नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स.)। तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) के अध्यक्ष और अभिनेता विजय सोमवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के समक्ष पेश हुए। सीबीआई मुख्यालय में उनसे करूर भगदड़ मामले की जांच के सिलसिले में पूछताछ शुरू हो गई है। इस दौरान बड़ी संख्या में उनके समर्थक सीबीआई दफ्तर के बाहर जुटे हैं।
समर्थक उनकी पार्टी का झंडा हाथों में लिए सुबह से बाहर खड़े हैं। इस दौरान समर्थकों ने अभिनेता विजय के लिए नारेबाजी भी की।
यह पेशी 27 सितंबर 2025 को तमिलनाडु के करूर जिले में टीवीके के एक चुनावी अभियान कार्यक्रम के दौरान हुई भगदड़ से जुड़ी है, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी। घटना की जांच सीबीआई कर रही है।
सीबीआई ने इस महीने की शुरुआत में विजय को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 179 के तहत नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया था। नोटिस में 6 जनवरी को पेश होने की तारीख दी गई थी।
सिलीगुड़ी, 12 जनवरी (हि.स)। इंडियन आइडल सीजन 3 के विजेता और वेब सीरीज पाताल लोक-2 में नजर आए एक्टर-सिंगर प्रशांत तमांग का पार्थिव शरीर सोमवार को ताबूत में बंद अवस्था में बागडोगरा एयरपोर्ट लाया गया। जैसे ही उनका शव एयरपोर्ट पहुंचा, वहां मौजूद परिवार के सदस्य फूट-फूट कर रो पड़े। इससे वहां का पूरा माहौल गमगीन हाे गया।दार्जिलिंग निवासी प्रशांत तामांग ने अपनी मधुर आवाज से देशभर के लोगों का दिल जीता था। उनके अचानक निधन से पहाड़ क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
सोमवार काे बागडोगरा एयरपोर्ट पर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट, जीटीए के मुख्य कार्यकारी अनित थापा, दार्जिलिंग के विधायक नीरज ज़िम्बा सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
उल्लेखनीय है कि, रविवार को दिल्ली में दिल का दौरा पड़ने से प्रशांत तामांग का निधन हो गया था। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरा पहाड़ शोक में डूब गया। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ नेपाली भाषा में भी कई लोकप्रिय गीत गाए थे और कई वेब सीरीज में अभिनय भी किया था।
सांसद राजू बिष्ट ने कहा कि, प्रशांत तामांग का जाना देश, राज्य और पहाड़ के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी आवाज ने एक समय गोरखा समाज को एकजुट किया था।——————–
– मेडिकल इमरजेंसी के कारण एयर इंडिया की फ्लाइट जयपुर की गई डायवर्ट
नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स)। नई दिल्ली से विजयवाड़ा जा रही एयर इंडिया की एक उड़ान को चिकित्सा संबंधी आपात स्थिति के कारण सोमवार सुबह जयपुर में आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। विमान में सवार सभी यात्री सुरक्षित हैं।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एयर इंडिया की उड़ान संख्या एआई 2517 में एक बुजुर्ग यात्री की तबीयत खराब हो गई, जिसके बाद फ्लाइट को जयपुर डायवर्ट किया गया। यात्री को विमान से उतारकर अस्पताल ले जाया गया। फ्लाइट में यात्रियों की संख्या के बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है। ‘फ्लाइटराडार24.कॉम’ पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस उड़ान का संचालन ए320 विमान से हुआ था।
मुख्यमंत्री और केंद्रीय राज्यमंत्री ने किया यूपी एआई व स्वास्थ्य नवाचार सम्मेलन’ का उद्घाटनकेंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने ग्रामीण भारत की जनता को एआई का लाभ मिलने पर दिया जाेर
लखनऊ, 12 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के साथ उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और राज्यमंत्री अजीत पाल ने सोमवार को दो दिवसीय उत्तर प्रदेश एआई और स्वास्थ्य नवाचार सम्मेलन’ 2026 का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर केन्द्रीय आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। साथ ही, एआई पेनेट्रेशन के क्षेत्र में भी भारत पहले स्थान पर पहुंच गया है। इसके साथ ही मोबाइल कनेक्शन 100 करोड़ से ऊपर हो गये है।
केन्द्रीय राज्यमंत्री प्रसाद ने कहा कि भारत एआई सर्विस प्रोवाइडर ऑफ द वर्ल्ड बनने वाला है। विश्व में भारत का डंका बजेगा, जिसमें यूपी बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा। पूरे उत्तर प्रदेश में इंटरनेट का जाल बिछ चुका है। एआई के क्षेत्र में यूपी में बहुत प्रगति हुई है। साथ ही साइबर थ्रेट व डीप फेक जैसी तमाम चुनौतियां भी हैं। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि ग्रामीण भारत की जनता को इसका लाभ मिलना चाहिए। कृषि, स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र पर्यावरण का क्षेत्र हो उसमें एआई का उपयोग किया जा रहा है। उन्हाेंने कहा कि जब जब जन भावना साथ होती है तो सरकार निर्णायक फैसले लेती है। डीप फेक के जरिय लोगों को हानि पहुुंचाया जा रहा है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीप फेक रोकने के लिए केन्द्र सरकार प्रतिबद्ध है। केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 15 से 20 फरवरी के बीच नई दिल्ली में होगी। यहां से निकलने वाले सुझाव राष्ट्रीय नीति और वैश्विक स्तर पर एआई से जुड़े विमर्श को दिशा देंगे।
इस अवसर पर चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग यादव, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी,नीति आयोग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), विश्व बैंक, गेट्स फाउंडेशन, गूगल सहित देश-विदेश के एआई और हेल्थ सेक्टर के विशेषज्ञ सम्मेलन में उपस्थित रहे।
– आलोचनात्मक चिंतन जेएनयू की आत्मा: धर्मेंद्र प्रधान
नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को कहा कि बहस, चर्चा, असहमति और यहां तक कि टकराव भी स्वस्थ लोकतंत्र के आवश्यक तत्व हैं, लेकिन इनका उद्देश्य अंततः निर्णय तक पहुंचना होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक बार निर्णय हो जाने के बाद उसके प्रभावी और सुचारु क्रियान्वयन के लिए सामूहिक सहयोग अनिवार्य है।
उपराष्ट्रपति यहां जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के 9वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनसे अपने ज्ञान और कौशल को राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित करने का आह्वान किया।
जेएनयू की लोकतांत्रिक परंपरा का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालयों में विचारों की स्वतंत्रता, बहस, चर्चा, असहमति और वैचारिक मंथन अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन सुचारु प्रशासन और राष्ट्र निर्माण के लिए निष्कर्ष और सहयोग की भावना भी उतनी ही आवश्यक है।
स्वामी विवेकानंद की जयंती पर उनके विचारों का स्मरण करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसका उद्देश्य चरित्र निर्माण, बौद्धिक सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता होना चाहिए। शिक्षा और समुचित प्रशिक्षण के माध्यम से ही भारत का युवा वर्ग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत–2047’ के संकल्प को साकार कर सकता है।
भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने नालंदा और तक्षशिला जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्रों का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि उपनिषद, भगवद्गीता, कौटिल्य का अर्थशास्त्र और तिरुक्कुरल जैसे ग्रंथों में शिक्षा को सामाजिक और नैतिक जीवन का केंद्र माना गया है।
उपराष्ट्रपति ने जेएनयू के समावेशी वातावरण, भारतीय भाषाओं तथा सभ्यतागत अध्ययन को बढ़ावा देने के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप मातृभाषाओं में ज्ञान सृजन को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से तीन मूल दायित्व निभाने का आह्वान किया—सत्य की खोज में बौद्धिक ईमानदारी, असमानताओं को कम करने के लिए सामाजिक समावेशन और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान। उन्होंने संविधानिक मूल्यों और भारत की सभ्यतागत परंपराओं से प्रेरित रहने तथा माता-पिता और शिक्षकों के प्रति सदैव सम्मान बनाए रखने की अपील की।
इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आलोचनात्मक चिंतन जेएनयू की आत्मा है। उन्होंने कहा कि जेएनयू में बहस, चर्चा, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और बौद्धिक संवाद की एक जीवंत परंपरा रही है। जेएनयू एक ऐसा बौद्धिक केंद्र रहा है, जहां विचारों को परखा, निखारा और विकसित किया जाता है, जो आगे चलकर राष्ट्रीय नीतियों के निर्माण में योगदान देते हैं।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि जेएनयू का शैक्षणिक वातावरण नेतृत्व विकसित करने का एक सशक्त केंद्र रहा है। उन्होंने डॉ. डीपी त्रिपाठी, सीताराम येचुरी, प्रकाश करात, केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर तथा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास जैसे प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सभी ने सार्वजनिक जीवन में विशिष्ट पहचान बनाई है।
प्रधान ने कहा कि वर्षों के निरंतर शैक्षणिक योगदान के माध्यम से जेएनयू ने शैक्षणिक उत्कृष्टता की एक सशक्त और विशिष्ट परंपरा स्थापित की है। यह देश के उन अग्रणी विश्वविद्यालयों में रहा है, जिसने बहुविषयक वातावरण में वास्तविक शैक्षणिक स्वायत्तता को आत्मसात किया है। बहुविषयक शोध जेएनयू के मूल स्वभाव का हिस्सा है। यह विश्वविद्यालय अपने समय से आगे सोचने वाली एक प्रयोगशाला के रूप में विकसित हुआ है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि जेएनयू की डिग्री केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जेएनयू की समावेशिता, सामाजिक न्याय और उत्तरदायित्व की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यहां के विद्यार्थी ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से अपील करते हुए प्रधान ने कहा कि वे जेएनयू की समावेशिता, सामाजिक न्याय और उत्तरदायित्व की परंपरा को और मजबूत करें, वंचितों की आवाज़ बनें तथा असमानताओं को कम करने की रणनीतियां विकसित करें। कुछ विद्यार्थी संसद और विधानसभाओं तक पहुंचकर लोकतंत्र को सुदृढ़ करेंगे, कुछ कर्तव्य भवन में राष्ट्र सेवा का दायित्व निभाएंगे, कुछ रणनीतिक विशेषज्ञ और राजनयिक बनकर भारत की वैश्विक भूमिका को सशक्त करेंगे, जबकि कुछ नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से नए उद्यम और विश्वस्तरीय कंपनियों की नींव रखेंगे। वहीं कुछ लेखक, पत्रकार और विचारशील नेतृत्वकर्ता बनकर राष्ट्र के वैचारिक विमर्श को दिशा देंगे।
इस अवसर पर जेएनयू के कुलाधिपति कंवल सिब्बल, कुलपति प्रो. शांतिश्री धुलिपुडी पंडित, वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य, उपाधि प्राप्त विद्यार्थी तथा उनके परिजन उपस्थित थे।
– परीक्षण की कामयाबी ने सेना के लिए पोर्टबल गाइडेड मिसाइल हासिल करने का रास्ता बना दिया
नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स.)। शीर्ष आक्रमण क्षमता वाली तीसरी पीढ़ी की फायर एंड फॉरगेट मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपीएटीजीएम) ने उड़ान परीक्षण में एक बार फिर अपनी उपयोगिता साबित की है। इस दौरान मिसाइल और वारहेड के प्रदर्शन मानक के अनुरूप पाए गए। परीक्षण का लक्ष्य एक डमी टैंक था, जिसे मिसाइल ने सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। इस परीक्षण ने सेना के लिए तीसरी पीढ़ी की स्वदेशी मैन पोर्टबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल हासिल करने का रास्ता बना दिया है।
डीआरडीओ की हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला ने महाराष्ट्र के अहिल्या नगर की केके रेंज में एक गतिशील लक्ष्य के खिलाफ सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया। स्वदेश में विकसित एमपीएटीजीएम में अत्याधुनिक स्वदेशी प्रौद्योगिकियां जैसे इमेजिंग इंफ्रारेड (आईआईआर) होमिंग सीकर, ऑल इलेक्ट्रिक कंट्रोल एक्चुएशन सिस्टम, फायर कंट्रोल सिस्टम, टैंडम वारहेड, प्रणोदन प्रणाली और उच्च प्रदर्शन दृष्टि प्रणाली शामिल हैं। इन्हें डीआरडीओ की सहयोगी प्रयोगशालाओं रिसर्च सेंटर इमारत, हैदराबाद, टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी, चंडीगढ़, उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला, पुणे और इंस्ट्रूमेंट्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, देहरादून में विकसित किया गया है।
डीआरडीओ के मुताबिक थर्मल टारगेट सिस्टम को डिफेंस लैबोरेटरी, जोधपुर ने टारगेट टैंक की नकल करने के लिए बनाया था। आईआईआर सीकर दिन और रात में कॉम्बैट ऑपरेशन की काबिलियत रखता है। यह वॉरहेड मॉडर्न मेन बैटल टैंक को हराने में काबिल है। भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड इस वेपन सिस्टम के डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर हैं। मिसाइल को ट्राइपॉड या मिलिट्री व्हीकल लॉन्चर से लॉन्च किया जा सकता है। डीआरडीओ ने पिछले साल 13 अप्रैल और 13 अगस्त को ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल के परीक्षण किये थे।
इस मिसाइल का अधिकतम सीमा तक उड़ान का परीक्षण सफलतापूर्वक किया जा चुका है। मिसाइल को उन्नत एवियोनिक्स के साथ अत्याधुनिक लघु इन्फ्रारेड इमेजिंग तकनीक के साथ लैस किया गया है। इस मिसाइल की लंबाई लगभग 1,300 मिमी. है और वजन कम रखने के लिए एल्यूमीनियम और कार्बन फाइबर लॉन्च ट्यूब के साथ लगभग 120 मिमी का व्यास रखा गया है। मिसाइल का कुल वजन 14.5 किलोग्राम और इसकी कमांड लॉन्च यूनिट (सीएलयू) का वजन 14.25 किलोग्राम है जो लेजर ऑल-वेदर को डिजिटल ऑल-वेदर के साथ जोड़ती है।
इसकी मारक क्षमता लगभग 2.5 किमी है। ‘दागो और भूल जाओ’ की तकनीक वाली इस पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल के इस परीक्षण ने सेना के लिए तीसरी पीढ़ी की स्वदेशी मैन पोर्टबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल हासिल करने का रास्ता बना दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. समीर वी कामत ने सफल टेस्ट के लिए डीआरडीओ, साझीदारों और उद्योग की सराहना करते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक अहम कदम बताया है।
रक्षा मंत्री ने सफल टेस्ट को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक ज़रूरी कदम बताया। टीम को बधाई देते हुए डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. कामत ने कहा कि ट्रायल टारगेट सफलतापूर्वक किया गया, जिससे वेपन सिस्टम को भारतीय सेना में शामिल करने की राह मिली है। ———-
इंदौर, 12 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां सोमवार को एक और बुजुर्ग की मौत हो गई। इसके बाद यहां दूषित पानी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। मृतक का नाम भगवानदास (64) है। दूषित पानी से तबियत खराब होने के चलते उन्हें 10 दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पहले उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां हालत में सुधार नहीं होने पर बॉम्बे अस्पताल रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
इंदौर के बॉम्बे अस्पताल के जनरल मैनेजर राहुल पाराशर ने बताया कि भागीरथपुरा की इमली गली में रहने वाले भगवानदास भरणे को जब यहां लाया गया तो उस दौरान कार्डियक अरेस्ट आया था। इस पर सीपीआर देकर उन्हें फिर वेंटिलेटर पर लिया गया था। उन्हें गैंग्रीन सहित मल्टी ऑर्गन्स फेल्यूअर जैसी तकलीफ थी।
इंदौर में सोमवार को हुई मौत के बाद मृतकों का आंकड़ा 23 पहुंच गया है। मृतकों में उर्मिला यादव (60), नंदलाल पाल (75), उमा कोरी (31), मंजूला (74), ताराबाई कोरी (70), गोमती रावत (50), सीमा प्रजापत (50) जीवन लाल बरेडे (80), अव्यान साहू (5 माह), शंकर भाया (70), संतोष बिगोलिया, अरविंद लखर, गीताबाई, अशोक लाल पंवार, ओमप्रकाश शर्मा, हरकुंवर बाई, रामकली, सुमित्रा बाई, श्रवण खुपराव, हीरालाल, सुनीता वर्मा, कमला बाई और भगवानदास शामिल हैं।
इससे पहले नौ जनवरी को कमला बाई (59) पत्नी तुलसीराम की उपचार के दौरान हो गई थी। मृतक महिला का पति मजदूरी करता है। दोनों लगभग 20 दिन पहले ही भागीरथपुरा में आकर रहने लगे थे। इस दौरान दूषित पानी पीने से कमला बाई की तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें 5-6 जनवरी से उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी और हालत बिगड़ने पर 7 जनवरी को एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां कमला बाई ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। मौत के बाद परिजनों ने भागीरथपुरा में नगर निगम की टीम और संबंधित केंद्र को इसकी जानकारी दी, लेकिन आधार कार्ड में पता नहीं बदला होने के कारण इस मामले को दूषित पानी से हुई मौत के रूप में दर्ज नहीं किया गया।
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार क्षेत्र में व्यवस्थाएं सुधारने में जुटी हैं। रहवासी टैंकरों के भरोसे हैं और यह साफ नहीं है कि टंकियों से नियमित जलापूर्ति कब शुरू होगी। नगर निगम रोजाना पानी की टेस्टिंग और सैंपलिंग कर रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार वह आरओ, बोरिंग और बोतल के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। पानी को छानकर और उबालकर इस्तेमाल कर रहे हैं।
अभी भागीरथपुरा के 42 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती है और इनमें से 13 मरीजों की हालत गंभीर है, जिन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया है। इनमें से तीन मरीज वेंटिलेटर पर बताए जा रहे हैं।
तीसरे चरण में गड़बड़ी से ‘अन्वेषा’ उपग्रह कक्षा में नहीं पहुंच सका
नोट-इस खबर को अंग्रेज़ी वर्णमाला के कुछ शब्दों को हिंदी में बदलकर फिर से जारी किया गया है।
श्रीहरिकोटा, 12 जनवरी (हि.स.)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का पीएसएलवी-सी62/ईओएस-एन1 मिशन रविवार को तकनीकी खामी के कारण विफल घोषित कर दिया गया। इस मिशन के तहत रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित अत्यंत गोपनीय हाइपरस्पेक्ट्रल निगरानी उपग्रह ‘अन्वेषा’ का प्रक्षेपण किया गया था, लेकिन रॉकेट के तीसरे चरण (पीएस3) के अंतिम चरण में आई गड़बड़ी के कारण उपग्रह को निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका।
इसरो के अनुसार, मिशन के दौरान पीएसएलवी रॉकेट का उड़ान क्रम सामान्य रूप से आगे बढ़ रहा था, लेकिन तीसरे स्टेज के अंत में रॉकेट मार्ग से भटक गया, जिससे पेलोड को अपेक्षित कक्षा में इंजेक्ट नहीं किया जा सका। इसके बाद इसरो ने मिशन को विफल घोषित करते हुए विस्तृत तकनीकी विश्लेषण शुरू कर दिया है।
दरअसल, इसरो का यह 64वां पीएसएलवी मिशन (पीएसएलवी-सी62/ईओएस-एन1) आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 10:18 बजे प्रक्षेपित किया गया था। इस उड़ान के माध्यम से कुल 16 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा जाना था! इनमें डीआरडीओ द्वारा विकसित ‘अन्वेषा’ सबसे महत्वपूर्ण पेलोड था।
इसरो ने पहले बताया था कि ‘अन्वेषा’ एक अत्याधुनिक हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट है, जो जंगलों की गहराई से लेकर युद्ध के मैदान में छिपी बेहद सूक्ष्म वस्तुओं तक की पहचान करने में सक्षम है। यह उपग्रह पर्यावरण निगरानी, संसाधन मानचित्रण और सामरिक निगरानी के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में भारत की निगरानी क्षमताओं को नई मजबूती प्रदान करने वाला था।
हालांकि मिशन की असफलता से इसरो और रक्षा प्रतिष्ठान को झटका लगा है, लेकिन वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि इसरो की टीम खामी के कारणों की गहन जांच कर रही है, ताकि भविष्य के मिशनों में ऐसी त्रुटियों से बचा जा सके।
गौरतलब है कि यह वर्ष 2026 में इसरो का पहला प्रक्षेपण था। साथ ही यह न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) का 9वां वाणिज्यिक मिशन था, जो तकनीकी खामी के कारण सफल नहीं हो सका
नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स)। वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट एक फरवरी को 11 बजे लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। आम तौर पर केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश किया जाता है, लेकिन इस वर्ष रविवार को पड़ने की वजह से अनिश्चितता थी, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को इसकी पुष्टि कर दी है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पोस्ट पर लिखा कि भारत सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बजट सत्र 2026 के लिए संसद के दोनों सदनों को बुलाने की मंजूरी दे दी है। यह सत्र 28 जनवरी को शुरू होगा और 2 अप्रैल तक चलेगा। पहला चरण 13 फरवरी को समाप्त होगा। दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होगा। इससे पहले आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 को 29 जनवरी को लोकसभा में पेश किया जाएगा।
केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश करने की परंपरा 2017 से शुरू हुई थी, लेकिन रविवार को बजट पेश होना बहुत कम देखने को मिलता है। इससे पहले 28 फरवरी 1999 को तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने रविवार के दिन आम बजट पेश किया था। केंद्र सरकार ने 2017 में बजट की तारीख 28 फरवरी से बदलकर 1 फरवरी इसलिए की थी, ताकि नए वित्त वर्ष की शुरुआत यानी 1 अप्रैल से पहले ही फंड का सही तरीके से इस्तेमाल किया जा सके।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार जब बजट पेश करेंगी, तो यह उनका लगातार 9वां बजट होगा। इसके साथ ही वह पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के 10 बार बजट पेश करने के रिकॉर्ड के काफी करीब पहुंच जाएंगी। हालांकि, निर्मला सीतारमण पहले ही रिकॉर्ड बना चुकी हैं कि उन्होंने एक ही वित्त मंत्री के रूप में लगातार सबसे ज्यादा बजट पेश किए हैं।
-केंद्रीय मंत्री ने चार गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनने पर आयोजन को ऑनलाइन संबोधित किया
नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्वस्तरीय राजमार्ग परियोजना और बड़े पैमाने पर परियोजना क्रियान्वयन में वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
नितिन गडकरी ने आज आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में एनएच-544जी बेंगलुरु-कडप्पा-विजयवाड़ा आर्थिक गलियारा (कॉरिडोर) पर बनाए गए चार गिनीज विश्व रिकॉर्ड के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित किया। कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, एनएचएआई के अध्यक्ष संतोष यादव, सांसद पार्थसारथी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि भारत की इंजीनियरिंग क्षमता, नई तकनीकों के उपयोग और गुणवत्ता के साथ गति बढ़ाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और अनुबंधकर्ता राजपथ इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड को बधाई देते हुए कहा कि सरकार का मिशन लागत कम करते हुए गुणवत्ता में सुधार करना और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना है।उन्होंने कहा कि नवाचार, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के जरिए ज्ञान को संपदा में बदलना ही देश के भविष्य की दिशा तय करेगा और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति से असंभव को भी संभव किया जा सकता है।
गडकरी ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में सरकार लगातार नई तकनीकों का उपयोग कर रही है और गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि राजमार्ग निर्माण की गति लगातार बढ़े, लागत घटे और साथ ही पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी का संरक्षण भी सुनिश्चित हो। अलग-अलग प्रकार की नई सामग्री और नवोन्मेषी (इनोवेटिव) तकनीकों का उपयोग कर सड़क निर्माण को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बनाया जा रहा है। हाल ही में केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) और वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के वैज्ञानिकों ने धान की पराली से बिटुमेन बनाने में सफलता हासिल की है और इस तकनीक को 15 उद्योगों को पेटेंट के रूप में प्रदान किया जा चुका है। अब देश में पराली से बिटुमेन का उत्पादन शुरू हो गया है, जिससे प्रदूषण की समस्या कम होगी और किसानों को भी लाभ मिलेगा।
गडकरी ने कहा कि नवाचार, उद्यमिता, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के माध्यम से ज्ञान को संपदा में बदलना ही देश के भविष्य की दिशा तय करेगा। सरकार का स्पष्ट मिशन है कि निर्माण लागत को कम करते हुए गुणवत्ता में सुधार किया जाए और इसके लिए विश्व की सर्वश्रेष्ठ तकनीकों और सफल प्रयोगों को अपनाया जा रहा है। ऐसे रिकॉर्ड मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के बिना संभव नहीं होते। केंद्र सरकार की नीतिगत स्पष्टता, ठेकेदारों की प्रतिबद्धता और आंध्र प्रदेश सरकार तथा मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के सहयोग से यह ऐतिहासिक उपलब्धि संभव हो पाई है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की सोच हमेशा नए प्रयोगों, नई तकनीकों और विकासोन्मुख पहलों को प्रोत्साहित करने वाली रही है।
उल्लेखनीय है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने निर्माणाधीन एनएच-544जी बेंगलुरु–कडप्पा–विजयवाड़ा आर्थिक गलियारा (कॉरिडोर) पर कुल चार गिनीज विश्व रिकॉर्ड बनाए हैं। 6 जनवरी को आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी के पास पहले दो रिकॉर्ड स्थापित किए गए, जिनमें 24 घंटे के भीतर 28.89 लेन किलोमीटर या तीन लेन चौड़े 9.63 किलोमीटर लंबे खंड में बिटुमिनस कंक्रीट की सबसे लंबी लगातार बिछावट और 24 घंटे में 10,655 मीट्रिक टन बिटुमिनस कंक्रीट की सबसे अधिक मात्रा लगातार बिछाने का रिकॉर्ड शामिल है। दोनों रिकॉर्ड छह लेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के तहत पहली बार विश्व स्तर पर बनाए गए। इसके बाद 11 जनवरी को दो और गिनीज विश्व रिकॉर्ड बनाए गए, जिनमें 57,500 मीट्रिक टन बिटुमिनस कंक्रीट की निरंतर बिछावट और 156 लेन किलोमीटर या तीन लेन चौड़े 52 किलोमीटर लंबे खंड की लगातार पेविंग का रिकॉर्ड शामिल है। इस दौरान 84.4 लेन किलोमीटर या दो लेन चौड़े 42.2 किलोमीटर लंबे खंड के पिछले विश्व रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया गया। ये रिकॉर्ड बेंगलुरु–कडप्पा–विजयवाड़ा आर्थिक गलियारा (कॉरिडोर) के पैकेज-2 और पैकेज-3 में बनाए गए।
एनएचएआई ने कंसेशनर एमएस राजपथ इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर अत्याधुनिक निर्माण तकनीक और मशीनरी का उपयोग करते हुए यह उपलब्धि हासिल की। निर्माण कार्य में 70 टिप्पर, पांच गरम मिश्रण संयंत्र (हॉट मिक्स प्लांट), एक पेवर और 17 रोलर लगाए गए। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आईआईटी बॉम्बे सहित प्रमुख संस्थानों और मूल उपकरण निर्माता (ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स) द्वारा सख्त गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी की गई, जिससे सुरक्षा और गुणवत्ता के उच्चतम मानकों का पालन सुनिश्चित हुआ। 343 किलोमीटर लंबा यह प्रवेश-नियंत्रित (एक्सेस-कंट्रोल्ड) छह लेन आर्थिक गलियारा (कॉरिडोर) पूरा होने के बाद यात्रा दूरी को मौजूदा 635 किलोमीटर से घटाकर 535 किलोमीटर कर देगा और यात्रा समय को लगभग 12 घंटे से घटाकर करीब 8 घंटे कर देगा। यह गलियारा (कॉरिडोर) बेंगलुरु को विजयवाड़ा से जोड़ते हुए रायलसीमा क्षेत्र, आंध्र प्रदेश के तटीय और उत्तरी इलाकों तथा कोपार्थी औद्योगिक नोड के साथ संपर्क को मजबूत करेगा। एनएचएआई द्वारा बनाए गए ये गिनीज विश्व रिकॉर्ड देश में सुरक्षित, तेज़ और आधुनिक राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माने जा रहे हैं।