भारत का संविधान : सार्थक चर्चा और मंथन की जरुरत

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बाल मुकुन्द ओझा

26 जनवरी को हमारा देश 77वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। 26 जनवरी 1950 के दिन भारत को गणतांत्रिक राष्ट्र घोषित कर स्वतंत्र भारत का नया संविधान लागू हुआ था। गणतंत्र दिवस के दिन हमें अपने संविधान पर सार्थक चर्चा और मंथन करने की महती जरुरत है। हमारा संविधान बताता है कि देश के प्रत्येक नागरिक का यह मूल कर्तव्य होगा कि वह संविधान का अनुपालन करे और उसके द्वारा स्थापित संस्थाओं एवं आदर्शों का सम्मान करे।

भारत का संविधान विश्व में सबसे बड़ा संविधान है। इस संविधान के जरिये नागरिकों को प्रजातान्त्रिक अधिकार सौंपे गए। संविधान  देश में विधायिका ,कार्यपालिका और न्यायपालिका की व्यवस्था तथा उनके अधिकारों और दायित्वों को सुनिश्चित करता है। सविँधान के जरिये हमने अपने लोकतान्त्रिक अधिकार हासिल किये ,अथार्त समस्त अधिकार जनता में निहित हुए ,इसी दिन हमें अपने मौलिक अधिकार प्राप्त हुए और एक नए लोकतान्त्रिक देश का निर्माण हुआ। भारतीय संविधान का निर्माण एक संविधान सभा द्वारा किया गया। संविधान सभा में 296 सदस्य थे।  जिन्होंने एक महीने 18 दिन काम कर संविधान को तैयार किया। हालाँकि इस अवधि में काम केवल 166 घंटे ही हुआ और हमारा संविधान बनकर तैयार हो गया।  26 जनवरी 1950 को हमारे संविधान को लागू किये जाने के कारण हर वर्ष 26 जनवरी को हम गणतंत्र दिवस  के रूप में मानते है। यह दिन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले अनगिनत स्वतन्त्रता सेनानियों का सपना साकार हुआ। यह महत्वपूर्ण दिन हम गणतंत्र दिवस के रूप में मानते  हैं। इस दिन देश की राजधानी से लेकर गावं -ढाणी तक गणतंत्र का पर्व उत्साह और की भावना  के साथ मनाया जाता है। इस पावन पवित्र दिन देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले योद्धाओं को नमन कर उनके बताये मार्ग पर चलने का सकल्प लेते हैं। मातृभुमि के सम्मान एवं आजादी के लिये हजारों देशभक्तों  ने अपने जीवन की आहूति दी थी। देशभक्तों की गाथाओं से हमारा  कण कण गूँज रहा  हैं। देशप्रेम की भावना से ओत-प्रोत हजारों सपूतों ने भारत को आजादी  दिलाने में अपना सर्वस्व  न्योछावर कर दिया था। ऐसे  महान देशभक्तों के त्याग और बलिदान के कारण  आज  हमारा देश लोकतान्त्रिक  गणराज्य  हो सका है। गणतंत्र दिवस हमारी राष्ट्रीय  एकता एवं  भावना को और अधिक  प्रगाढ़ बनाने के लिए  देशवाशियों को प्रेरित करता है । यह पर्व हमारे शहीदों की अमर गाथाओं  से हमें गौरवान्वित करता है और प्रेरणा देता है कि अपने देश के गौरव को बनाए रखने के लिए हम संकल्पित है  तथा हर पल तेजी से  प्रगति और  विकास की ओर बढ़ रहे  है।

आजादी के 76 वर्षों के बाद आज हमारा देश अपने देशवासियों की अंतरआत्मा को झकझौंर रहा है। जिस देश में दूध-दही की नदियां बहती थीं, जिसे सोने की खान कहा जाता था। सत्यमेव जयते जिसका आदर्श था। महापुरूषों और ग्रंथों ने सत्य की राह दिखाई थी। भाईचारा, प्रेम और सद्भाव हमारे वेद वाक्य थे। कमजोर की मदद को हम सदैव आगे रहते थे। भारत के आदर्श समाज और राम राज्य की विश्व में अनूठी पहचान थी। राजाओं के राज को आज भी लोग याद रखते हैं और यह कहते नहीं थकते कि- उस समय की न्याय व्यवस्था काफी सुदृढ़ थी राज के कर्मचारी आम आदमी को प्रताड़ित नहीं करते थे। सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था में नैतिकता थी। बुराई के विरूद्ध अच्छाई का बोलबाला था। महात्मा गांधी ने आजादी के बाद राम राज्य की कल्पना संजोई थी। प्रगति और विकास की ओर हमने तेजी से बढ़ने का संकल्प लिया था। पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से चहुंमुखी विकास की ओर कदम बढ़ाये थे। सामाजिक क्रांति का बीड़ा उठाया था। ईमानदारी के मार्ग पर चलने की कस्में खाई थीं। आजादी की आधी से अधिक सदी बीतने के बाद हमारे कदम लड़खड़ा रहे हैं। सत्यमेव जयते से हमने किनारा कर लिया है। अच्छाई का स्थान बुराई ने ले लिया है और नैतिकता पर अनैतिकता प्रतिस्थापित हो गई है। ईमानदारी केवल कागजों में सिमट गई है और भ्रष्टाचरण से पूरा समाज आच्छादित हो गया है। देश और समाज अंधे कुएं की ओर बढ़ रहा है, जिसमें गिरने के बाद मौत के सिवाय कुछ हासिल होने वाला नहीं है। आजादी के बाद निश्चय ही देश ने प्रगति और विकास के नये सोपान तय किये हैं। पोस्टकार्ड का स्थान ई-मेल ने ले लिया है। इन्टरनेट से दुनिया नजदीक आ गई है। मगर आपसी सद्भाव, भाईचारा, प्रेम, सच्चाई से हम कोसों दूर चले गये हैं। समाज में बुराई ने जैसे मजबूती से अपने पैर जमा लिये हैं। लोक कल्याण की बातें गौण हो गई हैं। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम संविधान पर कोई व्यर्थ की नुक्ताचीनी नहीं करे। यह विश्व का सबसे बड़ा और गौरवशाली संविधान है जिसका सम्मान करना प्रत्येक देशवासी का कर्तव्य है।

बाल मुकुन्द ओझा

वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार

डी 32, मॉडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर

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