विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन
नई दिल्ली, 13 जनवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग में युवाओं को देश की रचनात्मक शक्ति का केंद्र बताते हुए कंटेंट, क्रिएटिविटी, नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर किए गए अलग-अलग पोस्ट में कहा कि बीते 11 वर्षों में देश के हर क्षेत्र में संभावनाओं के अनंत द्वार खुले हैं। उन्होंने कंटेंट और क्रिएटिविटी सेक्टर का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा रामायण और महाभारत की प्रेरक कथाओं को भी गेमिंग वर्ल्ड का हिस्सा बना सकते हैं। हनुमान जी जैसे पात्र पूरी दुनिया की गेमिंग इंडस्ट्री को दिशा दे सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स का जो सिलसिला शुरू किया गया था, वह अब रिफॉर्म एक्सप्रेस का रूप ले चुका है और इसके केंद्र में देश की युवा शक्ति है।
एक अन्य पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलकर देश को अपनी विरासत और अपने विचारों को आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन भी युवाओं को यही संदेश देता है।
भारत में प्रत्येक पर्व और त्योहार का अपना सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्त्व होता है। ऐसा ही एक पर्व मकर संक्रांति है जो लोक मंगल को समर्पित है। हिन्दू तीज-त्योहारों में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति का त्योहार धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। लोकमंगल के त्योहार देश की सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक बुनियाद को मजबूत बनाने और समाज को जोड़ने का काम करते हैं। यह त्योहार न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका वैज्ञानिक महत्व भी है। मकर संक्रांति सूर्य, पृथ्वी और ऋतुओं के बीच के संबंध को दर्शाने वाला पर्व है। इस वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति पर पुण्य काल मुहूर्त 14 जनवरी 2026 की दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शाम 5 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। ये मुहूर्त स्नान, दान और धार्मिक कार्यों के लिए बेहद शुभ माना गया है। वहीं मकर संक्रांति पर महा पुण्य काल मुहूर्त दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शाम 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। मकर संक्रान्ति पर्व पूरे भारत और नेपाल में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। मकर संक्रांति भारत में मनाए जाने वाले प्रमुख त्यौहारों में से एक है, जिसे विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है। उत्तर भारत में इसे संक्रांति, गुजरात और महाराष्ट्र में उत्तरायण, तमिलनाडु में पोंगल और असम में माघ बिहू कहा जाता है। हिन्दी भाषी क्षेत्रों में इस त्यौहार को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। यह त्यौहार सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
धार्मिक विश्वास के अनुसार मकर संक्रांति पर किये गये दान के कार्य अन्य दिनों के अपेक्षा सौ गुना अधिक पुण्य प्राप्त होता। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना बेहद पुण्यकारी माना जाता है। यह त्योहार देश में पतंजबाजी के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। इस अवसर पर महिला और पुरुष सबेरे से शाम होने तक अपनी अपनी छतों पर वो काटा की करतल ध्वनि के साथ पतंगबाजी का आनंद उठाते है। इस दिन तिल का हर जगह किसी ना किसी रूप में प्रयोग होता ही है। पौराणिक मान्यता के अनुसार ऐसा माना जाता है कि अगर मकर संक्राति के दिन तिल का दान या सेवन किया जाए तो इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं। जिससे ऐसे व्यक्ति जिस पर शनि देव का कुप्रभाव है वह भी कम हो जाता है। इसलिए इस दिन काले तिल को दान करने की मान्यता है। तिल स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन का ही चयन किया था। मकर संक्रांति के दिन गंगा जी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर सागर में जा मिलीं। इसीलिए आज के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। मकर संक्रान्ति के अवसर पर गंगास्नान एवं गंगातट पर दान को अत्यन्त शुभ माना गया है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग एवं गंगासागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गयी है। मकर संक्रांति को मौसम में बदलाव का सूचक भी माना जाता है।
भारत में मकर संक्रान्ति विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। बंगाल में इस पर्व पर गंगासागर पर बहुत बड़े मेले का आयोजन होता है। यहां इस पर्व के दिन स्नान करने के बाद तिल दान करने की प्रथा है। कहा जाता है कि इसी दिन यशोदा जी ने श्रीकृष्ण की प्राप्ति के लिए व्रत रखा था। इसी दिन गंगा भगीरथ के पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए गंगा सागर में जा मिली थीं। यही वजह है कि हर साल मकर संक्रांति के दिन गंगा सागर में भारी भीड़ होती है। इस साल महाकुंभ मेले में दूसरा शाही स्नान भी मकर संक्रांति 2025 के पावन पर्व पर आयोजित हो रहा है। यह महाकुंभ प्रयागराज में हो रहा है। मकर संक्रांति 2025 विशेष रूप से स्नान और दान का पर्व है। इस दिन गंगास्नान करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
बिहार में भी मकर संक्रांति को खिचड़ी के ही नाम से जानते हैं। यहां भी उड़द की दाल, चावल, तिल, खटाई और ऊनी वस्त्र दान करने की परंपरा है। इसके अलावा असम में इसे ‘माघ- बिहू और ‘ भोगाली-बिहू के नाम से जानते हैं। तमिलनाडू में इस पर्व को चार दिनों तक मनाते हैं। यहा पहला दिन भोगी पोंगल दूसरा दिन सूर्य पोंगल, तीसरा दिन मट्टू पोंगल और चौथा दिन कन्या पोंगल के रूप में मनाते हैं। पूजा और अर्चना की जाती है। राजस्थान में इस दिन बहुएं अपनी सास को मिठाईयां और फल देकर उनसे आर्शीवाद लेती हैं। इसके अलावा वहां किसी भी सौभाग्य की वस्तू को 14 की संख्या में दान करने का अलग ही महत्व बताया गया है। महाराष्ट्र में इस दिन गूल नामक हलवे को बांटने की प्रथा है। तो इस तरह पूरे भारत में इस पर्व को अलग-अलग तरह की परंपराओं के साथ मनाया जाता है।
श्रद्धालुओं को मिलेगा आध्यात्मिक पर्यटन का नया अनुभव
-मुख्यमंत्री योगी की परिकल्पना के अनुसार तैयार की गई हैं टैंट सिटी – जयवीर सिंह
लखनऊ, 13 जनवरी (हि.स.)। मकर संक्रांति सहित अन्य प्रमुख स्नान पर्व पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए संगम तट पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त टेंट सिटी बसाई गई है। संगम की पुण्य धारा में डुबकी लगाने देश-दुनिया से श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन हो रहा है। इसी क्रम में आगंतुकों को सुरक्षित और यादगार अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) ने संगम तट की रेत पर आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित टैंट कॉलोनी बसाई है, जो कल्पवासियों और पर्यटकों के लिए आस्था के साथ-साथ आकर्षण का नया केंद्र बनकर उभरी है।
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने मंगलवार काे बताया कि प्रयागराज के अरैल सेक्टर-7 में त्रिवेणी पुष्प से पहले विकसित टैंट कॉलोनी में कुल 50 अत्याधुनिक कॉटेज बनाए गए हैं। इनकी ऑनलाइन बुकिंग यूपीएसटीडीसी की वेबसाइट के माध्यम से की जा सकती है। टैंट कॉलोनी को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इसमें 15 हजार रुपये किराए वाला प्रीमियम, 11 हजार 500 रुपये का लग्जरी और 7 हजार 500 रुपये का डीलक्स कॉटेज शामिल है। यहां कुल 12 प्रीमियम, 8 लग्जरी और 30 डीलक्स टैंट बने हैं। इनमें ठहरने वाले श्रद्धालुओं के लिए टैंट शुल्क में सात्विक भोजन की समुचित व्यवस्था की गई है। टैंट कॉलोनी परिसर में यज्ञशालाएं बनाई गई हैं। यहां लगातार भजन-कीर्तन हो रहा है। सांस्कृतिक रंग देने के लिए कलाग्राम भी विकसित किया गया है, जहां स्थानीय शिल्प और लोककला को बढ़ावा दिया जा रहा है।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि माघ मेले में रोजगार और नवाचार को विशेष बढ़ावा मिला है। यहां संगम टेंट कॉलोनी में एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) प्रदर्शनी के जरिए प्रयागराज की पारंपरिक मूंज कला के भी स्टॉल लगे हैं। यहां के कारीगरों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। माघ मेला 2026 न केवल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत कर रहा है, बल्कि उद्यमियों और हस्तशिल्पियों के लिए व्यापार का बड़ा मंच भी बन गया है, जहां देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु मूंज से बने डलिया, पेन स्टैंड, रोटी रखने के बर्तन, गमले और सजावटी सामान जैसे उत्पाद पसंद कर रहे हैं। नैनी क्षेत्र के महेवा इलाके की यह पारंपरिक कला, जिसे चांद जैसी कारीगर वर्षों से आगे बढ़ा रही हैं, अब आधुनिक रूप में सामने आकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना पा रही है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप माघ मेला केवल आस्था का आयोजन नहीं, बल्कि पर्यटन, रोजगार और स्थानीय कला को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम बन रहा है। यूपीएसटीडीसी द्वारा विकसित संगम टेंट कॉलोनी इसका बेहतरीन उदाहरण है, जहां श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाओं के साथ भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव मिल रहा है। उन्होंने कहा कि एक जिला एक उत्पाद के तहत मूंज कला जैसे पारंपरिक शिल्प को मंच देकर स्थानीय कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। योगी जी की सोच है कि प्रदेश का हर आयोजन रोजगार, नवाचार और संस्कृति से जुड़े, और माघ मेला 2026 इसी सोच को जमीन पर उतारता हुआ दिखाई दे रहा है।
दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी आज भी अपने दिवंगत पति धर्मेंद्र की यादों से उबर नहीं पाई हैं। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने पति को अचानक खो देने के दर्द को शेयर किया और बताया कि यह सदमा उनके लिए कितना गहरा है। इसी बातचीत में हेमा मालिनी ने खुलासा किया कि उन्होंने धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ अब तक नहीं देखी है। 01 जनवरी को रिलीज हुई इस फिल्म में धर्मेंद्र को आखिरी बार बड़े पर्दे पर देखना दर्शकों के लिए बेहद भावुक अनुभव रहा।
‘इक्कीस’ न देखने की वजह बताती हेमा मालिनी
स्क्रीन को दिए इंटरव्यू में हेमा मालिनी ने कहा कि इस फिल्म को देखना उनके लिए अभी संभव नहीं है। उन्होंने कहा, “जब यह फिल्म रिलीज हुई थी, तब मैं मथुरा में थी और यहां मेरे कई काम थे। लेकिन सच कहूं तो मैं अभी यह फिल्म नहीं देख सकती। यह मेरे लिए बेहद भावुक कर देने वाला पल होगा। मेरी बेटियां भी यही कह रही हैं कि अभी न देखूं। शायद जब समय के साथ जख्म कुछ भर जाएं, तब मैं इसे देख पाऊं।” हेमा के इस बयान ने एक बार फिर उनके गहरे दर्द को सामने ला दिया।
फिल्म ‘इक्कीस’ की कहानी और कलाकार
श्रीराम राघवन के निर्देशन में बनी ‘इक्कीस’ परमवीर चक्र से सम्मानित सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के जीवन पर आधारित है। फिल्म में अरुण खेत्रपाल का किरदार अगस्त्य नंदा ने निभाया है, जबकि जयदीप अहलावत भी अहम भूमिका में नजर आते हैं। दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र ने इसमें अरुण खेत्रपाल के पिता का किरदार निभाया है। फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग के दौरान सनी देओल और बॉबी देओल अपने पिता को आखिरी बार पर्दे पर देखकर भावुक हो गए थे, जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दी थीं।
लेह, 13 जनवरी (हि.स.)। रॉयल एनफील्ड आइस हॉकी लीग अपने तीसरे सीजन के साथ एक बार फिर लद्दाख में लौट रही है। यह लीग 29 जनवरी से 14 फरवरी 2026 तक आयोजित की जाएगी। रॉयल एनफील्ड सोशल मिशन के तहत, लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन और आइस हॉकी एसोसिएशन ऑफ लद्दाख के सहयोग से आयोजित यह लीग न केवल प्रतिस्पर्धा का मंच है, बल्कि हिमालयी क्षेत्रों में आइस हॉकी के दीर्घकालिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी है।
इस सीजन में लीग का दायरा और अधिक व्यापक हो गया है। विस्तारित राउंड-रॉबिन फॉर्मेट के तहत पुरुष वर्ग की 11 और महिला वर्ग की 6 टीमें हिस्सा लेंगी, जिनके बीच कुल 75 मुकाबले खेले जाएंगे। यह संरचना खिलाड़ियों को अधिक मैच अनुभव देने और प्रतिस्पर्धात्मक गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर केंद्रित है।
तकनीकी विकास और सामुदायिक प्रशिक्षण का मजबूत मॉडल
रॉयल एनफील्ड आइस हॉकी लीग सीजन 3 एक व्यापक तकनीकी विकास कार्यक्रम का प्रतिस्पर्धात्मक चरण है, जिसकी नींव दिसंबर 2025 में रखी गई थी। अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षक डैरिल ईसन के नेतृत्व में आइस हॉकी कोचों के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसके बाद प्रशिक्षित कोच अपने-अपने समुदायों में लौटकर स्थानीय प्रतिभाओं की पहचान और टीमों की व्यवस्थित तैयारी में जुटे। इस तरह, लीग जमीनी स्तर के प्रशिक्षण और उच्च गुणवत्ता वाली प्रतिस्पर्धा के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करती है।
स्थानीय प्रतिभाओं के लिए अवसर और लीग का विस्तार
लेह में आयोजित यह टूर्नामेंट दूरदराज के हिमालयी क्षेत्रों के खिलाड़ियों को संरचित लीग फॉर्मेट और पेशेवर रूप से प्रबंधित प्रतियोगिता का अनुभव देता है। वर्ष 2026 संस्करण में लेह, नुब्रा, कारगिल, ज़ांस्कर, चांगथांग और आसपास के क्षेत्रों की टीमें भाग लेंगी। इस सीजन में खारू क्षेत्र से दो नई टीमें—खारू ईगल्स (महिला) और खारू फाल्कन्स (पुरुष)—लीग में पदार्पण करेंगी, जो लीग के निरंतर विस्तार और समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाता है।
रेफरी प्रशिक्षण और पेशेवर मानकों पर जोर
खेल के इकोसिस्टम को और मजबूत करते हुए, दिसंबर 2025 में पहली बार एक समर्पित रेफरी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका नेतृत्व इंटरनेशनल आइस हॉकी फेडरेशन के ऑफिशिएटिंग इंस्ट्रक्टर पीटर गेबी ने किया। इस पहल का उद्देश्य मैच संचालन के मानकों को बेहतर बनाना, पेशेवर गेम डिलीवरी सुनिश्चित करना और भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए प्रशिक्षित रेफरी तैयार करना है।
खेल से आगे—सामुदायिक जुड़ाव और शीतकालीन पर्यटन
आइस हॉकी लीग केवल खेल तक सीमित नहीं है। मुकाबलों के दौरान जमी हुई रिंक सामुदायिक उत्सव स्थलों में बदल जाती हैं, जहां स्थानीय परिवार, समर्थक और पर्यटक एक साथ जुटते हैं। इससे लद्दाख में सामुदायिक जुड़ाव, युवाओं की भागीदारी और शीतकालीन पर्यटन को नई ऊर्जा मिलती है, साथ ही आइस हॉकी की गहरी सांस्कृतिक जड़ों को भी मजबूती मिलती है।
सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर पहल
आइशर ग्रुप फाउंडेशन की कार्यकारी निदेशक बिदिशा डे ने कहा, “रॉयल एनफील्ड आइस हॉकी लीग की नींव सामुदायिक विकास में है। हमारा उद्देश्य स्थानीय आजीविका को सशक्त बनाना, युवाओं और महिलाओं को अवसर देना और हिमालयी क्षेत्रों से उभरती प्रतिभाओं के लिए एक स्पष्ट मार्ग तैयार करना है। यह लीग खेल के माध्यम से संस्कृति, गर्व और सामूहिक पहचान का उत्सव भी है।”
रॉयल एनफील्ड आइस हॉकी लीग के माध्यम से कंपनी अपने सोशल मिशन को आगे बढ़ाते हुए खेल के जरिए हिमालयी समुदायों को सशक्त बना रही है—स्थानीय खेल इकोसिस्टम को मजबूत करना, आजीविका के अवसर पैदा करना और पूरे हिमालय क्षेत्र में एक समृद्ध शीतकालीन खेल संस्कृति को बढ़ावा देना।
नई दिल्ली, 13 जनवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने संसद के केंद्रीय कक्ष और दूसरी सार्वजनिक जगहों से वीर सावरकर की तस्वीर को हटाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।
बालासुंदरम नाम के एक रिटायर्ड अधिकारी ने यह याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि वो इस तरह की बेतुकी याचिका दाखिल कर कोर्ट का कीमती वक़्त बर्बाद कर रहे हैं।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को एक लाख का जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी। कोर्ट के रुख को देखते हुए याचिकाकर्ता ने अर्जी वापस ले ली। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को नसीहत दी कि रिटायरमेंट के बाद इस तरह की चीजों में लगने के बजाय वो समाज के लिए कुछ सार्थक योगदान दें।
श्रीनगर, 13 जनवरी (हि.स.)। पिछले वर्ष ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने कश्मीर घाटी में मस्जिदों, मदरसों तथा इन धार्मिक संस्थानों से जुड़े प्रबंधनकर्ताओं, इमामों और शिक्षकों की प्रोफाइलिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि मस्जिदों, मदरसों, इमामों (नमाज के अगुआ), शिक्षकों और इन संस्थानों की प्रबंधन समितियों से जुड़े व्यक्तियों का विवरण एकत्र करने के लिए गांव स्तर के नंबरदारों (राजस्व विभाग के कर्मचारी) को एक निर्धारित प्रोफार्मा उपलब्ध कराया गया है। इस प्रक्रिया के तहत धार्मिक संस्थानों की वित्तीय स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसमें निर्माण कार्यों के लिए प्रयुक्त धन के स्रोतों और दैनिक खर्चों से जुड़ी जानकारी शामिल है।
अधिकारियों के अनुसार, सामान्य विवरण के अलावा मदरसों के शिक्षकों और इमामों से आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण, संपत्ति स्वामित्व, सोशल मीडिया हैंडल, पासपोर्ट, एटीएम कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, सिम कार्ड, मोबाइल फोन मॉडल और आईएमईआई नंबर जैसी विस्तृत जानकारियां भी मांगी गई हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का उद्देश्य मस्जिदों, मदरसों और उनसे जुड़े व्यक्तियों का एक समग्र और अद्यतन डेटाबेस तैयार करना है।
उल्लेखनीय है कि नवंबर 2025 में ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ के दौरान जांच में यह सामने आया था कि कुछ संदिग्धों को मदरसों या सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथी बनाया गया था। अधिकारियों के अनुसार, मौलवी इरफान सहित कुछ इमामों की संदिग्ध भूमिका के चलते वे जांच के दायरे में आए थे। प्रोफार्मा में मस्जिद या मदरसे से जुड़े धार्मिक संप्रदाय—बरेलवी, देवबंदी, हनफ़ी अथवा अहले हदीथ—का विवरण भी मांगा गया है।
अधिकारियों ने बताया कि घाटी में लंबे समय से प्रचलित सूफी परंपरा के विपरीत शुद्धतावादी इस्लामी विचारधारा के बढ़ते प्रभाव को युवाओं के कट्टरपंथीकरण का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। इसी क्रम में इमामों, शिक्षकों और प्रबंधन समिति के सदस्यों से किसी भी आतंकवादी या विध्वंसक गतिविधि में पूर्व संलिप्तता, लंबित मामलों अथवा न्यायालय द्वारा दी गई सजा से संबंधित विवरण भी मांगा गया है।
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा पुलिस के सहयोग से नवंबर 2025 के पहले सप्ताह में जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े एक अंतरराज्यीय ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। इस कार्रवाई में तीन डॉक्टरों सहित नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया था और लगभग 2,900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी।
बरामद विस्फोटकों में अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर शामिल थे, जिनमें से करीब 360 किलोग्राम अत्यधिक ज्वलनशील अमोनियम नाइट्रेट होने का संदेह जताया गया था। इसके अलावा फरीदाबाद के एक किराए के मकान से हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए थे। जांच में यह भी सामने आया था कि 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के बाहर विस्फोट के प्रयास में इस्तेमाल की गई कार एक कश्मीरी डॉक्टर उमर नबी द्वारा चलाई जा रही थी।
पुलिस के अनुसार, फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय के शिक्षक गनाई को श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद समर्थक पोस्टर लगाने के मामले में वांछित घोषित किए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया था। 19 अक्टूबर को श्रीनगर के बुनपोरा-नौगाम इलाके में विभिन्न स्थानों पर ऐसे पोस्टर लगाए गए थे, जिनमें पुलिस और सुरक्षा बलों को धमकियां दी गई थीं। इसी जांच से पूरे अंतरराज्यीय आतंकी नेटवर्क का खुलासा हुआ।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा कि जांच में एक ऐसे ‘सफेदपोश’ आतंकी पारिस्थितिकी तंत्र का पता चला है, जिसमें कट्टरपंथी पेशेवर और छात्र शामिल हैं, जो पाकिस्तान और अन्य देशों में बैठे आतंकवादी आकाओं के संपर्क में थे।
नई दिल्ली, 13 जनवरी (हि.स.)। ग्लोबल मार्केट से आज पॉजिटिव संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी बाजार पिछले सत्र के दौरान मजबूती के साथ बंद होने में सफल रहे। डाउ जॉन्स फ्यूचर्स भी आज बढ़त के साथ कारोबार करता हुआ नजर आ रहा है। यूरोपीय बाजार पिछले सत्र के दौरान मिले-जुले परिणाम के साथ बंद हुए। वहीं एशियाई बाजार में आज मिला-जुला कारोबार होता हुआ नजर आ रहा है।
अमेरिकी बाजार में पिछले सत्र के दौरान उत्साह का माहौल बना रहा, जिसके कारण वॉल स्ट्रीट के सूचकांक मजबूती के साथ बंद होने में सफल रहे। डाउ जॉन्स दिन के निचले स्तर से करीब 600 अंक उछल कर बंद हुआ। इसी तरह एस एंड पी 500 इंडेक्स ने भी 7,000 अंक के काफी करीब पहुंचने में सफलता हासिल की। ये सूचकांक पिछले सत्र के कारोबार के दौरान 0.16 प्रतिशत की तेजी के साथ 6,977.31 अंक के स्तर पर पहुंच कर बंद हुआ। इसी तरह नैस्डेक ने 0.27 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,736.22 अंक के स्तर पर पिछले सत्र के कारोबार का अंत किया। डाउ जॉन्स फ्यूचर्स आज फिलहाल 0.05 प्रतिशत की तेजी के साथ 49,616.72 अंक के स्तर पर कारोबार करता हुआ नजर आ रहा है।
यूरोपीय बाजार में पिछले सत्र के दौरान मिला-जुला कारोबार होता रहा। एफटीएसई इंडेक्स 0.16 प्रतिशत की मजबूती के साथ 10,140.70 अंक के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह डीएएक्स इंडेक्स ने 143.70 अंक यानी 0.57 प्रतिशत की तेजी के साथ 25,405.34 अंक के स्तर पर पिछले सत्र के कारोबार का अंत किया। दूसरी ओर, सीएसी इंडेक्स 0.04 प्रतिशत के गिरावट के साथ 8,358.76 अंक के स्तर पर बंद हुआ।
एशियाई बाजार में आज मिला-जुला कारोबार होता हुआ नजर आ रहा है। एशिया के नौ बाजार में से छह के सूचकांक मजबूती के साथ हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं, जबकि तीन सूचकांक गिरावट के साथ लाल निशान में बने हुए हैं। गिफ्ट निफ्टी 0.31 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 25,780 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह सेट कंपोजिट इंडेक्स 0.19 प्रतिशत फिसल कर 1,239.83 अंक के स्तर पर और शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.03 प्रतिशत की सांकेतिक गिरावट के साथ 4,163.84 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहे हैं।
दूसरी ओर, स्ट्रेट्स टाइम्स इंडेक्स 0.44 प्रतिशत की मजबूती के साथ 4,787.83 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह ताइवान वेटेड इंडेक्स 136.45 अंक यानी 0.45 प्रतिशत की तेजी के साथ 30,703.74 अंक के स्तर पर पहुंचा हुआ है। निक्केई इंडेक्स ने आज जोरदार छलांग लगाई है। फिलहाल ये सूचकांक 1,667.11 अंक यानी 3.21 प्रतिशत उछल कर 53,607 अंक के स्तर पर आ गया है।
इसी तरह हैंग सेंग इंडेक्स 291.52 अंक यानी 1.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ 26,900 अंक के स्तर पर पहुंचा हुआ है। इसके अलावा जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स 0.69 प्रतिशत की मजबूती के साथ 8,946.20 अंक के स्तर पर और कोस्पी इंडेक्स 0.54 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,649.59 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहे हैं।
नई दिल्ली, 13 जनवरी (हि.स.)। स्टील गैबियंस का निर्माण करने वाली कंपनी गैबियन टेक्नोलॉजी इंडिया लिमिटेड के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में प्रीमियम एंट्री करके अपने आईपीओ निवेशकों को खुश कर दिया। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 81 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर इसकी लिस्टिंग 9.88 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 89 रुपये के स्तर पर हुई। हालांकि लिस्टिंग के बाद निवेशकों को तब झटका लगा, जब बिकववाली के दबाव में इस इस शेयर की चाल में गिरावट आ गई। लिस्टिंग होने के बाद से ही मुनाफा वसूली शुरू हो जाने के कारण कंपनी के शेयर सुबह 10 बजे तक लुढ़क कर 84.55 रुपये के लोअर सर्किट लेवल तक पहुंच गए। लोअर सर्किट लगने के बावजूद कंपनी के आईपीओ निवेशक आज 4.38 प्रतिशत के फायदे में हैं।
गैबियन टेक्नोलॉजी इंडिया लिमिटेड का 29.16 करोड़ रुपये का आईपीओ 6 से 8 जनवरी के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से शानदार रिस्पॉन्स मिला था। इसके कारण ये ओवरऑल 826 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन 271.13 गुना (एक्स एंकर) सब्सक्राइब हुआ था। वहीं नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में 1,476.78 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इसी तरह रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन 867.23 गुना सब्सक्राइब हो सका था। इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 36 लाख नए शेयर जारी किए गए हैं। आईपीओ के जरिये जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी नए प्लांट और मशीनरी की खरीदारी करने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।
कंपनी की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी को 3.41 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 5.82 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 6.63 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष में नवंबर 2025 के अंत तक कंपनी को 4.30 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका है।
इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी मामूली उतार चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2022-23 में इसे 78.88 करोड़ का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 104.97 करोड़ और वित्त वर्ष 2024-25 में फिसल कर 101.17 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष में 30 नवंबर 2025 तक कंपनी को 60.66 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है।
इस अवधि में कंपनी के कर्ज में भी लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 के अंत में कंपनी पर 29.46 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 36.37 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 46.71 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष में नवंबर 2025 तक कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ 52.05 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।
इस अवधि में कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में ये 7.97 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 13.71 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 12.02 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष में 30 नवंबर 2025 तक ये 16.32 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2022-23 में 6.39 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 13.16 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का ईबीआईटीडीए 15.06 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष 30 नवंबर 2025 तक ये 10.76 करोड़ रुपये के स्तर पर रहा।
नई दिल्ली, 13 जनवरी (हि.स)। यात्री वाहनों की थोक बिक्री में यूटिलिटी वाहनों की मजबूत मांग के दम पर दिसंबर 2025 में सालाना आधार पर 27 फीसदी बढ़ी है।
उद्योग निकाय सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने मंगलवार को एक बयान में बताया कि दिसंबर में यात्री वाहनों की कुल बिक्री 3,99,216 इकाई रही, जो दिसंबर 2024 की 3,14,934 इकाई की तुलना में 26.8 फीसदी अधिक है। सियाम के मुताबिक दिसंबर महीने में दोपहिया वाहनों की थोक बिक्री सालाना आधार पर 11,05,565 इकाई के मुकाबले 39 फीसदी की बढ़ोत्तरी के साथ 15,41,036 इकाई हो गई। वहीं, तिपहिया वाहनों की कुल बिक्री 61,924 इकाई रही है, जो दिसंबर 2024 की 52,733 इकाई की तुलना में 17 फीसदी अधिक है।
सियाम ने बिक्री के परिदृश्य पर कहा कि वाहन उद्योग वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में मजबूत गति के साथ प्रवेश कर रहा है, क्योंकि 2025 के अंत में सभी वाहन खंडों में मजबूत दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गयी। चौथी तिमाही के दौरान वाहनों की थोक एवं खुदरा बिक्री की मात्रा में स्थिर वृद्धि की उम्मीद है।
उद्योग जगत ने कहा, ‘‘भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर नजर रखते हुए उद्योग निकाय को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2025-26 सकारात्मक वृद्धि के साथ समाप्त होगा। इसमें नीतिगत रूप से समर्थित कारक मजबूती से मौजूद रहेंगे जिससे हाल के वर्षों के मजबूत प्रदर्शन को बनाए रखने में मदद मिलेगी।’’