वाराणसी में साइबर ठगी का खुलासा: अन्तर्राज्यीय गिरोह के सरगना समेत 9 गिरफ्तार

अपराध

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वाराणसी, 31 दिसंबर (हि.स.)। फर्जी कॉल सेंटर के माध्यम से शेयर ट्रेडिंग के नाम पर आम लोगों से साइबर ठगी करने वाले अन्तर्राज्यीय गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। साइबर पुलिस टीम ने गिरोह के सरगना समेत 9 शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज, लैपटॉप, पीली धातु तथा 4,88,920 रुपये नकद बरामद किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों को बुधवार को पुलिस लाइन स्थित नवीन सभागार में मीडिया के सामने पेश किया गया। इस दौरान अपर पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) साइबर क्राइम नीतू कादयान और सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) साइबर क्राइम विदुष सक्सेना ने मामले का खुलासा किया। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के निर्देश पर साइबर अपराध के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में सूचना मिली कि कुछ साइबर अपराधी अवैध कॉल सेंटर के जरिए शेयर ट्रेडिंग में अधिक मुनाफे का लालच देकर लोगों से ठगी कर रहे हैं। सूचना के आधार पर डीसीपी अपराध सरवणन टी., एडीसीपी साइबर क्राइम और एसीपी साइबर क्राइम के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया। प्रभारी निरीक्षक साइबर क्राइम थाना गोपाल जी कुशवाहा को कार्रवाई के निर्देश दिए गए। टीम ने मंगलवार शाम लंका क्षेत्र के गांधीनगर कॉलोनी में छापेमारी कर मौके से 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपियों में सरगना सोमिल मोदनवाल (उर्दू बाजार, जौनपुर), अमित सिंह, अभय मौर्य, कृष्णा विश्वकर्मा, अभिषेक तिवारी, शिवा वैश्य, अमन मौर्य, विजय कुमार उर्फ विक्की और सुजल चौरसिया है। सभी जनपद जौनपुर के निवासी हैं। पूछताछ में सरगना सोमिल मोदनवाल ने बताया कि गिरोह नामी-गिरामी कंपनियों के नाम का दुरुपयोग कर मेटा, गूगल जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन देता था। इन विज्ञापनों के जरिए लोगों का डेटा हासिल कर उन्हें फोन कॉल किए जाते थे और आकर्षक ऑफर देकर शेयर ट्रेडिंग में निवेश के लिए फंसाया जाता था।

आरोपी खुद को ट्रेडिंग एक्सपर्ट बताकर पीड़ितों से उनके डिमैट खाते की लॉगिन आईडी और पासवर्ड हासिल कर लेते थे। इसके बाद अधिक ब्रोकरेज और कमीशन के लालच में बार-बार ट्रांजेक्शन कराकर पीड़ितों को भारी नुकसान पहुंचाया जाता था। इतना ही नहीं, डिमैट खाते की पूरी हैंडलिंग मिलने के बाद खाते में मौजूद रकम को फर्जी म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर कर निकाल लिया जाता था। अफसरों ने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क की जानकारी जुटाने के साथ आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस टीम की सफलता पर खुश होकर डीसीपी क्राइम ने टीम को 25 हजार रूपये पुरस्कार देने की घोषणा की है।

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