तीन विदेशी जहाज जब्त

– तेल कार्गो के अवैध हस्तांतरण में शामिल नेटवर्क कर रहा था टैक्स की चोरी
नई दिल्ली, 07 फरवरी (हि.स.)। भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने सुनियोजित समुद्री हवाई समन्वित अभियान के जरिए अंतरराष्ट्रीय तेल तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस अभियान से संघर्षग्रस्त क्षेत्रों से उत्पन्न होने वाले भारी मात्रा में तेल और तेल-आधारित कार्गो के अवैध हस्तांतरण में शामिल नेटवर्क ध्वस्त हुआ है। आईसीजी ने तीन विदेशी जहाजों को जब्त कर लिया है, जिन्हें आगे की जांच के लिए मुंबई बंदरगाह पर लाया जा रहा है।
आईसीजी के कमांडर अमित उनियाल ने बताया कि 5 फरवरी को मुंबई से लगभग 100 समुद्री मील पश्चिम में भारतीय तटरक्षक बल के जहाजों ने तीन संदिग्ध जहाजों को रोका। आईसीजी की विशेषज्ञ बोर्डिंग टीमों ने जहाजों की लगातार तलाशी ली और जहाज पर बरामद इलेक्ट्रॉनिक डेटा की पुष्टि की। दस्तावेज का सत्यापन करके चालक दल के सदस्यों से विस्तृत पूछताछ की गई। घटनाक्रम की पूरी जानकारी जुटाने के बाद आपराधिक कार्यप्रणाली की पुष्टि हुई।
उन्होंने बताया कि तस्करी करने वाले गिरोह ने एक ऐसी कार्यप्रणाली अपनाई, जिसमें सस्ते तेल को समुद्री जहाजों से ले जाकर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मोटर टैंकरों में स्थानांतरित किया जाता था। प्रारंभिक जांच से पता चला कि गिरोह में कई देशों के काम करने वाले दलाल शामिल थे, जो समुद्र में जहाजों के बीच माल की बिक्री और हस्तांतरण करते थे। आईसीजी की तकनीक आधारित निगरानी प्रणालियों से पता चलने के बाद भारतीय विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) के भीतर संदिग्ध गतिविधि में लिप्त एक मोटर टैंकर की पहचान की गई। इसके बाद जहाजों की आवाजाही की डिजिटल जांच और डेटा पैटर्न विश्लेषण से टैंकर की ओर आ रहे दो अतिरिक्त जहाजों की पहचान हुई, जिन पर अवैध रूप से तेल के जहाज-से-जहाज पर हस्तांतरण में शामिल होने का संदेह था, जिससे भारत सहित तटीय राज्यों को देय भारी शुल्क की चोरी हो रही थी।
कमांडर उनियाल ने बताया कि 5 फरवरी को भौतिक तलाशी से डिजिटल साक्ष्य की पुष्टि होने पर तीनों जहाजों को जब्त कर लिया गया। प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि समुद्री कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए ये जहाज अक्सर अपनी पहचान बदलते रहते थे। शुरुआती जांच से यह भी पता चलता है कि जहाजों के मालिक विदेशी देशों में रहते हैं। जब्त किए गए जहाजों को आगे की जांच के लिए मुंबई ले जाया जाएगा और बाद में उचित कानूनी कार्रवाई के लिए भारतीय सीमा शुल्क और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सौंप दिया जाएगा।-
