‍यायलय के जस्टिस विनोद कुमार भारवनी ने इस मामले में सुनवाई की। इस दौरान विशिष्ट लोक अभियोजक ने जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध किया। उनका तर्क था कि इस मामले में अभी जांच चल रही है। अब तक की जांच में पाया गया है कि आरोपित विक्रम भट्ट और श्वेताम्बरी भट्ट ने अलग-अलग नामों से अलग-अलग फर्जी बिल तैयार करवाकर शिकायतकर्ता से पैसा ट्रांसफर करवाया है। उस पैसे को अपने खातों में डलवाकर खुद ने ही उपयोग में ले लिया। इस प्रकार आरोपितों ने मिलकर शिकायतकर्ता से अलग-अलग नाम के अकाउंट में 4 करोड़ 23 लाख 13 हजार 424 रुपये लिए। इसमें से 1 करोड़ 65 लाख 69 हजार 955 रुपए खुद के ही खातों में डलवाकर कर्जा उतारने के लिए उपयोग में ले लिए। विशिष्ट लोक अभियोजक ने कहा कि आपराधिक कृत्य में प्रार्थी मेहबूब अंसारी की सक्रिय भूमिका जांच के दौरान सामने आई है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रार्थी द्वारा गवाहों पर भी दबाव बनाया जा रहा है, महत्वपूर्ण अनुसंधान अभी बाकी है। अलग से अभी पूछताछ करनी है। अगर इस समय यदि प्रार्थी को जमानत पर छोड़ दिया गया तो वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए जमानत आवेदन निरस्त किया जाए। हाईकोर्ट ने श्वेताम्बरी वी. भट्ट पत्नी विक्रम भट्ट, विक्रम भट्ट पुत्र प्रवीण भट्ट और मेहबूब अंसारी पुत्र उस्मान अंसारी के जमानत आवेदन पत्र को निरस्त कर दिया।

यह है मामला: राजस्थान के उदयपुर के इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक डॉ. अजय मुर्डिया ने 17 नवंबर को विक्रम भट्ट समेत आठ लोगों के खिलाफ 30 करोड़ की धोखाधड़ी की एफआईआर उदयपुर में दर्ज कराई थी। डॉ. अजय मुर्डिया का आरोप था कि एक इवेंट में उनकी मुलाकात दिनेश कटारिया से हुई थी। दिनेश कटारिया ने उन्हें पत्नी की बायोपिक बनाने का प्रस्ताव दिया। इस सिलसिले में दिनेश कटारिया ने 24 अप्रैल 2024 को मुंबई स्थित वृंदावन स्टूडियो बुलाया था। कटारिया ने उन्हें विक्रम भट्ट से मिलवाया, जहां भट्ट से बायोपिक बनाने पर चर्चा हुई थी। कुछ दिन बाद विक्रम और श्वेतांबरी भट्ट ने डॉक्टर अजय मुर्डिया को कहा कि 7 करोड़ रुपए और फाइनेंस करके वे 4 फिल्में 47 करोड़ में बना सकते हैं। इन फिल्मों की रिलीज से 100 से 200 करोड़ रुपए तक मुनाफा हो जाएगा। इसके बाद उनके स्टाफ में अमनदीप मंजीत सिंह, मुदित, फरजाना आमिर अली, अबजानी, राहुल कुमार, सचिन गरगोटे, सबोबा भिमाना अडकरी के नाम के अकाउंट में 77 लाख 86 हजार 979 रुपए ट्रांसफर करवाए। इस तरह 2 करोड़ 45 लाख 61 हजार 400 रुपए ट्रांसफर किए। वहीं इंदिरा एंटरटेनमेंट से 42 करोड़ 70 लाख 82 हजार 232 रुपए का भुगतान किया गया, जबकि चार फिल्मों का निर्माण 47 करोड़ में किया जाना तय हुआ था। विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी भट्ट ने केवल 2 फिल्म का निर्माण कर रिलीज करवाया। तीसरी फिल्म विश्व विराट लगभग 25 प्रतिशत ही बनाई गई। चौथी फिल्म महाराणा-रण की अभी तक शूटिंग भी शुरू नहीं हुई। आरोप है कि डायरेक्टर ने फिल्म महाराणा-रण के ही 25 करोड़ हड़प लिए। इंदिरा आईवीएम के मालिक डॉ. अजय मुर्डिया (पीडि़त) ने फिल्म डायरेक्टर, उनकी पत्नी, बेटी कृष्णा निवासी अंधेरी वेस्ट, मुंबई, दिनेश कटारिया निवासी सहेली नगर उदयपुर, महबूब अंसारी प्रोड्यूसर निवासी ठाणे, मुदित बुटट्टान निवासी दिल्ली, गंगेश्वरलाल श्रीवास्तव डीएससी चेयरमैन, अशोक दुबे जनरल सेक्रेटरी, फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज मुंबई के खिलाफ भूपालपुरा (उदयपुर) थाने में रिपोर्ट दी थी।

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