गढ़वा, 12 जनवरी (हि.स.) । झांरखंड राज्य के ढ़वा थाना क्षेत्र के बेलचंपा गांव के पास अज्ञात हाईवा की भीषण टक्कर से स्कार्पियो सवार एक ही परिवार के चार युवकों की रविवार की रात मौके पर ही मौत हो गई। हादसा इतना भयावह था कि स्कार्पियो पूरी तरह चकनाचूर हो गई और शव वाहन में बुरी तरह फंस गया। मृतकों की पहचान पलामू जिले के पांडु थाना क्षेत्र के लवर पांडु गांव निवासी लखन पासवान के पुत्र नरेंद्र कुमार पासवान (30), शंभु पासवान का पुत्र जितेंद्र पासवान (28), विश्रामपुर थाना क्षेत्र के भंडार गांव निवासी मनोज पासवान का पुत्र बादल पासवान (20)तथा अशोक पासवान का पुत्र बिक्की कुमार (18) के रूप में हुई है। चारों आपस में करीबी रिश्तेदार थे।
जानकारी के अनुसार सभी युवक स्कार्पियो से श्रीबंशीधर नगर थाना क्षेत्र के बिलासपुर गांव गए थे, जहां जितेंद्र पासवान की मौसेरी बहन की सगाई थी। समारोह की खुशियां लेकर देर रात लौटते समय बेलचंपा गांव के पास तेज रफ्तार हाईवा ने सामने से टक्कर मार दी। टक्कर के बाद स्कार्पियो सड़क किनारे पिचक गई, जबकि हाईवा चालक वाहन लेकर फरार हो गया।
सूचना मिलते ही गढ़वा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। कटर मशीन की मदद से वाहन को काटकर कड़ी मशक्कत के बाद चारों शव बाहर निकाले गए और पोस्टमार्टम के लिए गढ़वा सदर अस्पताल भेजा गया। अस्पताल पहुंचते ही स्वजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। जवान बेटों की लाशें देखकर पूरा परिसर शोक में डूब गया।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि गढ़वा–रेहला मार्ग पर रात के समय हाईवा व अन्य भारी वाहनों की तेज रफ्तार आम हो चुकी है। कई बार शिकायत के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। पुलिस ने बताया कि अज्ञात हाईवा की तलाश की जा रही है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच के आधार पर चालक की पहचान की जाएगी।
दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में सोमवार का दिन पाला की सफेद चादर से ढाका दिखाई दिया। पाला की ठंड से लोगों की कंपकपी छूट गई। मौसम विभाग के वैज्ञानिकों का मानना है कि अभी और पाला पढ़ने की संभावना है।
दिल्ली एनसीआर में सोमवार को पारा गिरकर न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया। सुबह 2 डिगी पारा गिरने से लोगो की कपकपी छूट गयी गयी। खेतों में पाला की सफेद चादर से किसान भी परेशान हो गए। हाथ पैर सुन्न हो गए। पाला के कारण हाथ पैर की उंगलियां भी दर्द करने लगी। हालांकि यह पारा गेंहू की फसल के लिए वरदान है , किसान कृष्ण त्यागी का कहना है कि जितना पाला पड़ेगा गेंहू की फसल अच्छी होगी। लेकिन यही पाला आलू की फसल को नुकसान पहुंचाता है। कृषि वैज्ञानिक डॉ अनंत कुमार का कहना है अभी सर्दी बढ़ेगी। जितना पाला पड़ेगा धूप भी उतनी ही निकलेगी। दिन में सर्द हवाएं रहने से सर्दी का असर देखने को मिलेगा। कृषि बैज्ञानिक अनंत कुमार का कहना है। आलू, सरसों, व सब्जी की खेती करने वाले किसान फसलों को हल्का पानी दे जिससे फसल पर पाला का असर कम हो जाएगा। दिल्ली एनसीआर बागपत जिले में सोमवार को गिरे पारे के कारण स्कूलों को जाते बच्चे भी इससे प्रभावित दिखाई दिए। कई दिन की छुट्टी के बाद सोमवार को फिर स्कूल खुल गए। लेकिन सर्दी का असर अभी कम नही है जिससे छोटे बच्चों को ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है।
नई दिल्ली, 11 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना विकसित केरल से होकर गुजरती है। नया भारत तभी आकार ले सकता है, जब केरल अपने पूर्ण सामर्थ्य के साथ आगे बढ़े।
केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार को तिरुवनंतपुरम में आयोजित केरल कौमुदी कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘न्यू इंडिया, न्यू केरल’ की अवधारणा को विकसित भारत के विजन में समाहित किया है। विकसित भारत का अर्थ है कि देश का हर राज्य अपनी सर्वोत्तम क्षमता तक विकास करे। इसी दृष्टि से विकसित केरल भी विकसित भारत का अभिन्न हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य एक ऐसा केरल बनाना है जो विकसित हो, सुरक्षित हो और जहां हर व्यक्ति की आस्था का सम्मान किया जाए।
अमित शाह ने कहा कि आधारभूत संरचना, शिक्षा, अनुसंधान एवं विकास, औद्योगिक विकास और व्यक्ति की आय में वृद्धि यही ‘विकसित केरल’ की परिकल्पना है। विकसित केरल में प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए और धर्म या समुदाय से परे हर प्रकार की आस्था और विश्वास की रक्षा की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार आकांक्षी भारत की बात करती है। एक ऐसा भारत, जिसमें भविष्य को लेकर विश्वास, प्रगति की भावना और आत्मनिर्भरता हो। इसी से न्यू इंडिया का निर्माण होता है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हर राज्य का समग्र विकास आवश्यक है। सरकार ऐसी राजनीति में विश्वास करती है, जहां राजनीति से अधिक प्रदर्शन को महत्व दिया जाए।
गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में प्रदर्शन आधारित राजनीति की शुरुआत की है, जहां शिकायतों के बजाय संकल्प पर विश्वास किया जाता है। शिकायतें हमेशा रहेंगी, लेकिन उन्हें दूर करने की प्रतिबद्धता होनी चाहिए। सरकार तुष्टीकरण की राजनीति में विश्वास नहीं करती, बल्कि सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने पर जोर देती है।
अमित शाह ने कहा कि केरल में अपार संभावनाएं हैं। यहां की संस्कृति, साहित्य और शिक्षा के प्रति लगाव ने इसे देश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया है। आयुर्वेद से लेकर आईटी, खेल से लेकर स्टार्टअप और बैकवाटर्स से लेकर बौद्धिक विमर्श तक, केरल ने हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। हालांकि, सत्ता में आने-जाने वाली दो गठबंधनों की राजनीति ने राज्य में ठहराव की स्थिति पैदा की है।
उन्होंने कहा कि हालिया स्थानीय निकाय चुनावों ने केरल की राजनीति में बदलाव के संकेत दिए हैं। गृह मंत्री ने केरल की जनता से नई सोच, नए नेतृत्व और नई राजनीति को अपनाने की अपील की और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ही विकसित केरल की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है।
अमित शाह ने कहा कि नरेन्द्र मोदी भारतीय इतिहास के एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिन्होंने अक्षय ऊर्जा से लेकर ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण तक समग्र विकास की परिकल्पना की है। साल 2014 में भारत विश्व की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, जो 11 वर्षों में चौथे स्थान पर पहुंच गया है और दिसंबर 2027 से पहले तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।
उन्होंने कहा कि बीते 11 वर्षों में न केवल आर्थिक विकास हुआ है, बल्कि आधारभूत संरचना में लगभग 610 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। आज विश्व के 50 प्रतिशत डिजिटल लेनदेन भारत में हो रहे हैं। सरकार ने 60 करोड़ गरीबों को आवास, गैस कनेक्शन, पेयजल, बिजली, मुफ्त राशन और 5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराया है। इस दौरान 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि भारत आज अंतरिक्ष और स्टार्टअप के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है। अनुसंधान एवं विकास के कई क्षेत्रों में भारत शीर्ष देशों में शामिल है और पेटेंट पंजीकरण में भी अग्रणी बनकर उभरा है। यह संकेत है कि भविष्य भारत का है।
अमित शाह ने कहा कि केवल प्रेषण आधारित अर्थव्यवस्था के सहारे केरल का समग्र विकास संभव नहीं है। उन्होंने पर्यटन, शिक्षा, समुद्री व्यापार, आयुर्वेद, मसाले, आईटी, डाटा स्टोरेज और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में संभावनाओं को विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा विकास मॉडल चाहिए, जिसमें हर नागरिक स्वयं को उसमें प्रतिबिंबित होता देख सके।
गृह मंत्री ने कहा कि सतही तौर पर कानून-व्यवस्था ठीक लग सकती है, लेकिन अदृश्य खतरों की पहचान और उनका निराकरण आवश्यक है। पीएफआई पर प्रतिबंध के समय राज्य की दोनों सत्तारूढ़ गठबंधनों ने इसका विरोध किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या पीएफआई और जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठन केरल को एकजुट रख सकते हैं।
अमित शाह ने सबरीमला मंदिर में सोने की चोरी के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से होनी चाहिए, ताकि न्याय केवल हो ही नहीं, बल्कि होता हुआ दिखे भी।
उन्होंने कहा कि केरल में सत्ता में रही दोनों गठबंधनों ने एक-दूसरे के कार्यकाल के भ्रष्टाचार की जांच नहीं की। सहकारी घोटाला, एआई कैमरा घोटाला, पीपीपी घोटाला और अन्य मामलों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यदि केरल की जनता भ्रष्टाचार मुक्त शासन चाहती है, तो एक बार उनकी सरकार को अवसर देना चाहिए।
गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच केंद्र सरकार ने केरल को 72,000 करोड़ रुपए दिए, जबकि 2014 से 2024 के बीच मोदी सरकार ने 3.13 लाख करोड़ रुपए विकास के लिए प्रदान किए। इसके अतिरिक्त बुनियादी ढांचे, सड़कों, रेलवे, हवाई अड्डों और शहरी विकास के लिए अलग से हजारों करोड़ रुपए दिए गए।
अमित शाह ने कहा कि केरल कौमुदी ने क्षेत्रीय भाषाओं की पत्रकारिता में एक विश्वसनीय स्वर के रूप में अपनी पहचान बनाई है और यह केरल की जनता की आत्मा की आवाज बन चुका है।
उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर के विकासखंड अफजलगढ़ अंतर्गत ग्राम शाहपुर जमाल में जिला प्रशासन द्वारा स्वदेशी का प्रतीक ‘विदुर ब्रांड’ पैक्ड वाटर बोतल प्लांट का उद्घाटन किया गया। यह इकाई HAPPY NRLM स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित की जा रही है। इस प्लांट की दैनिक उत्पादन क्षमता 5,000 बोतल प्रति दिन है। इकाई के संचालन से ग्राम एवं आसपास के क्षेत्र की 60 से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को नियमित रोजगार प्राप्त होगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि के साथ-साथ आत्मनिर्भरता को भी बल मिलेगा। स्वदेशी का प्रतीक विदुर ब्रांड स्थानीय संसाधनों एवं ग्रामीण महिलाओं की सहभागिता से निर्मित उत्पादों को बढ़ावा देते हुए ‘वोकल फॉर लोकल’ एवं आत्मनिर्भर भारत की भावना को साकार कर रहा है। यह पहल राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार एवं ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह इकाई ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका का एक सफल एवं प्रेरणादायक मॉडल प्रस्तुत करेगी।
-कहा, नौकरशाही में नैतिकता की मौलिक कमी, प्रशासन इसे बाहरी वस्तु मानती है
प्रयागराज, 11 जनवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नौकरशाही की मनमानी पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा है कि पारम्परिक नौकरशाही में नैतिकता की एक मौलिक कमी यह है कि यह नैतिकता को प्रशासन के रोज़मर्रा के कामकाज का अभिन्न अंग न मान उसे बाहरी वस्तु मानती है। सरकार के विधायी विंग द्वारा सिविल सेवकों को दिये गये विवेकाधिकार का इस्तेमाल, अड़चन पैदा करने के बजाय, नीति और कानून के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा जहां प्रशानिक निर्णय तर्कहीन, अपमानजनक व मनमाने हैं, अदालतों को हस्तक्षेप करने के अपने अधिकारों को फिर से स्थापित करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। दूसरे शब्दों में कहें ,अदालतें, कानून के शासन के गारंटर के रूप में कार्य करने के बजाय, इस दायित्व को कार्यकारी शाखा को सौंप रही हैं, ताकि राज्य नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। किंतु नौकरशाही सहयोग नहीं कर रही।
कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव (गृह) को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है और कहा है कि यदि आदेश पालन में कोई कानूनी बाधाएं हैं, तो उनका खुलासा करें। साथ ही पूछा है कि किस कारण से प्रदेश का गृह विभाग, कोर्ट द्वारा समय-समय पर मांगी गई विशिष्ट और सटीक जानकारी देने में बार-बार विफल हो रहा है। कोर्ट ने जानकारी उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। याचिका की अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने राजेंद्र त्यागी व दो अन्य की गैंगस्टर एक्ट के तहत उनके खिलाफ की गई कार्यवाही की चुनौती याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
प्रदेश के कुछ जिलों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने और गैंगस्टर एक्ट के तहत जिलाधिकारी की शक्ति पुलिस कमिश्नरेट को देने के बाद शक्ति का दुरूपयोग करने की शिकायत को लेकर दाखिल याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह टिप्पणी की है और कहा है कि अपर मुख्य सचिव गृह व पुलिस कमिश्नर गाजियाबाद ने हलफनामा दाखिल किया कहा अपराध से निपटने के लिए पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली सबसे प्रभावी व अच्छी है। किन्तु उसमें मांगी गयी जानकारी ही नहीं है। अपर महाधिवक्ता ने फिर से समय मांगा, जबकि केस दर्जनों बार लग चुका है। कोर्ट ने डी जी पी अभियोजन को भी आदेश पालन का समय दिया।
कोर्ट ने कहा कि दाखिल हलफनामे से स्पष्ट है कि या तो कोर्ट का आदेश समझ नहीं सके या लापरवाही से विना विवेक का इस्तेमाल किए हलफनामा दाखिल कर दिया। उन्हें आदेश की अनदेखी करने के दुष्परिणाम की कोई परवाह नहीं। मनमानी पर उतारू है। कोर्ट मूकदर्शक नहीं रह सकती। प्रदेश के नागरिकों के हित में अपनी शक्ति को इस्तेमाल करने में संकोच नहीं करेगी। कोर्ट ने कहा अधिकारियों को ठीक से प्रशिक्षित नहीं किया गया है। उनमें संस्थागत काबिलियत की कमी है। फिर भी वे महात्वाकांक्षी है और हेरफेर करने में माहिर हैं। कोर्ट ने फिलहाल एक बार फिर मांगी गई जानकारी देने का समय दिया है।
जोधपुर, 11 जनवरी (हि.स.)। मोबाइल के युग में मातृशक्ति संभाले नई पीढ़ी की कमान : शेखावत
रविवार को श्री करणी कथा के पावन प्रसंग पर व्यास पीठ को नमन करते हुए केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि जब भी भारत की सभ्यता की रक्षा की बात आती है तो हम बप्पा रावल, महाराणा राज सिंह, राव चंद्रसेन, दुर्गादास राठौड़, छत्रपति शिवाजी महाराज, छत्रसाल बुंदेला जैसे महापुरुषों का स्मरण करते हैं। इन वीरों को गढ़ने वाली वह मातृशक्ति थी, जिसने पालने में झुलाते समय ही देश और धर्म के लिए मर मिटने के संस्कार दिए थे। उन्होंने प्रसिद्ध पंक्तियां दोहराई, “इला न देणी आपणी, हालरिये हुलराय, पूत सिखावे पालणे, मरण बड़ाई माय” (अपनी मातृभूमि को कभी शत्रुओं के हाथ में न जाने दे, और यदि आवश्यक हो तो इसके लिए मर मिटना ही सबसे बड़ी वीरता है)। शेखावत ने कहा कि रानी पद्मिनी और हजारों वीरांगनाओं ने जौहर की अग्नि में खुद को इसलिए होम कर दिया, ताकि हमारी संस्कृति के मान बिंदु गाय, गंगा, गौरी, गीता और गायत्री, अक्षुण्ण रहें। उन्होंने कहा कि आज संस्कारों की लोरी से ही सनातन संस्कृति सुरक्षित रहेगी।
आधुनिक दौर और वैचारिक प्रदूषण की चुनौती
शेखावत ने कहा कि पिछले 200 सालों से भारत की सभ्यता को पतित और विद्रूप करने के प्रयास हुए। तलवार के दम पर जो नहीं हो सका, वह अब वैचारिक आक्रमण के जरिए करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि आज यह मोबाइल और डब्बे (गैजेट्स) का जमाना है। तलवारों के आक्रमण से तो हम बच गए, लेकिन इस वैचारिक प्रदूषण से बचने के लिए परिवार और विशेषकर माता बहनों को संभाल करने की जरूरत है।
नई पीढ़ी को संस्कारित करने का संकल्प
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि आज भारत की सभ्यता और सनातन मान बिंदुओं का सम्मान पूरी दुनिया में पुनर्स्थापित हो रहा है। इस पुनर्जागरण के दौर में हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी आने वाली पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ना है। सैकड़ों पीढ़ियां इस संस्कृति को बचाने के लिए खप गईं। यदि हमने अपनी पीढ़ी को संस्कारित नहीं किया, तो यह समय ‘डामाडोल’ (अस्थिर) हो सकता है। शेखावत ने कहा कि आज जो माताएं अपने बच्चों को संस्कारित कर तैयार करेंगी, उन्हें वही पुण्य लाभ और यश प्राप्त होगा जो महारानी पद्मावती को जौहर के माध्यम से प्राप्त हुआ था।
दो दिवसीय ‘यूपी एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कॉन्फ्रेंस’ 12 जनवरी से, योगी आदित्यनाथ करेंगे उद्घाटन
– एआई के प्रयोग से यूपी बनेगा हेल्थ व इनोवेश सेक्टर का पावरहाउस
– कॉन्फ्रेंस में नीति, एआई, हेल्थकेयर जैसे विषयों पर होगा मंथन
लखनऊ, 11 जनवरी(हि.स.)। । उत्तर प्रदेश को देश में आधुनिक, सुलभ और तकनीक-सक्षम स्वास्थ्य व्यवस्था का मॉडल राज्य बनाने की दिशा में योगी सरकार एक ऐतिहासिक पहल करने जा रही है। सोमवार को लखनऊ में दो दिवसीय ‘यूपी एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कॉन्फ्रेंस’ प्रारंभ होने जा रहा है। उद्घाटन सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे।
इस दौरान केन्द्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद, उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स राज्य मंत्री अजीत सिंह पाल, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह उपस्थित रहेंगे।
कॉन्फ्रेंस में स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी मनोज कुमार सिंह, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग यादव संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में राज्य और केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहेंगे। वहीं, नीति आयोग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), विश्व बैंक, गेट्स फाउंडेशन, गूगल सहित देश-विदेश के एआई और हेल्थ सेक्टर के विशेषज्ञ सम्मेलन के विभिन्न सेशंस में हिस्सा लेंगे।
संभल, 11 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में जनपद संभल के हजरतनगर गढ़ी थाना क्षेत्र में सरकारी खाद के गड्ढे की भूमि पर अवैध रूप से बने आठ मकानों के अवैध कब्जाधारियों ने बुलडोजर की कार्रवाई के डर से खुद ही अपने निर्माण तोड़ने शुरू कर दिए हैं।
मामला जनपद संभल के थाना हजरतनगर गढ़ी क्षेत्र की नगर पंचायत सिरसी के मोहल्ला शर्की कर्बला रोड का है। राजस्व प्रशासन की टीम ने इन मकानों की पैमाइश कर चिन्हांकन किया था, जिससे लोगों में हड़कंप मच गया। इससे पहले, गांव राया बुजुर्ग में तालाब की भूमि पर बने तीन मकानों को राजस्व प्रशासन ने बुलडोजर से गिराया था।
प्रशासन द्वारा 12 जनवरी को संभावित बुलडोजर कार्रवाई के डर से लोगों ने मजदूर लगाकर अवैध निर्माण हटाना शुरू कर दिया है। गुरुवार को हल्का लेखपाल पुष्पेंद्र कुमार, लेखपाल नितिन शर्मा और नायब तहसीलदार बबलू कुमार ने शिकायत के आधार पर मौके पर पहुंचकर पैमाइश की थी।
इस विषय में जानकारी देते हुए तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने रविवार काे बताया कि कुछ लोगों ने सरकारी खाद के गड्ढे की भूमि पर मकान बना लिए हैं, जिसके लिए उनके न्यायालय से धारा 67 के अंतर्गत आदेश पारित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि लोग खुद कब्जा हटा रहे हैं, तो यह अच्छी बात है और प्रशासन को कार्रवाई नहीं करनी पड़ेगी।
अवैध निर्माण करने वालों में अय्यूब हसन पुत्र जाहिद हुसैन (200 वर्गमीटर), कामिल पुत्र आकिल (50 वर्गमीटर), मौ. हसन पुत्र रजी हसन (70 वर्गमीटर), चांद पत्नी छिम्मन (110 वर्गमीटर), असकरी पुत्र रजी हसन (130 वर्गमीटर), अली हसन पुत्र रजी हसन (100 वर्गमीटर) और जुल्फेकार पुत्र इफ्तेकार (90 वर्गमीटर) शामिल हैं। रहबर पुत्र रजी हसन का 100 वर्गमीटर भूमि पर बना मकान जिलाधिकारी न्यायालय के आदेश पर 3 मार्च 2023 को कुर्क किया गया है।
नई दिल्ली, 11 जनवरी (हि.स.)। वरिष्ठ हिंदी कथाकार नासिरा शर्मा ने रविवार को कहा कि लेखक को सियासत और मानवता के बीच संतुलन बनाकर लिखना चाहिए, जिससे रचनाओं में मानवता के संदेश जरूर बचे रहें। उन्होंने नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला में आज साहित्य अकादमी की ओर से आयोजित साहित्यिक कार्यक्रमों में यह बात कही। नासिरा शर्मा ने कहा, “लेखक जिंदगी के नजदीकी मुद्दों को उठाता है। लेखक को सियासत और मानवता की दृष्टि के बीच संतुलन बनाते हुए लिखना पड़ता है।”
हॉल नं.- 2 स्थित ‘लेखक मंच’ पर आयोजित पहले कार्यक्रम ‘आमने-सामने’ में दो अकादमी पुरस्कार प्राप्त लेखकों ने पाठकों से संवाद किया।
प्रख्यात डोगरी कवि एवं नाटककार मोहन सिंह ने बताया कि लेखन को व्यवसाय समझना गलत है, इसका उपयोग केवल सामाजिक बदलाव के लिए होना चाहिए। उन्होंने अपनी नज्में ‘घेरा‘, ‘श्राप‘, ‘मां के मरने पर‘, ‘पोतियां ऐसी ही होती हैं‘, ‘साथ न छोड़ देना’, ‘पेड़ और आदमी‘ आदि प्रस्तुत कीं।
वहीं, बोडो की प्रख्यात कवयित्री रश्मि चौधरी ने बताया कि उनकी कविताएं नारीवादी होती हैं, जिनमें ग्रामीण महिलाओं के दुख, पीड़ा और दयालुता जैसे विषय होते हैं। उन्होंने अपनी कविता ‘दरबार‘ बोडो में और शेष कविताएं- ‘आंगन‘, ‘अकेली‘, ‘चिड़िया उड़ गई‘ और ‘जीवन‘ हिंदी में प्रस्तुत कीं।
‘कहानी-पाठ’ कार्यक्रम नासिरा शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जिसमें दो कथाकारों ने अपनी कहानियां सुनाईं कि इनमें एक अवधेश श्रीवास्तव और दूसरे हरिसुमन बिष्ट हैं।
अवधेश की कहानियों में बच्चों और कुत्ते के पिल्लों के बीच के प्रेम को दर्शाया गया है, जबकि हरिसुमन की कहानी में ‘तुमने कुछ नहीं कहा था‘, जो गंदे नाले की समस्या पर हो रही राजनीति और सही जन प्रतिनिधि के चुनाव की कसमकस पर आधारित है।
कार्यक्रम के आरंभ में, साहित्य अकादमी में संपादक (हिंदी) अनुपम तिवारी ने सभी अतिथियों का अंगवस्त्र से अभिनंदन किया और श्रोताओं से उनका परिचय कराया।
नई दिल्ली, 11 जनवरी (हि.स.)। वरिष्ठ हिंदी कथाकार नासिरा शर्मा ने रविवार को कहा कि लेखक को सियासत और मानवता के बीच संतुलन बनाकर लिखना चाहिए, जिससे रचनाओं में मानवता के संदेश जरूर बचे रहें। उन्होंने नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला में आज साहित्य अकादमी की ओर से आयोजित साहित्यिक कार्यक्रमों में यह बात कही।
नासिरा शर्मा ने कहा, “लेखक जिंदगी के नजदीकी मुद्दों को उठाता है। लेखक को सियासत और मानवता की दृष्टि के बीच संतुलन बनाते हुए लिखना पड़ता है।”
हॉल नं.- 2 स्थित ‘लेखक मंच’ पर आयोजित पहले कार्यक्रम ‘आमने-सामने’ में दो अकादमी पुरस्कार प्राप्त लेखकों ने पाठकों से संवाद किया।
प्रख्यात डोगरी कवि एवं नाटककार मोहन सिंह ने बताया कि लेखन को व्यवसाय समझना गलत है, इसका उपयोग केवल सामाजिक बदलाव के लिए होना चाहिए। उन्होंने अपनी नज्में ‘घेरा‘, ‘श्राप‘, ‘मां के मरने पर‘, ‘पोतियां ऐसी ही होती हैं‘, ‘साथ न छोड़ देना’, ‘पेड़ और आदमी‘ आदि प्रस्तुत कीं।
वहीं, बोडो की प्रख्यात कवयित्री रश्मि चौधरी ने बताया कि उनकी कविताएं नारीवादी होती हैं, जिनमें ग्रामीण महिलाओं के दुख, पीड़ा और दयालुता जैसे विषय होते हैं। उन्होंने अपनी कविता ‘दरबार‘ बोडो में और शेष कविताएं- ‘आंगन‘, ‘अकेली‘, ‘चिड़िया उड़ गई‘ और ‘जीवन‘ हिंदी में प्रस्तुत कीं।
‘कहानी-पाठ’ कार्यक्रम नासिरा शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जिसमें दो कथाकारों ने अपनी कहानियां सुनाईं कि इनमें एक अवधेश श्रीवास्तव और दूसरे हरिसुमन बिष्ट हैं।
अवधेश की कहानियों में बच्चों और कुत्ते के पिल्लों के बीच के प्रेम को दर्शाया गया है, जबकि हरिसुमन की कहानी में ‘तुमने कुछ नहीं कहा था‘, जो गंदे नाले की समस्या पर हो रही राजनीति और सही जन प्रतिनिधि के चुनाव की कसमकस पर आधारित है।
कार्यक्रम के आरंभ में, साहित्य अकादमी में संपादक (हिंदी) अनुपम तिवारी ने सभी अतिथियों का अंगवस्त्र से अभिनंदन किया और श्रोताओं से उनका परिचय कराया।
गांधीनगर, 11 जनवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सुबह सोमनाथ में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026’ में भाग लिया। इसके बाद दोपहर में उन्होंने वाइब्रेंट गुजरात सौराष्ट्र रीजनल कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ किया। कार्यक्रमों के बाद शाम को प्रधानमंत्री गांधीनगर पहुंचे, जहां उन्होंने महात्मा मंदिर स्थित मेट्रो स्टेशन और मेट्रो फेज-2 का लोकार्पण किया।
वाइब्रेंट गुजरात सौराष्ट्र रीजनल कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने सौराष्ट्र-कच्छ के 7 जिलों में 3540 एकड़ क्षेत्र में 13 नई स्मार्ट जीआईडीसी की घोषणा की। ये जीआईडीसी जामनगर, अमरेली, भावनगर, कच्छ, मोरबी और सुरेंद्रनगर में विकसित की जाएंगी।
इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने पहले कहा था कि मोरबी, जामनगर और राजकोट का त्रिकोण ‘मिनी जापान’ बनेगा, तब लोगों ने मजाक उड़ाया था, लेकिन आज वह सपना साकार होता दिख रहा है। उन्होंने निवेशकों से कहा कि सौराष्ट्र में निवेश का यही सही समय है।
प्रधानमंत्री के 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए यह गुजरात सरकार की नई पहल है। वाइब्रेंट गुजरात सौराष्ट्र समिट से गिरनार की गरिमा, सोमनाथ की आस्था, गिर के शेरों की दहाड़, सफेद रण की सुंदरता और स्थानीय हस्तकला को वैश्विक पहचान मिलेगी।
इसके साथ ही सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र में उद्योगों के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित होगा।