एम्स में पहली बार हुई 11 साल के बच्चे की लैप्रोस्कोपिक व्हिपल सर्जरी

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नई दिल्ली, 23 जनवरी (हि.स.)। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने पहली बार किसी बच्चे की लैप्रोस्कोपिक व्हिपल सर्जरी की है। यह उपलब्धि पीडियाट्रिक एंडोस्कोपिक सर्जन्स ऑफ इंडिया (पेसिकॉन 2026) के 21वें वार्षिक सम्मेलन के दौरान सामने आई। इसका आयोजन एम्स के बाल शल्य चिकित्सा विभाग की ओर से किया जा रहा है।

व्हिपल प्रक्रिया को चिकित्सकीय भाषा में पैंक्रियाटिकोड्यूओडेनेक्टॉमी कहा जाता है। इसे सामान्य सर्जरी की सबसे जटिल शल्य प्रक्रियाओं में गिना जाता है। इस ऑपरेशन में अग्न्याशय का सिर, छोटी आंत का एक हिस्सा, पित्ताशय और पित्त नली को हटाया जाता है। अब तक यह सर्जरी आमतौर पर खुले ऑपरेशन

के जरिये होती थी, वह भी अधिकतर वयस्क मरीजों में। बच्चे में इस सर्जरी को लैप्रोस्कोपिक यानी दूरबीन विधि से करना भारत में पहली बार हुआ है। एम्स के डॉक्टरों के अनुसार, 11 साल की लड़की पूरी तरह से लैप्रोस्कोपिक विधि के माध्यम से इस जटिल प्रक्रिया से गुजरने वाली दुनिया की सबसे कम उम्र की मरीज बन गई है।

एम्स के बाल शल्य चिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रो. संदीप अग्रवाल ने इसे भारतीय बाल शल्य चिकित्सा के लिए एक परिवर्तनकारी क्षण बताया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि बच्चों में शरीर की बनावट अलग होती है, ऐसे में इतनी जटिल सर्जरी को न्यूनतम चीरे के जरिए करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। यह ऑपरेशन लगभग साढ़े आठ घंटे तक चला, जिसमें शरीर पर केवल चार छोटे चीरे लगाए गए थे। इस सफल ऑपरेशन का नेतृत्व पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अंजन कुमार धुआ ने किया था।

इस केस प्रस्तुति को सम्मेलन में मौजूद देशभर के विशेषज्ञों ने सराहा। सर्जरी से जुड़े हर पहलू रोगी चयन, ऑपरेशन की योजना, तकनीकी चुनौतियां और जटिलताओं से बचाव पर विस्तार से चर्चा की गई।

एम्स दिल्ली में पहली बार पूर्ण रूप से लैप्रोस्कोपिक पैंक्रियाटिकोड्यूओडेनेक्टॉमी (जिसे व्हिपल सर्जरी भी कहा जाता है) मार्च 2025 में की गई थी। यह सर्जरी झारखंड के गढ़वा की एक 11 वर्षीय लड़की पर की गई थी, जिसे ‘सॉलिड स्यूडोपापिलरी एपिथेलियल नियोप्लाज्म’ नामक एक दुर्लभ अग्न्याशय ट्यूमर था।

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