वैश्‍विक दबावों से परे भारत की आर्थ‍िक उड़ान

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-डॉ. मयंक चतुर्वेदी

अमेरिका के लाख दबाव के बाद भी भारत की आर्थ‍िक ग्रोथ होना बताता है कि हम सही दिशा में हैं। वस्‍तुत: ये दुनिया के उन तमाम देशों के लिए भी मूक संदेश है कि कभी एक या सीमित देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, लाख असहमति के बाद भी दुनिया में एक साथ अनेक मित्र बनाए जा सकते हैं, संतुलित मित्रता, बहुआयामी साझेदारी और आत्मनिर्भरता ही भविष्य का रास्ता है, जिसका आज भारत सशक्‍त उदाहरण है। क्‍योंकि केंद्र की मोदी सरकार के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था ने यह साफ कर दिया है कि वह किसी एक देश या बाजार पर निर्भर नहीं है। इसलिए ही अमेरिका सहित वैश्विक शक्तियों के दबावों के बावजूद भारत ने निर्यात, उत्पादन और सेवाओं के क्षेत्र में आज मजबूती दिखाई है।

वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़े इस आत्मविश्वास की ठोस तस्वीर पेश करते हैं। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच भारत का कुल निर्यात, जिसमें माल और सेवाएं दोनों शामिल हैं, 634.26 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 607.93 बिलियन डॉलर के मुकाबले 4.33 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि है। इसी तरह से अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान माल निर्यात 330.29 बिलियन डॉलर तक पहुंचा, यह भी 322.41 बिलियन डॉलर पिछले वर्ष की तुलना से 2.44 प्रतिशत अधिक है। विशेष रूप से गैर पेट्रोलियम निर्यात का 288.16 बिलियन डॉलर तक पहुंचना और 5.51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करना यह दर्शाता है कि भारत ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटाते हुए विविध क्षेत्रों में मजबूती बना रहा है।

दिसंबर 2025 में ही माल निर्यात 38.51 बिलियन डॉलर रहा, जोकि इससे एक वर्ष पूर्व 2024 के दिसंबर के आंकड़े से बेहतर है। इस बीच हमें इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में तेज उछाल देखने को मिला, जहां यह 3.57 बिलियन डॉलर से बढ़कर 4.17 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। फार्मा सेक्टर ने अपनी विश्वसनीयता बनाए रखते हुए स्थिर वृद्धि दर्ज की है। इंजीनियरिंग गुड्स और समुद्री उत्पादों ने भी निरंतर मांग के दम पर मजबूती दिखाई देती है। कहना होगा ऐसे सकारात्‍मक वातावरण में खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित निर्यात भी पीछे नहीं रहे। मीट, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों में आई वृद्धि दर्शाती है कि ग्रामीण भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा बन चुका है।

देखने में आ रहा है कि जहां माल निर्यात उत्पादन क्षमता को दर्शाता है, वहीं सेवाओं का निर्यात भारत की बौद्धिक और तकनीकी शक्ति का प्रमाण है। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच सेवाओं का अनुमानित निर्यात 6.46 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 303.97 बिलियन डॉलर रहा है। आईटी, सॉफ्टवेयर और बिजनेस सर्विसेज ने यह सुनिश्चित किया कि वैश्विक मंदी के संकेतों के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहेगी। हालांकि दिसंबर 2025 में कुल निर्यात में हल्की गिरावट जरूर दर्ज की गई, किंतु सेवाओं का निर्यात 35.50 बिलियन डॉलर पर स्थिर रहा। यही वह क्षेत्र है जिसने ट्रेड बैलेंस को संभालने में निर्णायक भूमिका निभाई। ऐसे में 151.74 बिलियन डॉलर का ट्रेड सरप्लस यह दिखाता है कि भारत इस वक्‍त आयात आधारित अर्थव्यवस्था नहीं रही है, यह निर्यात प्रेरित विकास मॉडल की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

यहां समझने के लिए यह भी है कि भारत की निर्यात सफलता का एक बड़ा कारण उसका बदला हुआ वैश्विक दृष्टिकोण है। वह आज किसी एक देश पर निर्भर नहीं रह कर सभी के साथ अपने मित्रवत संबंध बनाने में सफल दिखता है। तमाम असहमतियों के बीच भी अमेरिका के साथ मजबूत व्यापारिक रिश्ते उसके बने ही हुए हैं। साथ ही एशिया, यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका में भी अपने बाजारों का विस्तार किया है। चीन को निर्यात में दर्ज की गई तेज वृद्धि यह दर्शाती है कि यहां भी राजनीतिक असहमति के बावजूद आर्थिक संवाद और व्यापारिक संभावनाएं खुली रखी जा सकती हैं।

यूएई, मलेशिया, स्पेन और हॉन्गकॉन्ग जैसे बाजारों में भारतीय उत्पादों की बढ़ती मांग इस बात का प्रमाण है कि एक दुनिया, अनेक मित्र की नीति व्यावहारिक और लाभकारी भी है। यह रणनीति वैश्विक अस्थिरता के दौर में भारत को जोखिमों से बचाती है और नए अवसरों के द्वार खोलती है। हालांकि यह सच भी है कि आयात में वृद्धि होने के बाद भी मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट एक चुनौती बना हुआ है। किंतु इसे कमजोरी के रूप में देखने के बजाय संक्रमणकालीन चरण के रूप में समझना अधिक उचित होगा। क्‍योंकि इंफ्रास्ट्रक्चर, मशीनरी और कच्चे माल का आयात भविष्य की उत्पादन क्षमता को मजबूत करने का आधार है। दूसरी ओर सोना और कुछ गैर जरूरी आयातों में आई कमी यह बताती है कि नीतिगत स्तर पर संतुलन साधने की कोशिशें जारी हैं।

कहना यही होगा कि मोदी सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं, मुक्त व्यापार समझौते और लॉजिस्टिक्स सुधार आने वाले वर्षों में भारत के निर्यात को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले हैं। लक्ष्य पूरी तरह स्पष्ट है कि भारत को एक सफल वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस हब बनाया जाना है, जिसके लिए जमीन पर अनेक कार्य होते हुए आज दिखाई दे रहे हैं।

वस्‍तुत: आज किसान, कारीगर, स्टार्टअप संस्थापक और आईटी पेशेवर, हर वर्ग यह महसूस कर रहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था सही दिशा में बढ़ रही है। आज विश्‍व स्‍तर के तमाम दबावों के बीच भी सकारात्मक ग्रोथ बनाए रखना इस बात का प्रमाण है कि भारत ने आत्मनिर्भरता और वैश्विक सहयोग के बीच संतुलन साधने का अपने में हुनर पा लिया है। ऐसे में साल 2025 का यह निर्यात प्रदर्शन उस भविष्य की झलक है जहां भारत आत्मविश्वास के साथ कह सकता है कि हम अब आत्‍मनिर्भर हैं, हम दुनिया के साथ हैं और अपनी शर्तों पर आगे बढ़ रहे हैं। यही नया भारत है और यही उसकी आर्थिक उड़ान की आज की सफलतम कहानी है।

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