भारत ग्लोबल साउथ−दुनिया के बीच प्रमुख एविएशन गेटवे के रूप में उभर रहा:मोदी

0
14

नई दिल्ली, 28 जनवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि भारत तेजी से ग्लोबल साउथ और दुनिया के बीच एक प्रमुख एविएशन गेटवे के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि विमानन क्षेत्र में किए जा रहे व्यापक सुधारों के कारण भारत आज निवेशकों, निर्माताओं और नवाचारकर्ताओं के लिए बड़े अवसरों का केंद्र बन गया है।

प्रधानमंत्री तेलंगाना के हैदराबाद में आयोजित विंग्स इंडिया 2026 कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का विमानन क्षेत्र आज बड़े पैमाने, नीति स्थिरता और तकनीकी महत्वाकांक्षा का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि बहुत कम ऐसे देश हैं जहां विमानन उद्योग के लिए इतनी व्यापक संभावनाएं मौजूद हों। उन्होंने वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत से आह्वान किया कि वे भारत की विकास यात्रा में दीर्घकालिक भागीदार बनें और वैश्विक विमानन क्षेत्र की प्रगति में योगदान दें।

मोदी ने कहा कि भारत न केवल विभिन्न शहरों और क्षेत्रों को आपस में जोड़ रहा है, बल्कि मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के जरिए शहरों को बंदरगाहों और बाजारों से भी जोड़ रहा है। भारत की एविएशन विजन केवल यात्री परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि एयर कार्गो पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कार्गो मूवमेंट को तेज और अधिक कुशल बनाने के लिए आवश्यक सभी नियामकीय सुधार किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि डिजिटल कार्गो प्लेटफॉर्म्स के जरिए पूरी प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जा रहा है, जबकि ऑफ-एयरपोर्ट प्रोसेसिंग व्यवस्थाएं हवाई अड्डों पर दबाव कम कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि आधुनिक वेयरहाउस बनाए जा रहे हैं, जिससे कार्गो हैंडलिंग में तेजी आएगी और भविष्य में डिलीवरी समय तथा लॉजिस्टिक्स लागत दोनों में कमी होगी। भारत एक प्रमुख और प्रतिस्पर्धी ट्रांस-शिपमेंट हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और निवेशकों से वेयरहाउसिंग, फ्रेट फॉरवर्डिंग, एक्सप्रेस लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में अवसर तलाशने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विंग्स इंडिया जैसे मंच विमानन उद्योग के सभी हितधारकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने उद्योग के नेताओं, विशेषज्ञों और निवेशकों का स्वागत करते हुए कहा कि विमानन उद्योग का अगला युग आकांक्षाओं से भरा हुआ है और भारत इसमें एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विमान निर्माण, पायलट प्रशिक्षण, एडवांस्ड एयर मोबिलिटी और एयरक्राफ्ट लीजिंग जैसे क्षेत्रों में मौजूद विशाल अवसरों को रेखांकित किया।

पिछले एक दशक में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के विमानन क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन आया है। कभी हवाई यात्रा कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित थी लेकिन आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है। यात्री यातायात में तेज वृद्धि हुई है और भारतीय एयरलाइंस ने हाल के वर्षों में 1,500 से अधिक विमानों का ऑर्डर दिया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह वृद्धि सरकार की दीर्घकालिक सोच और ‘हवाई यात्रा को समावेशी बनाने’ के दृष्टिकोण का परिणाम है। वर्ष 2014 में देश में जहां केवल 70 हवाई अड्डे थे, वहीं आज इनकी संख्या बढ़कर 160 से अधिक हो गई है। यानी एक दशक में दोगुने से भी ज्यादा हवाई अड्डों का निर्माण हुआ है। उन्होंने कहा कि 100 से अधिक एयरोड्रोम सक्रिय किए गए हैं और साथ ही उड़ान योजना शुरू की गई, जिससे किफायती हवाई यात्रा संभव हो सकी।

मोदी ने कहा कि उड़ान योजना के तहत अब तक करीब 1.5 करोड़ यात्रियों ने यात्रा की है, जिनमें से कई मार्ग ऐसे थे जो पहले अस्तित्व में ही नहीं थे। उन्होंने कहा कि टियर-2 और टियर-3 शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने से न केवल यात्रियों को सुविधा मिली है, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिली है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा, हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार कई गुना बढ़ना तय है। वर्ष 2047 तक देश में 400 से अधिक हवाई अड्डे होने की संभावना है। सरकार उड़ान योजना के अगले चरण पर काम कर रही है, जिससे क्षेत्रीय और किफायती हवाई संपर्क और मजबूत होगा। इसके साथ ही सी-प्लेन संचालन के विस्तार पर भी ध्यान दिया जा रहा है, ताकि देश के हर कोने तक कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सके।

पर्यटन क्षेत्र पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देशभर में पर्यटन स्थलों का उन्नयन किया जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग हवाई यात्रा को प्राथमिक विकल्प के रूप में अपना रहे हैं। आने वाले वर्षों में हवाई यात्रा की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि होगी, जिससे निवेश के और भी अधिक अवसर पैदा होंगे।

प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे-जैसे भारत एक वैश्विक विमानन हब के रूप में उभर रहा है, वैसे-वैसे विमानन जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता कम करना आवश्यक है। सरकार विमान डिजाइन, निर्माण और एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) इकोसिस्टम पर विशेष ध्यान दे रही है। भारत पहले से ही विमान पुर्जों का एक बड़ा निर्माता और आपूर्तिकर्ता है तथा अब सैन्य और परिवहन विमानों का घरेलू स्तर पर उत्पादन भी किया जा रहा है। साथ ही नागरिक विमान निर्माण की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की भौगोलिक स्थिति, वैश्विक एयर कॉरिडोर में इसकी मौजूदगी, मजबूत घरेलू फीडर नेटवर्क और लंबी दूरी के बेड़े का भविष्य विस्तार देश की बड़ी ताकत हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि वह दिन दूर नहीं जब भारत में डिजाइन और निर्मित इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (ई-वीटीओएल) विमान विमानन क्षेत्र को नई दिशा देंगे और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी लाएंगे।

उन्होंने कहा कि भारत सतत विमानन ईंधन पर भी व्यापक रूप से काम कर रहा है और आने वाले वर्षों में ग्रीन एविएशन फ्यूल का प्रमुख उत्पादक और निर्यातक बनने की दिशा में अग्रसर है। प्रधानमंत्री ने वैश्विक निवेशकों को भारत की इस “उड़ान” में सह-पायलट बनने का आमंत्रण दिया और विंग्स इंडिया 2026 के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here