डिजिटल माध्यमों पर प्रतिबंध का विमर्श

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बाल-सुरक्षा और तकनीकी समाधानवाद : डिजिटल युग में सामाजिक माध्यमों पर प्रतिबंध का विमर्श

ऑस्ट्रेलिया का प्रस्ताव है सोलह वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सामाजिक माध्यमों पर पूर्ण प्रतिबंध हो। निजता पर खतरा, व्यवहारिक असफलता और मूल मनो-सामाजिक कारणों की अनदेखी। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के माध्यम से अधिकार-आधारित सुरक्षा।अभिभावकीय सहमति, बच्चों की निगरानी और लक्षित विज्ञापनों पर प्रतिबंध।  कानून, डिजिटल साक्षरता, पारिवारिक सहभागिता और मंचों की जवाबदेही का संतुलन। 

– डॉ प्रियंका सौरभ

डिजिटल युग में बच्चों और किशोरों का जीवन केवल भौतिक संसार तक सीमित नहीं रह गया है। सामाजिक माध्यम, ऑनलाइन मंच और आभासी समुदाय आज उनके सीखने, अभिव्यक्ति, पहचान और सामाजिक संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे समय में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि इन मंचों पर बच्चों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया द्वारा सोलह वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सामाजिक माध्यमों पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रस्ताव इसी चिंता से उत्पन्न हुआ है। परंतु इस कदम को लेकर यह आलोचना भी सामने आई है कि यह एक जटिल मनो-सामाजिक समस्या का अत्यधिक सरलीकृत, तकनीक-आधारित समाधान है, जिसे ‘तकनीकी समाधानवाद’ कहा जा रहा है।

तकनीकी समाधानवाद का अर्थ है यह मान लेना कि सामाजिक, सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक समस्याओं को केवल तकनीकी नियमों, प्रतिबंधों या उपकरणों के माध्यम से हल किया जा सकता है। बच्चों के संदर्भ में यह दृष्टिकोण विशेष रूप से सीमित प्रतीत होता है, क्योंकि बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य, आत्मसम्मान, सामाजिक तुलना, ऑनलाइन उत्पीड़न, अकेलापन और व्यवहारिक परिवर्तन केवल मंच तक पहुँच रोक देने से समाप्त नहीं होते। ये समस्याएँ परिवार, विद्यालय, सहपाठी समूह, सामाजिक वातावरण और व्यापक सांस्कृतिक प्रवृत्तियों से गहराई से जुड़ी होती हैं। ऑस्ट्रेलिया का प्रस्ताव इन जटिल कारणों की बजाय सीधे निषेध पर केंद्रित दिखाई देता है।

ऑस्ट्रेलिया के प्रस्तावित कानून के अनुसार, सोलह वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सामाजिक माध्यमों का उपयोग प्रतिबंधित किया जाएगा और आयु-सत्यापन की अनिवार्य व्यवस्था लागू की जाएगी। पहली दृष्टि में यह कदम बच्चों की सुरक्षा के लिए कठोर और निर्णायक लगता है, किंतु व्यवहारिक स्तर पर इसके कई प्रश्नचिह्न हैं। आयु-सत्यापन के लिए व्यापक व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करनी पड़ सकती है, जिससे बच्चों और उनके अभिभावकों की निजता पर खतरा उत्पन्न होता है। इसके अतिरिक्त, तकनीकी उपायों को आभासी निजी नेटवर्क, फर्जी पहचान या नए, कम नियंत्रित मंचों के माध्यम से आसानी से दरकिनार किया जा सकता है। इससे न केवल कानून की प्रभावशीलता कम होती है, बल्कि बच्चे अधिक जोखिमपूर्ण डिजिटल स्थानों की ओर भी जा सकते हैं।

पूर्ण प्रतिबंध का एक और गंभीर पक्ष यह है कि यह बच्चों को सामाजिक माध्यमों से मिलने वाले सकारात्मक अवसरों से भी वंचित कर सकता है। आज अनेक बच्चे इन्हीं मंचों के माध्यम से शैक्षिक सामग्री प्राप्त करते हैं, रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेते हैं, सामाजिक मुद्दों पर जागरूक होते हैं और मानसिक स्वास्थ्य सहायता समूहों से जुड़ते हैं। विशेष रूप से ग्रामीण, पिछड़े या सामाजिक रूप से हाशिये पर खड़े बच्चों के लिए डिजिटल मंच कई बार अभिव्यक्ति और सहयोग का एकमात्र साधन होते हैं। ऐसे में पूर्ण प्रतिबंध सामाजिक असमानताओं को और गहरा कर सकता है। यह दृष्टिकोण यह भी संकेत देता है कि समस्या का मूल बच्चों या तकनीक में है, जबकि वास्तव में समस्या उस सामाजिक ढाँचे में है जिसमें बच्चों का डिजिटल समाजीकरण हो रहा है।

भारत ने इसी संदर्भ में एक भिन्न और अपेक्षाकृत संतुलित मार्ग अपनाया है। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रत्यक्ष निषेध के बजाय अधिकार-आधारित और डेटा-केंद्रित दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। यह अधिनियम यह स्वीकार करता है कि बच्चों को डिजिटल संसार से अलग-थलग करना न तो संभव है और न ही वांछनीय। इसके स्थान पर, यह आवश्यक है कि डिजिटल मंचों को उत्तरदायी बनाया जाए और बच्चों के अधिकारों की रक्षा की जाए। इस कानून के अंतर्गत बच्चों के व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण के लिए सत्यापित अभिभावकीय सहमति को अनिवार्य किया गया है, जिससे परिवार की भूमिका सुदृढ़ होती है।

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह बच्चों के व्यवहारिक निगरानी, व्यक्तित्व-आधारित वर्गीकरण और लक्षित विज्ञापनों पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाता है। इससे बच्चों को उपभोक्ता के रूप में शोषण से बचाने का प्रयास किया गया है। साथ ही, यह अधिनियम बच्चों को डेटा तक पहुँच, उसमें सुधार, उसे हटाने और शिकायत दर्ज कराने जैसे अधिकार प्रदान करता है। यह दृष्टिकोण बच्चों को केवल संरक्षण की वस्तु न मानकर उन्हें अधिकार-संपन्न नागरिक के रूप में देखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इसके अतिरिक्त, भारत में एक स्वतंत्र डेटा संरक्षण बोर्ड की व्यवस्था की गई है, जो नियमों के उल्लंघन पर दंड निर्धारित कर सकता है। इस प्रकार, मंचों और डेटा का प्रसंस्करण करने वाली संस्थाओं पर जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है, बिना यह कहे कि बच्चों को डिजिटल मंचों से बाहर कर दिया जाए। यह मॉडल यह भी दर्शाता है कि कानून के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता, डिजिटल साक्षरता, विद्यालयों में ऑनलाइन सुरक्षा शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार अनिवार्य है। केवल कानून बनाकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती, बल्कि एक समग्र सामाजिक प्रयास की आवश्यकता होती है।

ऑस्ट्रेलिया और भारत के दृष्टिकोणों की तुलना करने पर स्पष्ट होता है कि जहाँ एक ओर नियंत्रण और निषेध पर आधारित नीति है, वहीं दूसरी ओर संतुलन, सहभागिता और सशक्तिकरण पर आधारित ढाँचा। ऑस्ट्रेलिया का प्रस्ताव त्वरित समाधान का आभास देता है, किंतु दीर्घकाल में यह व्यवहारिक, संवैधानिक और सामाजिक चुनौतियों से घिर सकता है। इसके विपरीत, भारत का मॉडल धीमा और जटिल अवश्य है, परंतु यह बच्चों की स्वायत्तता, निजता और विकास के साथ बेहतर सामंजस्य स्थापित करता है।

अंततः, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा का प्रश्न केवल यह नहीं है कि उन्हें किससे दूर रखा जाए, बल्कि यह भी है कि उन्हें किस प्रकार सशक्त बनाया जाए। डिजिटल युग में बाल-सुरक्षा का अर्थ बच्चों को तकनीक से अलग करना नहीं, बल्कि उन्हें तकनीक के साथ सुरक्षित, जागरूक और जिम्मेदार बनाना है। सरल तकनीकी समाधान जटिल मानवीय समस्याओं का स्थान नहीं ले सकते। इस संदर्भ में भारत का डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण ढाँचा यह संकेत देता है कि संतुलित नियमन, अभिभावकीय सहभागिता, मंचों की जवाबदेही और सामाजिक समर्थन के माध्यम से ही बच्चों के लिए एक सुरक्षित और समावेशी डिजिटल भविष्य का निर्माण संभव है।

-प्रियंका सौरभ 

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार,

नरेंद्र मोदी का जॉर्डन के अम्मान में विशेष स्वागत

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प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी अम्मान पहुंच गए हैं। दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों के प्रतीक के रूप में एक विशेष भाव के तहत, अम्मान हवाई अड्डे पर पहुंचने पर प्रधानमंत्री का जॉर्डन के प्रधानमंत्री डॉ. जाफर हसन ने गर्मजोशी से स्वागत किया और समारोहपूर्वक उनका अभिवादन किया।

यह जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की उनकी तीन देशों की यात्रा का पहला पड़ाव है। जॉर्डन की यह पूर्ण द्विपक्षीय यात्रा 37 साल के अंतराल के बाद हो रही है। प्रधानमंत्री की यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ के साथ-साथ हो रही है।

हनुमान घाट पर आध्यात्मिक समूह ने किया स्नान

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काशी तमिल संगमम् 4.0 के अंतर्गत तमिलनाडु से आए आध्यात्मिक दल ने सोमवार को हनुमान घाट पहुंचकर गंगा स्नान किया। इस दौरान सभी सदस्यों ने मां गंगा की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। गंगा स्नान के उपरांत समूह ने घाट पर स्थित प्राचीन मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। श्रद्धालुओं को मंदिरों की दिव्यता, भव्यता और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी दी गई।

इसके बाद तमिल प्रतिनिधिमंडल हनुमान घाट स्थित महाकवि सुब्रह्मण्य भारती के घर पहुंचा, जहां उन्होंने उनके परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। समूह के लोगों में इतिहास जानने की विशेष जिज्ञासा देखने को मिली। उन्होंने सुब्रमण्यम भारती के घर के समीप स्थित पुस्तकालय का भी भ्रमण किया और वहां से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

सुब्रह्मण्य भारती के घर के भ्रमण के उपरांत यह समूह कांची मठ पहुंचा, जहां उन्हें मठ के इतिहास से अवगत कराया गया। काशी में दक्षिण भारतीय मंदिरों को देखकर साहित्यिक और आध्यात्मिक दल अत्यंत उत्साहित नजर आया।

तमिलनाडु से आए इस प्रतिनिधिमंडल का अंदाज कुछ अलग ही दिखाई दे रहा था। आध्यात्मिक समूह अपने-अपने तरीके से काशी की व्याख्या कर रहा था। कोई अपने पूर्वजों को याद कर रहा था तो कोई संस्कृति की एकता को रेखांकित करते हुए ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को साकार होता हुआ देख रहा था।

समूह में शामिल वी.के. रमन ने बताया कि हमने विभिन्न मंदिरों का भ्रमण किया और यह देखकर आश्चर्य हुआ कि काशी और तमिलनाडु की संस्कृति में गहरी समानता है। यहां की संस्कृति हमारी संस्कृति जैसी ही है। इस तरह के आयोजन लगातार होने चाहिए, ताकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के सपने को साकार किया जा सके।

बीएचइएल ने भारत सरकार को 109 करोड़ रुपये से अधिक का लाभांश चेक सौंपा

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भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (बीएचईएल) के लिए लाभांश वितरण समारोह 15 दिसंबर, 2025  को आयोजित किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव, संयुक्त सचिव, बीएचईएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और कार्यकारी निदेशक भी शामिल हुए।\मारोह के दौरान, केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री को 109.98 करोड़ रुपये का लाभांश चेक सौंपा गया। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए लाभांश भुगतान वर्ष 2023-24 के भुगतान की तुलना में 100 प्रतिशत अधिक है।

केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री ने सरकार की प्रमुख पहलों के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड से महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आग्रह किया। एक अग्रणी भारी इंजीनियरिंग और विनिर्माण कंपनी के रूप में, उन्होंने भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड को ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की भी सलाह दी।

पहली कमलादेवी चट्टोपाध्याय शिल्प व्याख्यान शृंखला के साथ राष्ट्रीय हस्तशिल्प सप्ताह 2025 का समापन 

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वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय ने हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद के सहयोग से आज नई दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय शिल्प परिसर (द कुंज) में कमलादेवी चट्टोपाध्याय शिल्प व्याख्यान शृंखला के पहले संस्करण का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में पद्म भूषण राजीव सेठी ने ‘आने वाली पीढ़ी के लिए हस्तशिल्प’ विषय पर अपना व्याख्यान दिया। ।

श्री राजीव सेठी द्वारा दिए गए उद्घाटन व्याख्यान में उन महत्वपूर्ण प्रश्नों पर प्रकाश डाला गया जो आज हस्तनिर्मित उत्पादों को परिभाषित करते हैं, जैसे कि क्या ये तेजी से बदल रही तकनीकी दुनिया में टिके रह सकते हैं और किस प्रकार सदियों पुरानी मजबूती स्थानान्तरण (माइग्रेशन ) और सांस्कृतिक समरूपता जैसी समकालीन चुनौतियों का सामना कर सकती हैं। श्री सेठी ने मानव हाथ की शाश्वत शक्ति, उसकी अंतर्ज्ञान, कौशल और संवेदनशीलता को एक रचनात्मक शक्ति के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कोई भी मशीन इसकी पूरी तरह से नकल नहीं कर सकती है। इस बात पर भी प्रकाश डाला कि हस्तनिर्मित शिल्प किस प्रकार कम मशीनीकृत उत्पादन, स्थानीय आजीविका और देश भर में महिलाओं और हाशिए पर पड़े समूह के सशक्तिकरण के माध्यम से स्थिरता के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है।

इस अवसर पर हस्तशिल्प की विकास आयुक्त श्रीमती अमृत राज ने कहा कि यह व्याख्यान इस बात की याद दिलाता है कि भारत के लाखों कारीगर समावेशी, सतत विकास और हस्तनिर्मित उत्कृष्टता में वैश्विक नेतृत्व के हमारे दृष्टिकोण के केंद्र में बने हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह शृंखला कमलादेवी जी के शिल्प को शिक्षा, आजीविका और राष्ट्र निर्माण के साथ एकीकृत करने के आग्रह को श्रद्धांजलि है।भारत सरकार में हस्तशिल्प और कारीगर-आधारित गतिविधियों के लिए विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) का कार्यालय नोडल एजेंसी है। यह हस्तशिल्प के विकास, विपणन और निर्यात में सहायता करता है और शिल्प कला के रूपों और कौशल को बढ़ावा देता है।

इस व्याख्यान में हस्तशिल्प की विकास आयुक्त श्रीमती अमृत राज; विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम बीना; ईपीसीएच के पूर्व अध्यक्ष श्री रवि के पासी; ईपीसीएच के अतिरिक्त कार्यकारी निदेशक श्री राजेश रावत, प्रख्यात डिजाइनर, विद्वान, शिल्प गुरु, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता और वास्तुकार समेत 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।(यह व्याख्यान शृंखला कमलादेवी चट्टोपाध्याय की दूरदर्शी विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित करती है, जिन्हें व्यापक रूप से भारत के शिल्प पुनर्जागरण की जननी माना जाता है। उन्होंने भारत की हस्तशिल्प और हथकरघा परंपराओं को पुनर्जीवित करने और संस्थागत रूप देने में अग्रणी भूमिका निभाई। उनके आजीवन काम ने कारीगरों को सशक्त बनाने, स्वदेशी शिल्प को बढ़ावा देने और भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में मदद की

राष्ट्रपति ने राजकुमार गोयल को केंद्रीय मुख्य सूचना आयुक्त पद की शपथ दिलाई

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राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (15 दिसंबर को सुबह 11:00 बजे राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में राज कुमार गोयल को केंद्रीय सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त के पद की शपथ दिलाई।

प्रधानमंत्री ने सम्राट पेरुम्बिडुगु मुथरैयर द्वितीय के सम्मान में स्मारक डाक टिकट जारी होने का स्वागत किया

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प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा आज सम्राट पेरुम्बिडुगु मुथरैयर द्वितीय (सुवरन मारन) के सम्मान में स्मारक डाक टिकट जारी किए जाने पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की।

श्री मोदी ने कहा कि सम्राट पेरुम्बिडुगु मुथरैयर द्वितीय सशक्त प्रशासक थे, जो अद्भुत विजन, दूरदृष्टि, और रणनीतिक कौशल से सम्‍पन्‍न थे। उन्होंने न्याय के प्रति सम्राट की अटूट प्रतिबद्धता और तमिल संस्‍कृति के महान संरक्षक के तौर पर उनकी विशिष्‍ट भूमिका को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र—विशेष रूप से युवाओं से—पूज्य सम्राट के असाधारण जीवन और विरासत के बारे में और अधिक जानने का आह्वान किया, जिनके योगदान आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करते हैं।

एक्‍स पर अलग-अलग की गई पोस्टों में श्री मोदी ने कहा:

“उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा सम्राट पेरुम्बिडुगु मुथरैयर द्वितीय (सुवरन मारन) के सम्मान में स्मारक डाक टिकट जारी किए जाने की मुझे प्रसन्‍नता है। वह महान प्रशासक थे, जो अद्भुत विजन, दूरदृष्टि, और रणनीतिक कौशल से सम्‍पन्‍न थे। वह न्‍याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए विख्‍यात थे। वे तमिल संस्‍कृति के भी महान संरक्षक थे। मैं अधिक से अधिक युवाओं से उनके असाधारण जीवन के बारे में पढ़ने का आह्वान करता हूँ।

मोेदी ने भारतीय स्क्वैश टीम को विश्व कप जीत पर बधाई दी

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प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी एवं केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने पहला स्क्वॉश विश्व कप जीतने पर टीम इंडिया को बधाई दी और देश के लिए एक शानदार इतिहास रचने पर उनकी सराहना की। एसडीएटी स्क्वैश विश्व कप 2025 में अपना पहला विश्व कप खिताब जीतकर इतिहास रचने वाली भारतीय स्क्वैश टीम को आज बधाई दी।

श्री मोदी ने जोशना चिनप्पा, अभय सिंह, वेलवन सेंथिल कुमार और अनाहत सिंह के उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उनके समर्पण, अनुशासन और दृढ़ संकल्प ने देश को अपार गौरव दिलाया है। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि वैश्विक मंच पर भारतीय खेलों की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह जीत देश भर के असंख्‍य युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी और भारत के युवाओं में स्क्वैश की लोकप्रियता को और बढ़ाएगी।

श्री मोदी ने ट्विटर पर अपनी एक पोस्ट में कहा:

“एसडीएटी स्क्वैश विश्व कप 2025 में इतिहास रचते हुए अपना पहला विश्व कप खिताब जीतने के लिए भारतीय स्क्वैश टीम को हार्दिक बधाई!

जोशना चिनप्पा, अभय सिंह, वेलवन सेंथिल कुमार और अनाहत सिंह ने जबरदस्त समर्पण और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया है। उनकी सफलता ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है। यह जीत हमारे युवाओं के बीच स्क्वैश की लोकप्रियता को भी बढ़ाएगी।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने पहला स्क्वॉश विश्व कप जीतने पर टीम इंडिया को बधाई दी और देश के लिए एक शानदार इतिहास रचने पर उनकी सराहना की।

X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि पहला स्क्वॉश विश्व कप जीतने पर टीम इंडिया को बधाई। उन्होंने कहा कि देश के लिए एक शानदार इतिहास रचने पर सभी खिलाड़ी सराहना के पात्र हैं। श्री शाह ने कहा कि खिलाड़ियों ने जिस अदम्य खेल भावना का प्रदर्शन करते हुए सबसे मजबूत विरोधियों को भी हराया, वह हमारी नई प्रतिभाओं को प्रेरणा देगा

प्रधानमंत्री−गृहमंत्री ने पटेल की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 75वीं पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र की एकता और भारत को एकता के सूत्र में पिरोने के लिए समर्पित कर दिया।केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने राष्ट्रीय एकता के प्रतीक, मजबूत भारत के शिल्पकार लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी को उनकी पुण्यतिथि पर नमन किया।उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति परिसर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 75वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

श्री मोदी ने कहा कि एकीकृत और सशक्त भारत के निर्माण में सरदार पटेल का अतुलनीय योगदान सदैव राष्ट्र की सामूहिक चेतना में अंकित रहेगा।

एक्स पर एक पोस्ट में श्री मोदी ने कहा:

“लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को उनकी 75वीं पुण्यतिथि पर मेरा सादर नमन। उन्होंने देश को एकसूत्र में पिरोने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। अखंड और सशक्त भारतवर्ष के निर्माण में उनका अतुलनीय योगदान कृतज्ञ राष्ट्र कभी भुला नहीं सकता।”

“भारत रत्न सरदार पटेल की 75वीं पुण्यतिथि आत्मनिर्भर भारत के लिए प्रेरणा लेने का भी एक विशेष अवसर है। उन्होंने देशवासियों में राष्ट्रीय एकता की जो भावना भरी, वो ‘विकसित भारत’ के लिए ऊर्जा का स्रोत है। राष्ट्र निर्माण में उनकी अद्वितीय भूमिका सशक्त और सामर्थ्यवान भारत के लिए पथ-प्रदर्शक बनी रहेगी।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने राष्ट्रीय एकता के प्रतीक, मजबूत भारत के शिल्पकार लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी को उनकी पुण्यतिथि पर नमन किया।

X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि “राष्ट्रीय एकता के प्रतीक, मजबूत भारत के शिल्पकार लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी को उनकी पुण्यतिथि पर नमन करता हूँ। सरदार साहब ने खंड-खंड में बँटे आजाद भारत को तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद एकीकृत कर मजबूत राष्ट्र का सुदृढ़ रूप दिया। देश के पहले गृह मंत्री के रूप में माँ भारती की सुरक्षा, आंतरिक स्थिरता एवं शांति की स्थापना को ही उन्होंने अपना जीवन लक्ष्य बनाया। सहकारी आंदोलन को पुनर्जीवित कर महिलाओं, किसानों के स्वावलंबन से आत्मनिर्भर भारत की नींव रखने वाले सरदार साहब राष्ट्रप्रथम के पथ पर ध्रुवतारे के समान हम सभी का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

उत्तराख़ंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अखंड भारत के शिल्पकार, महान स्वतंत्रता सेनानी एवं ‘भारत रत्न’ लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री आवास में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल ने अपने दूरदर्शी नेतृत्व, राष्ट्रनिष्ठ सोच और अदम्य साहस के बल पर देश की अनेक रियासतों का एकीकरण कर अखंड एवं सशक्त भारत की नींव रखी। राष्ट्रहित के प्रति उनका अटल संकल्प, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि देश की एकता, अखंडता और समरसता के लिए सरदार पटेल का योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ ने पटेल पार्क हजरत गंज में लोह पुरूष सरदार पटेल की जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की।

हर सांस के साथ बढ़ रहा है वायु प्रदूषण का खतरा

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बाल मुकुन्द ओझा

देश की राजधानी दिल्ली सहित देशभर में पर्यावरण प्रदूषण का मामला संसद और सुप्रीम कोर्ट में गूंजने लगा है। अनेक सांसदों ने प्रदूषण विशेषकर वायु प्रदूषण पर संसद में चर्चा की मांग की है। वहीं देश की सर्वोच्च अदालत ने वायु प्रदूषण पर गहरी चिंता व्यक्त की है। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर खतरे के निशान को भी पार कर चुका है। दिल्ली गैस चैंबर में बदल चुका है, यहां AQI 500 के पार दर्ज किया गया है। प्रदूषण से लोगों को सांस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने बार के सदस्यों और लोगों को सलाह दी है कि वे शीर्ष अदालत के सामने लिस्टेड मामलों के लिए, जहां भी आसान हो, हाइब्रिड मोड में पेश हों। सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के मुद्दे पर गंभीर सुनवाई चल रही है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस समस्या पर चुप नहीं रहा जा सकता और केंद्र सरकार से इस संबंध में प्रभावी एक्शन प्लान मांगा गया है । सर्वोच्च अदालत ने साफ कर दिया कि हवा की गुणवत्ता की समस्या गंभीर है और इसे तुरंत हल करने की दिशा में ऐसे कदम उठाने चाहिए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक के मुताबिक वायु प्रदूषण दुनिया के सबसे बड़े हेल्थ रिस्क में से एक है। इसकी वजह से हर साल दुनिया में करीब 67 लाख लोग समय से पहले मौत का शिकार होते हैं। हमारे देश भारत की बात करे तो वायु प्रदूषण की समस्या अत्यधिक गंभीर हो गई है। शहरों में वायु की गुणवत्ता या AQI बहुत खराब या गंभीर है। राजधानी दिल्ली में AQI 500 पार पहुँच चुका है। AQI यानि एयर क्वालिटी इंडेक्स हवा की क्वालिटी को बताने वाला एक स्कोर है, जो यह समझने में मदद करता है कि हमारे आसपास की हवा साफ है या प्रदूषित। AQI में हवा में मौजूद प्रदूषकों का स्तर मापा जाता है। AQI जितना बढ़ता है हवा उतनी ही ज्यादा खतरनाक मानी जाती है। वर्तमान में देश की राजधानी दिल्ली सहित बहुत से शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों के रूप में सबसे पहले स्थान पर हैं। IQAir की रिपोर्ट के मुताबिक भारत पर्यावरण प्रदूषण के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर है और विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2023 के मुताबिक दुनिया के 50 सबसे प्रदूषित शहरो में से 42 शहर भारत के हैं। हर साल दिल्ली में होने वाली मौतों में से करीब 11.5 प्रतिशत प्रदूषण के कारण होती हैं। भारत की लगभग पूरी आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती, जहां वायु गुणवत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वायु गुणवत्ता दिशानिर्देशों से अधिक हैं। भारत में अत्यधिक वायु प्रदूषण के कारण सांस संबंधी बीमारियां, त्वचा रोग जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ गया है और जीवन प्रत्याशा में भी कमी आई है।

प्रदूषण आज दुनियाभर चिंता का विषय है। यह केवल भारत के लिए ही नहीं है बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है जो कई तरह के प्रदूषणों से पीड़ित है। वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण और अन्य, लाखों लोगों के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। भारत दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों में दूसरे स्थान पर है। प्रदूषण का स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है और औसतन एक भारतीय की जीवन प्रत्याशा को 5.3 साल तक कम कर देता है। प्रदूषण का अर्थ है हमारे आस पास का परिवेश गन्दा होना और प्राकृतिक संतुलन में दोष पैदा होना। प्रदूषण कई प्रकार का होता है जिनमें वायु, जल और ध्वनि-प्रदूषण मुख्य है। पर्यावरण के नष्ट होने और औद्योगीकरण के कारण  प्रदूषण की समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया है जिसके फलस्वरूप मानव जीवन दूभर हो गया है। महानगरों में वायु प्रदूषण अधिक फैला है। वहां चौबीसों घंटे कल-कारखानों और वाहनों का विषैला धुआं इस तरह फैल गया है कि स्वस्थ वायु में सांस लेना दूभर हो गया है। यह समस्या वहां अधिक होती हैं जहां सघन आबादी होती है और वृक्षों का अभाव होता है। कल-कारखानों का दूषित जल नदी-नालों में मिलकर भयंकर जल-प्रदूषण पैदा करता है। बाढ़ के समय तो कारखानों का दुर्गंधित जल सब नाली-नालों में घुल मिल जाता है। इससे अनेक बीमारियां पैदा होती है। इसी भांति ध्वनि-प्रदूषण ने शांत वातावरण को अशांत कर दिया है। कल-कारखानों और यातायात का कानफाडू शोर, मोटर-गाड़ियों की चिल्ल-पों, लाउड स्पीकरों की कर्णभेदक ध्वनि ने बहरेपन और तनाव को जन्म दिया है। हमने प्रगति की दौड़ में मिसाल कायम की है मगर पर्यावरण का कभी ध्यान नहीं रखा जिसके फलस्वरूप पेड़ पौधों से लेकर नदी तालाब और वायुमण्डल प्रदूषित हुआ है और मनुष्य का सांस लेना भी दुर्लभ हो गया है। इसके अलावा वृक्षों की अंधाधुंध कटाई ने भी पर्यावरण को बहुत अधिक क्षति पहुंचाई है। विश्व में हर साल एक करोड़ हैक्टेयर से अधिक वन काटा जाता है। भारत में 10 लाख हैक्टेयर वन प्रतिवर्ष काटा जा रहा है। वनों के कटने से वन्यजीव भी लुप्त होते जा रहे हैं। वनों के क्षेत्रफल के नष्ट हो जाने से रेगिस्तान के विस्तार में मदद मिल रही है। प्रकृति का संरक्षण हमारे सुनहरे भविष्य का आधार है। मनुष्य जन्म से ही प्रकृति और पर्यावरण  के सम्पर्क में आ जाता है। प्राणी जीवन की रक्षा हेतु प्रकृति की रक्षा अति आवश्यक है।

बाल मुकुन्द ओझा

वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार

डी-32, मॉडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर