देश में दलहन उत्पादन बढ़ाकर आत्मनिर्भरता होना हमारा लक्ष्य : शिवराज सिंह

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– दलहन उत्पादन में अग्रणी है मध्य प्रदेश : केन्द्रीय कृषि मंत्री

सीहोर, 07 फरवरी (हि.स.)। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश को दलहन में आत्मनिर्भर बनाना है। किसानों को केवल गेहूं, सोयाबीन और धान ही नहीं उगाना चाहिए, बल्कि फसल चक्रण पर ध्यान देना चाहिए। देश में चना, मसूर और उड़द का उत्पादन बढ़ाना है। इकार्डा के माध्यम से दलहन फसलों के उन्नत बीज तैयार किए जाएंगे।

केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान शनिवार को मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र में दलहन आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहे। केन्द्रीय मंत्री चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (आईसीएआरडीए) सीहोर के नवनिर्मित प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण केंद्र तथा अत्याधुनिक प्लांट टिशु कल्चर प्रयोगशाला का लोकार्पण भी किया गया।

केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि अमेरिका और यूरोप के 27 देशों से हमारा समझौता हुआ है। अमेरिका के साथ कृषि समझौते में किसानों के हितों की रक्षा की गई है। सीहोर का शरबती गेहूं दुनिया में धूम मचाएगा। देश के बासमती चावल और मसालों को 18 प्रतिशत टैरिफ से लाभ मिलेगा। टेक्सटाइल निर्यात बढ़ने से कपास उत्पादक किसानों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि देश में मूंग को छोड़कर अन्य दालों का उत्पादन घट गया। दाल हमें विदेश से आयात करना पड़े यह देश के हित में नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार को बधाई देते हुए कहा कि हमारा मध्य प्रदेश आज भी दलहन उत्पादन में अग्रणी है।

केन्द्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि देश का कृषि मंत्रालय अब दिल्ली से नहीं, गांव और खेतों से चल रहा है। हमारे कृषि वैज्ञानिक प्लांट टिशू कल्चर के माध्यम से मसूर सहित अन्य दलहन फसलों की नई और उन्नत किस्में तैयार हो रही हैं। किसानों को ज्यादा उत्पादन वाले और रोग रहित बीच उपलब्ध कराना है। दलहन आत्म निर्भरता मिशन के अंगर्तग दालों के कलस्टर बनाए जाएंगे। इकार्डा के सहयोग से बीज ग्राम और बीज हब बनाए जाएंगे। प्रगतिशील और आदर्श किसानों को एक हैक्टेयर में दलहन उत्पादन के लिए 10 हजार रुपये प्रोत्साहन दिया जायेगा। इस कलस्टर में अगर कोई दाल मिल शुरू करना चाहता है तो इसके लिए भारत सरकार 25 लाख रुपये का अनुदान देगी। किसानों को उपज का सही दाम दिलाने के लिए देशभर में 1000 दाल मिल खुलेंगी, जिसमें से 55 मध्यप्रदेश में स्थापित होंगी। मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय राज्य सरकार के साथ है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार किसानों से 8000 रुपये प्रति क्विंटल तुअर, 7800 रुपये प्रति क्विंटल उड़द, 5875 रुपये प्रति क्विंटल चना, 7000 रुपये प्रति क्विंटल मसूर खरीदेगी। केंद्र सरकार सभी दलहन फसलों की शत-प्रतिशत खरीदी करेगी। मध्य प्रदेश में भावांतर भुगतान योजना शुरू की। हमारी सरकार बीज से लेकर बाजार तक किसानों की चिंता कर रही है। शाकाहारियों के लिए दालें प्रोटीन का मुख्य विकल्प हैं। किसान अन्नदाता भी हैं और जीवनदाता भी। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश को दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत 354 करोड़ की बजट राशि मिलेगी। केंद्रीय कृषि मंत्री ने सम्मेलन में आए विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों को दलहन मिशन की बजट राशि का स्वीकृति-पत्र भी सौंपा।

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव संजीव कुमार अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के लिए भारत सरकार ने 11 हजार 440 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय मिशन मोड में दलहन फसलों के प्रोत्साहन के लिए काम कर रहा है। दलहन मिशन के अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही हैं। किसानों को उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसानों को नई तकनीक और मशीनों के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मध्य प्रदेश दलहन उत्पादन में अग्रणी राज्य है। सीहोर में इकार्डा ने कई फसलों के बीजों पर काम किया। मध्य प्रदेश की धरती पर विकसित हुई तकनीक और बीज देशभर में पहुंचेंगे।

अंतरराष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (इकार्डा) के महानिदेशक अली अबुर साबा ने कहा कि भारत सरकार कृषि, किसान और खाद्य प्रसंस्करण को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने इकार्डा को पल्सेस प्रोडक्शन डेवलम्पमेंट कंसल्टेशन के लिए चुना है। भारत वैश्विक स्तर पर दालों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। यहां दालें प्रोटीन का मुख्य स्त्रोत हैं। इकार्डा ने अपने शोध केंद्रों में 41 सभी प्रकार की दालों की नई किस्में तैयार की हैं।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान, मुख्यमंत्री डॉ. यादव और इकार्डा के सहयोग से दालों के अनुसंधान के लिए सीहोर में यह केंद्र शुरू किया गया है। देश में दालों की पैदावार की औसत उत्पादकता 926 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर है, जबकि मध्यप्रदेश में यह आंकड़ा 1200 किलोग्राम है। अगर मध्यप्रदेश से सीखकर हम इसे देश में लागू करेंगे, तो भारत में दालों का उत्पादन 8 मिलियन टन तक बढ़ सकता है और देश दलहन उत्पादन के मामलों में आत्मनिर्भरता प्राप्त कर लेगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद भी कृषि मंत्रालय, इकार्डा और किसानों के साथ मिलकर कार्य करेगी। हम सब मिलकर भारत को बहुत जल्द दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाएंगे।

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