विकसित भारत युवा संसद में गूंजा लोकतंत्र का स्वर, आपातकाल से मिले सबकों पर युवाओं की बेबाक चर्चा

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मीरजापुर, 22 जनवरी (हि.स.)। विकसित भारत की संकल्पना को सशक्त बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को जीडी बिनानी पीजी कॉलेज में विकसित भारत युवा संसद-2026 का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “आपातकाल के 50 वर्ष: लोकतंत्र के लिए सबक” रहा, जिस पर युवाओं ने गहन, तथ्यपरक और विचारोत्तेजक विमर्श प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि क्षेत्रीय निदेशक, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय भारत सरकार (उत्तर प्रदेश–उत्तराखंड), लखनऊ द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। स्वागत संबोधन में नोडल अधिकारी डॉ. राम मोहन अस्थाना ने कहा कि वर्ष 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसने यह सिखाया कि लोकतंत्र की रक्षा सजग नागरिकों और जागरूक युवाओं से ही संभव है।

जिला युवा अधिकारी प्रतीक साहू ने कहा कि विकसित भारत युवा संसद युवाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगी। यहां से चयनित प्रतिभागी लखनऊ विधानसभा और आगे चलकर देश की संसद दिल्ली में अपनी प्रस्तुति देंगे, जिससे नेतृत्व क्षमता का विकास होगा।

मुख्य अतिथि समरदीप सक्सेना ने अपने संबोधन में कहा कि आपातकाल के अनुभव ने भारत को और अधिक मजबूत लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाया। उन्होंने युवाओं से संविधान के मूल्यों—स्वतंत्रता, समानता और न्याय को आत्मसात करने का आह्वान किया।

युवा संसद सत्र में प्रतिभागियों ने आपातकाल के कारणों, प्रभावों और उससे मिले लोकतांत्रिक सबकों पर अपने विचार रखे। निर्णायक मंडल द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अन्या कसेरा को प्रथम, प्रियंका राय को द्वितीय, कृतिका सिंह को तृतीय, संगीता यादव को चतुर्थ और आदित्य तिवारी को पंचम स्थान प्रदान किया गया। अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. अशोक कुमार सिंह ने इसे युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ने वाला सशक्त मंच बताया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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