भारतीय साहित्य और पत्रकारिता की धुरी थे मंगलेश डबराल

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भारतीय साहित्य और पत्रकारिता की दुनिया में मंगलेश्वर डबराल जी, जिन्हें साहित्य जगत में मंगलेश डबराल के रूप में अधिक पहचाना जाता है, एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने साधारण जीवन, जमीनी संघर्ष, और संवेदनात्मक अनुभवों को अपनी लेखनी में अद्भुत सहजता के साथ व्यक्त किया। वे केवल कवि ही नहीं, बल्कि जनपक्षीय पत्रकार और विचारशील साहित्यकार भी थे। आधुनिक हिंदी कविता में सरलता, गहराई और संवेदना की त्रयी को प्रतिष्ठित करने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

मंगलेश्वर डबराल जी का जन्म उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में हुआ। पहाड़ों की कठोर ज़िंदगी, प्रकृति की निर्मलता और ग्रामीण समाज के संघर्ष ने उनके मन में बचपन से ही संवेदनाओं की एक गहरी धारा प्रवाहित की। यही वजह है कि उनकी कविताओं में पहाड़ की आत्मा, उसकी खुशबू, उसकी पीड़ा और उसका अकेलापन साफ़ दिखाई देता है। वे मानते थे कि कविता मनुष्यता का सबसे स्वाभाविक स्वर है—और इसी मान्यता के कारण उनकी रचनाएँ हर पाठक को अपनी-सी लगती हैं।

पत्रकारिता में उनका प्रवेश भी साहित्यिक दृष्टि से प्रभावित था। उन्होंने अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में कार्य किया और हमेशा जनहित, समाज के हाशिये पर रह रहे लोगों और असमानताओं के मुद्दों को प्रमुखता दी। उनकी रिपोर्टिंग का दृष्टिकोण वस्तुनिष्ठ होते हुए भी संवेदनात्मक था। वे समाचारों के भीतर छिपे जीवन के सच को उजागर करने में सहज थे। उनके लेखन में किसी प्रकार का प्रदर्शन नहीं, बल्कि सादगी और नैतिक साहस की झलक स्पष्ट मिलती है।

डबराल जी ने कविता को जनता की भाषा और जनता के सरोकारों का माध्यम बनाया। उनकी काव्यधारा में रोमांच या आडंबर नहीं, बल्कि आंतरिक शांति, आत्मीयता और जीवन की बारीकियों का सूक्ष्म अवलोकन मिलता है। उनकी प्रसिद्ध काव्य-पंक्तियाँ और रचनाएँ आज भी नए लेखकों और पाठकों को सोचने और संवेदित होने की प्रेरणा देती हैं। वे शब्दों में सादगी रखते हुए भी गहनतम भावों को इस प्रकार व्यक्त करते थे कि कविता सीधे हृदय में उतर जाती थी।

उनकी कविता में व्यक्ति का अकेलापन, समय की निरंतरता, जीवन की छोटी-छोटी खुशियाँ, सामाजिक विडंबनाएँ और मनुष्य का संघर्ष एक साथ दिखाई देते हैं। वे मानते थे कि कविता आत्मा की भाषा है और इसी कारण उनकी रचनाओं में कृत्रिमता का कोई स्थान नहीं था। डबराल जी की कविताएँ आधुनिक समय के द्वंद्व को ऐसे चित्रित करती हैं जैसे कोई सामान्य व्यक्ति अपने जीवन का साधारण विवरण दे रहा हो, लेकिन वह साधारण विवरण ही असाधारण संवेदना में बदल जाता है।

मंगलेश्वर डबराल जी का व्यक्तित्व एक शांत, सरल और विनम्र कवि का था। वे साहित्यिक स्पर्धाओं या मंचीय प्रतिष्ठा से दूर रहे। उनका विश्वास था कि सच्चा साहित्य वही है जो समाज को संवेदित करे, उसे सोचने पर मजबूर करे और मनुष्य को मनुष्य से जोड़ने का कार्य करे। वे साहित्य को सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा मानते थे, किसी व्यक्तिगत उपलब्धि का नहीं।

पत्रकारिता में रहते हुए भी उन्होंने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। वे सत्ता के विरुद्ध और सच के पक्ष में निर्भीक होकर लिखते थे। उनके लेखन का उद्देश्य जागरूकता पैदा करना था, विवाद खड़ा करना नहीं। उन्होंने अनेक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी सशक्त टिप्पणियों के माध्यम से पाठकों का ध्यान आकर्षित किया। उनका लेखन संतुलित, गहन और अध्ययन आधारित होता था।

डबराल जी को साहित्य के क्षेत्र में कई सम्मान मिले, जिनमें साहित्य अकादमी सम्मान विशेष उल्लेखनीय है। यह सम्मान उन्हें उनकी कृति हम जो देखते हैं पर प्राप्त हुआ। किंतु उनके लिए सम्मान पुरस्कारों से अधिक महत्वपूर्ण पाठकों का विश्वास और प्रेम था। वे कहा करते थे कि कवि को पुरस्कार नहीं, बल्कि समाज की संवेदनशीलता को बढ़ाने वाला मार्ग तैयार करना चाहिए।

उनके व्यक्तित्व का सबसे प्रखर पक्ष था—उनकी जनपक्षीय सोच। वे गरीबों, मजदूरों, प्रवासियों और ग्रामीण समाज के दुखों को अपनी कविताओं का केंद्र बनाते थे। उन्होंने शहरों के कृत्रिम चमक-दमक के पीछे छिपी संवेदनहीनता पर भी तीखे शब्दों में टिप्पणी की। उनके लेखन ने पहाड़ के संघर्ष और शहर की व्यस्त भागदौड़, दोनों को ही समान संवेदना के साथ सामने रखा।

मंगलेश्वर डबराल जी का जीवन, कविता और पत्रकारिता एक-दूसरे से अलग नहीं, बल्कि एक ही धारा के विभिन्न रूप थे। वे जिस समाज में रहते थे, उसी समाज की धड़कनों को सुनकर लिखते थे। उनके शब्दों में पहाड़ की ऊँचाई, नदी की विनम्रता और जनजीवन की सच्चाई—सब कुछ दिखाई देता है। वे उस परंपरा के कवि थे जो कविता को केवल साहित्यिक प्रयोग नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का साधन मानते थे।

उनका निधन हिंदी साहित्य और पत्रकारिता दोनों की दुनिया के लिए एक अपूरणीय क्षति थी। उन्होंने लेखनी की जो परंपरा स्थापित की, वह आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक प्रेरित करती रहेगी। वे हमें सिखाते हैं कि साहित्य केवल सुन्दर शब्दों का खेल नहीं, बल्कि जीवन की सच्चाइयों को महसूस करना और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी है।

महाराष्ट्र के वर्धा में “ अवैध ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़; 192 करोड़ रुपये की 128 किलो मेफेड्रोन ज़ब्त; तीन गिरफ्तार

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राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने ऑपरेशन हिंटरलैंड ब्रू नाम के विशेष ऑपरेशन के तहत महाराष्ट्र के वर्धा में गुप्त मेफेड्रोन बनाने वाली फैक्ट्री का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया है। इस ऑपरेशन में लगभग 192 करोड़ रुपये की 128 किलो मेफेड्रोन, 245 किलो प्रीकर्सर केमिकल, कच्चा माल और पूरा प्रोसेसिंग सेटअप ज़ब्त किया गया।

विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई करते हुए, डीआरआई अधिकारियों ने वर्धा से लगभग 60 किमी दूर करंजा (घड़गे) के दूरदराज, झाड़ियों से ढके इलाके में चुपके से निगरानी की और फिर खोजबीन अभियान चलाया। ऑपरेशन के दौरान, अधिकारियों ने पूरी तरह से चालू सिंथेटिक ड्रग प्रोसेसिंग सेटअप का पता लगाया, जिसमें अवैध रूप से मेफेड्रोन बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कामचलाऊ रिएक्टर, बर्तन और अन्य उपकरण शामिल थे। ज़ब्ती में तैयार उत्पाद और उसके सिंथेसिस के लिए ज़रूरी प्रीकर्सर केमिकल भी शामिल थे।

इस अवैध फैक्ट्री को स्थानीय लोग जानबूझकर ग्रामीण इलाके में इस तरह से बनाकर चला रहे थे ताकि यह आसपास के माहौल में घुल-मिल जाए और पकड़ी न जाए। विनिर्माण इकाई अस्थायी, मॉड्यूलर, बिना पहचान वाली संरचना थी जो झाड़ियों के बीच गहराई में छिपी हुई थी।

इस इकाई को चलाने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिसमें मास्टरमाइंड भी शामिल है। वह फाइनेंसर और केमिस्ट के तौर पर भी काम करता था, इस कार्य में उसके दो साथी भी थे। ये तीनों मेफेड्रोन के विनिर्माण और वितरण नेटवर्क में सक्रिय रूप से शामिल पाए गए और उन्हें एनडीपीएस एक्ट, 1985 के संबंधित प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया है।

इस ऑपरेशन के साथ, डीआरआई ने इस वर्ष अब तक गोपनीय सूचना के आधार पर कार्रवाई करके पांच गैरकानूनी ड्रग विनिर्माण इकाइयों का भंडाफोड़ किया है। ये लगातार प्रयास डीआरआई की निरंतर सतर्कता, ऑपरेशनल उत्कृष्टता और सरकार के नशा मुक्त भारत अभियान के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दिखाते हैं, जो नागरिकों को नशीले और साइकोट्रॉपिक पदार्थों के खतरे से बचाती है।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारत 6जी मिशन के अंतर्गत शीर्ष परिषद बैठक की अध्यक्षता की

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केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज भारत 6जी मिशन के अंतर्गत शीर्ष परिषद की बैठक की अध्यक्षता और भारत 6जी एलायंस की प्रगति की समीक्षा की।बठक में केंद्रीय संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी, सचिव (दूरसंचार) डॉ. नीरज मित्तल, सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय सूद, प्रमुख मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षा जगत, अनुसंधान एवं विकास संस्थानों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, उद्योग जगत के प्रमुखों और भारत 6जी गठबंधन के सदस्यों ने भाग लिया। इस उच्च-स्तरीय बातचीत में 2030 तक वैश्विक 6जी क्षेत्र में अग्रणी बनने की दिशा में देश की तीव्र प्रगति पर बल दिया गया।

केंद्रीय मंत्री श्री सिंधिया ने बैठक को संबोधित करते हुए उभरती संचार प्रौद्योगिकियों में भारत को अग्रणी बनाने के लिए 6जी नवाचार को गति देने हेतु सरकार की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने भारत 6जी गठबंधन के सात कार्य समूहों के बीच बेहतर तालमेल के महत्व पर बल दिया और साथ ही सहयोग को बढ़ावा देने, टीम वर्क को मज़बूत करने और अपने प्रयासों में समन्वय सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से बैठकें करने का पुरज़ोर आग्रह किया।

केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने परिषद को संबोधित करते हुए गठबंधन को उसकी तीव्र वृद्धि के लिए बधाई दी और इस बात पर बल दिया कि भारत को अब आत्मविश्वास के साथ वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने 6जी मिशन की चार प्रमुख प्राथमिकताओं को रेखांकित किया: निरंतर प्रगति जारी रखना, संपूर्ण मूल्य श्रृंखला की गहन जांच करना, जटिल तकनीकी चुनौतियों को समाधान योग्य घटकों में विभाजित करना और प्रत्येक कार्य समूह के लिए मापनीय तिमाही लक्ष्य निर्धारित करना। उन्होंने भारत 6जी गठबंधन के साथ घनिष्ठ समन्वय, नियमित प्रगति समीक्षा और स्वतंत्र मूल्यांकन के महत्व पर बल दिया। इसका उद्देश्‍य प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कल्पना के अनुसार यह सुनिश्चित करना है कि 6जी का लाभ ग्रामीण समुदायों सहित देश भर के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि उद्योग, उद्यमियों और शिक्षा जगत के बीच मज़बूत सहयोग के साथ, भारत 6जी बौद्धिक संपदा और मानकों में वैश्विक अग्रणी बनने की दिशा में आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत केवल वैश्विक रुझानों का अनुसरण करने के बजाय, दूरसंचार प्रौद्योगिकियों के भविष्य को आकार देने के लिए प्रतिबद्ध है।

केंद्रीय संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने बी6जीए द्वारा स्पेक्ट्रम, एआई-नेटिव नेटवर्क, ग्रीन टेलीकॉम, उभरते अनुप्रयोगों और आरएफ सेंसिंग को कवर करने वाली आठ तकनीकी रिपोर्टों और श्वेतपत्रों के विमोचन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “ये उपलब्धियां देश के एक प्रौद्योगिकी कार्यान्वयनकर्ता से एक प्रौद्योगिकी निर्माता के रूप में ऐतिहासिक परिवर्तन का प्रतीक हैं।”

सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने उभरती हुई तकनीकी पहलों को एक मिशन-मोड ढांचे में स्पष्ट रूप से परिभाषित उद्देश्यों के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। इसका उद्देश्‍य भारत को मानक-निर्धारण, उपयोग-मामले विकास और भविष्य की तकनीक की रूपरेखा तैयार करने में वैश्विक नेतृत्व प्राप्त करने में सक्षम बनाना है। उन्होंने एआई और 6जी के प्रति राष्ट्रीय दृष्टिकोण में साइबर सुरक्षा सम्‍बंधी विचारों को एकीकृत करने के महत्वपूर्ण महत्व को रेखांकित किया, और कहा कि सुरक्षित आर्किटेक्चर आधारभूत होने चाहिए। अब एक दूर की अवधारणा के बजाय एक व्यावहारिक वास्तविकता बन चुके क्वांटम संचार की तीव्र प्रगति पर प्रकाश डालते हुए प्रो. सूद ने विशेषज्ञों से क्वांटम प्रौद्योगिकियों, अगली पीढ़ी की संचार प्रणालियों और साइबर सुरक्षा के अभिसरण की जांच करने और यह निर्धारित करने का आग्रह किया कि उनकी संयुक्त गति देश के तकनीकी भविष्य को कैसे आकार दे सकती है।

सचिव (तकनीकी) डॉ. नीरज मित्तल ने पिछली समीक्षा के प्रमुख विचार-विमर्शों को याद किया, इनमें परिष्कृत स्पेक्ट्रम समय-सीमा, भारतीय सिलिकॉन रोडमैप, 2027-28 तक स्वदेशी 6जी बीटीएस और 6जी एसओसी की समय-सीमा, स्थिरता सम्‍बंधी केपीआई और बढ़ी हुई अंतर्राष्ट्रीय पहुंच शामिल हैं। उन्होंने आईटीयू आईएमटी-2030 (6जी) ढांचे में भारत के योगदान, “सर्वव्यापी कनेक्टिविटी” के समावेशन और भारत की क्षमताओं की वैश्विक मान्यता को मज़बूत करने पर प्रकाश डाला। डॉ. मित्तल ने अनुसंधान, मानकों, परीक्षण और परिनियोजन को एकीकृत करने और राष्ट्रीय 6जी टेस्टबेड, बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) निर्माण, उपकरण विकास और सिलिकॉन इको-सिस्‍टम के विकास में तेज़ी लाने की आवश्यकता पर बल दिया।

सरकार ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष को मंज़ूरी दी है। यह भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक अनुसंधान सहायता ढांचों में से एक है। एएनआरएफ के अंतर्गत स्थापित, यह कोष भविष्य के 6जी विकास के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों – एआई-नेटिव नेटवर्क, सेमीकंडक्टर, फोटोनिक्स,  सेंसिंग, साइबर सुरक्षा और उपग्रह-स्थलीय एकीकरण – में अग्रणी अनुसंधान को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देगा।

देश के 5जी नवाचार इको-सिस्‍टम की तीव्र प्रगति को प्रदर्शित करने के लिए, केंद्रीय मंत्री ने तीन पुस्तिकाएं जारी कीं। इनमें 100 5जी उपयोग केस लैब्स की स्थापना, प्रदर्शन और प्रभाव का दस्तावेजीकरण किया गया है। साथ में, ये पुस्तिकाएं बुनियादी ढांचे की तैनाती से लेकर व्यावहारिक प्रयोग, प्रोटोटाइप विकास और वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों तक प्रयोगशालाओं के विकास पर प्रकाश डालती हैं, यह दर्शाती हैं कि कैसे इस पहल ने एक जीवंत अनुसंधान और नवाचार इको-सिस्‍टम के लिए एक मजबूत, उद्योग-संरेखित नींव रखी है। संग्रह ” 5जी उपयोग केस लैब: बुनियादी ढांचे से नवाचार तक ” उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रयोगशालाओं के निर्माण और सफल संचालन को दर्शाता है; ” 5जी लैब बुक – संस्करण 1 : 5जी कोर, 5जी एनआर और उपयोग के मामलों में प्रयोग” एंड-टू-एंड 5जी सिस्टम पर काम करने वाले शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए तकनीकी, प्रयोग-उन्मुख मार्गदर्शन प्रदान करता है।

भारतीय तटरक्षक बल का जहाज सार्थक कुवैत के सुवैख बंदरगाह पहुंचा

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भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) का स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित अपतटीय गश्ती पोत (ओपीवी) सार्थक खाड़ी क्षेत्र में अपनी विदेशी तैनाती (ओएसडी) के तहत 09 दिसंबर, 2025 को कुवैत के सुवैख बंदरगाह पर पहुंचा। यह पहला बंदरगाह दौरा भारत–कुवैत समुद्री सहयोग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा एवं विकास) दृष्टिकोण के अनुरूप क्षेत्रीय साझेदारी को सशक्त करने के प्रति भारत की वचनबद्धता को रेखांकित करता है। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच मौजूदा समुद्री संबंधों को और मजबूत करना, समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा, संरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना तथा सुरक्षित, संरक्षित व स्वच्छ समुद्र सुनिश्चित करने में एक विश्वसनीय और जिम्मेदार साझेदार के रूप में भारत की भूमिका को और सुदृढ़ करना है।

कुवैत में चार दिवसीय प्रवास के दौरान, आईसीजीएस सार्थक का चालक दल कुवैत तटरक्षक बल तथा अन्य समुद्री हितधारकों के साथ कई महत्वपूर्ण पेशेवर गतिविधियों में भाग लेगा। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शिष्टाचार भेंट, प्रमुख समुद्री सुविधाओं का परिचयात्मक दौरा और समुद्री प्रदूषण रोधी कार्रवाई, समुद्री खोज एवं बचाव तथा समुद्री कानून प्रवर्तन पर केंद्रित संयुक्त प्रशिक्षण सत्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, संयुक्त योग सत्रों व मैत्रीपूर्ण खेल स्पर्धाओं सहित सांस्कृतिक एवं खेल आदान-प्रदान दोनों देशों की समुद्री सेनाओं के बीच पारस्परिक संबंधों को और मजबूत करेंगे। इससे आपसी समझ व विश्वास और गहरा होगा।

आईसीजीएस सार्थक का आगमन ऐसे महत्वपूर्ण समय पर हुआ है, जब दिसंबर 2024 में कुवैत की भारत के प्रधानमंत्री की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते ने भारत-कुवैत की उभरती रणनीतिक साझेदारी के तहत रक्षा और समुद्री सहयोग के व्यापक विस्तार का मार्ग प्रशस्त किया है। जहाज की वर्तमान यात्रा इन साझा उद्देश्यों को न केवल सुदृढ़ करती है, बल्कि दोनों देशों की इस प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है कि वे सशक्त परिचालन तालमेल विकसित करेंगे, आपसी सहभागिता को बढ़ाएंगे और खाड़ी क्षेत्र में एक सुरक्षित एवं स्थिर समुद्री वातावरण को प्रोत्साहित करेंगे।

आईसीजीएस सार्थक कुवैत यात्रा के बाद अपनी विशेष कार्य तैनाती को आगे बढ़ाते हुए ईरान और सऊदी अरब के बंदरगाहों पर नियोजित प्रवास करेगा। इन दौरों से पश्चिम एशिया में समुद्री सहयोग को व्यापक रूप से सुदृढ़ करने के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता, क्षमता निर्माण और सहयोगात्मक समुद्री शासन को आगे बढ़ाने के भारत के समग्र दृष्टिकोण का प्रतिबिंब मिलता है।

राज्य सभा में वंदेमातरम और लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा् हुई

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​आज (9 दिसंबर, 2025) संसद के दोनों सदनों में हुई दो महत्वपूर्ण बहसों – राज्यसभा में ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा और लोकसभा में ‘चुनाव सुधारों’ पर बहस – का हुई।राज्यसभा में यह बहस राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व पर केंद्रित रही। दोनों पक्षों के मुख्य वक्ताओं ने एक-दूसरे पर तीखे राजनीतिक और वैचारिक हमले किए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने (सत्ता पक्ष का नेतृत्व) करते हुए इस चर्चा को एक राष्ट्रीय आवश्यकता बताया।लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा का मुख्य उद्देश्य निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के मुद्दे उठाना था।
​क. सांसद मनीष तिवारी (विपक्ष – कांग्रेस) ने बहस की शुरुआत करते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए।

​1. राज्यसभा में ‘वंदे मातरम’ पर बहस का विश्लेषण 💬

​राज्यसभा में यह बहस राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व पर केंद्रित रही। दोनों पक्षों के मुख्य वक्ताओं ने एक-दूसरे पर तीखे राजनीतिक और वैचारिक हमले किए।
​क. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (सत्ता पक्ष का नेतृत्व)
​गृह मंत्री अमित शाह ने इस चर्चा को एक राष्ट्रीय आवश्यकता बताया। उन्होंने कांग्रेस पर सीधा हमला करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ पर विवाद पैदा करने की शुरुआत तुष्टीकरण की राजनीति के कारण हुई।

​मुख्य आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रगीत के कुछ अंशों को हटवा दिया था, जो स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों देशभक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत था।

​ऐतिहासिक संदर्भ: उन्होंने कहा कि जब यह गीत 100 साल का हुआ, तब देश आपातकाल (इमरजेंसी) से गुज़र रहा था, जो कांग्रेस के अलोकतांत्रिक इतिहास को दर्शाता है।

​निष्कर्ष: शाह ने निष्कर्ष निकाला कि इस राष्ट्रगीत का विरोध और इसे लेकर पैदा किया गया विवाद ही देश के विभाजन का मूल कारण बना। उनके अनुसार, यह गीत मात्र एक धुन नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।

​ख. विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे (विपक्ष का नेतृत्व)
​विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री के आरोपों का दृढ़ता से खंडन किया और इसे इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने का प्रयास बताया।

​मुख्य तर्क: उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस ने हमेशा ‘वंदे मातरम’ का सम्मान किया है और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इसे ही नारा बनाकर लाखों लोग जेल गए और अपने प्राणों का बलिदान दिया।

​राजनीतिक मंशा: खड़गे ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह बेरोज़गारी, महंगाई और विमानन कंपनी (इंडिगो) संकट जैसे वास्तविक और गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस भावनात्मक चर्चा को प्राथमिकता दे रही है।

​निष्कर्ष: उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष को राष्ट्रीय प्रतीकों को राजनीतिक हथियार बनाना बंद कर देना चाहिए और देश के सामने खड़ी वर्तमान चुनौतियों पर जवाब देना चाहिए।

​ग. सांसद ए. राजा (विपक्ष – द्रमुक)
​सांसद ए. राजा ने बहस में शामिल होते हुए तर्क दिया कि ‘वंदे मातरम’ पर विवाद को धार्मिक रंग देना ग़लत है।

​विभाजनकारी राजनीति: उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत पर विभाजन मुसलमानों ने नहीं किया, बल्कि यह भारतीय जनता पार्टी की विभाजनकारी राजनीति की देन है।

​सांस्कृतिक बहुलता: राजा ने ज़ोर दिया कि भारत एक ऐसा देश है जहाँ विभिन्न संस्कृतियाँ और विभिन्न भाषाएँ हैं, और राष्ट्रवाद को किसी एक प्रतीक या गीत तक सीमित नहीं किया जा सकता।

​2. लोकसभा में चुनाव सुधारों पर बहस का विश्लेषण 🗳️

​लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा का मुख्य उद्देश्य निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के मुद्दे उठाना था।
​क. सांसद मनीष तिवारी (विपक्ष – कांग्रेस)
​कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बहस की शुरुआत करते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए।

​सुधार का सुझाव: उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग के सदस्यों के चयन को नियंत्रित करने वाले कानून में तुरंत संशोधन किया जाए।

​चयन समिति में बदलाव: तिवारी ने विशेष रूप से मांग की कि निर्वाचन आयुक्तों के चयन की समिति में लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाए, ताकि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।

​लोकतंत्र की आत्मा: उन्होंने कहा कि वोट देने का अधिकार लोकतंत्र की आत्मा है और यह सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है कि यह अधिकार सुरक्षित रहे और किसी भी तरह की धांधली न हो।

​वित्तीय आरोप: उन्होंने सरकारों पर चुनाव जीतने के लिए चुनाव से ठीक पहले लोगों के खातों में पैसे डालने की रणनीति अपनाने का आरोप भी लगाया।

​ख. सांसद ललन सिंह (सत्ता पक्ष – जदयू)
​राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दल से सांसद ललन सिंह ने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता का बचाव किया।

​आरोपों का खंडन: उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था है, और विपक्ष के निराधार आरोपों से इस संस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न नहीं लगाया जाना चाहिए।

​चुनाव की निष्पक्षता: सिंह ने जोर देकर कहा कि देश में हुए पिछले कई चुनावों की निष्पक्षता ने यह साबित किया है कि चुनाव आयोग पूरी तरह से तटस्थ होकर काम करता है।

​ग. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू (सत्ता पक्ष)
​केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बहस में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार चुनाव सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है।

​जनता का विश्वास: उन्होंने कहा कि चुनाव सुधारों पर चर्चा आवश्यक है ताकि जनता झूठे आख्यानों (बातों) से गुमराह न हो और उनका लोकतंत्र में विश्वास बना रहे।

​सार्थक चर्चा की आवश्यकता: रिजिजू ने सदन के सदस्यों से अपील की कि वे शोरशराबा करने के बजाय चुनाव सुधारों जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सार्थक और रचनात्मक चर्चा करें।

​3. विस्तृत समीक्षा और निष्कर्ष 🎯

​दोनों सदनों में आज की कार्यवाही ने भारतीय लोकतंत्र के दोहरे चरित्र को उजागर किया: एक ओर भावनात्मक राष्ट्रवाद पर गहन बहस, तो दूसरी ओर संस्थागत विश्वसनीयता पर तीखा सवाल-जवाब।
​’वंदे मातरम’ पर बहस ने यह स्पष्ट कर दिया कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इतिहास की व्याख्या और राष्ट्रवादी प्रतीकों के उपयोग को लेकर गहरा मतभेद है। यह चर्चा, रचनात्मक संवाद की बजाय, राजनीतिक प्रतिशोध और एक-दूसरे के इतिहास पर आरोप-प्रत्यारोप में बदल गई।
​’चुनाव सुधारों पर बहस’ अत्यंत महत्वपूर्ण थी, क्योंकि यह लोकतंत्र की रीढ़ से संबंधित है। मनीष तिवारी की यह मांग कि चयन समिति में विपक्ष के नेता को शामिल किया जाए, संस्थागत निष्पक्षता के प्रति जनता के विश्वास को बहाल करने की दिशा में एक गंभीर कदम है। हालांकि, शोर-शराबे के कारण इस विषय पर व्यापक और आवश्यक चर्चा नहीं हो पाई, जो कि संसद के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
​निष्कर्ष: आज की संसदीय कार्यवाही गहरे ध्रुवीकरण और विधायी गतिरोध की शिकार रही। महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, सदन का अधिकांश समय प्रतीकात्मक राजनीति और राजनीतिक स्कोर सेटल करने में बर्बाद हुआ। संसद को अपनी उत्पादकता बढ़ाने और जनहित के मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा करने की आवश्यकता है।

भारतीय संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा, में शीतकालीन सत्र के अंतर्गत कार्यवाही चली, जो मुख्यतः वैचारिक टकराव और विधायी गतिरोध के बीच फंसी रही। दिन भर की कार्यवाही में, लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा हुई, जबकि राज्यसभा में ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर विशेष बहस जारी रही, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली। वहीं, विपक्ष के हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही को कई बार स्थगित भी करना पड़ा।

​1. राज्यसभा: ‘वंदे मातरम’ पर भावनात्मक और राजनीतिक बहस 🇮🇳

​राज्यसभा की कार्यवाही का प्रमुख केंद्र राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर चल रही विशेष चर्चा रही, जो कल (8 दिसंबर, 2025) शुरू हुई थी।
​बहस का सार और सत्ता पक्ष का पक्ष
​केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस चर्चा का नेतृत्व किया और कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तुष्टीकरण के कारण ही राष्ट्रगीत का विरोध किया गया और इसके कुछ अंशों को पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के काल में हटाया गया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि राष्ट्रगीत के विरोध ने देश के विभाजन को जन्म दिया। सत्ता पक्ष के सांसदों ने ‘वंदे मातरम’ को सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए इसके ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया।


​विपक्ष का जोरदार खंडन
​विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इन आरोपों का पुरज़ोर खंडन किया। उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस ने ही स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस गीत को नारा बनाया और लाखों स्वतंत्रता सेनानी इसे गाते हुए जेल गए। उन्होंने सरकार पर राष्ट्रगीत जैसे संवेदनशील विषय को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि देश जब बेरोज़गारी और महंगाई जैसी वास्तविक समस्याओं से जूझ रहा है, तब सरकार ध्यान भटकाने के लिए इस चर्चा को क्यों प्राथमिकता दे रही है। द्रमुक सांसद ए. राजा सहित अन्य विपक्षी नेताओं ने भी कहा कि इस गीत पर विभाजन मुसलमानों ने नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी की राजनीति ने पैदा किया है।
​विधायी कार्य और कार्यवाही का हाल
​बहस के बीच, सदन में विपक्षी सदस्यों का शोरशराबा जारी रहा, जिसके कारण कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा। हंगामे के बावजूद, राज्यसभा ने सोमवार को निचले सदन द्वारा पारित ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा उपकर विधेयक’ को विचार के बाद लोकसभा को वापस भेज दिया।

​2. लोकसभा: चुनावी सुधारों पर गरमागरम बहस 🗳️

​लोकसभा में आज चुनाव सुधारों और विशेष गहन पुनरीक्षण (पुनरीक्षण अभ्यास) पर बहस हुई, जिसे विपक्ष लंबे समय से उठाने की मांग कर रहा था।
​विपक्ष के गंभीर आरोप
​कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बहस की शुरुआत की और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग के सदस्यों के चयन को नियंत्रित करने वाले कानून में संशोधन किया जाए और चयन समिति में लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारें चुनावों से पहले लोगों के खातों में पैसा डालकर चुनाव जीतने की रणनीति अपनाती हैं। विपक्ष ने यह भी कहा कि पुनरीक्षण अभ्यास में मतदाता सूची में कई अनियमितताएं हैं, जिन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
​सत्ता पक्ष का बचाव
​जनता दल यूनाइटेड के नेता ललन सिंह जैसे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सांसदों ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता का बचाव किया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि चुनाव सुधारों पर चर्चा आवश्यक है ताकि जनता झूठे आख्यानों (बातों) से गुमराह न हो और लोकतंत्र में उनका विश्वास बना रहे।
​कार्यवाही का हाल
​सदन की कार्यवाही विपक्ष द्वारा किए गए हंगामे के कारण बाधित रही। विपक्षी सदस्यों के शोरशराबे के कारण कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। कांग्रेस सांसदों ने विमानन कंपनी इंडिगो संकट (उड़ानों के रद्द होने) को लेकर भी स्थगन प्रस्ताव दिए, जिसमें सरकार की निष्क्रियता पर चर्चा की मांग की गई थी।

​3. समीक्षा: संसद की कार्यवाही का गहरा ध्रुवीकरण 💬

​आज की संसदीय कार्यवाही ने एक बार फिर गहरे वैचारिक ध्रुवीकरण को दर्शाया, जहां महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों की तुलना में इतिहास और प्रतीकों पर केंद्रित बहस हावी रही।
​प्रतीकात्मक बनाम वास्तविक मुद्दे
​संसद का अधिकांश समय ‘वंदे मातरम’ की ऐतिहासिक व्याख्याओं और कांग्रेस की पिछली भूमिकाओं पर केंद्रित रहा। यह बहस, राष्ट्रगीत के महत्व को स्वीकार करते हुए भी, अक्सर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गई। सत्ता पक्ष ने प्रतीकों के माध्यम से राष्ट्रवाद को मजबूत करने की कोशिश की, जबकि विपक्ष ने इसे “ध्यान भटकाने वाली रणनीति” बताया। यह प्रवृत्ति बताती है कि संसद वर्तमान समस्याओं (जैसे इंडिगो उड़ान संकट, बेरोज़गारी और महंगाई) पर विस्तृत चर्चा करने के बजाय, भावनात्मक और वैचारिक मुद्दों पर अधिक ऊर्जा खर्च कर रही है।
​विधायी कार्य में गतिरोध
​दोनों सदनों में बार-बार हंगामे के कारण कार्यवाही का स्थगन होना भारतीय लोकतंत्र की चुनौतीपूर्ण तस्वीर प्रस्तुत करता है। पीठासीन अधिकारियों ने सदस्यों से बार-बार सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की, लेकिन व्यवधान जारी रहा। यह गतिरोध संसद की उत्पादकता और जनता के प्रति जवाबदेही को प्रभावित करता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि रचनात्मक संवाद का स्थान नारेबाजी और राजनीतिक विरोध ने ले लिया है।
​लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल
​लोकसभा में चुनाव सुधारों पर हुई चर्चा, विशेषकर चुनाव आयोग की चयन प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की मांग, लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को बनाए रखने के व्यापक सवाल को दर्शाती है। यदि निर्वाचन संस्थाओं की निष्पक्षता पर बार-बार सवाल उठते हैं, तो यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के लिए एक गंभीर चुनौती है। विपक्ष द्वारा सुझाये गए सुधार, जैसे समिति में विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश को शामिल करना, जनता के विश्वास को बहाल करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम हो सकता है।
​निष्कर्ष
​9 दिसंबर, 2025 की संसदीय कार्यवाही भारतीय राजनीति की वर्तमान दशा का एक आईना है: तीव्र ध्रुवीकरण, जहां राष्ट्रवादी प्रतीकों पर बहस ने जनता के वास्तविक सरोकारों पर चर्चा को कम महत्वपूर्ण बना दिया। जहां एक ओर ‘वंदे मातरम’ जैसी चर्चा राष्ट्रीय चेतना को जगा सकती है, वहीं रचनात्मक विधायी कार्य की कमी संसद की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाती है। लोकतंत्र के सुचारू संचालन के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को समझौते और सहयोग के मार्ग पर चलना होगा, ताकि बहसें केवल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए हों।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने ‘जल शक्ति हैकाथॉन-2025’ का शुभारंभ किया

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केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श सीआर पाटिल ने श्रम शक्ति भवन, नई दिल्ली में ‘जल शक्ति हैकाथॉन-2025’ और भारत-विन पोर्टल का शुभारंभ किया। यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के दृष्टिकोण और भारत के जल क्षेत्र में वैज्ञानिक एवं तकनीकी समाधानों को मज़बूत करने के लिए उनके ‘जल विज़न@2047’ पर ज़ोर के अनुरूप है।

श्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जल शक्ति हैकाथॉन-2025 महज एक प्रतियोगिता नहीं है बल्‍कि एक राष्ट्रीय आंदोलन है। इसे भारत के लिए एक सुरक्षित, समावेशी और प्रौद्योगिकी-संचालित जल भविष्य के निर्माण हेतु देश की सामूहिक प्रतिभा को जुटाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

राष्ट्रीय भागीदारी के लिए एक सार्वजनिक भलाई

हैकाथॉन का उद्देश्य जल क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देना है। इसे सभी हितधारकों के लिए एक वास्तविक सार्वजनिक हित बनाना है। यह समग्र सरकार और समग्र समाज (जनभागीदारी) दृष्टिकोण अपनाता है, जिससे नागरिकों, शोधकर्ताओं, उद्योगों और नवप्रवर्तकों की व्यापक भागीदारी संभव हो सके।

https://bharatwin.mowr.gov.in पर उपलब्ध यह पोर्टल राष्ट्रीय मंच भारत-विन (जल नवाचार नेटवर्क) का हिस्सा है। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर की जल चुनौतियों के लिए व्यावहारिक, मापनीय और क्षेत्र-तैयार समाधानों को बढ़ावा देना है। इनमें खेत-स्तर पर जल संरक्षण, ग्रामीण जल गुणवत्ता, स्मार्ट निगरानी, ​​पारंपरिक जल व्‍यवस्‍थाओं का पुनरुद्धार, बाढ़ और सूखा प्रबंधन शामिल हैं।

यह पहल जल-क्षेत्र अनुसंधान के दायरे को सीमित संस्थानों से आगे बढ़ाती है। यह स्टार्टअप, एमएसएमई, उद्योग, वैज्ञानिक, शिक्षा, प्रयोगशालाएं, इनक्यूबेटर, युवा इनोवेटर, ग्रामीण और महिला युवा, निजी क्षेत्र और वैश्विक संस्थानों सहित हितधारकों की एक विस्तृत श्रृंखला की भागीदारी सुनिश्चित करती है।जल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम तथा राष्ट्रीय जल मिशन का कार्यान्वयन‘ योजना के अंतर्गत, जल संसाधन विभाग, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय चयनित नवाचारों के लिए अनुदान के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान करेंगे।

हैकाथॉन विजेताओं को प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट (पीओसी) विकसित करने के लिए 1 लाख रुपये का अनुदान मिलेगा। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में जल संसाधन प्रबंधन, अपशिष्ट जल उपचार, जल-उपयोग दक्षता, सर्कुलर अर्थव्यवस्था, जलवायु लचीलापन, आईओटी और स्मार्ट वाटर ग्रिड, सटीक कृषि, वर्षा जल संचयन, नदी-बेसिन और बाढ़ प्रबंधन, और जल विज्ञान मॉडलिंग आदि शामिल हैं।

राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच), रुड़की को प्रस्तुत प्रस्तावों की जांच करने तथा जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के सचिव के अनुमोदन हेतु परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी (पीआईए) के रूप में नामित किया गया ।

स्ट्रीट फूड फैस्टिविल 12 से 14 दिसंबर तक नेहरू स्टेडियम, नई दिल्ली में होगा

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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से इस वर्ष, स्ट्रीट फूड फैस्टिविल महोत्सव 12 से 14 दिसंबर, 2025 तक जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की प्रमुख पहल, वेव्स और क्रिएट इन इंडिया चैलेंज (सीआईसी), भारत की उभरती रचनात्मक प्रतिभाओं को दुनिया के सामने ला रही है। दो चुनौतियों, बैटल ऑफ़ बैंड्स और सिम्फनी ऑफ़ इंडिया के विजेता, राष्ट्रीय स्ट्रीट फ़ूड फेस्टिवल (एनएसएसएफ) के 15वें संस्करण में मुख्य आकर्षण बन रहे हैं। यह दिल्ली के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में से एक है, जो भारत के समृद्ध पाक कला परिदृश्य का जश्न मनाने के लिए आयोजित किया जाता है। यह उत्सव क्षेत्रीय व्यंजनों से लेकर लोकप्रिय स्ट्रीट फ़ूड तक, विविध स्वादों को एक साथ लाता है।

इस वर्ष, यह महोत्सव 12 से 14 दिसंबर, 2025 तक जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा, जिसमें क्रिएट इन इंडिया चैलेंज – सीजन 1 के विजेताओं की समृद्ध और विविध प्रतिभा का प्रदर्शन किया जाएगा, साथ ही प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर, अभिनेता आशीष विद्यार्थी, श्रीलंकाई पॉप कलाकार योहानी, गीतकार और गायक अमिताभ एस वर्मा और हिप-हॉप कलाकार एमसी स्क्वायर और कुल्लर जी भी प्रस्तुति देंगे।

तीन दिवसीय सांस्कृतिक समारोह में रोमांचक सीआईसी संगीत कार्यक्रम शामिल होंगे:

1. बैंड शिवोहम (बैटल ऑफ़ बैंड्स) – सदस्य पैडी, सनी, आशु और हितेश सूफ़ी धुनें और बॉलीवुड के क्लासिक गाने प्रस्तुत करेंगे।

2. चिराग तोमर (सिम्फनी ऑफ़ इंडिया) – तालवादक साहिल वर्मा के साथ लोकप्रिय बॉलीवुड हिट गाने प्रस्तुत करेंगे।

3. निशु शर्मा (बैटल ऑफ़ बैंड्स) – राजस्थानी लोक संगीत प्रस्तुत करेंगे।

4. नयन कृष्णा (सिम्फनी ऑफ़ इंडिया) – बाँसुरी वादन प्रस्तुत करेंगे।

5. मालदीव का एक विजेता बैंड पहली बार भारत में प्रस्तुति देगा, जिससे इस कार्यक्रम में एक अंतर्राष्ट्रीय आयाम जुड़ जाएगा।

सीआईसी और वेव्स पहल के तहत विकसित यह युवा कलाकार राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। बैटल ऑफ़ बैंड्स और सिम्फनी ऑफ़ इंडिया के विजेताओं ने वेव्स, मुंबई में अपनी कलात्मक विविधता से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और मेलबर्न में प्रमुख वेव्स बाज़ार ग्लोबल आउटरीच इवेंट्स, ओसाका वर्ल्ड एक्सपो और टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। राष्ट्रीय स्ट्रीट फ़ूड महोत्सव में उनकी भागीदारी उनकी रचनात्मक यात्रा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो उन्हें और भी व्यापक और विविध दर्शकों से जुड़ने में मदद करती है।

भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

यह पहल कलाकारों और उत्साही लोगों को अपनी रचनात्मकता को निखारने, उसे वेव्स मंच के माध्यम से प्रदर्शित करने और अपनी प्रतिभा व रचनात्मकता से धन कमाने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुँच बनाने के अवसर प्रदान करने के लिए बनाई गई है, जिससे भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

वेव्स और क्रिएट इन इंडिया चैलेंज (सीआईसी) के बारे में

क्रिएट इन इंडिया चैलेंज (सीआईसी) सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की प्रमुख ‘वेव्स’ पहल के अंतर्गत एक पहल है, जिसका उद्देश्य संगीत, फिल्म, एनीमेशन, वीएफएक्स, गेमिंग, कॉमिक्स, एआई, एक्सआर और डिजिटल मीडिया जैसे विभिन्न मीडिया और मनोरंजन क्षेत्रों में भारत की रचनात्मक प्रतिभाओं की पहचान, पोषण, चयन और प्रदर्शन करना है।

‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’ अभियान से लावारिस संपत्तियों के निपटान में तेजी

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भारत सरकार ने बैंक जमा, बीमा, डिविडेंड, शेयर, म्यूचुअल फंड और पेंशन समेत अदावाकृत वित्तीय संपत्तियों को उनके वैध दावेदारों तक पहुंचाने के लिए “आपकी पूंजी, आपका अधिकार” नामक एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है।

4 अक्टूबर 2025 को शुरू किया गया यह अभियान 3ए फ्रेमवर्क – जागरूकता, पहुंच और कार्यवाही पर आधारित है। यह तीन महीने का अभियान (अक्टूबर-दिसंबर 2025) सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में लागू किया जाएगा। अक्टूबर से 5 दिसंबर 2025 तक, 477 जिलों में जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों की भागीदारी से शिविर आयोजित किए गए हैं।

अभियान के दौरान पहुंच को उच्चतम करने के लिए, मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी), आमतौर पर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू), और प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं में जागरूकता सामग्री,  साथ ही लघु वीडियो संदेश, का व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार किया गया है। दावा प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए जिला-स्तरीय शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें जमीनी स्तर पर डिजिटल प्रदर्शन, हेल्पडेस्क और निर्देशित सहायता शामिल है।

इस अभियान में वित्तीय क्षेत्र के सभी प्रमुख निधि नियामकों – भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी), भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई), पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) और विनिधानकर्ता शिक्षा और संरक्षण निधि प्राधिकरण (आईईपीएफए) की सहयोगी भागीदारी शामिल है। आरबीआई के उद्गम (अदावाकृत बैंक जमाओं के लिए), आईआरडीएआई के बीमा भरोसा (अदावाकृत बीमा राशि के लिए) और सेबी के मित्रा (अदावाकृत म्यूचुअल फंडों के लिए) जैसे मौजूदा प्लेटफॉर्म ने नागरिकों को अपनी अदावाकृत संपत्तियों का अधिक कुशलता से पता लगाने में योग्य बनाया है। अभियान के पहले दो महीनों के दौरान, लगभग ₹2,000 करोड़ मूल्य की अदावाकृत धनराशि पर उनके वास्तविक स्वामियों की ओर से दावा किया गया है।

यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

रक्षा प्रबंधन महाविद्यालय ने 56वां स्थापना दिवस मनाया

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रक्षा प्रबंधन महाविद्यालय (सीडीएम) ने 8 दिसंबर, 2025 को सिकंदराबाद, तेलंगाना में अपना 56वां स्थापना दिवस मनाया। इस दिवस के उपलक्ष्य में, सीडीएम ने पर्पल पेसर्स और पर्पल पेडलर्स क्लबों के सहयोग से स्थापना दिवस दौड़ और साइकिलिंग कार्यक्रम का आयोजन किया।

समारोह में महिला सशक्तीकरण में निवेश द्वारा जिम्मेदार नागरिकों का विकास (डीआरआईडब्ल्यूई) का समापन समारोह भी आयोजित किया गया, जो उच्च रक्षा प्रबंधन पाठ्यक्रम के अधिकारी प्रशिक्षुओं के जीवनसाथियों में नेतृत्व, उद्यमिता, सामाजिक जागरूकता और सशक्तीकरण विकसित करने के लिए उस्मानिया विश्वविद्यालय के सहयोग से एक प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम है।

समारोह के एक भाग के रूप में, भारतीय नौसेना के बैंड ‘सिम्फनी’ ने एक विशेष प्रदर्शन दिया, जिससे कार्यक्रम में संगीतमय भव्यता आ गयी।

1970 में स्थापित, सीडीएम उच्च रक्षा प्रबंधन शिक्षा को लेकर तीनों सेनाओं के लिए एक प्रमुख संस्थान है। अपने प्रमुख पाठ्यक्रम ‘उच्च रक्षा प्रबंधन पाठ्यक्रम’ (एचडीएमसी) के साथ, यह संस्थान रक्षा योजना और निर्णय प्रक्रिया में आधुनिक प्रबंधन के सिद्धांतों को एकीकृत करके सभी सेवाओं में संगठनात्मक प्रभावशीलता को बढ़ाने में सहायक रहा है।

सीडीएम ने मित्र देशों के 660 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है, जिन्होंने वैश्विक समझ और रक्षा कूटनीति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इस अवसर पर, कमांडेंट सीडीएम, मेजर जनरल जी. श्रीनिवास ने सभी रैंकों, असैन्य रक्षा कर्मचारियों और अन्य कर्मचारियों को बधाई दी और अपने आदर्श वाक्य – “उत्कृष्टता के माध्यम से विजय” की सच्ची भावना के अनुरूप रक्षा प्रबंधन शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए सीडीएम की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की। इस समारोह में अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिवारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

केंद्र सरकार ने राज्यों में पात्र ग्राम पंचायतों, ब्लॉक पंचायतों और जिला पंचायतों को धनराशि जारी की

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केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-2025 और 2025-26 के दौरान ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग (15 वें एफसी) अनुदान के अंतर्गत राज्यों में पात्र ग्राम पंचायतों, ब्लॉक पंचायतों और जिला पंचायतों को धनराशि जारी की है।

15 वें वित्त आयोग के अंतर्गत अनुदान राज्यों द्वारा प्रस्तुत अनुदान हस्तांतरण प्रमाणपत्र (जीटीसी) और आरएलबी तथा राज्यों द्वारा सभी अनिवार्य पात्रता शर्तों की पूर्ति के आधार पर आरएलबी को जारी किए जाते हैं, जैसा कि वित्त मंत्रालय द्वारा दिनांक 14.07.2021 के पत्र के माध्यम से जारी 15 वें वित्त आयोग ग्रामीण स्थानीय निकाय अनुदानों के कार्यान्वयन के लिए परिचालन दिशानिर्देशों में निर्धारित किया गया है।

14 वें वित्त आयोग (वित्त वर्ष 2015-16 से 2019-20) और 15 वें वित्त आयोग (वित्त वर्ष 2020-21 से 2025-26) के अंतर्गत अनुदानों के राज्यवार आवंटन और रिलीज से संबंधित विवरण अनुबंध-I और अनुबंध-II में संलग्न हैं।

केन्द्र सरकार लाभार्थी राज्यों में ऐसे अनुदानों के माध्यम से वित्तपोषित परियोजनाओं से सीधे लाभान्वित होने वाले परिवारों या व्यक्तियों की संख्या के संबंध में आंकड़े एकत्र नहीं करती है।