जातिवाद से उठकर ‘भारतवासी’ होने पर करें गर्व : आनंदीबेन पटेल

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सूरत, 19 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने कहा कि जाति के नाम पर राजनीति करने वालों को अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है। उन्होंने लोगों से जाति के दायरों से बाहर निकलकर ‘भारतवासी’ और ‘हिंदुस्तानी’ होने पर गर्व करने की अपील की। उनके अनुसार सच्चा नेतृत्व वही है जो पूरे समाज को साथ लेकर चले, न कि किसी एक उपजाति तक सीमित रहे।

आनंदीबेन पटेल गुरुवार को सूरत में आयोजित ‘क्राफ्ट रूट’ कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। यह कार्यक्रम हर वर्ष उनकी पुत्री अनार पटेल द्वारा आयोजित किया जाता है। कार्यक्रम में पुराने समय को याद करते हुए आनंदीबेन ने कहा कि पहले गांव में यदि केवल दो-तीन पटेल परिवार भी होते थे, तो किसी भी बेटी के विवाह की जिम्मेदारी पूरा गांव, विशेषकर पटेल परिवार मिलकर निभाते थे। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी से उस उदारता और सामाजिक नेतृत्व से सीख लेने का आह्वान किया।

हाल ही में अनार पटेल को खोडलधाम ट्रस्ट के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस संदर्भ में आनंदीबेन ने मंच से ही उन्हें संदेश दिया कि संगठन का दायरा केवल एक जाति तक सीमित न रहे। उन्होंने कहा कि यदि किसी अन्य समाज का जरूरतमंद व्यक्ति भी सहायता के लिए आए, तो उसकी मदद करना ही सच्चा धर्म है।

शिक्षा को सबसे बड़ा दान बताते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई अनुसूचित जनजाति की छात्रा या गरीब बेटी पढ़ाई के लिए सहायता मांगती है, तो संपन्न पटेल परिवारों को आगे आकर उसकी फीस भरनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि 98 प्रतिशत अंक लाने वाली होनहार बेटी पैसों के अभाव में पढ़ाई न कर सके, तो यह समाज के लिए शर्म की बात है।

उप्र राज्यपाल ने बताया कि वह स्वयं भी कई बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रही हैं और ऐसा इस तरह करती हैं कि बच्चों को पता भी नहीं चलता कि उनकी फीस किसने भरी है। उन्होंने कहा कि सच्ची सेवा वही है जिसमें नाम और प्रसिद्धि की इच्छा न हो।

अपने संबोधन के अंत में आनंदीबेन पटेल ने समाज से संकीर्ण सोच छोड़कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व का अर्थ केवल अपनी जाति का भला करना नहीं, बल्कि पूरे समाज और मानवता की सेवा करना है।

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