ग्रामीण क्षेत्रों में डाक सेवाओं  के सुधार को मोबाइल एप्लिकेशन शुरू 

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ग्रामीण क्षेत्रों में डाक सेवाओं की दक्षता और गुणवत्ता में सुधार के लिए, डाक विभाग ने सभी शाखा डाक घर कार्यालयों में मोबाइल एप्लिकेशन शुरू किया है। इसका नाम डिजिटल रूरल एंटरप्राइज एप्लीकेशन फॉर मोबाइल्स (डीआरईएएम) है। यह एप्लिकेशन हैंडहेल्ड डिवाइस के माध्यम से डाक वस्तुओं की बुकिंग और डिलीवरी को आसान बनाता है, रियल टाइम ट्रैकिंग को सक्षम बनाता है, सेवा डिलीवरी को तेज करता है, और विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में जवाबदेही बढ़ाता है।

इसके अलावा, देश भर में ग्रामीण क्षेत्रों सहित डाक वस्तुओं के प्रदर्शन को ट्रैक करने और मूल्यांकन करने के लिए मुख्य प्रदर्शन संकेतक (केपीआई) पेश किए गए हैं। इनकी निगरानी की जाती है, जिससे बेहतर निगरानी, ​​समय पर डिलीवरी और सेवा की गुणवत्ता में लगातार सुधार सुनिश्चित होता है।

मेल नेटवर्क ऑप्टिमाइज़ेशन प्रोजेक्ट (एमएनओपी) और पार्सल नेटवर्क ऑप्टिमाइज़ेशन प्रोजेक्ट (पीएनओपी) ने ग्रामीण क्षेत्रों सहित डाक प्रदर्शन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एमएनओपी के अंतर्गत, मेल नेटवर्क को तर्कसंगत बनाया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों सहित पूरे देश में डिलीवरी की गति में सुधार हुआ है।इस पहल ने ग्राहकों के लिए डाक वस्तुओं की दृश्यता को भी मजबूत किया है।

इसी तरह, पार्सल नेटवर्क ऑप्टिमाइज़ेशन प्रोजेक्ट (पीएनओपी) ने इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन, पार्सल प्रोसेसिंग को आसान बनाने और ऑपरेशनल कमियों को कम करके ग्रामीण इलाकों में सेवा वितरण को बेहतर बनाने में योगदान दिया है। स्टैंडर्डाइज़्ड इक्विपमेंट, नेटवर्क रैशनलाइज़ेशन और बेहतर ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम ने पार्सल सेवाओं की विश्वसनीयता और पहुंच को बढ़ाया है। विकास के इन घटनाक्रमों ने ई-कॉमर्स में ग्रामीण भागीदारी को बढ़ावा दिया है। इन्होंने ग्रामीण ग्राहकों को समय पर, कुशल और किफायती पार्सल सेवाएं सुनिश्चित की हैं, जिससे कुल मिलाकर ग्रामीण विकास और आर्थिक विकास में योगदान मिला है।

देश में 1.39 लाख से ज़्यादा सभी शाखा डाक कार्यालयों को घर-घर सेवा वितरण को संभव बनाने के लिए डिजिटल डिवाइस से लैस किया गया है। ये डिवाइस ग्राहकों के घर पर वित्तीय, नागरिक-केंद्रित और डाक सेवाएं प्रदान करने में मदद करते हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में पहुंच और सेवा का दायरा बढ़ता है।

डाक विभाग पोस्ट ऑफिस बचत खाता धारकों को ई-बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करता है। इनमें छोटी बचत योजना के खातों को डिजिटल रूप से खोलना, ऑनलाइन फंड ट्रांसफर, ब्याज प्रमाण पत्र बनाना और संबंधित सेवाएं शामिल हैं। ई-पासबुक सुविधा चुनिंदा पीओएसबी योजनाओं के लिए ऑनलाइन बैलेंस पूछताछ और मिनी स्टेटमेंट को सक्षम बनाती है। इसके अलावा, विभागीय डाक कार्यालयों में पीओएसबी खातों को खोलने, जमा, निकासी और अन्य संबंधित लेनदेन के लिए बायोमेट्रिक-आधारित eKYC शुरू किया गया है।

नोडल डिलीवरी सेंटर (एनडीसी) की स्थापना से पार्सल डिलीवरी की स्पीड में काफी सुधार हुआ है, ऑपरेशन की लागत कम हुई है और कस्टमर संतुष्टि बढ़ी है। एनडीसी में ज़रूरत पड़ने पर ग्रामीण इलाकों का वितरण क्षेत्र भी शामिल है। इससे इंडिया पोस्ट की सेवाओं पर, विशेष रूप से ग्रामीण समुदायों में भरोसा काफी बढ़ा है।

यह जानकारी संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने आज लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी।

‘ऋषि अगस्त्य वाहन अभियान’ काशी पहुंचा, नमो घाट पर हुआ भव्य स्वागत

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तमिल और भारतीय परंपरा की प्राचीन सभ्यागत यात्रा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से निकला सेज अगस्त्य व्हीकल एक्सपीडिशन (SAVE) काशी तमिल संगमम् 4.0 का प्रमुख आकर्षण—अपनी नौ दिवसीय यात्रा पूर्ण करते हुए 10 दिसंबर को वाराणसी स्थित नमो घाट पहुंचा। यह ऐतिहासिक कार रैली 2 दिसंबर को ‘दक्षिण काशी’ तिरुनेलवेली (तेनकासी) से प्रारंभ हुई थी और लगभग 2,460 किलोमीटर की दूरी तय कर तमिलनाडु से उत्तर भारत तक सांस्कृतिक, भाषाई और आध्यात्मिक एकात्म की अविच्छिन्न धारा की स्मृति को पुनर्जीवित करती आगे बढ़ी।

रैली में शामिल 15–20 वाहनों और लगभग 100 प्रतिभागियों का भव्य स्वागत मोहन सराय काशी द्वार पर किया गया, जहां एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने पुष्पवर्षा और माल्यार्पण कर अगवानी की। इसके बाद नमो घाट पर पहुँचने पर मंडलायुक्त, वाराणसी मण्डल, श्री एस. राजलिंगम (आईएएस) और जिलाधिकारी श्री सत्येन्द्र कुमार (आईएएस) ने दल का औपचारिक स्वागत किया।

मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने सेव टीम को संबोधित करते हुए कहा कि यह यात्रा न केवल तमिल और काशी की सांस्कृतिक निकटता का उत्सव है, बल्कि भारत की उस आध्यात्मिक एकता की जीवंत अनुभूति भी है। जिसने सदियों से उत्तर और दक्षिण को एक सूत्र में बांध रखा है। SAVE अभियान युवा पीढ़ी को हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का अद्भुत प्रयास है, और काशी इस ऐतिहासिक संगम की साक्षी बनकर गौरवान्वित है।

यात्रा के दौरान प्रतिभागियों ने चेरा, चोल, पांड्य, पल्लव, चालुक्य और विजयनगर जैसे महान राजवंशों की संस्कृति, वास्तुकला और ज्ञान–परंपराओं की विरासत से जुड़े स्थलों का अध्ययन करते हुए स्थानीय समुदायों से संवाद स्थापित किया। कारवां ने तमिल प्रदेश से लेकर उत्तर भारत तक फैली हुई सभ्यागत निरंतरता, कलात्मक परंपराओं, शिल्प, साहित्य एवं सिद्ध चिकित्सा परंपराओं के जीवंत सूत्रों को खोजने और दस्तावेजीकृत करने का कार्य किया। 

मोहन सराय काशी द्वार पर एम. एल. सी.  हंसराज विश्वकर्मा रैली का स्वागत के बाद कहा कि
 यात्रा का एक महत्वपूर्ण आयाम पांड्य राजा ‘आदि वीर पराक्रम पांडियन’ की उस ऐतिहासिक परंपरा को भी स्मरण करना था, जिन्होंने उत्तर भारत की यात्रा कर सांस्कृतिक एकता का संदेश फैलाया और शिव मंदिर की स्थापना की—इसी प्रसंग से तेनकासी को “दक्षिण काशी” नाम की व्युत्पत्ति जुड़ी मानी जाती है।

इस अवसर पर अधिकारियों एवं विशिष्ट अतिथियों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की उस दृष्टि को रेखांकित किया, जिसमें भाषा, संस्कृति और क्षेत्रीय विभेदों के नाम पर उत्पन्न भ्रांतियों को दूर करते हुए भारत की सांस्कृतिक एकता को पुनः जागृत करने का आह्वान किया गया है।

इंडिया पोस्ट नेटवर्क के महत्वपूर्ण विस्तार और आधुनिकीकरण पर प्रकाश डाला

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संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा को संबोधित करते हुए विश्व के सबसे बड़े डाक नेटवर्क, इंडिया पोस्ट को मजबूत और आधुनिक बनाने में हुई महत्वपूर्ण प्रगति की रूपरेखा प्रस्तुत की।

श्री सिंधिया ने बताया कि भारतीय डाक वर्तमान में देशभर में 1.64 लाख डाकघरों का संचालन कर रही है, जिन्हें 2.78 लाख समर्पित ग्रामीण डाक सेवकों (जीडीएस) का सहयोग प्राप्त है। उनकी अमूल्य सेवा को स्वीकार करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ग्रामीण डाक सेवक दिन-रात न केवल कामकाज के लिए, बल्कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक भावनाओं को पहुंचाने के लिए भी अथक परिश्रम करते हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हासिल किए गए परिवर्तन पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने पिछले 11 वर्षों में इंडिया पोस्ट को मजबूत करने पर व्यापक रूप से ध्यान केंद्रित किया है। प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं:

  • पिछले साढ़े तीन वर्षों में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों में 4,903 नए डाकघरों का निर्माण किया गया है।
  • बैंकिंग सुविधाओं से वंचित गांवों में 5,746 डाकघरों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 5,657 (97 प्रतिशत) पहले ही खोले जा चुके हैं।
  • पिछले 11 वर्षों में राष्ट्रीय नेटवर्क में कुल 10,170 डाकघरों का विस्तार किया गया है।
  • डाकघर भवनों के निर्माण और नवीनीकरण के लिए 405 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जिसमें 49 विरासत डाकघर भी शामिल हैं, जिन्हें भारतीय डाक के संस्थागत रत्न माना जाता है।

सिंधिया ने इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि पर्याप्त प्रगति हासिल की गई है, लेकिन इंडिया पोस्ट के स्वामित्व वाले शेष 25,000 डाकघरों के नवीनीकरण के लिए अतिरिक्त धन की आवश्यकता होगी।

भविष्य की ओर बढ़ते हुए, केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि इंडिया पोस्ट संचालन को आधुनिक बनाने और सुव्यवस्थित करने के लिए एक व्यापक बिजनेस प्रोसेस री-इंजीनियरिंग (बीपीआर) पहल शुरू कर रहा है। इससे प्रथम-मील, मध्य-मील और अंतिम-मील वितरण प्रणालियों में सुधार होगा , जिससे करोड़ों नागरिकों के लिए ये प्रणालियाँ तेज़, अधिक सेवा-उन्मुख और डिजिटल रूप से सक्षम बनेंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि इंडिया पोस्ट स्वचालन को अपना रहा है और दुनिया के अग्रणी लॉजिस्टिक्स वाहकों में से एक के रूप में उभरने के लिए वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन कर रहा है।

सरकार डाक नेटवर्क को मजबूत करने, सेवा वितरण को बेहतर बनाने और इंडिया पोस्ट को देश के लिए एक आधुनिक, प्रौद्योगिकी-संचालित लॉजिस्टिक्स पावरहाउस में परिवर्तित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

वायु सेना स्टेशन मोहनबाड़ी में 1971 युद्ध विजय दिवस समारोह का आयोजन

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भारतीय वायु सेना ने असम के मोहनबाड़ी वायु सेना स्टेशन में 1971 के युद्ध में भारत की जीत की स्मृति में एक कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता और शौर्य को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, वरिष्ठ सैन्य और असैन्य गणमान्य व्यक्ति, पूर्व सैनिक और असम के बड़ी संख्या में युवा इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

एसयू-30 एमकेआई, सी-130, डोर्नियर, एएन-32, चिनूक, एमआई-17, एएलएच और चीता विमानों द्वारा हवाई प्रदर्शन में 1971 के युद्ध के प्रमुख मिशनों पुनर्मंचन किया गया, जिसमें तंगेल एयरड्रॉप, मेघना नदी पार करना और ढाका में सरकारी भवन पर हमला शामिल था। इस प्रदर्शन ने भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमता और मिशन तत्परता को प्रदर्शित किया।

इस अवसर पर ‘1971 के युद्ध के दौरान वायु अभियान’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें वायु सेना के पूर्व सैनिकों ने युद्ध में अपनी भागीदारी से संबंधित किस्से और अनुभव साझा किए। ‘ट्रायम्फ फ्रॉम द स्काई-71’ नामक एक प्रदर्शनी में युद्ध के समय की तस्वीरों का एक दुर्लभ संग्रह प्रदर्शित और इसमें भारत की निर्णायक जीत का प्रतीक औपचारिक लौ ‘स्वर्णिम विजय मशाल’ की एक प्रतिकृति भी शामिल थी।

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वायु अधिकारी कमान प्रमुख, एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा ने फरीदाबाद वायुसेना स्टेशन का दौरा किया

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भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के पश्चिमी वायु कमान (डब्ल्यूएसी) के वायु अधिकारी कमान प्रमुख (एओसी-इन-सी) एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा ने 10 दिसंबर 2025 को वायु सेना स्टेशन फरीदाबाद का दौरा किया। कमान प्रमुख का स्वागत स्टेशन कमांडर, ग्रुप कैप्टन वी विश्वनाथन ने किया और उन्हें स्टेशन द्वारा की गई परिचालन तैयारियों और कल्याणकारी पहलों के बारे में जानकारी दी गई।

एयर फ़ोर्स के 9 स्कूल में आयोजित 80वें विस्फोटक पहचान (ईडी) डॉग कोर्स की पासिंग आउट परेड का निरीक्षण कमान प्रमुख ने किया। ये नव उत्तीर्ण कुत्ते अब विभिन्न परिचालन इकाइयों में सुरक्षा अभियानों के लिए तैनात किए जाएंगे। कमान प्रमुख ने विस्फोटक पहचान के लिए इन कुत्तों को प्रशिक्षित करने हेतु अनुकरणीय मानकों और नवीन विधियों को अपनाने के लिए स्कूल की सराहना की।

इस दौरे के दौरान, कमान प्रमुख ने प्रमुख परिचालन लॉजिस्टिक्स स्थलों का दौरा कर उनकी कार्यक्षमता और परिचालन इकाइयों को कुशल लॉजिस्टिक्स सहायता प्रदान करने की तत्परता का आकलन किया। उन्होंने भंडारण और भंडारण की प्रभावशीलता की समीक्षा की और अल्प सूचना पर परिचालन सहायता प्रदान करने के लिए हमेशा तत्पर रहने की आवश्यकता पर बल दिया।

जैसे-जैसे भारतीय वायु सेना अपनी हवाई युद्ध और निगरानी क्षमताओं का आधुनिकीकरण और उन्नयन जारी रखती है, इस तरह की दौरे रसद संबंधी तैयारियों का मूल्यांकन करने, परिचालन संबंधी चुनौतियों का समाधान करने और बल की तत्परता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

राष्ट्रपति का 11 से 12 दिसंबर का मणिपुर का दौरा

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राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 11 और 12 दिसंबर, 2025 को मणिपुर का दौरा करेंगी।

11 दिसंबर को मणिपुर की राजधानी इम्फाल पहुंचने पर राष्ट्रपति को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। इसके बाद वे ऐतिहासिक मापल कांगजेइबुंग में पोलो प्रदर्शनी मैच देखने जाएंगी। उसी शाम, मणिपुर सरकार की ओर से इम्फाल के सिटी कन्वेंशन सेंटर में उनके सम्मान में आयोजित एक नागरिक स्वागत समारोह में राष्ट्रपति शामिल होंगी। इस अवसर पर वे विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगी और उनका उद्घाटन करेंगी।

12 दिसंबर को राष्ट्रपति इम्फाल स्थित नुपी लाल स्मारक परिसर का दौरा करेंगी और मणिपुर की वीर महिला योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगी। बाद में, वे सेनापति में एक जनसभा को संबोधित करेंगी, जिसमें वे जिले के लिए विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगी और उनका उद्घाटन करेंगी।

आज भारतीय संसद के शीतकालीन सत्र में फिर से हंगामा और तीव्र बहस का माहौल रहा

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आज भारतीय संसद के शीतकालीन सत्र में फिर से हंगामा और तीव्र बहस का माहौल रहा। दोनों सदनों — लोकसभा और राज्यसभा — में राजनीतिक तेज़ी दिखी, विशेष रूप से चुनाव सुधार और मतदाता-सूची (वोटर लिस्ट) से जुड़े मसलों पर। विपक्षी दलों ने पुरानी पार्टियों और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए, वहीं सरकार की ओर से बड़े सुधार व विकास संबंधी दावों के साथ जवाब दिए गए। कुल मिलाकर, आज की कार्यवाही ने यह दिखा दिया कि संसद का शीतकालीन सत्र सिर्फ औपचारिक प्रक्रियाओं का मंच नहीं, बल्कि राजनीतिक गतिशीलता और विवादों का मैदान भी है।


आज राज्यसभा में सत्र की शुरुआत के साथ ही एक औपचारिक, प्रतीकात्मक पहलू रहा — सदन ने 1948 में अपनाई गई Universal Declaration of Human Rights (सर्व-मानव अधिकार घोषणापत्र) की 77वीं वर्षगांठ पर संक्षिप्त श्रद्धांजलि दी।

इसके बाद सदन ने धीरे-धीरे अपनी मुख्य गतिविधियों की ओर बढ़ना शुरू किया। इस दौरान, राजनीतिक गर्माहट तब बढ़ी जब एक सांसद (कहा जा रहा है कि आदित्य प्रसाद नामक सांसद) ने बिना पर्याप्त कारण अपने स्टार्ड प्रश्‍न (starred question) को वापस ले लिया। इस फैसले पर विपक्ष ने तीखी आपत्ति जताई — और तब तक संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर उन्होंने वॉकआउट कर दिया।

वॉकआउट और विरोध-प्रदर्शनों की वजह से सदन की गरिमा और उसकी प्रक्रियात्मक शुद्धता पर सवाल उठे। विपक्ष का कहना था कि प्रश्न वापस लेने का यह फैसला पारदर्शिता के खिलाफ है, और इससे जनता के सामने जवाबदेही की प्रक्रिया कमजोर होती है। वहीं सरकार या समर्थक सांसदों की ओर से इस बारे में कोई स्पष्ट सार्वजनिक बयान आज देखने को नहीं मिला — जिससे सदन में असमंजस और असंतोष की स्थिति बनी।

इस विवाद के बीच, अन्य प्रस्तावों, निजी सदस्यों के बिल, या अन्य पैकेज्ड एजेंडा पर चर्चा न हो पाई — कम से कम आज नहीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कारण राज्यसभा की वास्तविक विधायी कार्यवाही बाधित रही।

राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर के बाद कुछ समय के लिए स्थगित भी रही — ताकि परिस्थितियों पर दोबारा विचार किया जा सके।

कुल मिलाकर, आज राज्यसभा में ना तो कोई महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुआ, ना कोई नई बड़ी शुरुआत देखने को मिली — बल्कि पुरानी प्रक्रियाओं, प्रश्न-उत्तर और पारदर्शिता के मुद्दों ने सदन की छवि को कुछ धुमिल किया। यदि विपक्ष ने अपना वॉकआउट जारी रखा, और सरकार ने उचित स्पष्टीकरण नहीं दिया, तो यह उस लोकतांत्रिक संस्था के लिए चिंताजनक संकेत है जो जवाबदेही, पारदर्शिता और जन-हित के फैसलों की प्रतिनिधि होती है।

आज की यह स्थिति दर्शाती है कि राज्यसभा — जो कि theoretically विचार-विमर्श, समीक्षा और संतुलन का घर है — राजनीतिक कलह और आरोप-प्रत्यारोप की चपेट में आने पर अपना मूल उद्देश्य खो सकती है। प्रतिनिधि-जनतंत्र के इस महत्त्वपूर्ण अंग को सिर्फ राजनीतिक नाटकों के लिए इस्तेमाल करना लोकतंत्र के लिए आत्मघात जैसा हो सकता है।


आज लोकसभा में सत्र की मुख्य शुरुआत हुई चुनाव सुधार (electoral reforms) और मतदाता-सूची (voter list / मतदाता सूची) से जुड़ी बहस के साथ। यह बहस पिछले दिनों से जारी थी, और आज उसके दूसरे दिन कई नेताओं ने अपनी बात रखी — जिसमें प्रमुख वकील, विपक्षी व समर्थक सांसद दोनों शामिल थे।

सुबह की शुरूआत में ही, कुछ सांसदों ने भूपेश बघेल के हवाले से आरोप लगाए कि चुनाव आयोग की कार्यशैली निष्पक्ष नहीं रही — और कई उदाहरणों से यह साबित हो चुका है। वहीं, सरकार समर्थक सांसदों ने यह तर्क दिया कि पिछले 10 वर्षों में पुरानी, ब्रिटिश कालीन कई कानूनी व्यवस्थाओं को हटाया गया है, और नई व्यवस्था जनता के हित में लाई गई है।

दोपहर होते-होते, चर्चा का मुख्य मोड़ आया जब अमित शाह — देश के गृह मंत्री — सदन में अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए। उन्हें शाम करीब 5 बजे के आस-पास बोलना तय था।

उनकी ओर से सरकार की ओर से प्रस्तावित चुनाव सुधारों की रूप-रेखा, मतदाता-पंजीकरण, मतदाता-तालिका की पारदर्शिता, और भविष्य के लिए चुनाव प्रक्रिया में सुधार संबंधित दावे पेश किए जाने की उम्मीद थी। यह बहस न सिर्फ कानूनी सुधारों तक सीमित थी, बल्कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप, अतीत के दावों और वर्तमान परिस्थितियों का मिश्रण थी।

विपक्ष,के नेताओं ने भ्रष्टाचार, मतदाता-चोरी, और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर जोरदार आरोप लगाये। इनमें से कुछ आरोपों को लेकर सदन में माहौल तनावपूर्ण रहा।

साथ ही आज लोकसभा में पहले हुई चर्चा — जिसमें गिनती, मतदाता-सूची, मतदाता अधिकार, और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता शामिल थे — उसे आगे बढ़ाने की कोशिश की गई। किन्तु, बहस के दौरान कई बार व्यवधान भी हुआ, विरोध-प्रदर्शन हुए, और सदन की गरिमा भी सवालों के घेरे में रही।

आखिर में, शाम करीब सात बजे, सदन अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही अगले दिन के लिए स्थगित कर दी।

आज लोकसभा की कार्यवाही का सार यह था कि चुनाव सुधार — एक संवेदनशील, महत्वपूर्ण और भविष्य तय करने वाला मसला — एक बार फिर केन्द्र में आ गया। लेकिन जिस तरह से आरोप-प्रत्यारोप, आरोपों की राजनीति और विरोध-विग्रह चले, उससे राजनीतिक दलीय स्वार्थ, रंगभेद, और संदेह की हवा महसूस हुई।

यदि सरकार और विपक्ष पारदर्शिता, तथ्य-आधारित बहस और लोकतंत्र की मर्यादा का ध्यान रखे, तो सुधार संभव है। लेकिन आज की कार्यवाही ने यह दिखाया कि जब राजनीति और सत्ता का मसला जुड़ जाए, तो लोकतंत्र के उन स्तंभों — जैसे सम्मान, जवाबदेही, जनहित — की नींव हिल सकती है।


निष्कर्ष

आज का दिन — राज्यसभा और लोकसभा दोनों के लिए — संकेत देता है कि भारत की संसद सिर्फ विधायी संस्था नहीं रही, बल्कि राजनीति, संदेह, संघर्ष और संवेदनशील बहस का मैदान भी है।

राज्यसभा में सवालों के वापस लिए जाने और वॉकआउट ने उस सदन की समीक्षा-प्रधान भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए।

लोकसभा में चुनाव सुधार बहस ने देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया, मतदाता-पंजीकरण, और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर तीखी बहस को जन्म दिया।

यदि लोकतंत्र की नींव मजबूत करनी है — जवाबदेही, पारदर्शिता, और जनता की आवाज़ को प्राथमिकता देनी है — तो सिर्फ बहस ही नहीं, बल्कि सही नियत, जिम्मेदारी और मर्यादा की भी ज़रूरत है। (जैमिनी)

राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन ने 1,469 फिल्मों का डिजिटलीकरण किया

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सरकार पुरानी फिल्मों के संरक्षण और डिजिटलीकरण के लिए राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन को लागू कर रही है।अब तक 1,469 फिल्मों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है, जिनकी कुल अवधि 4.3 लाख मिनट है। इनमें फीचर फिल्में, लघु फिल्में और वृत्तचित्र शामिल हैं। डिजिटलीकृत और पुनर्स्थापित फिल्मों का संरक्षण भारतीय राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार द्वारा किया जाता है और ये उनकी वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

भारत सरकार बांग्‍ला सहित सभी भारतीय भाषाओं में फिल्म निर्माताओं को सहायता प्रदान करती है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय  फिल्म सामग्री के विकास, संचार एवं प्रसार (डीसीडीएफसी) नामक अपनी योजना के माध्यम से फिल्मों के निर्माण और प्रचार के लिए वित्तीय और अन्य सहायता प्रदान करता है।

इससे क्षेत्रीय फिल्मों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचने में मदद मिलती है।

सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने आज लोकसभा में श्री नारायण तातु राणे और श्री सौमित्र खान द्वारा उठाए गए एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी साझा की।

केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और श्री सत्य नडेला की उपस्थिति में माइक्रोसॉफ्ट के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

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श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया तथा माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ श्री सत्य नडेला की उपस्थिति में माइक्रोसॉफ्ट के साथ एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए । यह सहयोग रोजगार संबंधों को व्यापक बनाने, एआई आधारित कौशल विकास को बढ़ावा देने और भारत के कार्यबल को वैश्विक अवसरों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस साझेदारी की एक प्रमुख विशेषता माइक्रोसॉफ्ट की यह प्रतिबद्धता है कि वह अपने व्यापक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से 15,000 से अधिक नियोक्ताओं और भागीदारों को मंत्रालय के राष्ट्रीय करियर सेवा (एनसीएस) प्लेटफॉर्म पर आने के लिए प्रोत्साहित करेगी । इससे रोजगार के अवसर काफी व्यापक होंगे, उच्च विकास वाले क्षेत्रों को समर्थन मिलेगा और भारत न केवल घरेलू मांग बल्कि विश्व के लिए भी कुशल कार्यबल विकसित करने में सक्षम होगा, जिससे भारतीय पेशेवरों और युवाओं की अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता के मार्ग मजबूत होंगे !

स समझौता ज्ञापन के तहत डिजीसक्षम के माध्यम से एआई-आधारित कौशल विकास पहलों का विस्तार किया जाएगा, जिससे लाखों युवाओं को एआई, क्लाउड टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा और उत्पादकता उपकरणों में भविष्य के लिए तैयार क्षमताएं मिलेंगी। ये प्रयास वैश्विक मानकों और उभरती उद्योग आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यबल के निर्माण में योगदान देंगे।

केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इस साझेदारी का स्वागत करते हुए कहा कि यह भारत के अनुकूल जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, डिजिटल रूप से कुशल तथा भविष्य के लिए तैयार कार्यबल बनाने की साझा महत्वाकांक्षा को दर्शाती है । उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि माइक्रोसॉफ्ट की भागीदारी से रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे, कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक श्रम गतिशीलता में भारत का नेतृत्व मजबूत होगा।

भारत-रूस के रिश्तों की अहमियत!

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एम ए कंवल जाफरी

रूस के राष्ट्रपति के दो दिवसीय भारत दौरे को इसलिए भी याद रखा जाएगा कि अमेरिका व कई यूरोपीय देशों के जबरदस्त दबाव और दुनिया में व्याप्त शदीद तनाव के बावजूद व्लादिमीर पुतिन का भारत में बड़ी गर्मजोशी से स्वागत किया गया। दौरे की अहमियत का अंदाजा इसी से हो जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रॉटोकॉल को दरकिनार कर स्वयं पालम एयरपोर्ट पहुंचे और गले लगाकर पुतिन का इस्तकबाल किया। इससे पहले वह दिसंबर 2021 में मात्र छह घंटे के लिए भारत आए थे। सदी के अहम दौरों में से एक इस हालिया दौरे से दुनिया की सियासत में एक नई कूटनीतिक गूंज पैदा हुई। पीएम मोदी ने दिल्ली के मास्को के साथ ऐतिहासिक रिश्तों को ध्रुव तारे के समान सशक्त और अटल करार दिया। पुतिन के भारत आगमन और 23 वें रूस-भारत शिखर सम्मेलन में लिए गए फैसलों से न केवल दोनों देशों के संबंधों में बेहतरी आई, बल्कि इससे विश्व पटल पर यह संदेश भी गया कि रूस और भारत किसी की परवाह किए बिना बड़ी बेबाकी से एक दूसरे के साथ खड़े हैं। दोनों के बीच यह दोस्ती कोई नई या अस्थाई नहीं है, बल्कि पुरानी और मजबूत है। यह मित्रता तब भी कायम थी, जब रूस संयुक्त सोवियत संघ था और आज भी सशक्त है जब वह रूस है। इस शानदार और मजबूत रिश्ते की बुनियाद दशकों की कड़ी मेहनत और ईमानदारी का परिणाम है।
दरअसल, अमेरिका समेत कई देश चाहते हैं कि भारत, रूस के साथ अपने संबंध कम कर दे, जबकि नई दिल्ली के शिखर सम्मेलन की गुफ्तुगू ने एक बार पुनः सिद्ध कर दिया कि भारत की विदेश नीति पूरी तरह से स्वतंत्र है और आगे भी स्वतंत्र रहेगी। भारत हित में आर्थिक और कूटनीतिक फैसले लिए जाते रहेंगे। मतलब साफ कि भारत अमेरिका के भारी दबाव और बढ़ाए टैरिफ की परवाह किए बिना रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा। भारत को तेल आपूर्ति करने वाले देशों में रूस पहले स्थान पर है। भारत अपनी खरीद का एक तिहाई से अधिक करीब 1.6 मिलियन बैरल तेल रोजाना रूसी तेल कंपनियों से खरीदता है। दूसरी ओर यह बात भी काफी विचित्र है कि अमेरिका स्वयं तो रूस से ईंधन खरीदने का अधिकार रखे और भारत पर तेल नहीं खरीदने का दबाव बनाए। मोदी ने हैदराबाद हाउस में कहा कि पिछले आठ दशकों की चुनौतियों के बावजूद रूस और भारत की मित्रता शाब्दिक नहीं, बल्कि हकीकत पर आधारित है। शिखर सम्मेलन में विजन 2030 रोडमैप की घोषणा हुई, जिसका लक्ष्य वार्षिक व्यापार को 2030 तक बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक ले जाना है। पुतिन के दौरे से भारत को रक्षा सहयोग में बढ़ोतरी, आर्थिक संबंधों में मजबूती, ऊर्जा क्षेत्र में सहभागिता और विज्ञान एवं तकनीकी जैसे क्षेत्रों में फायदा हुआ। विशेषकर रक्षा एवं परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल हुईं। इससे भारत की रक्षा क्षमताएं बढ़ीं और स्ट्रेटेजिक रिश्ते मजबूत हुए। भारत को एस-400 मिसाइल प्रणाली और अन्य हथियार समेत आधुनिक रक्षा प्रणाली की सप्लाई जारी रखने का वादा किया गया। भारत में न्यूक्लियर पावर प्लांट निर्माण समेत न्यूक्लियर एनर्जी प्रोजेक्ट्स में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। तेल, गैस और कोयले में सहयोग बढ़ाने और समय पर आपूर्ति का वादा किया गया। रक्षा, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों समेत द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के उपायों पर विचार के अलावा अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने का फैसला लिया गया। वायु रक्षा, हाईटेक विमान, अंतरिक्ष अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमतता और वैज्ञानिक परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने के समझौते हुए। सिविल न्यूक्लियर क्षेत्र में कुडनकुलम प्लांट के छह रिएक्टर की पूर्ति, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर और तैरते न्यूक्लियर पावर प्लांट्स पर सहयोग को साझी प्राथमिकता बताया गया। यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ व्यापारिक समझौते, प्रवास, बंदरगाहांे, जहाजरानी, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य रूपरेखा पर हस्ताक्षर किए गए। पांच लाख भारतीय अर्द्ध कुशल श्रमिक के रूस जाने को आसान बनाया गया। सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती के लिए रूसी नागरिकों को 30 दिनी निःशुल्क ई-टूरिस्ट और ग्रुप वीजे की घोषणा की गई। दोनों नेताओं की बैठक और समझौतों में जहां शानदार भविष्य की झलक मौजूद है, वहीं साझेदारी, स्थिरता और आत्मविश्वास की दुनिया में राजनीति, संस्कृति, ऊर्जा, परमाणु विज्ञान और मानव संसाधन क्षेत्र में सशक्त दोस्ती की संभावना है।
वर्तमान परिस्थितियों में जहां कुछ देश अपने रवैये में तब्दीली लाने को तैयार नहीं हैं, वहीं भारत को भी यह समझने की जरूरत है कि उसके साथ कौन देश खड़ा है? रूस और भारत के बीच परमाणु, ऊर्जा, तकनीकी, सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान प्रदान में वद्धि हो रही है। उन्हें रक्षा क्षेत्र में भी एक साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। भारत आतंक, उग्रवाद, सरहद पार सुनियोजित अपराध, मनीलांड्रिंग, आतंकवाद की वित्तीय सहायता और ड्रग्स की तस्करी जैसी चुनौतियों और खतरों से निपटने के लिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाने का इच्छुक है। भारत शांति का पक्षधर है। शांति बहाली पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। युद्ध से रूस दुनिया में अकेला पड़ गया तथा उसके विकास पर नकारात्मक प्रभावित पड़ा। इस कारण भारत को रक्षा एवं दूसरे उत्पादों की आपूर्ति में देरी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, पश्चिमी देशों की रूस को अलग-थलग करने की नीति सफल नहीं रही। भारत, चीन, अफ्रीका और पश्चिमी एशिया के दक्षिणी देशों में पुतिन का स्वागत इस बात का प्रमाण है कि जिन देशों का रूस ने साथ दिया, वे आज उसके साथ खड़े हैं। एक शांतिपूर्ण और विकसित भारत के लिए एक शांतिपूर्ण और विकसित रूस जरूरी है।
दोनों देशों के बीच व्यापार में बड़ा बदलाव आया है। पांच वर्ष पहले जो व्यापार आठ बिलियन डॉलर था, वह बढ़कर 68 बिलियन डॉलर हो गया है। दुनिया के सियासी मंज़रनामे में बदलाव प्राकृतिक प्रक्रिया है। रूस व चीन के रिश्ते बेहतर हुए। अमेरिका, भारत पर जिस तरह का दबाव बनाने की मुहिम में लगा है, उसे देखते हुए रूस और भारत के बीच रिश्तों की मजबूती बहुत जरूरी थी। पुतिन के दौरे की एक अच्छी बात यह रही कि वह अकेले नहीं आए, उनके साथ बड़ी संख्या में रूसी नागरिक और व्यापारी भी आए, जो भारत के साथ जुड़ना और व्यापार बढ़ाना चाहते हैं। इससे पता चलता है कि रूस लोगों के बीच संबंध बढ़ाने का इच्छुक है। भारत ने भी लोगों के आपसी जुड़ाव के मामले में सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उम्मीद की जानी चाहिए कि दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे।

एम ए कंवल जाफरी

वरिष्ठ पत्रकार