शिक्षा निदेशक हाजिर होकर बताए कि रोक के बावजूद जर्जर स्कूल भवनों को कैसे किया जा रहा है उपयोग-हाईकोर्ट

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जयपुर, 20 जनवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के जर्जर सरकारी स्कूल भवनों के उपयोग पर पाबंदी के बावजूद इसका उपयोग करने पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा है कि आगामी 2 फरवरी को प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा निदेशक अदालत में पेश हो। वहीं अदालत में शपथ पत्र पेश कर बताए कि अदालती रोक के बावजूद भी जर्जर स्कूल भवनों का उपयोग कैसे किया जा रहा है। वहीं हाल ही में बूंदी जिले में सरकारी स्कूल की छत किन परिस्थितियों में गिरी। जस्टिस महेन्द्र गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने यह आदेश झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने के बाद लिए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए।

सुनवाई के दौरान न्यायमित्र ने एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर का उल्लेख करते हुए बताया कि बूंदी के भैंसखेड के सरकारी स्कूल की छत गिरी है। स्कूल में उस समय करीब तीस छात्र मौजूद थे और वे कुछ देर पहले की बाहर बैठे थे। यदि वे अंदर होते तो बडी घटना हो सकती थी। इस पर अदालत ने कहा कि विभाग के अधिकारी बार-बार यह आश्वासन दे रहे हैं कि छात्रों को सुरक्षित माहौल में पढाई के लिए हर संभव कार्रवाई की जा रही है, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। अदालत ने गत 22 अगस्त को आदेश जारी कर जर्जर स्कूलों का उपयोग करने पर रोक लगाई थी। इस पर विभाग ने अदालत को आदेश की पालना करने की बात भी कही थी, लेकिन इस आदेश की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। इसके अलावा अदालत की ओर से पूर्व में कई बिंदुओं पर दिए राज्य सरकार से शपथ पत्र मांगा गया था, लेकिन बीते कई महीनों से अदालत में न तो शपथ पत्र दिया जा रहा है और ना ही देरी का कारण बताया जा रहा है।

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