यूपीआई को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम माना; ग्लोबल ट्रांजैक्शन में 49% हिस्सेदारी

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पीआईडीएफ-समर्थित इंफ्रास्ट्रक्चर, भीम-यूपीआई इंसेंटिव और रूपे-यूपीआई विस्तार जैसे लक्षित उपायों से पूरे भारत में डिजिटल पेमेंट अपनाने में तेज़ी आ रही है

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की जून 2025 की रिपोर्ट ‘ग्रोइंग रिटेल डिजिटल पेमेंट्स (द वैल्यू ऑफ इंटरऑपरेबिलिटी)’ में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा रिटेल फास्ट-पेमेंट सिस्टम (एफपीएस) माना गया है। इसके अलावा, एसीआई वर्ल्डवाइड की 2024 की रिपोर्ट ‘प्राइम टाइम फॉर रियल-टाइम’ के अनुसार, यूपीआई की ग्लोबल रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में लगभग 49% हिस्सेदारी है।

यूपीआई की वर्तमान स्थिति और अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रियल-टाइम पेमेंट प्लेटफॉर्म की तुलना में मार्केट शेयर का विस्तृत तुलनात्मक विवरण नीचे दी गई तालिका में दिया गया है।

यूपीआई सहित डिजिटल पेमेंट सिस्टम को अपनाने में छोटे व्यापारियों की मदद करने के लिए, सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) और नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (एनपीसीआई) ने समय-समय पर कई पहल की हैं। इनमें कम वैल्यू वाले भीम-यूपीआई ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए इंसेंटिव स्कीम, और पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (पीआईडीएफ) शामिल हैं, जो टियर-3 से 6 केंद्रों में डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे पीओएस  टर्मिनल और क्यूआर कोड) लगाने के लिए बैंकों और फिनटेक कंपनियों को अनुदान सहायता प्रदान करता है। 31 अक्टूबर, 2025 तक, पीआईडीएफ के माध्यम से टियर-3 से 6 केंद्रों में लगभग 5.45 करोड़ डिजिटल टच पॉइंट लगाए गए हैं। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2024-25 तक, लगभग 6.5 करोड़ व्यापारियों को कुल 56.86 करोड़ क्यूआर कोड दिए गए।

सरकार,  भारतीय रिज़र्व बैंक और एनपीसीआई ने पूरे देश में सार्वजनिक सेवाओं, परिवहन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म सहित सभी बिज़नेस में रूपे और यूपीआई के ज़रिए डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है।

अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रीयल-टाइम भुगतान प्लेटफार्मों के मुकाबले यूपीआई की स्थिति

देशलेन-देन की मात्रा(अरबों में)वैश्विक रीयल-टाइम भुगतान प्लेटफ़ॉर्म का % हिस्सा
भारत129.349%
ब्राज़ील37.414%
थाईलैंड20.48%
चीन17.26%
दक्षिण कोरिया9.13%
अन्य52.820%
कुल266.2100%

नवजोत कौर सिद्धू को कांग्रेस ने किया निलंबित, लगाए थे भ्रष्टाचार के आरोप

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नवजोत कौर सिद्धू को उनके विवादास्पद बयान के बाद कांग्रेस पार्टी से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।ऐसा उनके  उस विवादित बयान के कुछ ही घंटों बाद हुआ है जिसमें उन्होंने कहा था कि जो 500 करोड़ रुपये का सूटकेस देता है, वह पंजाब का मुख्यमंत्री बन जाता है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगाए। पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी कौर ने शनिवार को राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात के बाद पत्रकारों से कहा हम हमेशा पंजाब और पंजाबियत की बात करते हैं…लेकिन हमारे पास 500 करोड़ रुपये नहीं हैं जो हम मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के लिए दे सकें।

सिद्धू पर बात करते हुए नवजोत कौर ने दावा किया कि सिद्धू का कांग्रेस के प्रति लगाव तो बहुत है लेकिन उन्हें कभी मुख्यमंत्री पद नहीं मिलेगा। मीडिया ने सवाल किया क्यों नहीं मिलेगा? जवाब में नवजोत बोली मुख्यमंत्री बनने के लिए ₹500 करोड़ लगते हैं और हमारे पास देने के लिए इतने पैसे नहीं हैं। इसी के साथ सिद्धू के वापस बीजेपी जाने के सवाल पर नवजोत ने कहा कि मैं खुल के बोलती हूं वो कांग्रेस के साथ अटैच्ड है। बहुत ज्यादा उनको उनके साथ प्रियंका जी के साथ अटैचमेंट है। पर मुझे इतनी इनफैक्टिंग में लग नहीं रहा कि कहीं भी नवजोत सिद्धू को ये प्रमोट होने देंगे। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि उनकी टिप्पणी से पता चलता है कि कांग्रेस में नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक भ्रष्टाचार व्याप्त है। उन्होंने कहा है कि कोई भी व्यक्ति मुख्यमंत्री बनने के बारे में तभी सोच सकता है जब उसके सूटकेस में 500 करोड़ रुपये हों। कांग्रेस पूरी तरह से भ्रष्ट आचरण में डूबी हुई है। पंजाब भाजपा प्रमुख सुनील जाखड़ ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की और उनके दावे को कांग्रेस के लेन-देन की राजनीति के इतिहास से जोड़ा। 

लाल किले में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए अंतर-सरकारी समिति के 20वें सत्र की मेजबानी करना भारत की मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के अनोखे मेल को दर्शाता है

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यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए अंतर-सरकारी समिति के 20वें सत्र की शुरुआत आज नई दिल्ली के लाल किले में विभिन्न सत्रों के साथ हुई। सुबह वाले सत्र के बाद संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता की। 20वीं समिति (20 COM) के चेयरपर्सन और यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, श्री विशाल वी. शर्मा, तथा यूनेस्को के संस्कृति विभाग के सहायक महानिदेशक, श्री एर्नेस्टो ओट्टोने भी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित थे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए श्री विवेक अग्रवाल ने कहा कि यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल लाल किले में इस सत्र की मेजबानी करना भारत की मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के अनोखे मेल को दर्शाता है। उन्होंने भारत के समुदाय-केन्द्रित दृष्टिकोण पर जोर दिया, जिसमें परंपराओं की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय सूची का लगातार विस्तार, परंपरा-वहाकों  के लिए क्षमता-निर्माण कार्यक्रम, और जीवित विरासत को राष्ट्रीय विकास योजनाओं में शामिल करने के प्रयासों को रेखांकित किया।

सचिव ने भारत के उन 15 तत्वों का भी ज़िक्र किया, जो यूनेस्को की प्रतिनिधि सूची में शामिल हैं—जैसे वैदिक मंत्रोच्चार, कुटियट्टम, योग, कुंभ मेला, दुर्गा पूजा और गरबा। उन्होंने इन्हें “भारत की सांस्कृतिक पहचान का रंगीन प्रतिबिंब” बताया। उन्होंने यह भी कहा कि अमूर्त सांस्कृतिक विरासत मानवता की “जीवित धड़कन” है, जो प्रदर्शन कलाओं, हस्तकला, त्योहारों, अनुष्ठानों और पीढ़ियों से चली आ रही मौखिक परंपराओं के रूप में समुदायों द्वारा जीवित रखी जाती है।

सचिव ने जोर देकर कहा कि यह सत्र एक बेहद महत्वपूर्ण समय पर हो रहा है, क्योंकि दुनिया भर की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत व्यापारिक दबावों, बदलते सामुदायिक ढांचे और तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल वातावरण जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि यूनेस्को का मंच सहयोग, संवाद और सामूहिक संरक्षण के लिए बेहद आवश्यक है।

उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए श्री विशाल वी. शर्मा ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और सांस्कृतिक विरासतों की सुरक्षा के प्रति भारत की लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि समिति में भारत का वर्तमान कार्यकाल (2022–2026) जीवित विरासत की सुरक्षा पर वैश्विक चर्चाओं में भारत की भूमिका को और मजबूत करता है।

श्री एर्नेस्टो ओट्टोने ने भारत सरकार को नई दिल्ली में 20वें सत्र की मेजबानी के लिए धन्यवाद और खुशी व्यक्त की। साथ ही, उन्होंने सांस्कृतिक विरासतों की सुरक्षा में भारतीय सरकार के प्रयासों की सराहना की।

यह सप्ताहभर चलने वाला सत्र 8 से 13 दिसंबर 2025 तक आयोजित होगा, जिसमें सदस्य देशों, सांस्कृतिक संस्थानों, विशेषज्ञों, एनजीओ और पर्यवेक्षकों सहित लगभग हज़ार प्रतिनिधि शामिल होंगे।

बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के सभी 1237 गांवों का विवरण एमजीएमडी पोर्टल पर मानचित्रण करके अपलोड किया गया

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बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के सभी 1237 गांवों का विवरण एमजीएमडी पोर्टल पर मानचित्रण करके अपलोड किया गया है।

मेरा गांव मेरी धरोहर (एमजीएमडी) कार्यक्रम के तहत देश भर में सांस्कृतिक मानचित्रण के लिए 6,38,365 गांवों की पहचान की गई है। इनमें से अब तक 6,23,449 गांवों का विवरण एमजीएमडी पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है।

अपनी दस्तावेजीकरण गतिविधियों के हिस्से के रूप में, एमजीएमडी, मौखिक परंपराओं, विश्वासों, रीति-रिवाजों, ऐतिहासिक महत्व, कला रूपों, विरासत स्थलों, पारंपरिक भोजन, प्रमुख कलाकारों, मेलों और त्योहारों, पारंपरिक पोशाक, गहने और स्थानीय स्थलों सहित मूर्त और अमूर्त दोनों सांस्कृतिक तत्वों की एक विस्तृत श्रृंखला को शामिल करता है।

एमजीएमडी कार्यक्रम प्रामाणिक, ग्राम-स्तरीय सांस्कृतिक प्रोफाइल बनाकर ग्रामीण पहचान को मजबूत करने पर जोर देता है जो स्थानीय परंपराओं, प्रणालियों और विरासत संपत्तियों को मान्यता देता है। यह एमजीएमडी पोर्टल के माध्यम से समुदाय के नेतृत्व वाले दस्तावेजीकरण और क्राउड-सोर्स्ड सत्यापन को सक्षम करके सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देता है। एकल राष्ट्रीय पोर्टल पर संरचित सांस्कृतिक डेटा की उपलब्धता सांस्कृतिक क्लस्टर विकास, विरासत पर्यटन और पारंपरिक कौशल को बढ़ावा देने की योजना बनाने में सहायता करती है, जिससे स्थायी आजीविका सृजन और ग्रामीण आर्थिक विकास में योगदान मिलता है।

एमजीएमडी कार्यक्रम के तहत, संस्कृति मंत्रालय ने ओडिशा के गांवों का सांस्कृतिक मानचित्रण किया है, जिसके तहत अब तक 47,209 गांवों का मानचित्रण किया गया है। भद्रक जिले के सभी 998 गांवों का विवरण मैप किया गया है और एमजीएमडी पोर्टल पर अपलोड किया गया है। इसी तरह, बालासोर जिले के सभी 2,798 गांवों का विवरण मानचित्रण के बाद एमजीएमडी पोर्टल पर अपलोड किया गया है।

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

 कुमाऊं हिमालय में दीखा हिम तेंदुआ

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 कुमाऊं हिमालय में हिम तेंदुआ जनसंख्या एवं एल्पाइन पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण पर केंद्रित एक महत्त्वपूर्ण परियोजना के दौरान शोधकर्ताओं ने वन्यजीव जगत के लिए अत्यंत दुर्लभ और आश्चर्यजनक रिकॉर्ड दर्ज किया है। उत्तराखंड सरकार के वन विभाग के द्वारा राष्ट्रीय हरित भारत मिशन द्वारा वित्तपोषित यह परियोजना, नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व के विशाल और कम अध्ययन किए गए पर्वतीय परिदृश्य में टॉप मांसाहारी प्रजातियों की जनसंख्या गतिकी और उनके पारिस्थितिक संबंधों को जानकारी देने के उद्देश्य से संचालिक किया गया है।

यह परियोजना आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों जैसे कैमरा ट्रैपिंग, चिन्ह-सर्वेक्षण और आवास-उपयोग मॉडलिंग का उपयोग करके हिम तेंदुए, उसके शिकार प्रजातियों और अन्य मांसाहारियों की उपस्थिति तथा उनकी गतिविधियों के पैटर्न को समझने का प्रयास कर रही है। शोध दल यह भी जांच कर रहा है कि पशुधन चराई, गैर-काष्ठ वन उत्पादों का संग्रहण और जलवायु परिवर्तन से वनस्पतियों में हो रहे बदलाव खाद्य-जाल और एल्पाइन पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता को किस प्रकार प्रभावित कर रहे हैं।

इतना ही नहीं, व्यापक अध्ययन के दौरान सुंदरधुंगा घाटी में लगभग 3,010 मीटर की ऊंचाई पर बंगाल टाइगर का दुर्लभ और वैज्ञानिक रुप निगरानी में है। कैमरा ट्रैप में रिकॉर्ड हुई यह तस्वीर। बता दें कि, इस क्षेत्र से अब तक की सबसे पुष्ट उच्च-ऊंचाई उपस्थिति का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री धामी ने किया 108 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज अपने बागेश्वर दौरे के दूसरे दिन, केदारेश्वर मैदान, कपकोट में आयोजित जन सम्मेलन में 108 करोड़ रुपये की 42 योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। जिसमें लगभग 62 करोड़ की 24 योजनाओं का लोकार्पण तथा 45.95 करोड़ की 18 योजनाओं का शिलान्यास शामिल है। कार्यक्रम की शुरुआत स्कूली बच्चों की मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई, जिसने वातावरण को उत्साहपूर्ण बना दिया।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि जनता की विशाल उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार विकास के सही मार्ग पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि गरीब वर्ग, महिलाओं और युवाओं के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने ‘मानस खंड माला’ परियोजना के तहत धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण की प्रगति की जानकारी साझा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शीतकालीन पर्यटन की नई पहल से प्रदेश में वर्षभर पर्यटन गतिविधियाँ बढ़ेंगी और स्थानीय लोगों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा। उन्होंने कहा कि सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्यरत है और वन डिस्ट्रिक्टदृटू प्रोडक्ट के तहत बागेश्वर की पारंपरिक ताम्र शिल्प को राष्ट्रीय पहचान मिल रही है। सरयू एवं गोमती नदियों के संरक्षण कार्य निरंतर प्रगति पर हैं, वहीं बागेश्वर रेल लाइन का सर्वेक्षण भी पूर्ण हो चुका है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि गरुड़ अस्पताल का उच्चीकरण किया जाएगा, जिससे स्थानीय जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

इसके साथ ही विभिन्न स्वायत सहकारिता एवं स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता के चेक प्रदान किए गए । जिसमे संकल्प स्वायत सहकारिता समूह सीएलएफ (हर्षिला) को ₹3 करोड़ 23 लाख, ऊर्जा स्वायत सहकारिता सीएलएफ को ₹22 लाख 50 हजार,एनआरएलएम की संवाद महिला स्वयं सहायता समूह और जय गोलू देवता स्वयं सहायता समूह को ₹5 -5 लाख के चेक प्रदान किए गए।

कार्यक्रम स्थल पर कृषि, उद्यान, रेशम, सहकारिता, ग्राम्य विकास, महिला सशक्तिकरण, डेयरी, पशुपालन एवं उद्योग विभाग सहित विभिन्न विभागों ने स्टॉल स्थापित किए, जिन पर आमजन को योजनाओं की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई। मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण किया, स्थानीय हस्तशिल्पकारों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और उनके कार्य का उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम में जिलाधिकारी आकांक्षा कोंड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष शोभा आर्या, कपकोट विधायक सुरेश गड़िया, बागेश्वर विधायक पार्वती दास, दर्जा राज्यमंत्री भूपेश उपाध्याय, शिव सिंह विष्ट, जिला पंचायत उपाध्यक्ष विशाखा खेतवाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री बलवंत सिंह भौंरयाल, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रभा गड़िया, नगर पालिका अध्यक्ष सुरेश खेतवाल, एसपी चंद्र सिंह घोड़के, सीडीओ आर.सी. तिवारी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

आज संसद में भारी राजनीतिक हलचल, तीखी बहसों और महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ

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​आज सोमवार संसद के शीतकालीन सत्र का एक महत्वपूर्ण दिन रहा, जिसमें दोनों सदनों में मुख्य रूप से ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विशेष चर्चा हुई। हालाँकि, विपक्ष के हंगामे और कुछ अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों के कारण सदन की कार्यवाही बाधित भी हुई, जिसके परिणामस्वरूप कुछ समय के लिए स्थगन करना पड़ा।

​लोकसभा की कार्यवाही

​लोकसभा की कार्यवाही आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ पर विशेष चर्चा की शुरुआत के साथ आरंभ हुई। यह चर्चा राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थी। प्रधानमंत्री ने ‘वंदे मातरम्’ की गौरवशाली यात्रा को याद किया और बताया कि कैसे यह गीत अंग्रेजों की साजिशों के खिलाफ एकता का प्रतीक बना।

​वंदे मातरम् पर चर्चा: चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राष्ट्रगीत के विभिन्न पहलुओं, इतिहास और इसके उपयोग को लेकर तीखी बहस हुई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद बसवराज बोम्मई ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के एक प्रस्ताव में ‘वंदे मातरम्’ के कुछ छंदों को बदल दिया गया था, जिससे राष्ट्रगीत के साथ अन्याय हुआ। उन्होंने देश की भावी पीढ़ी को यह जानने की आवश्यकता पर जोर दिया कि किन लोगों की मंशा के कारण इसके साथ अन्याय हुआ।

​विपक्ष की प्रतिक्रिया: विपक्ष की ओर से कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने चर्चा की शुरुआत की, जबकि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के सांसद ए. राजा ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ पर विभाजन मुसलमानों ने नहीं, बल्कि भाजपा ने पैदा किया। कांग्रेस ने घोषणा की कि वह राष्ट्रगीत के उपयोग की समीक्षा करेगी। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव सुधारों पर बोलने की बात कही।

​सदन का स्थगन: सत्र की शुरुआत में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित करनी पड़ी थी, हालाँकि ‘वंदे मातरम्’ पर चर्चा के लिए इसे दोबारा शुरू किया गया और इसके लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है।

​राज्यसभा की कार्यवाही

​राज्यसभा में भी कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिले, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण उच्च सदन की कार्यवाही भी बाधित हुई।

​हंगामे और स्थगन: राज्यसभा में विपक्ष ने मुख्य रूप से एसआईआर (संभवतः सुरक्षा संबंधी कोई मुद्दा) के मामले पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए हंगामा किया। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मामले को महत्वपूर्ण बताते हुए चर्चा पर जोर दिया। लगातार शोर-शराबे और विपक्ष के हंगामा जारी रखने के कारण सदन की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

​विधेयक और प्रस्ताव: उच्च सदन में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा कल लोकसभा में लाए गए तीनों विधेयकों (संविधान 130वां संशोधन विधेयक 2025, संघ राज्य क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक 2025, और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन संशोधन विधेयक 2025) को एक संयुक्त समिति को सौंपे जाने का प्रस्ताव रखा जाएगा।

​अन्य मुद्दे: तृणमूल सांसद डेरेक ओब्रायन ने शून्यकाल में सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से सदस्यों के ‘व्यवस्था का प्रश्न’ (Point of Order) उठाने के अधिकार की रक्षा करने की अपील की। इसके अतिरिक्त, इंडिगो एयरलाइन संकट और सांसदों को अपने क्षेत्र में आने-जाने में होने वाली दिक्कतों का मुद्दा भी उठाया गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज बजट पर हुई चर्चा का जवाब दे सकती हैं और सीमा शुल्क टेरिफ अधिनियम 1975 की दूसरी अनुसूची में संशोधन के संबंध में भी वक्तव्य दे सकती हैं।

​समीक्षा और निष्कर्ष

​आज की संसदीय कार्यवाही की समीक्षा करने पर यह स्पष्ट होता है कि दोनों सदनों में उत्पादकता और हंगामे का मिला-जुला माहौल रहा। जहाँ एक ओर लोकसभा ने ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगाँठ पर एक महत्वपूर्ण विशेष चर्चा को प्राथमिकता दी, वहीं दूसरी ओर विपक्ष द्वारा एसआईआर जैसे मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग ने दोनों सदनों में कार्यवाही को बाधित किया। इस तरह के व्यवधान सत्र की समग्र उत्पादकता को प्रभावित करते हैं, जो पहले से ही लगभग 32% (लोकसभा) और 36% (राज्यसभा) के आसपास बताई जा रही है। राजनीतिक दलों के बीच राष्ट्रगीत जैसे भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व के विषय पर भी विभाजनकारी दृष्टिकोण सामने आया, जो एक स्वस्थ संसदीय बहस के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
​सत्र का अंतिम सप्ताह होने के कारण सरकार के लिए लंबित विधेयकों को पारित कराना और विपक्ष के लिए अपने मुद्दों पर जवाब मांगना, दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। उम्मीद है कि आगामी दिनों में सदन में और अधिक रचनात्मक और सार्थक चर्चाएँ होंगी।

पहला अनुच्छेद लोकसभा की कार्यवाही से आरंभ हुआ, जहाँ सदस्यों ने देश के आर्थिक हालत, मूल्यवृद्धि, कृषि संकट और बेरोज़गारी पर चिंता व्यक्त की। सदन के आरंभ में ही विपक्ष ने मूल्यवृद्धि पर तत्काल चर्चा की मांग रखते हुए सरकार पर निशाना साधा। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि लगातार बढ़ती महँगाई ने आम नागरिकों का जीवन कठिन बना दिया है और सरकार इसके समाधान में असफल रही है। सत्ता पक्ष ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि सरकार ने कई राहतकारी कदम उठाए हैं और वैश्विक कारणों से प्रभावित आर्थिक स्थिति को स्थिर करने हेतु नीतिगत कदम लगातार लागू किए जा रहे हैं।

संसद में आज कृषि संकट भी एक प्रमुख विषय बना रहा। विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों के किसानों की समस्याएँ सदन में रखीं। फसलों की लागत बढ़ने, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर स्पष्टता, किसानों के बकाया भुगतान और प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान पर विस्तृत चर्चा हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार किसानों की सहायता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और देशभर में नई योजनाओं के माध्यम से उत्पादन तथा आय में वृद्धि सुनिश्चित की जा रही है। हालांकि विपक्ष ने इन आश्वासनों को अपर्याप्त बताते हुए व्यापक सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया।

लोकसभा की कार्यवाही के दौरान श्रमिकों की स्थिति, उद्योगों में छंटनी, और रोज़गार सृजन को लेकर भी सार्थक बहस हुई। कई सदस्यों ने शिकायत की कि नए उद्योग और निवेश के दावे ज़मीनी स्तर पर दिखाई नहीं देते। सरकार की ओर से श्रम मंत्रालय ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि देश में रोजगार के नये अवसर बढ़ रहे हैं और कई प्रमुख क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है। हालांकि विपक्ष और कुछ स्वतंत्र सदस्यों ने इन आंकड़ों पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए अधिक पारदर्शिता की मांग की।

आज लोकसभा में सामाजिक न्याय, आरक्षण नीति और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के मुद्दे भी उठे। कई सदस्यों ने सामाजिक असमानता और भेदभाव के मामलों को गंभीरता से रखा। सरकार की ओर से कहा गया कि संवैधानिक व्यवस्थाओं के अनुरूप सभी वर्गों को सुरक्षा और अवसर प्रदान करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हालांकि, विपक्ष ने हाल के कुछ घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया।

दोपहर के बाद सदन में सरकार द्वारा प्रस्तुत विधेयक पर चर्चा शुरू हुई। यह विधेयक प्रशासनिक संरचना में व्यापक बदलाव से संबंधित था। सत्ता पक्ष ने इसे देश में सुशासन स्थापित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम कहा। वहीं विपक्ष ने इसे जल्दबाजी में लाया गया विधेयक बताते हुए कई धाराओं पर आपत्ति जताई। बहस के दौरान दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली, जिसके कारण सदन के अध्यक्ष को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा। अंततः लंबी चर्चा के बाद विधेयक को बहुमत से पारित कर दिया गया।

अब बात राज्यसभा की, जहाँ आज की कार्यवाही अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण लेकिन गहन रही। राज्यसभा में राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव, आंतरिक शांति और सुरक्षा बलों की चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। कई सदस्यों ने सीमा क्षेत्रों में हो रही घुसपैठ की घटनाओं और पड़ोसी देशों की गतिविधियों का उल्लेख करते हुए सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की। रक्षा मंत्री ने सदन को आश्वासन दिया कि देश की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत है और किसी भी चुनौती से निपटने के लिए सुरक्षा बल पूरी तरह सक्षम हैं।

राज्यसभा में आज शिक्षा सुधार, विद्यालयों में बढ़ती समस्याएँ, उच्च शिक्षा में गुणवत्ता की कमी और विश्वविद्यालयों में लगातार हो रहे विवादों पर भी चर्चा हुई। कई सदस्यों ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया। सरकार की ओर से उत्तर देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था का क्रियान्वयन तेज गति से हो रहा है और इससे भारत की शिक्षा प्रणाली को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी।

राज्यसभा की कार्यवाही में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, दवाओं की उपलब्धता और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की कमी पर भी सवाल उठे। कई सदस्यों ने महामारी के बाद स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और चिकित्सा क्षेत्र में अधिक निवेश की आवश्यकता पर जोर दिया। सरकार ने इस दिशा में किए गए नए निवेशों, चिकित्सालयों के विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में नये स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने की योजना की जानकारी दी।

दोनों सदनों में आज पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के मुद्दे बार-बार उठे। खासकर वायु प्रदूषण, नदियों की सफाई, जंगलों की कटाई और प्राकृतिक संपदा के क्षरण पर कई सदस्यों ने चिंता व्यक्त की। सरकार ने बताया कि देशभर में नए अभियान चलाए जा रहे हैं, परंतु विपक्ष और कुछ पर्यावरण विशेषज्ञ सदस्यों ने कहा कि ज़मीनी स्तर पर इन कार्यक्रमों का असर पर्याप्त नहीं दिखता।

आज की कार्यवाही में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि संसद के बाहर उठ रहे कई मुद्दे सदन के भीतर भी गूंजते रहे। विपक्ष ने कई बार सरकार से संवेदनशील मामलों पर बयान की मांग की, जिसमें युवा वर्ग की समस्याएँ, छात्रों में बढ़ता तनाव और समाज में फैलते असंतोष शामिल रहे। सरकार ने इन सभी मामलों में उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया, परंतु विपक्ष संतुष्ट नहीं दिखा।

दिनभर की कार्यवाही में कई बार सदन के भीतर शोरगुल, नारेबाजी और असहमति की स्थिति बनी, जिसके कारण कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित भी करना पड़ा। हालाँकि संसद के अध्यक्षों और सभापति ने संयम और अनुशासन बनाए रखने की अपील करते हुए कार्यवाही को आगे बढ़ाया।

कुल मिलाकर, आज का दिन संसद में भारी राजनीतिक हलचल, तीखी बहसों और महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श का रहा। दोनों सदनों में उठाए गए प्रश्नों और चर्चाओं ने यह स्पष्ट किया कि देश कई क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना कर रहा है और इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार तथा विपक्ष को संयुक्त रूप से आगे बढ़ना होगा। संसद का आज का दिन लोकतांत्रिक विमर्श की उपयोगिता और ताकत को एक बार फिर रेखांकित करता है।चैट जीपीटी

जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने का निर्णय

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अगस्त, 2019 में शुरू किया गया जल जीवन मिशन (जेजेएम) को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की घोषणा की गई है।प्रत्येक ग्रामीण परिवार हेतु नल जल आपूर्ति का प्रावधान करने के लिए, था, जिसे पांच वर्ष की अवधि के लिए राज्यों की भागीदारी से कार्यान्वित किया जाना था।

मिशन की शुरुआत में, केवल 3.23 करोड़ (16.7 प्रतिशत) ग्रामीण परिवारों के पास नल जल कनेक्शन होने की सूचना थी। अब तक, राज्यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों द्वारा 03.12.2025 तक दी गई सूचना के अनुसार, जेजेएम के तहत, लगभग 12.52 करोड़ और ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। इस प्रकार, 03.12.2025 तक, देश के 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 15.75 करोड़ (81.37%) से अधिक परिवारों के पास उनके घरों में नल जल आपूर्ति होने की सूचना है। राष्ट्रीय औसत से कम प्रगति वाले राज्यों सहित राज्य/संघ राज्‍य क्षेत्र-वार ब्‍यौरा अनुबंध में दिया गया है।

मिशन के लिए कुल परिव्यय 3.60 लाख करोड़ रुपये अनुमानित किया गया था, जिसमें से केंद्रीय हिस्सा 2.08 लाख करोड़ रुपये था। स्वीकृत केंद्रीय परिव्यय का 2024-25 तक लगभग उपयोग किया जा चुका है।

अब तक हुई प्रगति और चल रहे कार्यों को ध्यान में रखते हुए, माननीय वित्त मंत्री ने बजट घोषणाओं 2025-26 के माध्यम से संवर्धित कुल परिव्यय के साथ जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की घोषणा की है, जिसमें बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता और दीर्घकालिक स्थिरता और नागरिक केंद्रित जल सेवा सुपुर्दगी के लिए ग्रामीण पाइपगत जलापूर्ति योजनाओं के संचालन और रखरखाव पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

ऑपरेशन सागर बंधु – भारतीय नौसेना ने श्रीलंका को 1000 टन मानवीय सहायता सामग्री और आपदा राहत सामग्री पहुंचाने के लिए चार और युद्धपोत भेजे

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श्रीलंका को तत्काल खोज एवं बचाव तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) सहायता प्रदान करने के लिए शुरू किए गए ऑपरेशन सागर बंधु के तहत भारतीय नौसेना ने चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों को (एचएडीआर) सामग्री की आपूर्ति हेतु चार और जहाज– आईएनएस घड़ियाल, एलसीयू 54, एलसीयू 51 और एलसीयू 57 तैनात किए हैं।

इससे पहले आईएनएस विक्रांत, आईएनएस उदयगिरी और आईएनएस सुकन्या ने राहत सहायता तथा हेलीबोर्न एसएआर सहायता प्रदान की हैं।

ये तीन एलसीयू (लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी) 7 दिसंबर, 2025 की सुबह कोलंबो पहुंचे और श्रीलंका के अधिकारियों को महत्वपूर्ण राहत सामग्री सौंप दी। मानवीय सहायता मिशन जारी रखने के लिए आईएनएस घड़ियाल 8 दिसंबर, 2025 को त्रिंकोमाली पहुंच गया है।

1000 टन सामग्री सहित जहाजों की यह तैनाती भारत और श्रीलंका के बीच घनिष्ठ जन-जन संपर्क तथा भारतीय नौसेना की अपने आईओआर (हिंद महासागर क्षेत्र) के पड़ोसी देशों को समय पर मानवीय सहायता प्रदान करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

एक करोड़ के इनामी नक्सली रामधेर ने गिरोह के साथ किया सरेंडर, MMC ज़ोन नक्सल मुक्त

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कुख्यात नक्सली कमांडर और सेंट्रल कमेटी मेंबर (सीसीएम) रामधर मज्जी ने सोमवार को अपने ग्रुप के साथ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। उसे हिडमा जैसा ही कुख्यात माना जाता था। मज्जी ने छत्तीसगढ़ बकर कट्टा थाने में आत्मसमर्पण कर दिया। एमएमसी ज़ोन में सक्रिय सीसी (सेंट्रल कमेटी) सदस्य मज्जी अपने डिवीजनल कमेटी सदस्यों के साथ पहुँचे और एके-47 राइफल सहित हथियार डाल दिए। उनके साथ, एसीएम रामसिंह दादा और एसीएम सुकेश पोट्टम ने भी अपने हथियार सौंपकर आत्मसमर्पण कर दिया।

पुलिस ने एके-47, इंसास राइफल, एसएलआर, .303 राइफल और 0.30 कार्बाइन सहित हथियारों का एक बड़ा जखीरा बरामद होने की पुष्टि की है। आत्मसमर्पण करने वालों में छह महिला कार्यकर्ता भी शामिल थीं, जो माओवादी आंदोलन में महिलाओं की गहरी भागीदारी को उजागर करता है। इस सूची में लक्ष्मी, शीला, योगिता, कविता और सागर के साथ-साथ डीवीसीएम (डिवीजनल कमेटी सदस्य) ललिता और डीवीसीएम जानकी भी शामिल हैं। अन्य प्रमुख नामों में डीवीसीएम चंदू उसेंडी और डीवीसीएम प्रेम शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि उनके आत्मसमर्पण से क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क को करारा झटका लगा है। पुलिस सूत्रों ने खुलासा किया है कि यह समूह महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ विशेष क्षेत्रीय समिति क्षेत्र में सक्रिय था, जहाँ वे अपनी गतिविधियाँ संचालित करते थे और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए लगातार खतरा पैदा करते थे।