आवास विकास परिषद में टेंडर पर ‘सेटिंग’ का खेल

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रिटायर कर्मचारी की फर्म पर करोड़ों के काम, मुख्यालय तक पहुंचा मामला

बरेली, 07 फरवरी (हि.स.) । आवास विकास परिषद की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि परिषद से सेवानिवृत्त एक कर्मचारी के पुत्र ने नियमों की अनदेखी कर पिता के नाम से संचालित फर्म को करोड़ों रुपये के टेंडर दिलाने में भूमिका निभाई। मामला उजागर होने के बाद इसे परिषद मुख्यालय लखनऊ भेज दिया गया है, जहां से रिपोर्ट तलब की गई है।

जानकारी के अनुसार, रिटायर कर्मचारी के पुत्र विनय कुमार ने आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से परिषद में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर तैनाती हासिल की। आरोप है कि इसी पद का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी सूचनाओं और औपचारिकताओं में प्रभाव डालकर पिता के नाम से संचालित काव्या इंटरप्राइजेज को लाभ पहुंचाया। हाल ही में फर्म द्वारा करीब सवा करोड़ रुपये के कार्य का टेंडर डाले जाने की चर्चा है। सूत्रों का यह भी दावा है कि इससे पहले भी फर्म को परिषद से कई काम मिल चुके हैं।

निविदा में लगाए गए अनुभव प्रमाण पत्रों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि नियमों के विपरीत दस्तावेज लगाए गए, हालांकि आधिकारिक स्तर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि कुछ अधिकारी और इंजीनियर पूरे घटनाक्रम से अवगत थे, लेकिन उन्होंने चुप्पी साधे रखी, जिससे मामला लंबे समय तक चलता रहा।

प्रकरण सामने आने के बाद मुख्यालय ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है और जांच के संकेत दिए हैं। जांच में आरोप सही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई संभव है।

इस संबंध में एक्सईएन राजेंद्र नाथ राम ने कहा कि विनय के पिता विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके नाम से फर्म होने की जानकारी मिली है। रिटायरमेंट के बाद कोई भी व्यक्ति टेंडर ले सकता है। मामले में तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है।

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