पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने पदोन्नति नियमों में बड़े बदलाव को दी मंजूरी

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कोलकाता, 17 फरवरी (हि.स.)। पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने मंगलवार को राज्य सरकार के विभिन्न संवर्गों में लंबे समय से लंबित पदोन्नति संबंधी ठहराव को दूर करने और वरिष्ठ स्तर पर अनुभवी अधिकारियों की संख्या बढ़ाने के लिए पदोन्नति नियमों में बड़े बदलाव को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कैबिनेट बैठक के बाद यह जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पश्चिम बंगाल सिविल सेवा (डब्ल्यूबीसीएस) संवर्ग की पदोन्नति और ट्रांस्फर नियमों में संशोधन किया गया है, ताकि कैरियर प्रगति को सुव्यवस्थित किया जा सके और विभिन्न राज्य सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित हो।

नए प्रावधान के तहत डब्ल्यूबीसीएस अधिकारियों को दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पूरी करनी होगी। इसके बाद उन्हें तीन वर्ष तक प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) के रूप में सेवा देनी होगी। कुल पांच वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद वे सीधे उपमंडल अधिकारी (एसडीओ) पद पर पदोन्नति के पात्र होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच वर्ष की सेवा के बाद डब्ल्यूबीसीएस अधिकारी को एसडीओ बनने का अवसर मिलेगा। यह निर्णय उच्च स्तर पर अनुभवी अधिकारियों की संख्या बढ़ाने और विभिन्न राज्य सेवाओं के बीच समानता लाने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने बताया कि यह फैसला विभिन्न विभागों के पदोन्नति संबंधी अभिलेखों की समीक्षा के बाद लिया गया।

सरकारी सूत्रों के अनुसार इस निर्णय से पहले 46 विभागों के आंकड़ों की विस्तार से जांच की गई।

कैबिनेट ने अन्य राज्य गठित सेवाओं में भी पदोन्नति संबंधी अड़चनों को दूर करने के लिए 20 प्रतिशत अतिरिक्त पद सृजित करने का नीतिगत निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल डब्ल्यूबीसीएस ही नहीं, बल्कि अन्य राज्य सेवाओं में भी चरणबद्ध तरीके से 20 प्रतिशत अतिरिक्त पद बनाए जाएंगे। इससे पदोन्नति में ठहराव कम होगा और विभिन्न संवर्गों के बीच संतुलन बना रहेगा।

सूत्रों के मुताबिक पुलिस सहित अन्य सेवाओं में भी इसी प्रकार के कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में इस फैसले का स्वागत किया गया है और उम्मीद जताई गई है कि इससे विभिन्न विभागों में लंबे समय से लंबित पदोन्नति संबंधी समस्याओं का समाधान होगा।

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