नागरिक को समान सुरक्षा व सुनवाई मिले,यही रूल आफ की आत्मा :डीजीपी

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लखनऊ, 26 जनवरी (हि.स.)। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्णा ने सोमवार को उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराया।समारोह में डीजीपी ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को कर्तव्य व निष्ठा की शपथ दिलाई और उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मियों को सम्मानित भी किया।

इस अवसर पर डीजीपी ने प्रदेश के सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के अलावा उत्तर प्रदेश पुलिस परिवार के प्रत्येक प्रहरी को हार्दिक शुभकामनाएं दी। उन्होंने अमर राष्ट्र बलिदानियों को नमन करते हुए कहा कि उनके त्याग और बलिदान से हमारा गणराज्य जन्मा है। इस खास मौके पर डीजीपी ने यूपी पुलिस के उन वीर शहीदों का श्रद्धापूर्व स्मरण किया, जिन्होंने वर्दी को जीवन से ऊपर रखकर जनता की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित किया।

दैनिक पु​लिसिंग व्यवहार बना

डीजीपी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी पुलिस जिस प्रोफेशनलिज्म तत्परर्ता और अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है वह इस बात का प्रमाण है कि सुशासन अब केवल नीति नहीं, बल्कि दैनिक पुलिसिंग व्यवहार बन चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीरो टॉलरेंस तभी प्रभावी है जब रोजमर्रा के निर्णयों दिखाई दे और हर पुलिसकर्मी की कार्य संस्कृति बने।

थानों पर व्यवहार, शिकायत की सुनवाई, प्रक्रिया की स्पष्टता

उन्होंने कहा कि संविधान ने राज्य और नागरिक के संबंध को अधिकार, कर्तव्य और जवाबदेही के ढांचे में स्थापित किया है। पुलिसिंग का लक्ष्य होना चाहिए कि ये मूल्य नागरिक के अनुभव में सुरक्षा, सम्मान और भरोसे के रूप में दिखाई दें।

डीजीपी ने नगारिक केंद्रित सेवा पर बल देते हुए कहा कि थानों पर व्यवहार, शिकायत की सुनवाई, प्रक्रिया की स्पष्टता और समयबद्ध निस्तारण ये नागरिक की गरिमा और विश्वास से सीधे जुड़े हैं। डीजीपी ने महिला संबंध मामलों में रोकथाम, त्वरित सहायता, संवेदनशील सुनवाई और प्रभावी विवेचना इन चारों स्तरों पर मानकीकृत व जवाब देह व्यवस्था सुनश्चित करने की प्राथमिकता दोहराई।

डिजिटल सुरक्षा स्वतंत्रता का एक महत्वपूर्ण आयाम

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल सुरक्षा स्वतंत्रता का एक महत्वपूर्ण आयाम है। साइबर अपराध केवल आर्थिक क्षति नहीं बल्कि निजता मानसिक शांति और समाजिक प्रतिष्ठा पर भी प्रभाव डालते हैं। उनहोंने बताया कि जनपद एवं इकाई स्तर पर ट्रेनेड साइबर हेल्प डेस्क को सशक्त किया जा रहा है ताकि पीड़ित को त्वरित मार्ग दर्शन मिल सकें।

18 फारेंसिक लैब की स्थापना

उन्होंने न्याय की अवधारणा को पुलिसिंग से जोड़ते हुए कहा कि निष्पक्ष विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन और पीड़ित का भरोसा यही प्रभावी न्या की बुनियाद है। विवेचना की गुणवत्ता बढ़ाने से निर्णय अधिक वस्तुनिष्ठ बनते हैं और अभियोजन सुदृढ़ होता है। फारेंसिंक क्षेत्र में राज्य की प्रगति का उल्लेख करते हुए डीजीपी ने कहा कि 18 फारेंसिक लैब की स्थापना वैज्ञानिक जांच नेटवर्क विस्तृत हुआ है। यूपी राज्य फॉरेसिक विज्ञान संस्थान लखनऊ के माध्यम से प्रशिक्षण,शोद्य और विशेषज्ञता को संस्थागत आधार मिला है।

पुलिस की क्षमता मनोबल, स्वास्थ्य और बंधुत्व से भी बनती

उन्होंने कहा कि पुलिस की क्षमता केवल सिस्टम, संसाधनों से नहीं, बल्कि बल के भीतर मनोबल, स्वास्थ्य और बंधुत्व से भी बनती है। इसलिए पुलिस वेलफेयर, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियों पर निरंतर ध्यान आवश्यक है, जिसका सीधा प्रभाव सेवा की गुणवत्ता और फील्ड व्यवहार पर पड़ता है। साथ ही प्रशिक्षण के सतत उन्नयन पर बल देते हुए उन्होंने बताया कि 60,000 नव-भर्ती कांस्टेबलों के लिए हाइब्रिड मोड विशिष्ट प्रशिक्षण को मानकीकृत प्रणाली के रूप में लागू व सुदृढ़ किया जा रहा है, इसका फोकस संवैधानिक आचरण, नागरिक-मित्र व्यवहार, बेसिक लॉ, साइबर जागरूकता, ड्यूटी एथिक्स और आपात प्रतिक्रिया पर है।

पुलिस की पहचान तीन स्तंभों पर और मजबूत हो

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि ये सभी प्रयास अलग-अलग कार्यक्रम नहीं, बल्कि संविधान के उच्च आदर्शों को पुलिसिंग के दैनिक व्यवहार में उतारने के साधन हैं। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि वर्ष 2026 में उत्तर प्रदेश पुलिस की पहचान तीन स्तंभों पर और मजबूत हो-विधिसम्मत कार्रवाई, नागरिकों के प्रति सम्मान और सेवा में समयबद्धता और प्रदेश सरकार की जनहितकारी प्राथमिकताओं के अनुरूप नागरिकों की सुरक्षा व विश्वास को सर्वोच्च रखकर कार्य किया जाए।

सम्मानित हुए पुलिस कर्मी

डीजीपी ने यह जानकारी दी कि, गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश पुलिस के 18 कार्मिकों को वीरता पदक, 04 को राष्ट्रपति का विशिष्ट सेवा पदक तथा 68 को सराहनीय सेवा पदक प्रदान किए हैं। इसके अतिरिक्त 47 पुलिस कार्मिकों को उत्कृष्ट सेवा सम्मान चिन्ह, 198 को सराहनीय सेवा सम्मान चिन्ह तथा 470 को पुलिस महानिदेशक का प्रशंसा चिन्ह प्रदान किया गया। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के 10 पुलिस कर्मियों को मुख्यमंत्री का वीरता पदक एवं 25 पुलिस कर्मियों को मुख्यमंत्री का प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया। पुलिस महानिदेशक ने सभी सम्मानित कार्मिकों को बधाई दी।

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