क्या ईरान के लिये अब परमाणु परीक्षण ज़रूरी हो गया है ?                                                                    

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 तनवीर जाफ़री

 पिछले दिनों सनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के निर्देश पर जिस तरह वेनेज़ुएला पर सैन्य कार्रवाई करते हुये अमेरिकी सेना ने वेनेज़ुएला की राजधानी कराकस से वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो व उनकी पत्नी का बलात अपहरण कर उन्हें न्यूयार्क ले जाया गया उसने पूरी दुनिया को न केवल अचंभे में डाल दिया है बल्कि इस घटना ने एक नई विश्व व्यवस्था व नये वैश्विक शक्ति संतुलन के गठन की संभावना को भी प्रबल कर दिया है। कितना आश्चर्य है कि नोबल शांति पुरस्कार की चाहत रखने वाले राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी शक्तियों का दुरुपयोग कर इस दुनिया को जंगल राज की तरह चलाना चाह रहे हैं ? वेनेज़ुएला पर की गयी ग़ैर क़ानूनी अमेरिकी कार्रवाई कई संकेतों की ओर इशारा कर रही है। एक तो यह कि क्या यह विश्व की उदारवादी सोच रखने वाली ताक़तों को विश्व की पूंजीवादी व अतिवादी व्यवस्था की ओर से दी जाने वाली यह एक सीधी चुनौती है ? ग़ौरतलब है कि ट्रंप परिवार की गिनती भी अमेरिका के बड़े  पूंजीवादी घरानों में की जाती है। या फिर यह चीन व रूस जैसे देशों एक साथ ललकारने की ट्रंप की नीति का हिस्सा है ? और अब कोलंबिया, क्यूबा, मैक्सिको और ईरान जैसे देशों पर अमेरिकी सैन्य या आर्थिक दबाव की आशंका व्यक्त की जा रही है।साथ ही अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड पर भी अधिग्रहण की धमकी दी जा चुकी है।

                 ऐसे में दुनिया के सामने दो ही विकल्प बचे हैं एक तो यह कि दूसरे देशों की स्वतंत्रता व संप्रभुता का सम्मान करने वाले सभी देश वेनेज़ुएला पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विरोध करते हुये हर स्तर पर एकजुट होकर अमेरिका का मुक़ाबला करें। दूसरा यह कि ‘जिसकी लाठी उसी की भैंस’ वाली अमेरिकी नीति का ही अनुसरण करते हुये पूरी दुनिया ही जंगल राज में बदल जाये। हर ताक़तवर देश अपनी पड़ोसी कमज़ोर देश को निगलने की मानवता व न्याय विरोधी रक्तरंजित योजना पर काम करे। उदाहरण के तौर पर चीन ताइवान को हड़प ले और रूस यूक्रेन पर अपना आधिपत्य स्थापित कर ले ? इस्राईल, फ़िलिस्तीन लेबनान सीरिया पर नियंत्रण कर अपने वृहत्तर इस्राईल के नापाक मंसूबे पर आगे बढ़े ? और इन्हीं ख़तरनाक संभावनाओं के बीच एक उपाय यह भी है कि ईरान परमाणु परीक्षण के द्वारा उत्तर कोरिया की तरह एक ऐसी आत्म रक्षक व “निवारक” रणनीति पर काम करे जो अमेरिका को भी युद्ध से पीछे हटने पर मजबूर कर दे ? तो क्या लंबे समय से चले आ रहे तमाम ईरान विरोधी प्रतिबंधों के बावजूद उस के सामने इस समय वैसी ही स्थिति पैदा हो चुकी है कि आत्मरक्षा के लिये अब उसे परमाणु संपन्न देशों के क्लब में शामिल होना ज़रूरी हो गया है ? 

                    ग़ौर तलब है कि गत 13 जून – 24 जून 2025 के मध्य चला बारह दिवसीय ईरान-इज़राइल युद्ध उस समय शुरू हुआ था जब इज़राइल ने ईरान के कई सैन्य और परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी और ईरान के कई प्रमुख सैन्य अधिकारियों , परमाणु वैज्ञानिकों व प्रमुख राजनेताओं की हत्या कर दी थी साथ ही अनेक नागरिकों को भी मार दिया था। इज़राइल ने उस समय ईरान की वायु सुरक्षा को भी नुक़्सान पहुँचाया था और कई जगह तो इसे पूरी तरह नष्ट भी कर दिया था। इतना ही नहीं बल्कि अमेरिका ने भी इस्राईल के समर्थन में 22 जून को तीन ईरानी परमाणु स्थलों पर बमबारी की। परन्तु बाद में मुंहतोड़ जवाबी कार्रवाई करते हुये ईरान ने 550 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलों और 1,000 से अधिक आत्मघाती ड्रोनों के साथ  बड़े पैमाने पर इस्राईल में राजधानी तेल अवीव सहित कई शहरों पर भीषण हमले किये। कम से कम बारह सैन्य, ऊर्जा और सरकारी स्थलों को निशाना बनाया। यहाँ तक कि कई अमेरिकी सैन्य लक्ष्यों को भी निशाना बनाया। उस दौरान भी पश्चिमी मीडिया ईरानी सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामनेई को लेकर बार बार तरह तरह की अफ़वाह उड़ा रहा था। कभी उन्हें भूमिगत बता देता था तो कभी उनके ईरान छोड़कर भाग जाने की ख़बर फैला देता था। उस समय भी आयतुल्लाह ख़ामनेई जनता को संबोधित करने के लिये सार्वजनिक रूप से दिखाई देते थे और पिछले दिनों भी बिल्कुल वैसा ही दृश्य देखने को मिला। इस बार भी ‘भूमिगत’ होने व ‘मास्को भागने की तैयारी’ जैसी अफ़वाहों के बीच गत शुक्रवार को पुनः आयतुल्लाह ख़ामनेई जनता के सामने आये तथा बेख़ौफ़ होकर ख़ुद अमेरिका को ही हिदायत व नसीहत करते सुने गए। 

                    परन्तु ट्रंप के नेतृत्व वाला वर्तमान अमेरिका वेनेज़ुएला की घटना के बाद तो पूरी तरह बेनक़ाब हो चुका है। दुनिया में सबसे अधिक तेल भण्डार रखने वाले अमेरिका को विश्व के अन्य तेल उत्पादक देशों से अपनी शर्तों पर तेल चाहिये। चाहे इसके लिये कोई भी बहाना बनाकर किसी राष्ट्रपति का अपहरण तक क्यों न करना पड़े। ज़ाहिर है ईरान भी वेनेज़ुएला की ही तरह दुनिया के उन गिने चुने तेल उत्पादक देशों में एक है जो अमेरिका को ‘सर्वशक्तिमान ‘ भी नहीं मानता और न ही उसकी ‘वैश्विक थानेदारी ‘ को स्वीकार करता है। जबकि 1979 की ईरानी इस्लामिक क्रांति से पहले का रज़ा शाह पहलवी का ईरानी शासन अमेरिका का पिट्ठू शासन था। उसी समय से ईरान न केवल अमेरिकी बल्कि संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा लगाये गयी अनेक प्रतिबंध भी झेलता आ रहा है जोकि निश्चित रूप से ईरान की अर्थव्यवस्था को बेहद कमज़ोर कर रहा है। इन प्रतिबंधों के बावजूद अपने अत्यंत सीमित संसाधनों के बल पर ईरान ने शिक्षा,विज्ञान यहाँ तक कि अंतरिक्ष विज्ञान तक के क्षेत्र में जो तरक़्क़ी की है उसी की झलक गत वर्ष के बारह दिवसीय ईरान-इज़राइल युद्ध में भी देखने को मिली।

                   परन्तु  अब बात इस्राईल की नहीं बल्कि ईरान को सीधे अमेरिका चुनौती दे रहा है। ईरान में चल रहे सरकार विरोधी व अमेरिका -इस्राईल समर्थित प्रदर्शनों को लेकर अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों को मारा गया तो अमेरिका ईरान पर बड़े हमले करेगा। ऐसे में ईरान,अमेरिकी हमलों से बचने के लिये आख़िर कौन सी रणनीति अपना सकता है ? क्या ईरान द्वारा परमाणु परीक्षण किया जाना भी इन्हीं संभावनाओं में एक सबसे प्रमुख है ? क्या निकट भविष्य में ईरान भी परमाणु परीक्षण कर  “परमाणु क्लब” में शामिल हो जाएगा ताकि अमेरिका व इज़राइल जैसे देशों को सैन्य हमले से रोका जा सके ? यदि ईरान में उपजे सत्ता विरोधी प्रदर्शनों के बीच ईरान रूस और चीन जैसे सहयोगी देशों की मदद से परमाणु परीक्षण करता है तो इससे ईरान की जनता में सुरक्षा,स्वाभिमान तथा राष्ट्रवाद बढ़ेगा तो बढ़ेगा ही साथ ही वहां आंतरिक राष्ट्रीय एकता भी बढ़ेगी। इसके अलावा ईरान का क्षेत्रीय प्रभाव भी बढ़ेगा साथ ही अमेरिकी एकध्रुवीयता का विरोध करने वाले देशों को भी मज़बूती मिलेगी। इसके अलावा दशकों से अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण दबाव का सामना करती आ रही ईरान की अर्थव्यवस्था में इस परीक्षण से JCPOA के रूप में कई नई संभावनाएँ भी खुल सकती हैं। वैसे भी उत्तर कोरिया द्वारा किये गये परमाणु परीक्षण के बाद ही ट्रंप – की उत्तर कोरिया राष्ट्रपति किम जोंग के साथ 27 -28 फ़रवरी 2019 को वेतनाम के हनोई में मुलाक़ात हुई थी। गोया आज की दुनिया में ख़ासकर अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया में यदि किसी देश को अपना अस्तित्व बचाकर रखना है तो उसका परमाणु संपन्न देश होना ज़रूरी हो चुका है। अन्यथा कभी भी इराक़-वेनेज़ुएला-ग़ज़ा-सीरिया-लेबनान यानी कहीं भी कुछ भी हो सकता है ?

         − तनवीर जाफ़री  

वरिष्ठ पत्रकार

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हाउस अरेस्ट, मकान के चारों ओर बैरिकेडिंग

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वाराणसी, 11 जनवरी(हि. स.)। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के चेतगंज थाना क्षेत्र स्थित उनके मकान के चारों ओर रविवार की सुबह बैरिकेडिंग लगाकर पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई। साथ ही अजय राय को हाउस अरेस्ट भी किया गया।

अपने मकान के चारों ओर बैरिकेडिंग देखकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि मनरेगा का नाम बदले जाने पर वाराणसी में विरोध प्रदर्शन करने जा रहे उनके साथियों और उन्हें रोकने के लिए हाउस अरेस्ट कर दिया गया है। स्थानीय पुलिस ने उनके मकान के बाहर बैरिकेडिंग कर दी है। फिर भी वह रुकने या डरने वाले नहीं हैं।

वही, चेतगंज थाना के प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि अजय राय के विरोध प्रदर्शन किए जाने का ऐलान किए जाने पर उन्हें हाउस अरेस्ट करते हुए उनके मकान के चारों ओर बैरिकेडिंग लगाई गई है। मौके पर वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस के अधिकारी भी मौजूद हैं

उत्तराखंड में बंद का मिला-जुला असर

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देहरादून, 11 जनवरी (हि.स.)। अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच की मांग को लेकर विभिन्न राजनीतिक एवं गैर-राजनीतिक संगठनों ने रविवार को उत्तराखंड बंद का आह्वान किया गया है। हालांकि, मुख्यमंत्री उत्तराखंड द्वारा मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति किए जाने के बाद कुछ व्यापारिक संगठनों ने बंद से दूरी बना ली है। राज्य के विभिन्न व्यापार मंडलों तथा टैक्सी-बस यूनियनों ने यह स्पष्ट किया है कि प्रकरण में विधिसम्मत कार्रवाई प्रचलित होने के कारण वे बंद का समर्थन नहीं करेंगे और अपने व्यापारिक एवं परिवहन कार्यों को सुचारू रूप से जारी रखेंगे।

व्यापारिक संगठनों ने बंद के दौरान किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या कार्यों में बाधा की आशंका जताते हुए एसएसपी देहरादून से पुलिस सुरक्षा की मांग की है। प्रशासन ने भी बंद को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। पलटन बाजार देहरादून में भी बाजार बंद का मिला-जुला असर नजर आया।

इस बीच एसएसपी देहरादून ने आमजन से अपील करते हुए कहा है कि सभी प्रदर्शन शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से किए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति जबरन बाजार बंद कराने, सार्वजनिक परिवहन रोकने या कानून-व्यवस्था भंग करने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

वहीं पौड़ी व श्रीनगर में उत्तराखंड बंद का मिला जुला असर देखने को मिला। रविवार को यहा साप्तहिक अवकाश रहता है। जिसके चलते अधिकतर दुकान बंद रही। वही, वाहन चलते रहे।

इतिहास के पन्नों में 12 जनवरी :स्वामी विवेकानंद-मानवता,राष्ट्र,युवा शक्ति के प्रेरणास्रोत

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स्वामी विवेकानंद का नाम भारतीय इतिहास में एक महान विद्वान, संन्यासी और समाज सुधारक के रूप में दर्ज है, जिन्होंने मानवता की सेवा को अपना सर्वोच्च धर्म माना। वे न केवल आध्यात्मिक गुरु थे, बल्कि ऐसे विचारक भी थे जिन्होंने भारत को आत्मगौरव और आत्मविश्वास का संदेश दिया। अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्मसभा में दिए गए उनके ऐतिहासिक और धाराप्रवाह भाषण ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई और विश्व को भारतीय संस्कृति, वेदांत और सहिष्णुता से परिचित कराया।

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को बंगाल में हुआ था। उनका मूल नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। वे अपने ओजपूर्ण, निर्भीक और प्रेरणादायी भाषणों के कारण विशेष रूप से युवाओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय हुए। वे युवाओं को राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति मानते थे और उन्हें आत्मविश्वास, चरित्र निर्माण और कर्मशीलता का संदेश देते थे। इसी कारण उनके जन्मदिन को पूरे देश में ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

मानव सेवा और परोपकार को संगठित रूप देने के उद्देश्य से स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। इस मिशन का नाम उन्होंने अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस के सम्मान में रखा। रामकृष्ण मिशन आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और समाजसेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

महत्वपूर्ण घटनाचक्र

1708 – शाहू जी को मराठा शासक का ताज पहनाया गया।

1757 – ब्रिटेन ने पश्चिम बंगाल के बंदेल प्रांत को पुर्तग़ाल से अपने कब्जे में लिया।

1866 – लंदन में रॉयल एयरोनॉटिकल सोसायटी का गठन हुआ।

1924- गोपीनाथ साहा ने कोलकाता के पुलिस आयुक्त चार्ल्स ऑगस्टस टेगार्ट समझकर ग़लती से एक आदमी की हत्या कर दी। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

1934 – भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान् क्रान्तिकारी सूर्य सेन को चटगांव में फाँसी दी गयी। उन्होने इंडियन रिपब्लिकन आर्मी की स्थापना की और चटगांव विद्रोह का सफल नेतृत्व किया।

1950- स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 12 जनवरी 1950 में ‘संयुक्त प्रांत’ का नाम बदल कर ‘उत्तर प्रदेश’ रखा।

1984 – स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन के मौके पर हर वर्ष देश में ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ मनाने की घाेषणा की गयी।

1991 – अमरीकी संसद ने कुवैत में इराक के खिलाफ सैनिक कार्रवाई काे मंजूरी दी।

2001 – भारत का इंडोनेशिया-रूस-चीन संधि से इंकार, नैफ नदी पर बांध निर्माण योजना के कारण बांग्लादेश-म्यांमार सीमा पर तनाव के बाद सेनाएँ तैनात।

2002 – पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ़ ने राष्ट्र के नाम ऐतिहासिक संदेश प्रसारित किया।

2002 – पाकिस्तान ने आतंकवादी संगठन लश्कर व जैश पर प्रतिबंध लागू करने की घोषणा की जबकि वांछित पाक अपराधियों को भारत को सौंपने से इन्कार किया।

2003 – भारतीय मूल की महिला लिंडा बाबूलाल त्रिनिदाद की संसद अध्यक्ष बनीं।

2004 – दुनिया के सबसे बड़े समुद्री जहाज, आरएमएस क्वीन मैरी 2 ने अपनी पहली यात्रा की शुरूआत की।

2006 – भारत और चीन ने हाइड्रोकार्बन पर एक महत्त्वपूर्ण सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए।

2007 – हिन्दी फिल्म ‘रंग दे बसन्ती’ बाफ्टा के लिए नामांकित।

2008 – कोलकाता में आग से 2500 दुकानें जल कर खाक हुई।

2008 – दुनिया के सबसे बड़े फिल्म शो टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव की बुनियाद रखने वाले ‘मुर्रे दस्ती कोहल’ का निधन।

2009- प्रसिद्ध संगीतकार ए. आर. रहमान प्रतिष्ठित गोल्डन ग्लोब अवार्ड जीतने वाले पहले भारतीय बने।

2009 – इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ जयन्त कुमार ने दुनिया का सबसे पुराना उल्का पिंड क्रेटर खोजा।

2010- भारत सरकार द्वारा नागर विमानन क्षेत्र पर आतंकी हमलो की आशंका के बीच विमान अपहरण रोधी क़ानून 1982 में मौत की सजा की धारा जोड़ी गई।

2010 – कैरेबियाई देश हैती में आए भयंकर भूकंप में लाखों लोगों की मौत और राजधानी पोर्ट ओ प्रिंस का अधिकतर हिस्सा तबाह हो गया।

2015 – कैमरून में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड में आतंकवादी संगठन बोको हराम के 143 आतंकवादी मारे गये।

2018 – इसरो ने लॉन्च किया 100वाँ उपग्रह, एक साथ भेजे 31 सैटेलाइट्स।

2020 – भारतीय टीम के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को प्रतिष्ठित ‘पॉली उमरीगर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया।

जन्म

1863 – स्वामी विवेकानंद- भारतीय दार्शनिक।

1869 – भगवान दास – ‘भारत रत्न’ सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी, समाज सेवी और शिक्षा शास्त्री।

1886 – नेली सेनगुप्ता – प्रसिद्ध महिला क्रांतिकारी।

1899 – बद्रीनाथ प्रसाद – भारत के प्रसिद्ध गणितज्ञ।

1901 – उमाशंकर दीक्षित – ‘भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन’ के पुरोधा एवं मानवता के पुजारी और राष्ट्रवाद के अग्रदूत।

1917 – महर्षि महेश योगी- भारतीय अध्यात्मवादी

1918 – म​​हर्षि महेश योगी – प्रसिद्ध भारतीय योगाचार्य थे, जिन्होंने योग को भारत के बाहर भी प्रसिद्धि दिलाई।

1918 – सी. रामचन्द्र – हिन्दी फ़िल्म संगीतकार, गायक और निर्माता-निर्देशक।

1927 – डार्विन दीनघदो पग – भारतीय राज्य मेघालय के भूतपूर्व दूसरे मुख्यमंत्री थे।

1931 – अहमद फराज – प्रसिद्ध उर्दू कवि।

1936 – मुफ़्ती मोहम्मद सईद – भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर के भूतपूर्व नौवें मुख्यमंत्री थे।

1940 – एम. वीरप्पा मोइली – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ हैं।

1943 – सुमित्रा भावे – सुप्रसिद्ध मराठी फिल्म निर्माता थीं।

1958 – अरुण गोविल – भारतीय सिनेमा में हिंदी फ़िल्म और टीवी अभिनेता हैं।

1964 – अजय माकन – भारतीय राजनीतिज्ञ

1964 – दिनेश शर्मा – राजनीतिज्ञ तथा उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री।

1972 – प्रियंका गांधी – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की वर्तमान अध्यक्ष

1990 – मनोज सरकार – भारत के पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी हैं।

1991 – हरिका द्रोणावल्ली – भारत की तेजतर्रार महिला शतरंज खिलाड़ी हैं।

1999 – आर्या राजेंद्रन – तिरुवनंतपुरम की सबसे कम उम्र की नवनियुक्त महापौर हैं।

निधन

1924- गोपीनाथ साहा- पश्चिम बंगाल के स्वतंत्रता सेनानी।

1934 – सूर्य सेन – भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले प्रसिद्ध क्रांतिकारी।

1941 – प्यारे लाल शर्मा – भारतीय क्रांतिकारियों में से एक थे।

1966 – नरहर विष्णु गाडगिल – राजनेता, अर्थशास्त्री, लेखक व भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और संविधान सभा के सदस्य थे।

1976 – अगाथा क्रिस्टी – दुनिया के जाने माने जासूसी उपन्यासकारों में से एक।

1992 – कुमार गंधर्व – भारत के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक।

2000 – वी. आर. नेदुनचेजियन – तीन बार तमिल नाडु राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री रहे।

2004 – रामकृष्‍ण हेगड़े – जनता पार्टी के राजनीतिज्ञ थे, जो कर्नाटक के भूतपूर्व मुख्यमंत्री थे।

2005 – अमरीश पुरी – भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता और खलनायक।

महत्वपूर्ण दिवस

-राष्ट्रीय युवा दिवस।

-अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह दिवस (10 दिवसीय)।

-राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह 11 जनवरी- 17 जनवरी तक।

60 पैसे खर्च कर चबाएं डिस्प्रिन, गोल्डन आवर को सुरक्षित करें हृदयरोगी

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कानपुर, 11 जनवरी । हार्ट अटैक यानी दिल का दौरा पड़ना ऐसी परिस्थिति में रोगी को घबराने की बजाय तुरंत ही दो टेबलेट डिस्प्रिन चबाकर खाने से अटैक के खतरे से होने वाले नुकसान को 40 प्रतिशत रोका जा सकता हैं। यानी करीब 30 पैसे की आने वाली यह टेबलेट रोगी के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। अटैक आने पर शुरुआती चार घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इन्हें डॉक्टरी भाषा मे गोल्डन ऑवर कहा जाता हैं लेकिन अक्सर लोग ऐसी स्थिति में इसे शरीर मे गैस की समस्या को समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इसका खामियाजा उन्हें अपनी जान गवांकर करना पड़ता है। यह जानकारी रविवार को ह्रदय रोग संस्थान के निदेशक डॉ राकेश वर्मा ने दी।

डॉ वर्मा ने बताया कि वर्तमान के खानपान और भाग दौड़ भरी जिंदगी में खुद का ख्याल न रखना। विशेष तौर पर शीतलहर के समय उसे अनदेखा करना। हार्ट अटैक का कारण बनता है। क्योंकि जब मनुष्य के शरीर में खून का थक्का जमने लगता है तो वह हार्ट अटैक का रूप ले लेता है लेकिन यह बड़ी विडंबना बना है कि लोग शुरुआती समय में इसे कुछ और ही समझ लेते हैं और वक्त जाया करते हैं। जिस वजह से कभी-कभी उन्हें अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ता है।

आगे उन्होंने कहा कि हार्ट अटैक ऐसी स्थिति में प्राथमिक उपचार बेहद आवश्यक है। यदि किसी को भी इस तरह की समस्या हो तो तुरंत ही 30 पैसे की कीमत की आने वाली डिस्प्रिन टेबलेट को चबाकर पानी पी लेने से अटैक के खतरे को 40 प्रतिशत तक कम कर अस्पताल पहुंचने का समय मिल सकता है। शुरुआती चार घण्टे निर्णायक होते हैं। डिस्प्रिन टेबलेट में पाए जाने वाले रसायन तुरंत ही शरीर में प्रवेश कर जम रहे खून के धक्कों को पतला करते हैं। जिससे रोगी को काफी हद तक फायदा मिलता है।

दिल का दौरा पड़ने पर इसकी पहचान या शुरुआती लक्षण- जैसे सीने में असहनीय दर्द, बाएं हाथ या जबड़े में दर्द, किसी भी मौसम में अचानक पसीना आना और सांस लेने में परेशानी यानी यह गोल्डन ऑवर की ही शुरुआत होती है। इसी स्थिति के दौरान रोगी को तुरंत ही दो टेबलेट डिस्प्रिन की अच्छे से चबाकर खानी चाहिए। चबाकर लेने पर यह जल्दी खून में घुल जाती है और थक्के बनने की प्रक्रिया को धीमा कर देती है, जिससे मरीज को अस्पताल पहुंचने के लिए जरूरी समय मिल जाता है।

आगे उन्होंने यह भी कहा कि डिस्प्रिन टेबलेट किसी तरह का कोई इलाज नहीं बल्कि एक तरह की आपातकालीन स्थिति में एक प्रकार की मदद है। जिसके जरिए रोगी को अस्पताल पहुंचाने का समय मिल जाता है।

अमित शाह, नितिन गडकरी,पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि

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नई दिल्ली, 11 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय गृह एवं सहकारितामंत्री अमित शाह और केंद्रीय सड़क एवं परिवहनमंत्री नितिन गडकरी सहित अनेक मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने आज पूर्व प्रधानमंत्री एवं ‘भारत रत्न’ लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की।पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। रविवार को ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए शास्त्री जी के योगदान को याद किया।

शाह ने एक्स पर कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री एवं ‘भारत रत्न’ लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। संकट के समय ‘जय जवान, जय किसान’ का उद्घोष कर शास्त्री जी ने देश के स्वावलंबन व सुरक्षा का सुंदर समन्वय बनाया। उनका सादगीपूर्ण जीवन हर एक समाजसेवी के लिए प्रेरणा है।”

गडकरी ने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री ‘जय जवान जय किसान’ के प्रणेता भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र अभिवादन।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याणमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राष्ट्र की सेवा और समाज के कमजोर वर्ग के उत्थान के लिए समर्पित आपका ध्येयनिष्ठ जीवन सभी लिए प्रेरणा का महान स्रोत है।

केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री नैतिकता, सादगी और राष्ट्रनिष्ठा की जीवंत मिसाल थे। सीमित साधनों में भी देश को आत्मविश्वास और संकल्प की शक्ति देने वाले शास्त्री का जीवन हर भारतवासी के लिए प्रेरणास्रोत है।

केंद्रीय आवासीय एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि शास्त्री की कर्तव्यनिष्ठा और जीवन मूल्य आज भी करोड़ों देशवासियों को कर्तव्यपथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा देते हैं।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि शास्त्री का सादगीपूर्ण जीवन, अडिग संकल्प और ‘जय जवान, जय किसान’ का कालजयी मंत्र देश को आत्मबल से भरते हुए सेवा और कर्तव्य के पथ पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि उनका जीवन राष्ट्रसेवा, सादगी और ईमानदारी का प्रतीक रहा। “जय जवान, जय किसान” का उनका संदेश आज भी प्रत्येक भारतीय को कर्तव्य और समर्पण के मार्ग पर अग्रसर करता है।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि शुचिता, सादगी व कर्तव्यनिष्ठा के आदर्श प्रतिमान एवं ‘जय जवान-जय किसान’ के उद्घोषक, पूर्व प्रधानमंत्री, ‘भारत रत्न’ लाल बहादुर शास्त्री का त्यागमय जीवन हम सभी के लिए एक पाथेय है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि‘राजनीतिक और सामाजिक जीवन में शुचिता, सादगी की प्रतिमूर्ति, “जय जवान, जय किसान” का नारा देने वाले पूर्व प्रधानमंत्री “भारत रत्न” लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन।लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर ममता बनर्जी ने दी श्रद्धांजलि

कोलकाता, 11 जनवरी (हि.स.)। देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। रविवार को ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए शास्त्री जी के योगदान को याद किया। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में लिखा, “भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को उनकी पुण्यतिथि पर मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि।”

उल्लेखनीय है कि लाल बहादुर शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे और उन्हें देश को “जय जवान, जय किसान” का नारा देने के लिए जाना जाता है। उनकी सादगी, ईमानदारी और राष्ट्रभक्ति आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने की श्री सोमनाथ ट्रस्ट की बैठक की अध्यक्षता

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नई दिल्ली, 11 जनवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार रात को श्री सोमनाथ ट्रस्ट के सदस्यों के साथ बैठक की। इस बैठक में उन्होंने सोमनाथ की तीर्थयात्रा को और अधिक स्मरणीय बनाने के तरीकों पर चर्चा की।

बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि सोमनाथ में होना अपने आप में सौभाग्य की अनुभूति है—यह हमारी सभ्यतागत वीरता का गौरवपूर्ण प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि यह यात्रा सोमनाथ स्वाभिमानपर्व के दौरान हो रही है, जब पूरा देश 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हज़ार वर्ष पूरे होने का स्मरण कर रहा है। उन्होंने लोगों का स्नेहिल स्वागत के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दूसरे ट्वीट में कहा कि आज शाम सोमनाथ में श्री सोमनाथ ट्रस्ट की बैठक की अध्यक्षता की। मंदिर परिसर में बुनियादी ढांचे के उन्नयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की और सोमनाथ की तीर्थयात्रा को और अधिक स्मरणीय बनाने के तरीकों पर चर्चा की।

अरब सागर के आसमान पर सोमनाथ मंदिर के हजार साल की अद्भुत गाथा, प्रधानमंत्री मोदी हुए मंत्रमुग्ध

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सोमनाथ (गुजरात), 11 जनवरी (हि.स.)। सदियों से बार-बार हुए हमलों के बावजूद सोमनाथ मंदिर भारत की अटूट भावना के प्रतीक के रूप में आज भी शान से खड़ा है। इसी भावना का अद्भुत प्रकाश शनिवार देरशाम अरब सागर के ऊपर नभ पर देखने को मिला। करीब तीन हजार से भी अधिक ड्रोन के अनूठे संयोजन से सोमनाथ मंदिर के हजार साल की यात्रा को रोचक तरीके से प्रस्तुत किया गया। ड्रोन शो देखकर रोमांचित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी मंत्रमुग्ध हो गए। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से इस रोचक शो को कई तस्वीरें साझा की।

ड्रोन शो के जरिए अरब सागर के ऊपर आकाश में प्रकाश के अनूठे संयोजन के माध्यम से विभिन्न बिंदु चित्र- रंगीन आकृतियां सृजित की गईं। आकाश में उभरते प्रकाशमय दृश्य लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बन गए। ड्रोन के जरिए आकाश में बनी सोमनाथ मंदिर, त्रिशूल, ओम, वीर हमीरजी, अहिल्याबाई होल्कर, सरदार वल्लभभाई पटेल और नरेन्द्र मोदी की आकृतियां दिखाई गईं। हर बदलती हुई आकृति पर लोगों की तालियों की गड़गड़ाहट और हर-हर महादेव के उद्घोष से मंदिर परिसर गुंजायमान रहा। उसके बाद रंग-बिरंगी आतिशबाजी ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अनोखे आयोजन से पवित्र सोमनाथ धाम में उत्सवमय और हर्षोल्लास का माहौल बन गया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और राज्य के कई मंत्री उपस्थिति रहे।

उल्लेखनीय है कि सोमनाथ की गाथा केवल एक मंदिर की नहीं, बल्कि भारत माता के उन अनगिनत सपूतों के अदम्य साहस की कहानी है, जिन्होंने देश की संस्कृति और सभ्यता की रक्षा की। भारत के पश्चिमी समुद्र तट पर गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में भगवान सोमनाथ प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं। यह पावन भूमि, जिसे प्रभास क्षेत्र के नाम से जाना जाता है, केवल एक तीर्थस्थल नहीं बल्कि देश की अटूट श्रद्धा, संघर्ष और पुनरुत्थान का जीवंत प्रतीक है।

मध्यकाल में इस मंदिर ने कई आक्रमण झेले। ग्यारहवीं शताब्दी में महमूद गजनी से लेकर अलाउद्दीन खिलजी और औरंगजेब तक कई आक्रांताओं ने इसे लूटा और नष्ट किया। लेकिन हर बार राजा भीमदेव, सिद्धराज जयसिंह और कुमारपाल जैसे नायकों ने इसका पुनर्निर्माण कराया। अपनी आस्था की रक्षा के लिए हमीर जी गोहिल और वेगड़ा भील जैसे वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी। 15 अगस्त 1947 को देश स्वतंत्र हुआ। जूनागढ़ की आजादी के बाद लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के दृढ़ संकल्प से आधुनिक सोमनाथ मंदिर का स्वप्न साकार हुआ। 11 मई 1951 को देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की। आधुनिक मंदिर की वास्तुकला (कैलाश महामेरू प्रसाद) वर्तमान सोमनाथ मंदिर नागर शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे प्रसिद्ध वास्तुकार प्रभा शंकर सोमपुरा ने डिजाइन किया है।

मणिपुर में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई,हथियार बरामद, दो उग्रवादी गिरफ्तार

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इंफाल, 11 जनवरी (हि.स.)। मणिपुर के विभिन्न जिलों में बीते 24 घंटे में चलाए गए समन्वित अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया है तथा दो उग्रवादी कैडरों को गिरफ्तार किया है।

अधिकारियों के अनुसार, कांगपोकपी जिले के कांगचुप थाना क्षेत्र अंतर्गत अवलमुन गांव के आसपास तलाशी अभियान के दौरान एक एके-47 राइफल, कई सिंगल और डबल बैरल राइफल, बोल्ट एक्शन हथियार, इम्प्रोवाइज्ड मोर्टार, हैंड ग्रेनेड, विभिन्न प्रकार के जीवित कारतूस, संचार उपकरण और युद्धक परिधान बरामद किए गए।

इसी दिन एक अन्य अभियान में चुराचांदपुर जिले के चुराचांदपुर थाना क्षेत्र के साइडन और चांगपिकोट गांवों के आसपास से एक सिंगल बैरल राइफल बरामद की गई।

इस बीच, थौबल थाना क्षेत्र के अथोकपाम खुन्नौ इलाके से केवाईकेएल (सोरेपा) के कैडर एलांगबाम प्रेमचंद सिंह, निवासी हियांगलाम वाराखोंग, काकचिंग जिला, को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से एक होंडा एक्टिवा स्कूटर और सिम कार्ड सहित मोबाइल फोन जब्त किया गया।

एक अन्य कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने इम्फाल पश्चिम जिले के सिंगजामेई थाना क्षेत्र अंतर्गत सिंगजामेई मायेंगबाम लेईकाई से प्रेपाक के सक्रिय कैडर मयेंगबाम रोशन मैतेई उर्फ पंगनबा (28) को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया। मामले की आगे जांच जारी है।

पुरुलिया से लौटते शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर पथराव,इलाके में तनाव

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पश्चिम मेदिनीपुर, 11 जनवरी (हि. स.)। जिले के चंद्रकोणा रोड इलाके में शनिवार देर रात उस समय राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया, जब राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस समर्थकों द्वारा हमला किए जाने का आरोप लगा। घटना के विरोध में शुभेंदु अधिकारी ने चंद्रकोणा रोड पुलिस चौकी के भीतर करीब पांच घंटे तक धरना प्रदर्शन किया और देर रात मशाल जुलूस निकालकर विरोध जताया।इस घटना के विरोध में नेता प्रतिपक्ष चंद्रकोणा रोड पुलिस फांड़ी पहुंचे और धरना दिया। उन्होंने कहा कि जब तक दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होती और उनकी गिरफ्तारी नहीं की जाती तब तक वह थाने से बाहर नहीं जाएंगे। अधिकारी ने कहा कि वे केवल औपचारिक शिकायत नहीं, बल्कि एफआईआर नंबर और लगाई गई धाराओं की पूरी जानकारी मिलने के बाद ही दस्तखत करेंगे।

जानकारी के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी पुरुलिया में एक कार्यक्रम समाप्त कर लौट रहे थे। चंद्रकोणा रोड से गुजरते समय भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक उनका स्वागत करने के लिए सड़क किनारे जमा हुए थे। आरोप है कि इसी दौरान सामने की ओर मौजूद तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भाजपा समर्थकों को घेर लिया और उन पर हमला कर दिया। इस दौरान शुभेंदु अधिकारी के काफिले की करीब दो गाड़ियों में तोड़फोड़ किए जाने का भी दावा किया गया है।

घटना की खबर मिलते ही चंद्रकोणा रोड चौकी सहित आसपास के थानों से भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रण में लाने का प्रयास किया। हालांकि, शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोपितों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। इसके बाद वह अपने सहयोगी कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस चौकी के प्रभारी (आईसी) के कक्ष के सामने जमीन पर बैठकर धरने पर बैठ गए।

मीडिया से बातचीत में शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि उनके काफिले पर सुनियोजित और जानलेवा हमला किया गया। उन्होंने कहा कि हम पर जानलेवा हमला हुआ है। लाठी, बांस के साथ-साथ केरोसिन तक लाया गया था। यह सब सबके सामने हुआ है। बंगाल में ‘जंगलराज’ चल रहा है। एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि का काफिला भी सुरक्षित नहीं है। ऐसे में इस मामले में गैर-जमानती धाराएं लगनी चाहिए, नहीं तो मैं अदालत का दरवाजा खटखटाऊंगा।

बताया गया है कि देर रात तक शुभेंदु अधिकारी अपने समर्थकों के साथ चौकी में ही धरने पर डटे रहे। लगातार विरोध और दबाव के बाद पुलिस ने देर रात करीब एक बजे आरोपितों के खिलाफ डायरी (एफआईआर) दर्ज की। इसके बाद रात करीब डेढ़ बजे शुभेंदु अधिकारी चौकी से बाहर निकले और मशाल जुलूस के माध्यम से घटना के खिलाफ प्रदर्शन किया। मशाल जुलूस समाप्त होने के बाद उन्होंने घोषणा की कि इस हमले के विरोध में आगामी 13 जनवरी को चंद्रकोणा रोड में एक विशाल रैली निकाली जाएगी।

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। मेदिनीपुर संगठनात्मक जिला तृणमूल के अध्यक्ष सुजय हाजरा ने कहा कि शुभेंदु अधिकारी मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। यह पूरा मामला भाजपा का आंतरिक है। आगामी 15 जनवरी को नंदीग्राम में सेवा-शिविर का आयोजन किया जा रहा है, वहां आने पर उनके इलाज की व्यवस्था भी की जाएगी।

इससे पहले मेदिनीपुर संगठनात्मक जिला तृणमूल के उपाध्यक्ष निर्मल घोष ने भी आरोपों को नकारते हुए कहा था कि यह भाजपा के गुटीय संघर्ष का परिणाम है और तृणमूल का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

फिलहाल, इलाके में तनाव की स्थिति को देखते हुए चंद्रकोणा रोड और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। प्रशासन हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए है।

पश्चिम बंगाल के चंद्रकोणा में शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर हमला, थाने में धरने पर बैठे नेता प्रतिपक्ष

कोलकाता, 11 जनवरी (हि.स.)। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और नंदीग्राम विधायक शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर शनिवार रात हुए हमले पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। भाजपा ने हमले के लिए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाया है। नेता प्रतिपक्ष के काफिले को पश्चिम मिदनापुर जिले के चंद्रकोणा रोड पर निशाना बनाया गया।

अधिकारी शनिवार शाम पुरुलिया में पूर्व निर्धारित जनसभा को संबोधित कर लौट रहे थे। रात करीब 8:20 बजे उनका काफिला चंद्रकोणा रोड बाजार क्षेत्र के चौराहे के पास पहुंचा। कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस समर्थकों के एक समूह ने काफिले का रास्ता रोक लिया। शुभेंदु अधिकारी का एक वीडियो सामने आया है। उन्होंने इसमें दावा किया है की एक समुदाय के हमलावरों ने लाठी, डंडो और लोहे की छड़ों से काफिले की गाड़ियों पर हमला किया। उन्होंने कहा इस दौरान पुलिस मूकदर्शक बनी रही।केंद्रीय सुरक्षा बलों ने समय पर हस्तक्षेप नहीं किया होता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

इस घटना के विरोध में नेता प्रतिपक्ष चंद्रकोणा रोड पुलिस फांड़ी पहुंचे और धरना दिया। उन्होंने कहा कि जब तक दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होती और उनकी गिरफ्तारी नहीं की जाती तब तक वह थाने से बाहर नहीं जाएंगे। अधिकारी ने कहा कि वे केवल औपचारिक शिकायत नहीं, बल्कि एफआईआर नंबर और लगाई गई धाराओं की पूरी जानकारी मिलने के बाद ही दस्तखत करेंगे।

केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री और पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष डॉ. सुकांत मजूमदार ने एक्स पोस्ट में आरोप लगाया कि यह हमला पूर्व नियोजित और राज्य प्रायोजित था। यह पुलिस निष्क्रियता का खुला उदाहरण है। डॉ. मजूमदार ने कहा कि राज्य में नेता प्रतिपक्ष और निर्वाचित जनप्रतिनिधि सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य पुलिस पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने का आरोप लगाया।

तृणमूल कांग्रेस ने आरोपों को खारिज किया है। पार्टी ने कहा कि यह हमला लोगों की नाराजगी का परिणाम है। इस घटना पर पुलिस का कहना है कि जांच की जा रही है। उपलब्ध साक्ष्यों के अनुरूप आगामी कार्रवाई की जाएगी।