एयरोस्पेस में नवाचार को नई उड़ान, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन

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वडोदरा, 04 फ़रवरी (हि.स.)। भारत के एयरोस्पेस क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) और एयरबस की साझेदारी में स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) का बुधवार को वडोदरा में उद्घाटन किया गया। यह केंद्र सतत विमानन ईंधन (सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल—एसएएफ) और भविष्य की एयरोस्पेस तकनीकी पर अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनेगा। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन एयरबस इंडिया एवं साउथ एशिया के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक जर्गेन वेस्टरमायर ने किया। इस अवसर पर राजमाता शुभांगिनीराजे गायकवाड़, जीएसवी की कोर्ट सदस्य तथा प्रो. (डॉ.) मनोज चौधरी, कुलपति (गति शक्ति विश्वविद्यालय) उपस्थित रहे।

एयरबस के अध्यक्ष जर्गेन वेस्टरमायर ने इस अवसर पर कहा कि यह केंद्र भारत में एक सशक्त एयरोस्पेस इकोसिस्टम के साथ ही निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि नगर ठोस अपशिष्ट (एमएसडब्ल्यू) को सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल में बदलने जैसी अत्याधुनिक तकनीकी पर अनुसंधान एयरबस की नवाचार प्रतिबद्धता को दर्शाता है और यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न को मजबूती प्रदान करेगी।

जीएसवी के कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज चौधरी ने कहा कि कुलाधिपति अश्विनी वैष्णव के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय उद्योग-प्रेरित नवाचार को वास्तविकता में बदल रहा है। उन्होंने कहा कि एयरबस के साथ यह उद्योग–शैक्षणिक साझेदारी देश के लिए एक मॉडल बन चुकी है और यह पहल वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में सहायक होगी।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 से एयरबस और गति शक्ति विश्वविद्यालय के बीच व्यापक साझेदारी चल रही है। इसके अंतर्गत 45 मेधावी एवं आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को पूर्ण छात्रवृत्ति दी जा रही है, जिनमें एक-तिहाई छात्रवृत्तियां महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा एयरबस चेयर प्रोफेसरशिप की स्थापना, संयुक्त अनुसंधान अध्ययन समझौता (जेएसए) तथा एमएसडब्ल्यू से एसएएफ उत्पादन पर अनुसंधान को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

गति शक्ति विश्वविद्यालय की स्थापना संसद के अधिनियम के तहत वर्ष 2022 में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में की गई थी। यह भारत का एकमात्र विश्वविद्यालय है जो परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को समर्पित है और रेलवे, विमानन, बंदरगाह, शिपिंग, अंतर्देशीय जलमार्ग, शहरी परिवहन तथा संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला को कवर करता है।

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