बीएसई−एनएसई के बाद देश को मिलेगा तीसरा स्टॉक एक्सचेंज एमएसई

0

बीएसई और एनएसई के बाद अब देश को मिलेगा तीसरा स्टॉक एक्सचेंज एमएसई

– अगले दो सप्ताह में मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज शुरू हो सकती है एक्टिव ट्रेडिंग

नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स.)। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के बाद अब देश को जल्दी ही मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज (एमएसई) के रूप में एक तीसरा स्टॉक एक्सचेंज मिलने वाला है। माना जा रहा है कि अगले दो सप्ताह में मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज में एक्टिव ट्रेडिंग की शुरुआत हो सकती है। जानकारी के अनुसार मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए इस एक्सचेंज में खास योजना तैयार की गई है, जिसके तहत फिलहाल मार्केट मेकर्स की नियुक्ति की जा रही है। इस एक्सचेंज के जरिए फिलहाल 130 शेयरों के लिए लिक्विडिटी देने की तैयारी की गई है।

मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज (एमएसई) के एक्टिव होने का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। शुरुआती कारोबार के लिए एमएसई ने दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में दो चरणों में 1,240 करोड़ रुपये जुटाए हैं। मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज में ग्रो और जेरोधा जैसी प्रमुख ब्रोकरेज फर्म ने मुख्य रूप से निवेश किया है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज (एमएसई) के लिए बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के मुकाबले खड़ा होना आसान नहीं होगा‌। फिलहाल बीएसई और एनएसई की पकड़ काफी मजबूत बनी हुई है। इसलिए एमएसई के लिए इसको तत्काल चुनौती देना आसान नहीं होगा। कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान का मानना है कि बीएसई और एनएसई की मजबूत पकड़ के साथ ही फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सेगमेंट में मार्केट रेगुलेटर सेबी के नियम भी एमएसई के लिए मुश्किल बढ़ाने का काम करेंगे।

सेबी के नियमों के अनुसार फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में वीकली एक्सपायरी मंगलवार और गुरुवार को होती है। फिलहाल इसमें बदलाव का कोई प्रस्ताव नहीं है। मौजूदा व्यवस्था में निफ्टी की एक्सपायरी मंगलवार को होती है, जबकि सेंसेक्स की एक्सपायरी गुरुवार को होती है। अगर सेबी के नियमों में बदलाव नहीं हुआ, तो एमएसई को भी एक्सपायरी के लिए मंगलवार या गुरुवार में से किसी एक दिन का चयन करना होगा। ऐसी स्थिति में एमएसई के लिए डेरिवेटिव्स में पकड़ बना पाना आसान नहीं होगा।

दिल्ली स्टॉक एक्सचेंज, कोलकाता स्टॉक एक्सचेंज, मगध स्टॉक एक्सचेंज जैसे छोटे स्टॉक एक्सचेंजों का दौर खत्म होने के बाद अब देश में स्टॉक मार्केट की लगभग पूरी गतिविधि बीएसई और एनएसई के जरिए ही होती है। जहां तक मार्केट शेयर की बात है, तो फिलहाल एनएसई के पास सबसे अधिक हिस्सेदारी है। कैश में एनएसई की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से अधिक है। वहीं स्टॉक फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में इसकी हिस्सेदारी 95 प्रतिशत है, जबकि इंडेक्स फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में एनएसई की हिस्सेदारी लगभग 80 प्रतिशत है। दूसरी ओर, कैश में बीएसई की हिस्सेदारी 9 से 10 प्रतिशत के बीच है। स्टॉक फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में बीएसई की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत तथा इंडेक्स फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता:योगी

0

मुख्यमंत्री का निर्देश, अपरिहार्य होने पर ही वृक्षों की कटान हो, जितने वृक्ष कटें उससे अधिक पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए

एनएचएआई सड़क परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा, समन्वय और समयबद्ध निस्तारण के निर्देश

जिलाधिकारी साप्ताहिक एवं मुख्य सचिव पाक्षिक समीक्षा कर परियोजनाओं को समय से पूर्ण कराएं: मुख्यमंत्री

भूमि अधिग्रहण के लिए किसानों से सीधा संवाद करें, बिचौलियों का हस्तक्षेप न हो: मुख्यमंत्री

लखनऊ, 12 जनवरी:-
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास प्रदेश की अनिवार्य आवश्यकता है, किंतु यह पर्यावरण की कीमत पर नहीं हो सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वर्ष प्रदेश में 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है तथा सरकार की नीति है कि किसी भी परियोजना में अपरिहार्य स्थिति में ही वृक्षों की कटान की जाए और जितने वृक्ष कटें, उससे अधिक संख्या में पौधरोपण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए, ताकि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बना रहे।

मुख्यमंत्री सोमवार को प्रदेश में संचालित एवं प्रस्तावित भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की विभिन्न सड़क परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलावार समीक्षा करते हुए उन्होंने एनएचएआई के स्थानीय अधिकारियों एवं जिला प्रशासन के बीच बेहतर, सतत और प्रभावी समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि प्रत्येक जनपद के जिलाधिकारी एनएचएआई परियोजनाओं की साप्ताहिक समीक्षा सुनिश्चित करें। जहां भी किसी स्तर पर कोई विषय लंबित हो, उसे मुख्य सचिव की सोमवारीय समीक्षा बैठक में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत कर समयबद्ध निस्तारण किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि मुख्य सचिव स्वयं इन परियोजनाओं की पाक्षिक समीक्षा करें, जिससे कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो और निर्णय शीघ्रता से लिए जा सकें।

भूमि अधिग्रहण से संबंधित विषयों पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सीधे किसानों से संवाद स्थापित किया जाए। किसी भी स्थिति में बिचौलियों को हस्तक्षेप का अवसर न मिले, ताकि किसानों के हित सुरक्षित रहें और परियोजनाएं पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क परियोजनाएं प्रदेश के आर्थिक विकास, औद्योगिक विस्तार और आमजन की सुविधा से सीधे जुड़ी हैं। अतः सभी कार्य गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पूर्ण किए जाएं, जिससे उत्तर प्रदेश में सुदृढ़ कनेक्टिविटी के माध्यम से विकास को नई गति मिल सके।

उज्जैन में पहली बार महाकाल महोत्सव, सीएम 14 को करेंगे शुभारंभ

0

– महाकाल महालोक में आयोजित पांच दिवसीय महोत्सव के पहले दिन शंकर महादेवन अपने बेटों के साथ देंगे प्रस्‍तुति

भोपाल, 12 जनवरी (हि.स.)। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन एक बार फिर भारतीय संस्कृति, कला और अटूट श्रद्धा के महोत्सव की साक्षी बनने जा रही है। यहां पहली बार श्री महाकल महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 14 जनवरी को शाम 7 बजे श्री महाकाल महालोक में इस पांच दिवसीय ‘ महोत्सव’ का शुभारंभ करेंगे।

वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने सोमवार को बताया कि 18 जनवरी 2026 तक चलने वाला यह महोत्सव श्री महाकाल महालोक और त्रिवेणी संग्रहालय के प्रांगण में कला, संगीत और वैचारिक विमर्श का अनूठा संगम होगा। इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी, राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ महाराज सहित जन-प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। वीर भारत न्यास और श्रीमहाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के संयुक्त तत्वावधान में यह महोत्सव आयोजित किया जा रहा है।

सुरों की सरिता: दिग्गज कलाकार देंगे प्रस्तुतियां उन्होंने बताया कि महोत्सव की मुख्य सभाओं में देश के ख्यातिलब्ध कलाकार भगवान शिव की आराधना अपनी स्वर-लहरियों से करेंगे। इनमें 14 जनवरी को महोत्सव के पहले दिन सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक शंकर महादेवन अपने पुत्रों सिद्धार्थ और शिवम् के साथ ‘शिवोऽहम्’ की संगीतमय प्रस्तुति देंगे।

– 15 जनवरी: मुम्बई का प्रसिद्ध ‘द ग्रेट इंडियन क्वायर’ ‘शिवा’ थीम पर प्रस्तुति देगा।- 16 जनवरी: सुप्रसिद्ध गायिका सोना महापात्रा अपनी संगीत यात्रा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी।- 17 जनवरी: इंदौर के श्रेयश शुक्ला एवं मुम्बई के विपिन अनेजा व उनके बैंड द्वारा सुगम संगीत की प्रस्तुति होगी।- 18 जनवरी: महोत्सव का समापन इंडोनेशिया (कोकोरदा पुत्रा) और श्रीलंका (अरियारन्ने कालूराच्ची) के दलों द्वारा प्रस्तुत ‘शिव केंद्रित नृत्य नाटिका’ से होगा, जो महोत्सव के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को दर्शाएगा।

लोक और जनजातीय कला का वैभव

महोत्सव के दौरान प्रतिदिन शाम 4 से 6 बजे तक त्रिवेणी संग्रहालय में मध्य प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति के दर्शन होंगे। इसमें छिंदवाड़ा का भड़म, बैतूल का ठाट्या, धार का भगोरिया और सागर का बरेदी जैसे पारंपरिक नृत्यों का प्रदर्शन होगा। साथ ही, प्रतिदिन निकलने वाली ‘कला यात्रा’ शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए श्रीमहाकाल लोक पहुंचेगी, जिसमें शिव बारात, डमरू वादन और मलखंब के रोमांचक प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र होंगे।

बौद्धिक विमर्श: ‘शिव तत्व और र महाकाल’

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ 15 जनवरी को प्रातः 10:30 बजे एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इसका विषय ‘शिव तत्त्व और महाकाल: पुरातिहास, साहित्य और संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में’ रखा गया है, जहां विद्वान शिव तत्व की दार्शनिक गहराइयों पर प्रकाश डालेंगे। आमजन को इस भक्तिमय उत्सव में सहभागी होने के लिए सादर आमंत्रित किया गया है।

इस संगोष्ठी में दस से अधिक देशों और भारत के बारह से अधिक राज्यों के विद्वान विषय के विविध पक्षों पर प्रकाश डालेंगे। इन देशों में मॉरीशस, नीदरलैंड, फीजी, यूएसए, यूके, आयरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, थाईलैंड, श्रीलंका और नेपाल आदि सम्मिलित हैं। संगोष्ठी में भारत के राज्यों उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, केरल, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश आदि के विशेषज्ञ विद्वान सम्मिलित होंगे।

वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि इस संगोष्ठी का आयोजन त्रिवेणी कला एवं पुरातत्व संग्रहालय, जयसिंहपुरा, महाकाल लोक में प्रातः काल 11 से सन्ध्या 4:30 बजे तक किया जाएगा। संगोष्ठी में देश – विदेश के विविध क्षेत्रों में शिवोपासना, पुराख्यान, पुरातत्व, इतिहास, शैव दर्शन, साहित्य, वास्तु, मुद्राशास्त्र, शिल्प, चित्र आदि पर गहन मंथन किया जाएगा। संगोष्ठी में भाग लेने वाले विद्वानों में आयरलैंड में भारत के राजदूत अखिलेश मिश्रा, डॉ. रामा तक्षक, नीदरलैंड, डॉ. सोमदत्त काशीनाथ, वकोका, मॉरीशस, डॉ. आशुतोष द्विवेदी, फिजी, डॉ. बीर बहादुर महतो नेपाल, डॉ. मीरा सिंह फिलाडेल्फिया यूएसए, डॉ. सदाशिव कुमार द्विवेदी वाराणसी, डॉ. शुभंकर मिश्रा मॉरीशस, डॉ. अजय कुमार झा, जनकपुर नेपाल, डॉ. हरिसिंह पाल नई दिल्ली, पुरातिहासकार डॉ. शांतिस्वरूप सिन्हा वाराणसी के अलावा अनेक विद्वान भाग लेंगे।——————–

धारा 342 को समाप्त करने से समाप्त होगा धर्मांतरण :होसबाले

0

रांची, 12 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सोमवार को प्रवास के दौरान रांची पहुंचे। रांची के हरमू स्थित एक बैंंक्‍वेट हॉल में सामाजिक सद्भाव को लेकर बैठक का आयोजन किया गया, इसमें समाज के विभिन्न संगठन, विभिन्न जाति और समुदायों के सैकडों प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक का उद्देश्य समाज में व्याप्त समसामयिक समस्याओं पर चर्चा करना और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने के लिए सामूहिक प्रयासों पर विचार करना था।

बैठक के प्रथम सत्र में समाज के विभिन्न समूहों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे सामाजिक, सांस्कृतिक और सेवा कार्यों की जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने अपने कार्यों के दौरान सामने आ रही सामाजिक चुनौतियों को भी साझा किया।

इनमें प्रमुख रूप से धर्मांतरण, घुसपैठ, नशाखोरी, अशिक्षा, अंधविश्वास, परस्पर सहयोग की कमी, बाल-विवाह, लव-जिहाद जैसी गंभीर समस्याओं का उल्लेख किया गया।

वहीं, द्वितीय सत्र में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय ने समाज के प्रतिनिधियों की ओर से उठाए गए प्रश्न और विषयों पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। धर्मांतरण पर उन्होंने तीन प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख किया। इसमें झारखंड का छोटानागपुर क्षेत्र, पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय क्षेत्र और दक्षिण भारत के केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना राज्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन जनजातीय क्षेत्रों में साजिश के तौर पर चर्च से जुड़े लोगों का प्रवेश कराया गया और हिंदू धर्मगुरुओं को रोकने का प्रयास हुआ। होसबाले ने गरीबी, अशिक्षा और अंधविश्वास को उन्होंने धर्मांतरण के प्रमुख कारण बताया। उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में तथाकथित 3-डी समस्या का उल्लेख किया, जिसमें धर्मांतरण, डीजे संस्कृति और शराब शामिल है।

धर्मांतरण की समस्या को कम करने के उपायों पर उन्होंने समाज में परस्पर सहयोग, छुआछूत और जातिगत भेदभाव से दूरी, ऊंच-नीच की भावना त्यागने और हिंदू समाज की जनसंख्या सुदृढ़ करने की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने घर-वापसी के प्रयासों की चर्चा करते हुए कहा कि धर्मजागरण समाज का कार्य है, जिसे समाज को स्वयं करना होगा।

सरकार्यवाह ने जातिगत समस्या पर चर्चा करते हुए कहा कि हमारा जन्म किस परिवार या जाति में होगा, यह हमारे हाथ में नहीं होता, फिर हम जातिवाद क्यों करते हैं। किसी भी जाति को नीचा या ऊंचा नहीं समझना चाहिए।

पुरुष-महिला समानता माैजूदा समय की आवश्यकता

उन्होंने महिलाओं-बहनों के सम्मान पर विशेष ज़ोर देते हुए कहा कि पुरुष-महिला समानता आज की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब पुरुष और महिलाएं साथ-साथ कार्य कर रहे हैं, तो उनके बीच असमानता का कोई औचित्य नहीं है।

दत्तात्रेय ने कहा कि आज सोशल मीडिया सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के कंटेंट से भरा हुआ है। बच्चों को इसके नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए उन्हें भारतीय संस्कृति से जोड़ना जरूरी है। इसके लिए बच्चों के साथ संवाद की प्रक्रिया अपनाने पर उन्होंने बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को मंदिर जाने के लिए प्रेरित करना चाहिए, क्योंकि मंदिर जाने से अहंकार दूर होता है और मन को शांति मिलती है। उन्होंने विभिन्न पर्वों पर बनाए जाने वाले पंडालों में अत्यधिक खर्च पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे मनोरंजन की प्रवृत्ति से जोड़कर देखने की जरूरत बताई।

वहीं सरकार्यवाह ने स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिवस के अवसर पर उन्हें स्मरण करते हुए ने भारतीय युवाओं से उनके कथन, थिंक लिटिल लेस, एक्टल लिटिल मोर को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

उन्होंने हिंदू समाज के करने योग्ये कार्यों के रूप में जोर देते हुए सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने, गरीबी, अशिक्षा और अभावग्रस्त लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की बात कही। उन्होंने पारसी समुदाय का उदाहरण देते हुए मेहनत के बल पर आगे बढ़ने की बात कही और बताया कि आज़ादी के समय पारसी समाज ने सरकार से किसी प्रकार के आरक्षण की मांग नहीं की थी। उन्हों ने दिव्यांग बच्चों को समाज के आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों की ओर से गोद लेने का आग्रह किया और समाज के विभिन्न समूहों से ऐसे बच्चों की सहायता करने की अपील की।

बांग्लादेशी घुसपैठ पर जताई चिंता

बांग्लादेशी घुसपैठ के विषय पर उन्होंने कहा कि घुसपैठ के माध्यम से लंबे समय तक राजनीतिक लाभ उठाया जाता रहा है। आज बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने कहा कि सीमा पर फेंसिंग एक बड़ी चुनौती है और कई बार हमारे ही लोग घुसपैठियों को शरण देते हैं। सरकार एसआईआर सहित विभिन्न माध्यमों से इस समस्या के समाधान के लिए प्रयास कर रही है।

बैठक में दत्तात्रेय होसबाले ने हिंदू समाज के विभिन्न समूहों के प्रतिनिधियों से अपने-अपने समुदाय के विकास के साथ आपसी सहयोग बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने एक-दूसरे के कार्यक्रमों में सहभागिता, परस्पर आदर-सम्मान, कमजोर समुदायों की सहायता और हम सभी हिंदू हैं इस भाव को हमेशा याद रखने की अपील की।

इधर, तीसरे सत्र में दत्तात्रेय होसबोले ने झारखंड के कई संतों के साथ आध्यात्मिक-धार्मिक विषयों पर चर्चा की।

बैठक में धारा 342 पर चर्चा हुई जिसमें धर्मांतरण के बाद जनजाति वर्ग के स्टेटस में कोई बदलाव नहीं आता और धर्मांतरण के बाद ईसाई या मुस्लिम बनने के बाद भी जनजातियों को सुविधाओं का लाभ मिलता रहता है। उन्हाेंने कहा कि यदि इस धारा को समाप्त कर दिया जाए तो धर्मांतरण बहुत हद तक समाप्त हो जाएगा।

इस सत्र में गुरुकुल की स्थापना जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

वहीं, सामाजिक अध्यात्मिक संगठन की बैठक में उन्होंने कहा कि समाज की सामाजिक, आध्यात्मिक संस्थाओं ने सेवा, साहित्य, कला, धार्मिक क्षेत्रों में कार्य किया है। हजारों वर्षों से यह परम्परा चली आ रही है। ऐसा एक महान लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया गया है। सरकारें भी कई कार्यों में योगदान देती रही हैं, लेकिन बहुत सारे अनुकरणीय कार्य परिवार की भी होती है। इसमें अपने बच्चों को संस्कार देना और उन्हें बड़े-बुज़ुर्गों का आदर करना सिखाना शामिल है। होसबाले ने कहा कि समाज की एकता जरूरी है। जंजीर की प्रत्येक कड़ी स्वयं मजबूत रहे और एक कड़ी दूसरे कड़ी से जुड़े रहे, यह जरूरी है। सरकार के समक्ष याचना की स्थिति में हमारे युवा न रहें, ऐसे समाज निर्माण पर बल देना चाहिए। संस्कृत के उपयोग पर भी जोर दिया गया।

बिजनौर में प्रियंका गांधी के जन्मदिन पर भिड़े कार्यकर्ता,मारपीट

0

बिजनौर, 12 जनवरी । अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं सांसद प्रियंका गांधी का जन्मदिन मनाने के लिए सोमवार को जिला कांग्रेस कार्यालय में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस दौरान कार्यकर्ताओं के दो पक्षों में किसी बात को लेकर बहस शुरू हुई। ये बहस बाद में जल्द ही लात-घूंसे में तब्दील हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों और नाम न छापने की शर्त पर मौजूद कुछ लोगों ने बताया कि विवाद की शुरुआत फोटो खिंचवाने को लेकर हुई थी। आरोप है कि एक नेता ने दूसरे पक्ष के लोगों को फोटो खिंचवाने के दौरान टोकने पर यह बहस छिड़ी। इसके बाद विवाद और बोलचाल ने मारपीट का रूप ले लिया। घटना का वीडियो किसी ने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है।

मारपीट के समय जिला कांग्रेस अध्यक्ष हेनरीता राजीव सिंह, नगर अध्यक्ष हुमायू बेग, वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर सहित कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी कार्यालय में मौजूद थे। हंगामा बढ़ता देख वरिष्ठ नेताओं ने तत्काल हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को अलग किया और स्थिति को शांत कराया। हालांकि इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।वीडियो वायरल होने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक गलियारों में इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

अयोध्या में विकास को नई रफ्तार, एयरपोर्ट तक बनेगा फोर लेन मार्ग

0

-54.13 करोड़ की लागत से महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट को प्रयागराज मार्ग से जोड़ेगी नई सड़क

-मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में अयोध्या को मिल रही बुनियादी ढांचे की बड़ी सौगात

-1.6 किमी लम्बा चार लेन मार्ग बनेगा एयरपोर्ट यात्रियों और राम भक्तों के लिए राहत

-मेडिकल कॉलेज और एयरपोर्ट को सीधे जोड़ने से आवागमन होगा सुगम

-मार्च 2026 तक पूरा होगा स्मार्ट रोड प्रोजेक्ट, 60 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण

अयोध्या, 12 जनवरी (हि.स.)।योगी सरकार में आधुनिक बुनियादी ढांचे से लैस होकर अयोध्या विकास के नए प्रतिमान गढ़ रही है। इसी कड़ी में अयोध्या–प्रयागराज मार्ग से महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक एक नया फोर लेन मार्ग निर्माणाधीन है। यह परियोजना लगभग 54.13 करोड़ रुपये की लागत से पूरी की जा रही है, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आएगा। यह सड़क 1.6 किलोमीटर लम्बी होगी।

यह चार लेन सड़क प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के चांदपुर–हरवंश गांव क्षेत्र से शुरू होकर राजर्षि दशरथ स्वशासी मेडिकल कॉलेज के बगल से गुजरते हुए एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 तक पहुंचेगी। वर्तमान सड़क के दाहिने हिस्से से निकलकर बन रही यह आधुनिक सड़क मेडिकल कॉलेज और एयरपोर्ट को सीधे जोड़ेगी। लोक निर्माण विभाग द्वारा संचालित इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य एयरपोर्ट आने-जाने वाले यात्रियों, स्थानीय निवासियों और तीर्थयात्रियों को तेज, सुरक्षित और जाम-मुक्त यात्रा सुविधा प्रदान करना है। यह सड़क निर्माण अयोध्या के समग्र विकास का अहम हिस्सा है। राम मंदिर के साथ-साथ रिंग रोड, परिक्रमा मार्गों का विस्तार, अन्य हाईवे कनेक्टिविटी और एयरपोर्ट विस्तार जैसी परियोजनाएं अयोध्या को आध्यात्मिक राजधानी के साथ-साथ आधुनिक शहर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

–यात्रियों की बढ़ती संख्या के बीच जरूरी था मार्ग निर्माण

अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का संचालन दिसम्बर 2023 से शुरू हो चुका है। इस एयरपोर्ट ने राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा से पहले ही अयोध्या को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित कर दिया है। एयरपोर्ट की क्षमता सालाना 10 लाख यात्रियों की है और यह राम भक्तों के लिए सीधी उड़ान सुविधा उपलब्ध करा रहा है। लेकिन यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कनेक्टिविटी को मजबूत करना आवश्यक था। इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए यह चार लेन मार्ग बनाया जा रहा है।

–मेडिकल स्टाफ को भी मिलेगी सहूलियत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के विकास को प्राथमिकता देते हुए कई सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी है। यह परियोजना भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके पूरा होने से एयरपोर्ट टर्मिनल-2 से प्रयागराज मार्ग तक की दूरी कम समय में तय की जा सकेगी, यातायात व्यवस्था सुदृढ़ होगी और दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी। मेडिकल कॉलेज के छात्रों, मरीजों और स्टाफ को भी बेहतर आवागमन सुविधा मिलेगी।

–समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा कार्य

लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता सत्य प्रकाश भारती के अनुसार सड़क निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है और इसे समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। सड़क के दोनों किनारों पर लाइटिंग की व्यवस्था की जा रही है। लगभग 60 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है। उम्मीद है कि मार्च 2026 तक इस परियोजना को पूर्ण कर लिया जाएगा। इस सड़क को स्मार्ट रोड के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देगी। लाखों राम भक्तों के लिए एयरपोर्ट से राम मंदिर तक पहुंच और अधिक आसान होगी।अयोध्या अब विकास की नई ऊंचाइयों को छू रही है, जहां आस्था और आधुनिकता का सुंदर संगम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

आई-पैक छापेमारी पर कोलकाता पुलिस की प्रतिक्रिया,मामला न्यायाधीन

0

कोलकाता, 12 जनवरी (हि. स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आई-पैक (आईपैक) पर की गई छापेमारी और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख करने के मामले में कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज वर्मा ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है। ईडी की कार्रवाई के चार दिन बाद सोमवार को उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे घटनाक्रम की जांच चल रही है और मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए इस समय किसी तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है।

गौरतलब है कि पिछले गुरुवार को ईडी ने आई-पैक के संस्थापक प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास और कार्यालय पर छापेमारी की थी। इसके बाद बीते चार दिनों में घटनाक्रम ने कई मोड़ लिए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों के आधार पर पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज कीं, जबकि ईडी ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ईडी की ओर से दायर याचिका में पुलिस आयुक्त का भी उल्लेख किया गया है। सोमवार दोपहर को लालबाजार में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में पुलिस आयुक्त मनोज वर्मा ने यह बयान दिया।

यह प्रेस कॉन्फ्रेंस सड़क सुरक्षा को लेकर आयोजित हाफ मैराथन की जर्सी लॉन्च के लिए बुलाई गई थी, जिसमें अभिनेता एवं तृणमूल कांग्रेस सांसद देव भी मौजूद थे। हालांकि पत्रकारों की सबसे ज्यादा दिलचस्पी ईडी की आई-पैक छापेमारी को लेकर पुलिस आयुक्त की प्रतिक्रिया जानने में रही।

पत्रकारों के सवालों के जवाब में मनोज वर्मा ने कहा कि इस मामले में दो केस दर्ज किए गए हैं और दोनों की जांच चल रही है। इसके अलावा इस समय कुछ भी कहना संभव नहीं है। संभव है कि किसी अन्य दिन इस विषय पर बात की जाए।

जब उनसे पूछा गया कि छापेमारी के दौरान ऐसी क्या स्थिति बनी कि डीसी (दक्षिण) को भी मौके पर जाना पड़ा, तो उन्होंने कोई विवरण देने से इनकार करते हुए कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है और इस स्तर पर जानकारी साझा करना उचित नहीं होगा।

ईडी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में पुलिस के संदर्भ में ‘चोरी’ या ‘डकैती’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी सवाल किए गए। इस पर पुलिस आयुक्त ने कहा कि मैंने अभी तक वह लिखा हुआ नहीं पढ़ा है। केवल सुनी-सुनाई बातों पर टिप्पणी करना सही नहीं होगा। मामला अदालत में है, इसलिए इस पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।

एफआईआर की जांच की स्थिति, नोटिस जारी किए जाने या पुलिस के पास उस दिन की किसी विशेष सूचना के बारे में पूछे गए सवालों पर भी उनका जवाब संक्षिप्त रहा। उन्होंने बार-बार दोहराया कि जांच जारी है और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।

——

कोलकाता में कम हुई सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या

इस बीच, उसी पत्रकार वार्ता में कोलकाता पुलिस ने सड़क सुरक्षा को लेकर आंकड़े भी साझा किए। पुलिस आयुक्त ने बताया कि बीते वर्ष कोलकाता में सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2025 में कुल 154 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हुई, जो पिछले वर्षों की तुलना में कम है। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं की संख्या को और कम करने के लिए जागरूकता अभियान जारी रहेंगे। अभिनेता देव ने भी सड़क सुरक्षा के लिए कोलकाता पुलिस के प्रयासों की सराहना की।

ईरान में खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन जारी,हिंसा में अब तक 538 मौत

0

तेहरान (ईरान), 12 जनवरी (हि.स.)। ईरान में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के धर्मतंत्र को चुनौती देने वाले देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के दौरान शनिवार रात और रविवार सुबह देश की राजधानी और दूसरे सबसे बड़े शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए। अमेरिकी ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, 28 दिसंबर से हो रहे प्रदर्शनों से जुड़ी हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 538 हो गई है।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि ईरान ने सारी हदें पार कर दी हैं। निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं। अब बर्दाश्त करना मुश्किल है। अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ हमले के लिए मजबूत विकल्पों पर विचार कर रही है।

सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में इंटरनेट बंद होने और फोन लाइनें कटी होने के कारण दूसरे देशों से सही स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। प्रदर्शनकारियों और ईरान के सुरक्षा बलों के बीच झड़पों में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि मारे गए लोगों में से 490 प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षा बलों के सदस्य हैं। अब तक 10,600 अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया है। ईरानी सरकार ने हताहतों की कोई समग्र संख्या नहीं बताई है।

अमेरिका ने कहा- ईरान ने सारी हदें पार की, सैन्य आक्रमण के मजबूत विकल्पों पर विचार

वाशिंगटन, 12 जनवरी (हि.स.)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि ईरान ने सारी हदें पार कर दी हैं। निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं। अब बर्दाश्त करना मुश्किल है। अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ हमले के लिए मजबूत विकल्पों पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि इस्लामिक गणराज्य ने इंटरनेट सेवा बंद कर दी है। वह एलन मस्क से स्टारलिंक के लिए बात करेंगे।

ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, ” अमेरिका ईरान को लेकर बहुत ही मजबूत विकल्पों पर विचार कर रहा है। वहां के शासन ने सारी हदें पार कर दी हैं। अब फैसला लेने का वक्त आ गया है।” उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सर्वोच्च नेता अली खामेनेई का नाम लिए बिना कहा कि ईरान के नेता हिंसा के जरिये राज करते हैं।

उन्होंने ईरान की हमले की धमकी के बारे में पूछे जाने पर कहा, “अगर ईरान ऐसा करता है तो उस पर अब तक का सबसे बड़ा आक्रमण किया जाएगा।” ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के प्रदर्शनकारियों को स्टारलिंक की सुविधा उपलब्ध कराने के बारे में एलन मस्क से बात करेंगे।

अमेरिका में ईरान के प्रदर्शनकारियों के समर्थन में रैली, भीड़ में घुसा ट्रक

वाशिंगटन, 12 जनवरी (हि.स.)। अमेरिका के लॉस एंजिल्स के वेस्टवुड इलाके में ईरान के प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आहूत रैली में एक ट्रक घुस गया। रविवार दोपहर विल्शायर बुलेवार्ड के 11000 ब्लॉक में विल्शायर फेडरल बिल्डिंग के बाहर होने वाली रैली में शामिल होने के लिए सैकड़ों लोग जुटे थे।

सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान एक ड्राइवर ने कथित तौर पर भीड़ में ट्रक घुसा दिया। इस घटना में दो लोग घायल हो गए। लॉस एंजिल्स दमकल विभाग के अनुसार, ट्रक दोपहर लगभग 3:30 बजे से वेटरन एवेन्यू और ओहियो एवेन्यू के पास फेडरल बिल्डिंग से लगभग एक ब्लॉक दूर भीड़ में घुस गया।

अधिकारियों ने अभी तक इस घटना के संबंध में किसी की भी गिरफ्तारी की सूचना नहीं दी है, लेकिन सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में अधिकारियों को एक व्यक्ति को हिरासत में लेते हुए दिखाया गया है । इस व्यक्ति को ट्रक से नीचे उतारकर ले जाया गया। इस दौरान भीड़ ने उस पर हमला करने की कोशिश की। पुलिस का कहना है कि ट्रक के ड्राइवर से पूछताछ की जा रही है। इस घटना के बाद शाम 4:30 बजे रैली की गई। लोगों ने ईरान की आजादी के नारे लगाए। कुछ लोगों ने ईरानी झंडा भी लहराया।

ग्रीनलैंड का अमेरिका को कड़ा संदेश :किसी भी हाल में नियंत्रण स्वीकार नहीं

0

नाटो के तहत होगी रक्षा

ग्रीनलैंड, 12 जनवरी (हि.स.)। ग्रीनलैंड की सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि वह किसी भी परिस्थिति में अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की इच्छा को स्वीकार नहीं कर सकती। सरकार ने दो टूक कहा कि ग्रीनलैंड न तो बिकाऊ है और न ही किसी दूसरे देश के अधीन आने का सवाल पैदा होता है।

ग्रीनलैंड सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि ग्रीनलैंड डेनमार्क साम्राज्य का हिस्सा है और डेनिश कॉमनवेल्थ के अंतर्गत होने के कारण वह नाटो (NATO) का सदस्य है। ऐसे में ग्रीनलैंड की सुरक्षा और रक्षा नीतियां नाटो के ढांचे के भीतर ही तय और लागू की जाएंगी।

बयान में यह भी कहा गया कि हाल ही में नाटो के छह सदस्य देशों द्वारा ग्रीनलैंड के समर्थन में दिए गए सकारात्मक संदेश के बाद, ग्रीनलैंड सरकार अब अपनी रक्षा को नाटो के अंतर्गत और मजबूत करने के प्रयास तेज करेगी।

सरकार ने स्पष्ट किया कि नाटो के सभी सदस्य देश, जिनमें अमेरिका भी शामिल है, ग्रीनलैंड की सुरक्षा में समान हित रखते हैं। इसी कारण ग्रीनलैंड की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार डेनमार्क के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेगी कि ग्रीनलैंड की रक्षा से जुड़े सभी संवाद, योजनाएं और विकास कार्य नाटो सहयोग के दायरे में ही हों।

ग्रीनलैंड सरकार ने यह भी दोहराया कि वह पश्चिमी रक्षा गठबंधन का स्थायी हिस्सा बना रहेगा और उसकी संप्रभुता, पहचान और राजनीतिक स्थिति पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड की सामरिक अहमियत को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है, जिस पर यूरोप और नॉर्डिक देशों में भी चिंता जताई जा रही है।

भारत और जर्मन में रक्षा,प्रौद्योगिकी −व्यापारिक सहयोग पर जोर

0

नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच सोमवार को गांधीनगर (गुजरात) में बैठक हुई। इस दौरान भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देने के लिए रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, ऊर्जा और जन-जन संपर्क सहित अनेक क्षेत्रों में व्यापक समझौते हुए और बाद में कई घोषणाएं की गईं।

दोनों देशों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग, आर्थिक सहयोग के लिए सीईओ फोरम, सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम, क्रिटिकल मिनरल्स, दूरसंचार और उभरती तकनीकों में साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त घोषणापत्रों पर सहमति जताई।

हरित हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया, नवीकरणीय ऊर्जा और जैव-अर्थव्यवस्था में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए समझौते हुए। आयुर्वेद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सहयोग को विस्तार दिया गया। सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के संबंधों को मजबूत करने हेतु खेल, डाक सेवाएं, समुद्री विरासत और युवा हॉकी विकास पर समझौते किए गए।

इसके अलावा, भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए जर्मनी में वीज़ा-फ्री ट्रांजिट, इंडो-पैसिफिक संवाद, डिजिटल डायलॉग और हरित विकास के लिए 1.24 अरब यूरो की नई फंडिंग जैसी महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की गईं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने 12–13 जनवरी को भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह उनकी भारत की पहली और चांसलर बनने के बाद एशिया की भी पहली यात्रा थी, जो भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में जर्मनी के एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार के रूप में दिए गए महत्व को दर्शाती है। चांसलर मर्ज के साथ 23 प्रमुख जर्मन सीईओ और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया।

दोनों नेताओं के बीच आज सीमित और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। बातचीत में साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति बनी। रक्षा और सुरक्षा सहयोग को गहरा करने पर जोर दिया गया। सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग सहयोग, नौसैनिक सहयोग और नई ‘ट्रैक 1.5 विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद’ की स्थापना का स्वागत किया गया। दोनों नेताओं ने आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए सीमा-पार आतंकवाद सहित सभी रूपों में आतंक के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की प्रतिबद्धता दोहराई।

वार्ता के बाद प्रेसवार्ता में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भारत के साथ संबंधों को रणनीतिक संपत्ति बताया। मिस्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग में उल्लेखनीय और आशाजनक प्रगति हो रही है। साथ ही, लोगों से लोगों के संपर्क संबंधों की बड़ी ताकत है। जर्मनी में भारतीय प्रवासी और छात्रों की संख्या तेजी से बढ़कर क्रमश: लगभग तीन लाख और 60 हजार हो गई है।

भारत-जर्मनी सुरक्षा सहयोग पर विदेश सचिव ने स्पष्ट किया कि भारत की रक्षा खरीद नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हितों पर आधारित है, न कि किसी विचारधारा पर। किसी एक देश से खरीद को दूसरे से जोड़कर नहीं देखा जाता। यदि स्वदेशी उत्पादन संभव न हो, तो भारत विश्व में जहां सबसे उपयुक्त हो, वहां से रक्षा सामग्री प्राप्त करता है।

ईरान और ग्रीनलैंड पर चर्चा के विवरण साझा किए बिना विदेश सचिव ने कहा कि भारत ईरान के घटनाक्रम पर करीबी नजर रखे हुए है। वहां बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक और छात्र मौजूद हैं। प्रतिबंधों के बावजूद भारतीय दूतावास छात्रों से संपर्क में है और सभी सुरक्षित हैं। भारतीयों को अशांति वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

जर्मनी में फोस्टर केयर में रह रही भारतीय बच्ची आरिहा शाह के मामले पर विदेश सचिव ने कहा कि भारत सरकार जर्मन अधिकारियों के साथ लंबे समय से संवाद में है। इसे कानूनी के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। भारत परिवार की पीड़ा को समझता है और हर संभव सहायता कर रहा है। प्रयास है कि आरिहा भारतीय परिवेश, भाषा और संस्कृति से जुड़ी रहे।

वार्ता में दोनों देशों ने व्यापार और आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में द्विपक्षीय व्यापार के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का स्वागत किया। 2024 में भारत-जर्मनी व्यापार 50 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा। दोनों नेताओं ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को शीघ्र पूरा करने के समर्थन को दोहराया और जर्मन कंपनियों को भारत में निवेश बढ़ाने का आमंत्रण दिया।

वार्ता के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में दोनों नेताओं ने यूक्रेन में चल रहे युद्ध पर अपनी चिंता दोहराई, जिससे भारी मानवीय पीड़ा और दुनिया भर में नकारात्मक परिणाम हो रहे हैं। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुसार यूक्रेन में एक व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति हासिल करने के प्रयासों के लिए समर्थन व्यक्त किया।

दोनों नेताओं ने गाजा शांति योजना का स्वागत किया और गाजा में संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक कदम के रूप में पिछले साल 17 नवंबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 को अपनाने पर ध्यान दिया। उन्होंने सभी पक्षों को इस प्रस्ताव को पूरी तरह से लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया।

भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के लिए अपने मजबूत समर्थन की पुष्टि करते हुए, नेताओं ने वैश्विक वाणिज्य, कनेक्टिविटी और समृद्धि को नया आकार देने और बढ़ावा देने में इसकी परिवर्तनकारी क्षमता पर जोर दिया। इस संदर्भ में, वे इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने के लिए पहली आईएमईसी मंत्रिस्तरीय बैठक की उम्मीद कर रहे हैं।

नेताओं ने जलवायु परिवर्तन पर त्वरित वैश्विक कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया और यूएनएफसीसीसी प्रक्रिया का स्वागत किया। उन्होंने पेरिस समझौते के महत्व और बेलेम में कॉप-30 की पुष्टि की।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अहमदाबाद में चांसलर मर्ज का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने साबरमती आश्रम में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भाग लिया। इसके अलावा दोनों नेताओं ने भारत-जर्मनी सीईओ फोरम को संबोधित किया। चांसलर मर्ज की बेंगलुरु यात्रा भी प्रस्तावित रही, जहां व्यापार और तकनीकी सहयोग से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए।