हम शांति चाहते हैं, लेकिन अपनी सीमाओं और नागरिकों की रक्षा के लिए तैयार हैंःराष्ट्रपति मुर्मु

Date:

नई दिल्ली — राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए इसे भारत की सैन्य ताकत और आतंकवाद-रोधी रणनीति का एक निर्णायक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल भारत की सैन्य क्षमता और तत्परता को साबित किया है, बल्कि यह दिखाया है कि जब देश की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा की बात हो, तो भारत दृढ़ता व जिम्मेदारी के साथ कार्रवाई करने में सक्षम है।राष्ट्रपति ने कहा, “हम शांति चाहते हैं, लेकिन अपनी सीमाओं और नागरिकों की रक्षा के लिए तैयार हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि हमारी कूटनीति, अर्थव्यवस्था और सशस्त्र बल — मिलकर एक ऐसा भारत प्रस्तुत करते हैं जो मजबूत, सुरक्षित और न्यायपूर्ण है।

राजधानी के मानेकशॉ सेन्टर में आयोजित चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 के तीसरे संस्करण का बुधवार को राष्ट्राध्यक्ष द्रौपदी मुर्मू ने मुख्य अतिथि के रूप में भव्य उद्घाटन किया। इस मौके पर देश के शीर्ष सैन्य अधिकारी, रक्षा विशेषज्ञ, थिंक-टैंक, नीति आयोग, प्रशासनिक तथा स्थनीय प्रतिनिधि, अंतरराष्ट्रीय मेहमान तथा पत्रकार मौजूद थे — जिससे यह कार्यक्रम रक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा पर विचार-विमर्श का एक प्रमुख मंच बन गया।

चाणक्य डिफेंस डायलॉग का यह संस्करण 27–28 नवंबर 2025 को “Reform to Transform – सशक्त, सुरक्षित एवं विकसित भारत” के थीम के साथ आयोजित किया गया है। इस मंत्र के अंतर्गत रक्षा व्यवस्थाओं में सुधार, आत्मनिर्भरता, भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतिक बदलाव, आधुनिक युद्ध-तकनीक, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, साइबर व स्पेस रक्षा, थ्रेड कमांड संरचनाएं व संयुक्त ऑपरेशनल क्षमता आदि पर व्यापक चर्चा होगी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने डायलॉग के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह डायलॉग राष्ट्र की रक्षा संरचनाओं तथा सामरिक दृष्टिकोण के विस्तार में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि “भारत अब केवल संध्यात्मक चुनौती नहीं देखता, बल्कि नए युद्ध, आतंकवाद, उग्रवाद, मानवीय तथा हाइब्रिड खतरों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।


डायलॉग में शामिल अधिकांश वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, रणनीतिक विश्लेषक, रक्षा विशेषज्ञ और नीति-निर्धारक इस अवसर पर उपस्थित थे। सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी सहित तीनों सेनाओं के उच्च अधिकारी एवं रक्षा सचिव, थिंक-टैंक प्रतिनिधि, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ एवं नीति आयोग के नेता डायलॉग के सत्रों में भाग ले रहे थे।

डायलॉग के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि आज की बदलती भू-राजनीतिक स्थिति, तकनीकी चुनौतियाँ, साइबर व स्पेस असब्यूरिटीज, सीमा संघर्ष, आतंकवाद व हाइब्रिड युद्धों जैसी चुनौतियों के बीच भारत को अपनी रणनीति, हथियार-प्रणाली, जानकारी एवं कूटनीतिक दृष्टिकोण को और मजबूत करना होगा। “रिफॉर्म से ही ट्रांसफॉर्मेशन संभव है” — यह इस डायलॉग का मूल संदेश रहा।

राष्ट्रपति ने सम्मानित सशस्त्र बलों की मौजूदगी की भी सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने हर चुनौती में पेशेवराना दक्षता, अनुशासन और देशभक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण दिया है — चाहे वह पारंपरिक युद्ध हो, आतंकवाद-रोधी अभियान हो या मानवीय सहायता।

द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण “वसुधैव कुटुंबकम” — अर्थात् सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार मानने — पर आधारित है। इसके बावजूद, देश को अपनी सीमाओं, स्वाभिमान और नागरिकों की रक्षा के प्रति सजग रहना होगा। ऑपरेशन सिंदूर ने यही दिखाया है कि भारत न केवल सुरक्षा की दृष्टि से मजबूत है, बल्कि शांति की उसकी प्रतिबद्धता भी स्पष्ट है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की कूटनीति, अर्थव्यवस्था और सशस्त्र-बल मिलकर इसे 21वीं सदी का जिम्मेदार, मजबूत और विश्वस्तरीय सुरक्षा-निगमित देश बनाने की दिशा में अग्रसर कर रहे हैं।

चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 में कई सत्र आयोजित होंगे जिनमें स्वदेशी रक्षा उत्पादन, हाइब्रिड व साइबर सुरक्षा, मल्टी-डोमेन थियेटर कमांड, इंडो-पीसिफिक रणनीति, सामरिक कूटनीति, संयुक्त रक्षा और बाह्य चुनौतियों पर भारत की तैयारियों पर चर्चा होगी। इसके अतिरिक्त, आतंकवाद-रोधी रणनीति, सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास व नागरिक सुरक्षा, मानवीय एवं राहत अभियानों में सशस्त्र बलों की भूमिका, और रक्षा संरचनाओं में लॉजिस्टिक-आधार, टेक्नोलॉजी एवं संयुक्तता जैसे विषय शामिल होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस डायलॉग के बाद भारत की रणनीतिक दिशा और स्पष्ट होगी — जो न केवल भारत के रक्षा तंत्र को मजबूत करेगी, बल्कि उसे एक प्रतिस्पर्धात्मक, आधुनिक और जवाबदेह वैश्विक शक्ति की भूमिका में और मजबूती से स्थापित करेगी।

चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संबोधन — विशेषकर ऑपरेशन सिंदूर को लेकर — भारत के लिए एक आत्म-विश्वास और दृढ़ संकल्प का संदेश रहा। यह बयान इस बात का संकेत है कि भारत अपनी रक्षा, सुरक्षा और विदेश नीति में अस्थिरता या डर के बजाय, रणनीति, तैयारी और नैतिक समर्पण के साथ आगे बढ़ रहा है।

इस डायलॉग से यह उम्मीद की जा रही है कि भारत न केवल आधुनिक आतंकवाद, हाइब्रिड चुनौतियों और भू-राजनीतिक उतार-चढ़ावों से निपटने में सक्षम बनेगा, बल्कि वैश्विक रूप से शांति, स्थिरता और जवाबदेही के साथ अपनी भूमिका को और मजबूती से निभाएगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

काशी–तमिल संगमम् 4 में सैकड़ों युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया

काशी–तमिल संगमम् 4.0 के अंतर्गत आयोजित काशी हिंदू...

दंतेवाड़ा में 37 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण

रविवार को दंतेवाड़ा में 37 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण...

नवयुग खादी फैशन शो का आयोजन

नवयुग खादी फैशन शो का आयोजन शनिवार, 29 नवंबर को...

विश्व एड्स दिवस,सुरक्षा जरूरी

विश्व एड्स दिवस हर वर्ष 1 दिसंबर को एचआईवी/एड्स...
en_USEnglish