ओली के चुनावी तालमेल के प्रस्ताव को सभी दलों ने ठुकराया

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काठमांडू, 06 फ़रवरी (हि.स.)। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के प्रतिनिधि सभा सदस्य निर्वाचन में कुछ खास क्षेत्रों में चुनावी तालमेल के लिए किए गए प्रस्तावों को अन्य दलों द्वारा अस्वीकार किए जाने के बाद एमाले (एमाले) असहज स्थिति में फंसता नजर आ रहा है।

गगन थापा के नेतृत्व में रहे नेपाली कांग्रेस और प्रचण्ड के नेतृत्व में रहे नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) द्वारा तालमेल के प्रस्ताव ठुकराए जाने से खास क्षेत्रों में चुनावी तालमेल करने की एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली की इच्छा पूरी न होने की संभावना बढ़ गई है। इससे पार्टी को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। नेकपा के नेता प्रकाश ज्वाला ने रातोपाटी से कहा, “एमाले ने कुछ खास क्षेत्रों में चुनावी तालमेल का प्रस्ताव रखा था, लेकिन नेकपा ने उसे अस्वीकार कर दिया है। पार्टी संयोजक प्रचंड और सह-संयोजक माधव नेपाल ने एमाले के प्रस्ताव को न मानने का निर्णय लिया है।”

प्रचंड और माधव नेपाल ने कुछ दिन पहले हुई बैठक में एमाले से आए तालमेल प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए तालमेल न करने का निष्कर्ष सुनाया था।

चुनावी तालमेल की चर्चा के बीच कांग्रेस ने एक पत्रकार सम्मेलन के माध्यम से स्पष्ट कर दिया है कि वह निर्वाचन से पहले किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी। शुक्रवार को आयोजित कांग्रेस केंद्रीय प्रचार-प्रसार समिति की पत्रकार वार्ता में पार्टी के प्रवक्ता देवराज चालिसे ने बताया कि कांग्रेस अकेले ही चुनावी मैदान में उतरी है और 165 निर्वाचन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतार चुकी है, इसलिए चुनाव से पहले तालमेल की कोई नीति नहीं है।

ओली के निर्वाचन क्षेत्र झापा–5 और महासचिव शंकर पोखरेल के निर्वाचन क्षेत्र दाङ–2 में एमाले अन्य दलों के साथ चुनावी तालमेल के पक्ष में है। झापा–5 में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के नेता बालेन्द्र शाह ओली के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं।

रास्वपा की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए ओली अपने तथा महासचिव पोखरेल के क्षेत्रों में नेकपा या कांग्रेस में से किसी एक दल के साथ तालमेल कर जीत सुनिश्चित करना चाहते हैं।

पिछले निर्वाचन में ओली ने झापा में राप्रपा के साथ चुनावी तालमेल किया था। लेकिन इस बार राप्रपा ने भी चुनावी तालमेल न करने की बात कही है। राप्रपा और नेकपा—दोनों के तालमेल से इनकार के बाद झापा में ओली को चुनावी झटका लगने की आशंका जताई जा रही है, वहीं दांग में महासचिव शंकर पोखरेल के सामने भी कड़ी चुनौती बताई जा रही है।

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