पत्नी की ज्यादा योग्यता गुजारा भत्ता में रुकावट नहीं : हाईकोर्ट

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–हाईकोर्ट ने कहा, सालों घरेलू काम के बाद नौकरी पर लौटना मुश्किल

प्रयागराज, 11 जनवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने एक आदेश में कहा कि किसी पत्नी को सिर्फ़ इसलिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत गुज़ारा भत्ता देने से मना नहीं किया जा सकता, क्योंकि वह बहुत ज़्यादा पढ़ी-लिखी है या उसके पास वोकेशनल स्किल्स हैं। क्योंकि इससे यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि याचिकाकर्ता पत्नी पैसे कमाने के लिए काम कर रही है।

जस्टिस गरिमा प्रसाद की की कोर्ट ने यह भी कहा कि पति का अपनी पत्नी का कानूनी तौर पर भरण-पोषण करने की ज़िम्मेदारी से बचने के लिए सिर्फ़ उसकी योग्यता (क्वालिफिकेशन) पर निर्भर रहना गलत है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी की सिर्फ़ कमाने की क्षमता असल में नौकरी करके पैसे कमाने से अलग है।

कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह कई महिलाओं की सच्चाई है, जो अपनी पढ़ाई-लिखाई के बावजूद, सालों तक घरेलू काम और बच्चों की देखभाल की ज़िम्मेदारियों के बाद नौकरी पर लौटने में मुश्किल महसूस करती हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए बेंच ने बुलंदशहर के एडिशनल प्रिंसिपल जज, फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें पति से गुज़ारा भत्ता मांगने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत पत्नी की अर्जी खारिज कर दी गई थी।

बुलंदशहर फैमिली कोर्ट ने पत्नी सुमन वर्मा के गुज़ारा भत्ता की अर्जी इस आधार पर खारिज कर दी थी कि उसने कोर्ट से अपनी प्रोफेशनल पढ़ाई-लिखाई छिपाई और वह साफ मन से कोर्ट नहीं आई। फैमिली कोर्ट का यह भी मानना था कि पत्नी बिना किसी सही वजह के अलग रह रही है और उसने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 (वैवाहिक अधिकारों की बहाली) के तहत कार्यवाही के बावजूद वैवाहिक घर लौटने से मना कर दिया था। हालांकि, फैमिली कोर्ट ने निर्देश दिया कि नाबालिग बेटे को याचिका दायर करने की तारीख से हर महीने 3,000 रुपये दिए जाएं।

हाईकोर्ट में पत्नी के वकील ने दलील दी कि उसके पास आय का कोई जरिया नहीं है और प्रतिवादी पति यह साबित करने का कोई सबूत पेश नहीं कर पाया कि उसकी पत्नी काम कर रही थी और पैसे कमा रही थी। दूसरी ओर, पति ने दलील दी कि उसकी पत्नी बहुत ज़्यादा पढ़ी-लिखी है, फिलहाल प्राइवेट टीचर के तौर पर काम कर रही है, उसके पास टेलरिंग में आइटीआई डिप्लोमा है और वह बच्चों को ट्यूशन देकर भी पैसे कमाती है।

जस्टिस प्रसाद ने फैमिली कोर्ट के तर्क को सिरे से खारिज कर दिया, क्योंकि उन्होंने कहा कि पति द्वारा वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए सिर्फ़ याचिका दायर करना अपने आप में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125(4) के तहत अयोग्यता को लागू करने के लिए काफ़ी नहीं होगा। बेंच ने कहा कि पत्नी बुरे बर्ताव के कारण ससुराल छोड़ सकती है और पत्नी के लाभकारी रोज़गार के सबूत के बारे में भी कोई खास नतीजा नहीं निकला था। बेंच ने आगे कहा कि पति से मेंटेनेंस पाने का पत्नी का कानूनी अधिकार इस आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता कि वह कमाने की क्षमता रखती है।

हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी में सिलाई से कमाने की क्षमता हो सकती है, जो उसकी रोज़ी-रोटी चलाने के लिए काफ़ी नहीं हो सकती है। उसे उसी तरह का जीवन स्तर बनाए रखने में मदद नहीं कर सकती है, जो उसे तब मिलता जब वह पति के साथ रह रही होती। इस तरह याचिकाकर्ता पत्नी पति से मेंटेनेंस पाने की हकदार है, भले ही याचिकाकर्ता में काम करने की क्षमता हो।

महिलाओं को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, उनके बारे में एक टिप्पणी में कोर्ट ने आगे कहाः “यह एक सामाजिक सच्चाई है कि महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों में खुद को लगा देती हैं और बच्चों की देखभाल करती हैं। इसलिए वे नौकरी नहीं कर पातीं। इसलिए पति का अपनी पत्नी की योग्यता पर पूरी तरह निर्भर रहना और उसे भरण-पोषण देने की अपनी कानूनी जिम्मेदारी से बचना गलत है।”

कोर्ट ने यह भी माना कि एक बेरोजगार पत्नी की स्थिति, जिसे अकेले अपने छोटे बच्चे की देखभाल करनी पड़ती है, वह “कई महिलाओं की सच्चाई को दिखाती है, जो अपनी पढ़ाई-लिखाई के बावजूद, सालों तक घरेलू काम करने के बाद नौकरी करना मुश्किल पाती हैं। इसके अलावा, हाईकोर्ट ने किशोर बेटे को दिए गए 3,000 रुपये को ’बहुत कम’ रकम बताया और कहा कि लड़के को पढ़ाई करने और स्वस्थ माहौल में बड़ा होने के लिए सहारे की जरूरत है। हाईकोर्ट ने फेमिली कोर्ट के विवादित आदेश को रद्द कर दिया और मामला बुलंदशहर की फैमिली कोर्ट को वापस भेज दिया ताकि एक महीने के अंदर एक नया, तर्कसंगत आदेश पारित किया जा सके।

साथ ही फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया गया कि वह पति की कुल आय और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 में शामिल सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के आधार पर पत्नी और बेटे दोनों के लिए भरण-पोषण तय करे।

फिल्म ‘शतक’ से दो गीतों का भागवत ने किया लोकार्पण

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नई दिल्ली, 11 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने कहा है कि संघ और डॉक्टर साहब (हेडगेवार) समानार्थक शब्द हैं। जैसे-जैसे संघ नए-नए रूपों में सामने आता है, लोगों को लगता है कि संघ बदल रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि संघ बदल नहीं रहा, बल्कि क्रमशः प्रगट हो रहा है। यह प्रक्रिया बीज से पेड़ बनने जैसी है।

डॉ भागवत रविवार को दिल्ली के केशव कुंज, झंडेवालान में आयोजित कार्यक्रम में ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष -शतक’ विषय पर आधारित फिल्म के दो गीतों ‘भारत मां के बच्चे’ और ‘भगवा है मेरी पहचान’ के लोकार्पण अवसर पर संबोधित कर रहे थे। इन गीतों को प्रसिद्ध गायक सुखविंदर सिंह ने अपनी आवाज दी है।

सरसंघचालक ने कहा कि डॉक्टर साहब का जीवन ही संघ का विचार, संघ की भावना और संघ का संपूर्ण दर्शन है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व मनोवैज्ञानिक अध्ययन का विषय है। भागवत ने कहा कि जब डॉ हेडगेवार के माता-पिता एक ही दिन, मात्र एक घंटे के अंतराल में दुनिया से चल बसे, उस समय उनकी उम्र केवल 11 वर्ष थी। इतनी कम आयु में इतना बड़ा आघात किसी भी व्यक्ति को तोड़ सकता है, लेकिन इसका उनके व्यक्तित्व पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़ा।

उन्होंने कहा कि डॉ हेडगेवार जन्मजात देशभक्त थे और बड़े से बड़े आघात को आत्मसात कर अपने मन को विचलित न होने देना उनके मजबूत और स्वस्थ मन का प्रमाण है। यही मानसिक दृढ़ता आगे चलकर संघ विचार की नींव बनी।

कार्यक्रम में फिल्म के निर्माता वीर कपूर, निर्देशक आशीष मल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश (भय्याजी) जोशी तथा गायक सुखविंदर सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे

केन्द्र से टकराने की सतही राजनीति

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-हृदयनारायण दीक्षित

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संवैधानिक संकट पैदा कर दिया है। वे केन्द्रीय जांच एजेंसियों से भिड़ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने यहां तृणमूल कांग्रेस के रणनीतिकार के आवास व कार्यालय पर छापा मारा। बताया गया कि एक घोटाले की जांच के लिए यह कार्यवाही की गई है, लेकिन जांच व कार्यवाही के समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंच गईं। वे अपने साथ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी ले गईं। दोनों पक्षों के बीच तीखी बातचीत हुई। आरोप-प्रत्यारोप लगे। प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि यह छापा कोयला तस्करी से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े हुए हैं। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने छापे मारने की आड़ में उनके चुनावी रणनीति सम्बन्धी रिकार्ड को जब्त किया। प्रत्याशियों की सूची भी छीन ली गई है। इस आलेख के लिखे जाने तक तृणमूल कांग्रेस के लगभग दो दर्जन सांसद राजधानी दिल्ली में गृह मंत्रालय के बाहर धरना दे रहे हैं।

केन्द्रीय जांच एजेंसी के सामने राज्य पुलिस को खड़ा कर देना गंभीर संवैधानिक संकट पैदा कर सकता है।

सबसे खास बात है कि मुख्यमंत्री होने के बावजूद ममता ने घोषणा की कि प्रवर्तन निदेशालय के छापे के जवाब में पश्चिम बंगाल में भाजपा के कार्यालयों पर छापेमारी की जाए तो क्या होगा। वे संविधान की परवाह नहीं करतीं। केन्द्र से टकराव लेना और स्वयं को केन्द्र द्वारा पीड़ित बताना ममता की राजनीति का हिस्सा है। पश्चिम बंगाल में जब तब केन्द्र और राज्य के बीच टकराव की घटनाएं होती ही रहती हैं। जनता ऐसी घटनाओं व ममता से ऊब गई है।

तृणमूल कांग्रेस की स्थिति कमजोर हो रही है। उम्र और परिस्थितियां ममता बनर्जी की सरकार बनाने में सक्षम नहीं हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बहुत पहले ही बंगाल विधानसभा चुनाव को जीतने की महत्वाकांक्षा प्रकट कर दी थी। इसी क्रम में गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल का तीन दिवसीय दौरा किया था। उन्होंने तृणमूल के कुशासन की ओर जनता का ध्यान खींचा और राजग की शक्ति का गुरु मंत्र भाजपा के नेताओं को दिया। शाह ने कहा कि भय, भ्रष्टाचार, कुशासन और विदेशी घुसपैठ की राजनीति के स्थान पर विकास, विरासत और गरीब कल्याण की मजबूत सरकार बनाने का संकल्प बंगाल की जनता में दिखाई पड़ रहा है। ममता बनर्जी साल 2021 का विधानसभा चुनाव जीती भी थीं। भाजपा भी पूरे आत्मविश्वास के साथ चुनाव लड़ी और नेता विरोधी दल का पद हथियाने में सफल रही। साल 2021 की तुलना में राजनीतिक माहौल बदल चुका है। राजग का विस्तार हो रहा है। विदेशी घुसपैठ को लेकर ममता विपक्ष के आरोपों के घेरे में हैं। पड़ोसी बांग्लादेश में हिन्दुओं के विरुद्ध हुई हिंसा से विश्व आहत है। पश्चिम बंगाल के हिन्दू मतदाता भी बांग्लादेश की घटनाओं से आक्रोश में हैं।

पिछले विधानसभा के चुनाव में ममता पर अल्पसंख्यकवादी होने के आरोप लगे थे। अब वे स्वयं को हिन्दू सिद्ध करने के लिए प्रयासरत हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने मंच से ही चंडी पाठ किया था। इस बार की चुनौती बड़ी है। 2021 की तुलना में राष्ट्रवाद का विचार काफी सशक्त हो गया है। ममता द्वारा चुनाव के पहले दुर्गा आंगन और सिलीगुड़ी में महाकाल मंदिर निर्माण की घोषणा के संकेत भी दिए गए हैं। तृणमूल कांग्रेस के नेता और विधायक हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद की नींव रखी। यहां प्रत्येक शुक्रवार को भारी संख्या में लोग आते हैं। एकत्रीकरण बढ़ता जा रहा है। यद्यपि ममता बनर्जी के विधायक हुमायूं कबीर को पार्टी से निलंबित कर दिया गया है, तो भी स्थानीय नागरिक काफी डरे सहमे हुए हैं।

बाबर भारतीय मुसलमान नहीं था। वह विदेशी हमलावर था। उसी की सहायता और मार्गदर्शन में बाबर के सिपहसालार सैयद मीर बाकी ने 1528 में अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ध्वस्त कर दिया था। दीर्घकाल तक चले आंदोलन से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण हुआ। दिव्य और भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर बन चुका है। लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। अयोध्या में की गई खुदाई की पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट में 3500 साल ईसापूर्व का वर्णन है। रिपोर्ट के अनुसार ईसापूर्व 3500 वर्ष से 1000 ईसापूर्व तक अयोध्या एक बस्ती है। एएसआई के अनुसार यहां एक दिव्य और भव्य मंदिर पहले से था। रिपोर्ट में 500 ईस्वी तक मंदिर के अस्तित्व के साक्ष्य हैं। मंदिर गिराकर मस्जिद बनाने के पाप को सुधारा जा चुका है। क्या देश बाबर को भूल सकता है? श्रीराम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन और इसी विचार परिवार के अन्य संगठन भारतीय जनमानस का दिल जीतने में कामयाब हुए हैं। अब स्वयं को हिन्दू बताना लज्जा का विषय नहीं है।

ममता बनर्जी बहुत पहले से अल्पसंख्यकवादी हैं। वे और इंडी गठबंधन के अधिकांश नेता स्वयं को हिन्दू सिद्ध करने में जुटे हुए हैं। पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति के संकेत सुस्पष्ट हैं। ममता पश्चिम बंगाल में बहुत कमजोर स्थिति में हैं। अभी चुनाव के लिए कुछ महीने बचे हैं। पश्चिम बंगाल की उथल-पुथल को देश देख रहा है।

दरअसल, ममता बनर्जी को जनता के बीच तृणमूल कांग्रेस विरोधी भावनाएं सुस्पष्ट दिखाई दे रही हैं। ममता के मन में विधानसभा चुनाव को लेकर उत्साह है। वे हिन्दू ध्रुवीकरण की रणनीति पर अग्रसर हैं, लेकिन चुनाव में ध्रुवीकरण का लाभ उनको नहीं मिलेगा। ममता बनर्जी की राज्य सरकार के कार्यकाल में सत्ता संरक्षित लूट के मामले लगातार बढ़े हैं। आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज व संदेशखाली के महिला उत्पीड़न के मामले सर्वविदित हैं। ममता के राज्य में अल्पसंख्यक तुष्टीकरण नया नहीं है। बेरोजगारी बढ़ी है। लोग गांव छोडकर पलायन कर रहे हैं और विकास का कहीं कोई नाम नहीं है। विपक्षी भाजपा कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न जारी है।

भारतीय संविधान में केन्द्र व राज्यों के बीच विषयों की एक सूची है। इस सूची के अनुसार पुलिस राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आती है और सीबीआई ईडी केन्द्रीय प्राधिकार में होते हैं। दोनों को आमने-सामने खड़ा कर देना संविधान का उल्लंघन है। दोनों परस्पर पूरक हैं लेकिन ममता बनर्जी ने देश के संघीय ढांचे का ध्यान नहीं रखा। ऐसा कई बार हुआ है। वे विकल्प नहीं छोड़तीं और केन्द्रीय सत्ता को दोष दिया करती हैं। संविधान के अनुच्छेद 355 में वाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से राज्य की संरक्षा करने का संघ का कर्तव्य है। ये भी है कि वाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति की सुरक्षा के साथ प्रत्येक राज्य की सरकार का इस संविधान के अपबंधों के अनुसार चलाया जाना सुनिश्चित करें। लेकिन ममता बनर्जी संविधान की मूल भावना का उल्लंघन कर रही हैं। उन्हें याद कराना पड़ेगा कि मुख्यमंत्री के सम्माननीय पद पर बैठने के समय संविधान पालन की शपथ ली जाती है। वे सम्माननीय मुख्यमंत्री हैं। उन्हें संविधान विरोधी कार्य नहीं करना चाहिए लेकिन उनका एक स्वभाव है। वे बहुधा गुस्से में आ जाती हैं। उन्होंने भाजपा को चुनौती दी है कि वह तृणमूल कांग्रेस को लोकतांत्रिक तरीके से हराकर दिखाएं। वे चुनौती की भाषा बोलती हैं। लेकिन असल चुनौती आगामी विधानसभा चुनाव हैं। इसमें भाजपा की जीत पक्की है।

(लेखक, उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष हैं।)

खेल हमारे जीवन में करते हैं आनंद −उत्साह का संचारःशिवराज सिंह

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– केंद्रीय कृषि मंत्री सीहोर के इछावर में सांसद खेल महोत्सव के तहत आयोजित कार्यक्रम में हुए शामिल

सीहोर, 11 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खेल हमारे जीवन में आंनद और उत्साह का संचार करते हैं, शरीर को स्वस्थ बनाते हैं, मन को मजबूत करते हैं और आत्मा को प्रसन्नता से भर देते हैं। खेल गतिविधियों के इन लाभों को देखते हुए आगामी वर्ष से और अधिक व्यापक स्तर पर खेल गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा और गांव-गांव तक पहुंचकर प्रतिभावन खिलाड़ियों को अवसर प्रदान किए जाएंगे।

केंद्रीय कृषि मंत्री रविवार को मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के प्रवास के दौरान इछावर के गंजीबढ़ खेल मैदान में सांसद खेल महोत्सव के तहत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर खेल महोत्सव के तहत क्रिकेट, खो-खो, कबड्डी, रस्साकस्सी सहित अनेक खेल प्रतिनियोगिताएं आयोजित की गईं। इस दौरान केन्द्रीय मंत्री ने मैदान पर उतरकर क्रिकेट खेला और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। इसके साथ ही रस्साकसी जैसी खेल प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों के साथ महिलाओं ने भी उत्साह के साथ सहभागिता की।

शिवराज सिंह चौहान ने कार्यक्रम में खिलाड़ियों को देश की बेटी मेरिकॉम का उदाहरण देकर प्रोत्साहित करते हुए कहा कि बड़े से बड़े खिलाड़ी छोटे-छोटे गांवों से निकलते हैं, इसलिए निरंतर मेहनत करते रहें। इस निरंतर मेहनत के बल पर एक दिन आप भी उंचाइयों पर पहुंचेंगे और देश का नाम रोशन करेंगे। उन्होंने कहा कि खेल गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार भी निरंतर कार्य कर रही है।

कार्यक्रम में प्रदेश के राजस्व मंत्री करणसिंह वर्मा ने कहा कि सांसद खेल महोत्सव केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और खेल भावना को सही दिशा देने का एक बड़ा अभियान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में खेल को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को अवसर प्रदान करने के लिए यह महोत्सव एक महत्वपूर्ण मंच है। ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ी आज यहां अपनी क्षमता दिखा रहे हैं, यही खिलाड़ी आगे चलकर जिले, प्रदेश और देश को गौरवान्वित करेंगे। उन्होंने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि खेल हमें अनुशासन, एकजुटता, मेहनत और सकारात्मक सोच सिखाता है। जीत-हार खेल का हिस्सा हैं, लेकिन असली जीत उस भावना की होती है जिससे हम मैदान में उतरते हैं।

कार्यक्रम भाजपा जिला अध्यक्ष नरेश मेवाड़ा, सीहोर नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर, इछावर नगर नगर परिषद अध्यक्ष देवेंद्र वर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, लाड़ली बहनें एवं खिलाड़ी उपस्थित थे।

अमेरिका में विश्व हिन्दी दिवस एवं प्रवासी भारतीय दिवस आयोजित

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सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका), 11 जनवरी (हि.स.)। सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) के आईसीसी हॉल, मिलपिटस एरिया में, विश्व हिन्दी दिवस एवं प्रवासी भारतीय दिवस के अवसर पर शनिवार को एक भव्य सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।इस गरिमामय समारोह में प्रवासी भारतीय समुदाय के लगभग 16 संस्थाओं ने संयुक्त सहभागिता करते हुए हिन्दी भाषा, भारतीय संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित मनोहारी प्रस्तुतियां दीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत के महावाणिज्यदूत, सैन फ्रांसिस्को के डॉ. के. क्रिकर रेड्डी एवं उप-महावाणिज्यदूत राकेश अदलखा द्वारा यूपीएमए के अध्यक्ष रितेश टंडन के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत विभिन्न राज्यों तथा प्रवासी भारतीय संगठनों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभागार को भारतीय संस्कृति के गौरवपूर्ण रंगों से आलोकित कर दिया।

इस अवसर पर डॉ. के. क्रिकर रेड्डी ने शुद्ध हिन्दी में संबोधन करते हुए भारतीय वाणिज्यदूतावास द्वारा प्रवासी भारतीयों के लिए उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विश्व स्तर पर हिन्दी के प्रचार-प्रसार में निरंतर वृद्धि हो रही है, जो अत्यंत उत्साहजनक है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का शुभकामना संदेश पढ़कर सुनाया। तत्पश्चात उन्होंने मंच पर उपस्थित सभी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को औपचारिक भेंट एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर मिथिला सांस्कृतिक समन्वय समिति के मुख्य सलाहकार, बिहार फाउंडेशन गुवाहाटी चैप्टर के सचिव तथा रोटरी क्लब ऑफ गुवाहाटी वेस्ट के पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान में क्लब एम्बेसडर डॉ. प्रेम कांत चौधरी ने अतिथियों को मिथिला पेंटिंग युक्त दोपट्टा भेंट कर तथा बिहार फाउंडेशन एवं रोटरी क्लब की ओर से असमिया फूलम गामोछा से सम्मानित किया। उन्होंने असम और बिहार की सांस्कृतिक एकता को रेखांकित किया तथा विश्व हिन्दी दिवस और प्रवासी भारतीय दिवस के अवसर पर एक भावपूर्ण कविता का पाठ किया, जिसे श्रोताओं ने तालियों के साथ सराहा।

बिहार फाउंडेशन वेस्ट कोस्ट (कैलिफ़ोर्निया अमेरिका) के चेयरमैन आरके सिन्हा ने भी कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए हिन्दी को भारतीय पहचान और सांस्कृतिक एकता की सशक्त धूरी बताया। उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीयों ने विदेश में रहते हुए भी हिन्दी भाषा और भारतीय मूल्यों को जीवंत बनाए रखा है।

कार्यक्रम में प्रस्तुत कविताएं, गीत एवं नृत्य प्रस्तुतियां हिन्दी की सृजनात्मक शक्ति और भारतीय संस्कृति की विविधता का सजीव प्रमाण रहीं।

समारोह में अनेक साहित्यप्रेमी, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक आमंत्रित अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

वक्ताओं ने प्रवासी भारतीयों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि हिन्दी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भावनाओं, संस्कारों और सभ्यता की सशक्त वाहक है, जो विश्व पटल पर भारत की पहचान को और अधिक सुदृढ़ करती है।

कार्यक्रम का समापन हिन्दी के प्रचार-प्रसार तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने के सामूहिक संकल्प के साथ किया गया।

क्यूबा को तेल आपूर्ति पर ट्रंप की चेतावनी,अमेरिका से समझौते की सलाह

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वॉशिंगटन, 11 जनवरी (हि.स.)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अब उसे वेनेजुएला से न तो तेल मिलेगा और न ही आर्थिक सहायता। साथ ही उन्होंने क्यूबा को अमेरिका के साथ समझौता करने की भी सलाह दी है।

ट्रंप ने रविवार को अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि वेनेजुएला से वर्षों तक तेल और धन पर निर्भर रहने वाला क्यूबा अब उस समर्थन से वंचित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि क्यूबा के लिए बेहतर होगा कि वह “बहुत देर होने से पहले” अमेरिका से समझौता कर ले।

दरअसल, क्यूबा लंबे समय से वेनेजुएला से तेल आयात करता रहा है। हाल के घटनाक्रम में अमेरिकी कार्रवाई के बाद वेनेजुएला की अंतरिम सरकार ने अपना तेल अमेरिका को भेजना शुरू कर दिया है, जिससे क्यूबा की ऊर्जा आपूर्ति पर संकट गहराता दिख रहा है।

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन के अनुसार, क्यूबा की अर्थव्यवस्था पहले से ही बिजली कटौती, व्यापार प्रतिबंधों और संसाधनों की कमी से जूझ रही है। कृषि और पर्यटन जैसे प्रमुख क्षेत्र गंभीर दबाव में हैं। ऐसे में वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति रुकना क्यूबा की सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्ष के शुरुआती 11 महीनों में वेनेजुएला ने प्रतिदिन औसतन करीब 27 हजार बैरल तेल क्यूबा को भेजा था, जो उसकी कुल जरूरत का लगभग आधा था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आपूर्ति के बंद होने से क्यूबा की ऊर्जा और आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ सकता है।

टॉप 10 में शामिल देश की 7 कंपनियों के मार्केट कैप में 3.63 लाख करोड़ की गिरावट

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नई दिल्ली, 11 जनवरी (हि.स.)। घरेलू शेयर बाजार में पिछले कारोबारी सप्ताह के दौरान हुई खरीद-बिक्री के कारण बीएसई की टॉप 10 मोस्ट वैल्यूड कंपनियों में से 7 के मार्केट कैप में 3.63 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी हो गई। इनमें सबसे अधिक नुकसान रिलायंस इंडस्ट्रीज को हुआ। दूसरी ओर, टॉप 10 कंपनियों में से 3 कंपनियों के मार्केट कैप में 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हो गई।

पिछले सप्ताह के कारोबार के दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), भारती एयरटेल, इंफोसिस, बजाज फाइनेंस और लार्सन एंड टूब्रो के मार्केट कैप में 3,63,412.18 करोड़ रुपये की कमी हो गई। दूसरी ओर, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और हिंदुस्तान यूनिलीवर के मार्केट कैप में 41,598.99 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो गई।

5 से 9 जनवरी 2026 के बीच हुए कारोबार के दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप 1,58,532.91 करोड़ रुपये फिसल कर 19,96,445.69 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह एचडीएफसी बैंक का मार्केट कैप 96,153.61 करोड़ रुपये घट कर 14,44,150.26 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। इसके अलावा भारती एयरटेल का मार्केट कैप 45,274.72 करोड़ रुपये की गिरावट के साथ 11,55,987.81 करोड़ रुपये के स्तर पर, बजाज फाइनेंस का मार्केट कैप 18,729.68 करोड़ रुपये कम होकर 5,97,700.75 करोड़ रुपये के स्तर पर, लार्सन एंड टूब्रो का मार्केट कैप 18,728.53 करोड़ रुपये की कमजोरी के साथ 5,53,912.03 करोड़ रुपये के स्तर पर, टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का मार्केट कैप 15,232.14 करोड़ रुपये घट कर 11,60,682.48 करोड़ रुपये के स्तर पर और इंफोसिस का मार्केट कैप 10,760.59 करोड़ रुपये की गिरावट के साथ 6,70,875 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

दूसरी ओर, आईसीआईसीआई बैंक का मार्केट कैप 34,901.81करोड़ रुपये उछल कर 10,03,674.95 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह हिंदुस्तान यूनिलीवर का मार्केट कैप 6,097.19 करोड़ रुपये की तेजी के साथ 5,57,734.23 करोड़ रुपये के स्तर पर और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का मार्केट कैप 599.99 करोड़ रुपये बढ़ कर 9,23,061.76 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

मार्केट कैप के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज 19,96,445.69 करोड़ रुपये के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) के साथ देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रही। इसके बाद एचडीएफसी बैंक (कुल मार्केट कैप 14,44,150.26 करोड़ रुपये), टीसीएस (कुल मार्केट कैप 11,60,682.48 करोड़ रुपये), भारती एयरटेल (कुल मार्केट कैप 11,55,987.81 करोड़ रुपये), आईसीआईसीआई बैंक (कुल मार्केट कैप 10,03,674.95 करोड़ रुपये), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (कुल मार्केट कैप 9,23,061.76 करोड़ रुपये), इंफोसिस (कुल मार्केट कैप 6,70,875 करोड़ रुपये), बजाज फाइनेंस (कुल मार्केट कैप 5,97,700.75 करोड़ रुपये), हिंदुस्तान यूनिलीवर (कुल मार्केट कैप 5,57,734.23 करोड़ रुपये) और लार्सन एंड टूब्रो (कुल मार्केट कैप 5,53,912.03 करोड़ रुपये) के नाम सबसे मूल्यवान टॉप 10 कंपनियों के लिस्ट में दूसरे से दसवें स्थान पर बने रहे।

ओपनिंग के बाद फिसली ‘द राजा साब’,दूसरे दिन कमाई में भारी गिरावट

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साउथ सिनेमा के ‘डार्लिंग’ और ग्लोबल स्टार प्रभास की मच-अवेटेड फिल्म ‘द राजा साब’ ने रिलीज के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर जोरदार शुरुआत तो की, लेकिन दूसरे दिन के आंकड़ों ने सभी को चौंका दिया है। पहले दिन दुनियाभर में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की रिकॉर्ड ओपनिंग लेने वाली इस हॉरर-कॉमेडी से वीकेंड पर बड़ी छलांग की उम्मीद थी, मगर शनिवार को फिल्म की कमाई में भारी गिरावट दर्ज की गई।

दूसरे दिन कमजोर पड़ी रफ्तार

रिलीज के दिन प्रभास की स्टार पावर का असर साफ नजर आया। सिनेमाघरों के बाहर फैंस की भारी भीड़ उमड़ी और फिल्म ने भारत में करीब 53 करोड़ रुपये की दमदार ओपनिंग ली। हालांकि, सैकनिल्क की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को फिल्म की कमाई घटकर 27 करोड़ रुपये पर आ गई। इस तरह दो दिनों में भारत में ‘द राजा साब’ का कुल कलेक्शन 90.75 करोड़ रुपये हो गया है। दूसरे दिन करीब 48 प्रतिशत की गिरावट ने मेकर्स की चिंता जरूर बढ़ा दी है।

400 करोड़ के बजट पर टिकी निगाहें

करीब 400 करोड़ रुपये के भारी बजट में बनी इस फिल्म के लिए शुरुआती वीकेंड बेहद अहम माना जा रहा है। पहले दिन की शानदार शुरुआत के बाद दूसरे दिन की गिरावट से साफ है कि फिल्म को अब लंबी रेस खेलनी होगी। मारुति के निर्देशन में बनी ‘द राजा साब’ में प्रभास एक ऐसे किरदार में नजर आ रहे हैं, जिसे अपने पूर्वजों की एक रहस्यमयी हवेली विरासत में मिलती है। फिल्म में संजय दत्त विलेन की भूमिका में हैं, जबकि मालविका मोहनन और निधि अग्रवाल अहम किरदार निभा रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि निर्माताओं ने फिल्म के अंत में इसके सीक्वल ‘द राजा साब: सर्कस 1935’ का भी ऐलान कर दिया है।

उधर ‘धुरंधर’ का दबदबा कायम

वहीं, रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ बॉक्स ऑफिस पर अब भी मजबूती से टिकी हुई है। आदित्य धर के निर्देशन में बनी यह फिल्म रिलीज के 37वें दिन भी शानदार प्रदर्शन कर रही है। छठे शनिवार को फिल्म ने 5.75 करोड़ रुपये का कारोबार किया, जिसके साथ इसका कुल कलेक्शन 799.50 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अब ‘धुरंधर’ महज एक कदम दूर है 800 करोड़ क्लब में एंट्री लेने से और छठे रविवार को नया इतिहास रचने की पूरी तैयारी में है।

शादी के बंधन में बंधे नुपूर सेनन और स्टेबिन बेन

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बॉलीवुड और म्यूज़िक इंडस्ट्री से एक बेहद खास और खुशियों भरी खबर सामने आई है। अभिनेत्री कृति सैनन की छोटी बहन नुपुर सैनन और मशहूर सिंगर स्टेबिन बेन ने शादी के बंधन में बंधकर अपनी नई ज़िंदगी की शुरुआत कर ली है। लंबे समय तक अपने रिश्ते को निजी रखने के बाद इस कपल ने ईसाई रीति-रिवाजों के साथ विवाह किया, जिसकी पहली तस्वीरें सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। फैंस और सेलेब्स लगातार इस खूबसूरत जोड़ी को बधाइयां दे रहे हैं।

शादी के मौके पर नुपुर सैनन सफेद गाउन में परी जैसी नजर आईं, जबकि स्टेबिन बेन क्लासिक सूट में बेहद हैंडसम दिखे। यह विवाह समारोह बेहद निजी रखा गया, जिसमें केवल परिवार के सदस्य और करीबी दोस्त ही शामिल हुए। इस खास पल में दोनों ने एक-दूसरे के साथ जीवनभर साथ निभाने की कसमें खाईं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नुपुर और स्टेबिन की शादी दो अलग-अलग परंपराओं के अनुसार आयोजित की जा रही है। ईसाई रीति-रिवाजों से विवाह के बाद अब यह कपल 11 जनवरी को हिंदू रीति-रिवाजों से भी शादी करेगा। इससे दोनों परिवारों की सांस्कृतिक परंपराओं का खूबसूरत संगम देखने को मिलेगा।

शादी का जश्न राजस्थान के उदयपुर स्थित फेयरमोंट पैलेस में मनाया जा रहा है, जहां रॉयल अंदाज़ में विभिन्न फंक्शंस आयोजित किए गए हैं। इस मौके पर बड़ी बहन कृति सैनन भी खूब सुर्खियों में रहीं, जो हर फंक्शन में अपने बॉयफ्रेंड कबीर बहिया के साथ नजर आईं। शादी में मौनी रॉय और दिशा पाटनी ने अपने ग्लैमरस अंदाज़ से चार चांद लगा दिए। वहीं फिल्म इंडस्ट्री से निर्देशक अमर कौशिक, निर्माता दिनेश विजान समेत कई जाने-माने चेहरे इस जश्न में शामिल हुए।

बताया जा रहा है कि शादी के बाद नुपुर और स्टेबिन 13 जनवरी को मुंबई में एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन करेंगे, जिसमें बॉलीवुड और म्यूज़िक इंडस्ट्री के कई बड़े सितारे शामिल हो सकते हैं।

स्टेबिन बेन म्यूज़िक इंडस्ट्री का एक जाना-पहचाना नाम हैं। भोपाल में जन्मे स्टेबिन एक मलयाली क्रिश्चियन परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने बॉलीवुड की कई बड़ी फिल्मों में अपनी आवाज़ दी है। ‘रेस 3’, ‘जर्सी’, ‘सेल्फी’, ‘मिशन रानीगंज’, ‘फतेह’ और ‘मस्ती 4’ जैसे प्रोजेक्ट्स में उनके गाने दर्शकों के बीच खासे लोकप्रिय रहे हैं।

कुल मिलाकर, नुपुर सैनन और स्टेबिन बेन की यह शादी न सिर्फ उनके फैंस बल्कि पूरी फिल्म और म्यूज़िक इंडस्ट्री के लिए एक खास मौका बन गई है और अब यह विवाह बी-टाउन की सबसे चर्चित शादियों में शुमार हो चुका है।-

चिकित्सक का सम्मान भारत का सम्मान: आलोक कुमार

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देहरादून, 11 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सरकार्यवाह आलोक कुमार ने कहा कि चिकित्सा का सम्मान वास्तव में भारत का सम्मान है। भारतीय परंपरा में प्राचीनकाल में वैद्य कभी धन नहीं लेते थे, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां भिन्न हो गई हैं। आज स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर कार्य करने की अधिक आवश्यकता है।

सह सरकार्यवाह आलोक कुमार रविवार शाम को दून मेडिकल कालेज के प्रेक्षागृह में स्वामी विवेकानंद की 162वीं जयंती पर स्वामी विवेकानन्द हेल्थ मिशन सोसाइटी की ओर से आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले आलोक कुमार, स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज, अशोक कुमार विंदलस सहित अन्य अतिथियों ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर स्वामी विवेकानन्द के जीवन पर एक वृतचित्र प्रस्तुति के अलावा सोसाइटी की 13 वर्षों के यात्रा का भी प्रस्तुतीकरण किया गया। कार्यक्रम में सोसाइटी के सेवा यात्रा की कॉफ़ी टेबल बुक व वार्षिक कैलेण्डर का विमोचन भी किया गया।

आलोक कुमार ने सभी से चिकित्सा क्षेत्र में अहम योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में विवेकानंद मिशन उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि चिकित्सक ही स्वास्थ्य का आधार है और उनका सम्मान भारत का सम्मान है। आज स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि मानव जीवन में यदि करुणा और उदारता न हो, तो वह जीवन अधूरा है। उन्होंने कहा कि जीवन की पहली कामना जिजीविषा होती है, अर्थात संघर्ष के बीच भी अस्तित्व को बनाए रखना। गिरि महाराज ने कहा कि आज के समय में लोग वेलनेस और ब्यूटी पर तो खर्च कर रहे हैं, लेकिन करुणा और मानवीय मूल्यों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक शक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय दर्शन और परंपराओं का योगदान विश्वभर में फैला हुआ है। उन्होंने सऊदी अरब के एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भी भारतीय संस्कृति और ध्वनि विज्ञान की सराहना की गई है। महाराज ने कहा कि जिजीविषा के संरक्षण के लिए चिकित्सक भगवान के रूप में समाज के सामने आते हैं। अल्पकाल में 15 अस्पतालों का निर्माण आसान कार्य नहीं है, यह सेवा और समर्पण का उदाहरण है। अवधेशानन्द गिरि महाराज ने हेल्थ मिशन सोसाइटी को हर संभव मदद का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि चिकित्सक ही भगवान श्री हरि का रूप है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अशोक कुमार विंदलस ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में सोसाइटी के 10 कर्मठ योद्धाओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में श्याम बागड़ी ने धन्यवाद ज्ञापित किया और राष्ट्र गान के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस मौके पर प्रांत प्रचारक डॉ शैलेन्द्र, प्रचार प्रमुख संजय सहित अन्य मौजूद रहे।