जब गले पड़े पुरस्कार का हो गया ‘तिरस्कार ‘                                                                     

0

निर्मल रानी

प्रसिद्ध हिंदी लेखक, पत्रकार और पटकथा लेखक कमलेश्वर ने सम्मान,एवार्ड अथवा पुरस्कार के विषय पर बातचीत करते हुये एक बार बहुत ही महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी।  उन्होंने कहा था कि कोई भी ‘सम्मान’ ग्रहण करने से पहले यह ज़रूर देखना चाहिये कि सम्मानित करने वाली संस्था या व्यक्ति का स्वयं अपना कितना ‘सम्मान’ है। ऐसा उन्होंने इसीलिए कहा था कि तमाम लोग व संस्थाएं विशिष्ट लोगों को सम्मानित करने के नाम पर या इसी के बहाने ख़ुद अपनी छवि चमकाने या स्वयं की प्रसिद्धि की ख़ातिर तरह तरह के  सम्मान समारोह आयोजित करती रहती हैं। ऐसे में सम्मान या पुरस्कार प्राप्त करने के लिये लालायित रहने वाले लोग तो किसी भी ऐरे ग़ैरे नत्थू ख़ैरे से कोई भी सम्मान लेने पहुँच जाते हैं। यहाँ तक कि सम्मान हासिल करने के लिये तरह तरह की जुगाड़बाज़ियाँ भी करते हैं। परन्तु स्वाभिमानी लोग या ऐसे सम्मान की वास्तविकता को समझने वाले लोग इसतरह के कथित पुरस्कारों व सम्मानों से दूर रहना ही पसंद करते हैं ।

                        कुछ ऐसा ही दृश्य पिछले दिनों उस समय देखने को मिला जब  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा कांग्रेस नेता शशि थरूर को ‘सावरकर’ के नाम का एक  अवार्ड देने की कोशिश की गयी परन्तु शशि थरूर ने इसे लेने से इंकार कर दिया। ग़ौर तलब है कि केरल की ‘हाई रेंज रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी ‘(HRDS इंडिया) नाम के एक एनजीओ ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर को ‘वीर सावरकर इंटरनेशनल इम्पैक्ट अवॉर्ड 2025’ का पहला अवार्ड देने की कोशिश की थी। HRDS इंडिया को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस ) या संघ परिवार से संबद्ध माना जाता है। बात बीते वर्ष दिसंबर माह की है, जब केरल-आधारित इस एनजीओ ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर को ‘वीर सावरकर इंटरनेशनल इम्पैक्ट अवॉर्ड 2025’ का पहला प्राप्तकर्ता घोषित किया। HRDS इंडिया के अनुसार यह पुरस्कार राष्ट्रीय विकास, सामाजिक सुधार और मानवीय कार्यों के लिए दिया जाता है, और इसका नाम विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) के नाम पर रखा गया है, जो भाजपा और संघ परिवार द्वारा सम्मानित व आदर्श पुरुष माने जाते हैं। जबकि कांग्रेस,उदारवादियों और वामपंथी दलों द्वारा उनकी स्वतंत्रता संग्राम में कथित नकारात्मक भूमिका पर सवाल उठाए जाते हैं। यह पुरस्कार सम्मान समारोह 10 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली के एनडीएमसी कन्वेंशन हॉल में आयोजित होना प्रस्तावित था। इस आयोजन का उद्घाटन भी भाजपा के वरिष्ठ नेता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा किया जाना था। संस्था द्वारा इस पुरस्कार हेतु थरूर का नाम उनके राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर हस्तक्षेप और प्रभाव के लिए चुना गया था। परन्तु थरूर ने इस पुरस्कार को स्वीकार करने से यह कहते हुये इंकार कर दिया कि उन्हें इस पुरस्कार की जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स से मिली थी न कि आयोजकों से।  

                     ग़ौरतलब है कि शशि थरूर इस समय  तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद हैं। उन्होंने मीडिया से पूछने पर  स्वयं यह स्पष्ट किया कि था कि वे इस पुरस्कार के बारे में नहीं जानते थे और न ही इसे स्वीकार करने की सहमति जताई थी । सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करके भी उन्होंने यही कहा कि “मैं न तो इस पुरस्कार के बारे में जानता था और न ही इसे स्वीकार किया था। आयोजकों द्वारा मेरी सहमति के बिना मेरे नाम की घोषणा करना ग़ैर -ज़िम्मेदाराना है। पुरस्कार की प्रकृति, प्रस्तुत करने वाली संस्था या अन्य संदर्भों के बारे में स्पष्टता न होने पर, मैं न तो कार्यक्रम में भाग लूंगा और न ही पुरस्कार स्वीकार करूंगा”। थरूर ने सावरकर के व्यक्तित्व पर सीधे टिप्पणी नहीं की, लेकिन उनका इनकार कांग्रेस की वैचारिक स्थिति से जुड़ा माना जा रहा है। कांग्रेस में उनके सहयोगियों का मानना था कि सावरकर के नाम पर पुरस्कार स्वीकार करना पार्टी का अपमान होगा व ऐसा करना पार्टी को शर्मिंदा करेगा। थरूर पहले सावरकर पर किताब लिख चुके हैं और उनका कहना है कि सावरकर का अध्ययन ज़रूरी है, लेकिन आलोचनात्मक रूप से।
                      उधर HRDS इंडिया के आयोजकों ने इस विषय पर यह दावा किया था कि थरूर को इस पुरस्कार के बारे में पहले से जानकारी दी गई थी और उन्होंने अपनी सहमति भी जताई थी। परन्तु थरूर ने संस्था के इस दावे को पूरी तरह ख़ारिज कर दिया। आख़िरकार यह विवाद इतना बढ़ा कि विवाद के बाद न तो सम्मान प्राप्तकर्ता के रूप में शशि थरूर ने कार्यक्रम में शिरकत की ना ही सम्मान देने हेतु रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समारोह में पधारे। परन्तु इस घटना के बाद सावरकर के नाम को लेकर एक बार फिर उनके विवादित व्यक्तित्व को लेकर बहस ज़रूर छिड़ गयी। ग़ौरतलब है कि संघ व भाजपा सावरकर को ‘वीर सावरकर ‘ कहकर बुलाती है और एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में उन्हें सम्मान देती है।  जबकि कांग्रेस उन्हें ब्रिटिश हुकूमत से मुआफ़ी मांगने वाला व्यक्ति मानती है। निश्चित रूप से शशि थरूर का सावरकर सम्मान लेने से इंकार करना न केवल कांग्रेस में उनकी स्थिति को मजबूत करता है बल्कि वैचारिक रूप से सावरकर की हिंदूवादी राजनीति को भी ख़ारिज करता है। 

                    इस घटना ने संघ व भाजपा परिवार की उस ‘चतुराई ‘ को भी एक बार फिर उजागर कर दिया है जिसके तहत वह कांग्रेस अथवा अन्य धर्मनिरपेक्ष व उदारवादी नेताओं को किसी न किसी बहाने अपने साथ खड़ा हुआ दिखाने की कोशिश करती रहती है। साथ ही ऐसा कर उन्हें कांग्रेस में भी वैचारिक रूप से असहज करने का प्रयास करती है। हालांकि  संघ व भाजपा की इस नीति से यह सन्देश भी जाता है कि उनके पास इस स्तर के अपनी विचारधारा रखने वाले नेताओं की भी कमी है। चाहे वह महात्मा गाँधी की हत्या के बाद संघ पर प्रतिबंध लगाने वाले कांग्रेस नेता सरदार वल्लभ भाई पटेल की गुजरात में विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा बनाना हो या फिर जून 2018 में कांग्रेस नेता व पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को संघ के तृतीय वर्ष शिक्षा वर्ग समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में नागपुर में आमंत्रित करना। 

             इसी सिलसिले की एक कड़ी के रूप में  शशि थरूर को सावरकर सम्मान के नाम पर दिया गया कथित निमंत्रण भी उन्हें कांग्रेस में असहज करने व वैचारिक रूप से उन्हें अपने पक्ष में खड़ा दिखाने का प्रयास था परन्तु यह प्रयास तब उल्टा पड़ गया जब शशि थरूर ने स्वयं इस ‘गले पड़े’ पुरस्कार को लेने से इंकार कर उल्टे इस पुरस्कार का ही ‘तिरस्कार ‘कर दिया।                                                                   

 निर्मल रानी

चाइनीज मांझा के निर्माण खरीद फरोख्त काे रोके राज्य सरकार : हाईकोर्ट

0

प्रयागराज, 14 जनवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक बार फिर राज्य सरकार को चाइनीज मांझा के निर्माण, खरीद फरोख्त को कड़ाई से प्रतिबंधित करने का आदेश दिया है और कहा है कि यह मानव ही नहीं पक्षियों के लिए भी घातक है।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली तथा न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने जौनपुर के अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव व दो अन्य की जनहित याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा 2015 में चाइनीज मांझा पर प्रतिबंध के निर्देश दिए गए थे। जिसका पालन नहीं किया गया और याचिकाएं दाखिल हो रही हैं।

यह याचिका जौनपुर में चाइनीज मांझा से हुई घटनाओं को लेकर दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिया कि जौनपुर समेत पूरे प्रदेश में चाइनीज मांझा के निर्माण, बिक्री व उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। क्योंकि पहले भी हाईकोर्ट द्वारा आदेश दिया जा चुका है और पूर्व के आदेश के पालन के लिए राज्य सरकार बाध्य है। जब भी पतंग उड़ाना अपने चरम पर हो तब राज्य सरकार की यह जिम्मेदारी है कि चाइनीज मांझा का निर्माण, उपभोग व बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाये। क्योंकि यह मनुष्य व पक्षियों के जीवन के लिए संकटमय है। याचिका पर याचीगण के अधिवक्ता शिवा प्रिया प्रसाद ने बहस की।

कहा गया कि चाइनीज मांझा बनाने के लिए जिस धागे, शीशे के पाउडर व गोंद इत्यादि पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है वो इसको रेजर के ब्लेड की तरह तेज धार वाला बना देते हैं। जो शरीर के किसी भी हिस्से को कपड़ा पहनने के बावजूद काट सकती है। इससे मानव जीवन, जानवरों, पक्षियों का जीवन लगातार संकट में बना हुआ है और लोग घायल हो रहे हैं। यह मांझा जानलेवा है। कहा गया कि 11 दिसम्बर 2025 को अपनी बच्ची को स्कूल से छोड़कर आ रहे अध्यापक संदीप तिवारी की शास्त्री ब्रिज पर चाइनीज मांझा से गला कटने से मृत्यु हो गई। हाईकोर्ट ने 19 नवम्बर 2015 को एक जनहित याचिका में राज्य सरकार को आदेश दिया था कि प्रदेश के सभी जिले के कलेक्टर को निर्देश देकर चाइनीज मांझा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए लेकिन आदेश के बावजूद जिले में बिक्री व उपभोग जारी रहा। अध्यापक के अलावा 15 सितम्बर 2015 को उत्तम दुबे की भी चाइनीज मांझा से गला कटने मौत हो चुकी है।

भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है-उत्तरी सेना कमांडर

0

राजौरी, 14 जनवरी (हि.स.)। उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने बुधवार को कहा कि जम्मू और कश्मीर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है न केवल अपने भौगोलिक महत्व के कारण बल्कि अपनी मजबूत सैन्य संस्कृति और मानव संसाधनों के कारण भी।

राजौरी में 10वें वयोवृद्ध दिवस समारोह के समापन समारोह में एक सभा को संबोधित करते हुए सेना कमांडर ने सशस्त्रबलों में इस क्षेत्र के योगदान की भी सराहना की। लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने कहा, “जम्मू और कश्मीर न केवल रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है बल्कि मानव संसाधनों और सैन्य परंपरा के मामले में भी राष्ट्र की मूल सुरक्षा संरचना का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।” सशस्त्र बलों में इस क्षेत्र के योगदान पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि लगभग 1.5 करोड़ की आबादी के साथ जम्मू और कश्मीर भारत के सीमा सुरक्षा बलों में लगभग 4 से 5 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करता है।

उन्होंने कहा, “सशस्त्र बलों की कुल संख्या के अनुपात में देखा जाए तो यह एक महत्वपूर्ण योगदान है।” क्षेत्र की समृद्ध सैन्य विरासत का जिक्र करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने कहा कि जम्मू और कश्मीर विविध रेजिमेंटल परंपराओं में गहराई से निहित है जो देशभक्ति और बलिदान की एक अनूठी भावना को दर्शाती हैं।

उन्होंने कहा, “जम्मू और कश्मीर राइफल्स, जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री और डोगरा इकाइयों जैसी प्रतिष्ठित रेजिमेंटों का हर युद्ध में असाधारण प्रदर्शन जम्मू और कश्मीर की धरती और यहां के लोगों के लिए गर्व की बात है।”

उत्तरी सेना कमांडर ने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश में लगभग 45,000 पूर्व सैनिक और 975 “वीर नारी” रहती हैं जो विभिन्न पदों पर देश की सेवा कर रही हैं। उन्होंने आगे कहा, “अपने अनुशासन और देशभक्ति के बल पर हमारे पूर्व सैनिकों ने आपदा प्रबंधन और अन्य नागरिक भूमिकाओं में भी बहुमूल्य योगदान दिया है जिससे सैन्य-नागरिक एकता मजबूत हुई है।”

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूर्व सैनिकों की भूमिका को याद करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने कहा कि उनके अनुभव, स्थानीय ज्ञान और शौर्य ने सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सैनिकों का मनोबल बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, “इस अद्वितीय समन्वय प्रयास के दौरान हमारी सेनाओं का मनोबल चरम पर था। उत्तरी कमान के प्रत्येक सैनिक ने अनुकरणीय वीरता का प्रदर्शन किया, दुश्मन को करारा सबक सिखाया और आपसी विश्वास और भाईचारे की उच्चतम परंपराओं को कायम रखा।” सेना कमांडर ने कहा कि 10वें वयोवृद्ध दिवस समारोह के तहत उत्तरी कमान के विभिन्न क्षेत्रों में 8 जनवरी से 14 जनवरी तक कई स्मारक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसका समापन राजौरी में समापन समारोह के साथ हुआ।

लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने बताया कि मुख्य कार्यक्रम से पहले नागरोटा, अखनूर, रियासी, सुंदरबनी, नौशेरा, पुंछ और थानामंडी में सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवारों के लिए चिकित्सा शिविर आयोजित किए गए थे। उन्होंने आगे कहा, “इन शिविरों में चिकित्सा सहायता प्रदान की गई और साथ ही रक्तचाप मापने की मशीनें, इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर और ई-रिक्शा वितरित किए गए।” सेना अधिकारी ने कहा कि पेंशन, चिकित्सा देखभाल, सामाजिक कल्याण, सद्भावना, रोजगार और खरीद से संबंधित आउटरीच पहलों ने दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासनिक पहुंच सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा, “सेना और नागरिक प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से पूर्व सैनिकों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर समय पर और ठोस परिणामों में बदला जा रहा है।”

निरंतर समर्थन का वादा करते हुए सेना कमांडर ने कहा, “हम अपने पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण, सम्मान और खुशहाली के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। उनकी चिंताएं और जरूरतें हमारी सामूहिक जिम्मेदारी हैं।” लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने कहा कि हालिया बातचीत के दौरान उठाए गए मुद्दों, जिनमें चिकित्सा विशेषज्ञों की कमी, राजौरी में पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) सुविधा में दवाओं की उपलब्धता, अस्पतालों का सूचीबद्ध होना और पुंछ में अतिरिक्त ईसीएचएस सुविधाओं की आवश्यकता शामिल है का जल्द से जल्द समाधान किया जाएगा।

उत्तरी सेना के कमांडर ने एलजी मनोज सिन्हा और नागरिक प्रशासन को उनके समर्थन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

‘कैंपस टू मार्केट-दिल्ली स्टार्टअप युवा फेस्टिवल 2026’ का शुभारंभ

0

– भारत के हमारे पास युवाओं की बड़ी ताकत है: जयंत चौधरी

– आज का युवा केवल ‘जॉब सीकर’ नहीं, ‘जॉब क्रिएटर’ बन रहा: रेखा गुप्ता

– फेस्टिवल में शीर्ष 6 स्टार्टअप्स को 10 लाख की इक्विटी-फ्री ग्रांट और शीर्ष 100 को 1 लाख रुपये की मदद : आशीष सूद

नई दिल्ली, 14 जनवरी (हि.स.)। शाहदरा जिले के पुलिस उपायुक्त प्रशांत गौतम ने बुधवार को बताया कि‘कैंपस टू मार्केट – दिल्ली स्टार्टअप युवा फेस्टिवल 2026’ का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम दिल्ली सरकार के प्रशिक्षण एवं तकनीकी शिक्षा निदेशालय (डीटीटीई) की ओर से आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री और मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों से आए युवा इनोवेटर्स, शिक्षकों, निवेशकों और स्टार्टअप संस्थापकों से संवाद किया और छात्र-नेतृत्व वाले इनोवेशन की प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्टार्टअप प्रदर्शनी में प्रस्तुत विभिन्न इनोवेशन, प्रोटोटाइप्स और बिजनेस मॉडलों को देखा और युवा उद्यमियों की रचनात्मकता, समस्या-समाधान क्षमता और तकनीकी दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने कई छात्र टीमों से उनके स्टार्टअप आइडियाज, मार्केट स्ट्रेटेजी और सामाजिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने युवा उद्यमियों को इनोवेशन को वास्तविक समाधान में बदलने के लिए लगातार मार्गदर्शन और सहयोग का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री आशीष सूद सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।

जयंत चौधरी ने कहा कि भारत युवा देश है और हमारे पास युवाओं की बड़ी ताकत है। इसी वजह से हमारे काम करने की क्षमता बहुत अधिक है, लेकिन इस युवा शक्ति का सही फायदा तभी मिलेगा, जब हम युवाओं को आगे बढ़ने के मौके दें, उनकी प्रतिभा पहचानें और उनके कौशल को निखारें। उन्होंने कहा कि पहले हमारी शिक्षा व्यवस्था ऐसी थी कि जो बच्चे पढ़ाई के पारंपरिक ढांचे में फिट नहीं बैठते थे, उनके लिए स्कूल और कॉलेज के रास्ते लगभग बंद हो जाते थे। विश्वविद्यालयों में भी सिर्फ किताबी पढ़ाई पर ही जोर दिया जाता था। पूरे सिस्टम में यही सोच थी कि केवल औपचारिक शिक्षा ही जरूरी है। अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए इस सोच को बदला जा रहा है। आज जरूरत इस बात की है कि हम सिर्फ डिग्री पर नहीं, बल्कि बच्चों की काबिलियत पर ध्यान दें। यह तभी संभव है जब बच्चों को कौशल आधारित शिक्षा दी जाए, उन्हें अनुभव के जरिए सीखने के अवसर मिलें और वे बाहर की दुनिया को समझकर उससे सीख सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का युवा केवल ‘जॉब सीकर’ नहीं, बल्कि ‘जॉब क्रिएटर’ बन रहा है। उन्होंने बताया कि दिल्ली के छात्र-स्टार्टअप्स में असाधारण रचनात्मकता और इनोवेशन की क्षमता दिखाई दे रही है। यह वर्तमान समय की सामाजिक, पर्यावरणीय और तकनीकी चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में स्टार्टअप और इनोवेशन का मजबूत इकोसिस्टम विकसित हुआ है, जिसने युवाओं को विचार से उद्यम तक की यात्रा के लिए आवश्यक मंच, नीति और सहयोग दिया है। दिल्ली सरकार भी इसी दिशा में शिक्षा, कौशल और उद्यमिता को जोड़कर राजधानी को स्टार्टअप-कैपिटल ऑफ इंडिया बनाने की ओर तेजी से काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपील की कि देश के लिए समाधान रचने की भावना अपनाएं ताकि दिल्ली और भारत वैश्विक स्तर पर इनोवेशन का नेतृत्व कर सकें।

दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि पहले दिल्ली में स्टार्टअप्स तो थे, लेकिन वे बिखरे हुए थे। न कोई स्पष्ट स्टार्टअप नीति थी और न ही छात्रों को उद्योग, मेंटर्स और निवेशकों से जोड़ने की व्यवस्थित व्यवस्था। शिक्षा और स्टार्टअप से जुड़ी पहलें तब केवल घोषणाओं तक सीमित थीं। अब यह सोच पूरी तरह बदल चुकी है। दिल्ली सरकार स्कूल से लेकर उच्च और तकनीकी शिक्षा तक ऐसा इकोसिस्टम विकसित कर रही है, जिसमें कौशल विकास, उद्यमिता और इनोवेशन को केंद्र में रखा गया है और सार्वजनिक व निजी संस्थान मिलकर काम कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि स्टार्टअप युवा फेस्टिवल इस बदलाव का उदाहरण है। इसके तहत पहली बार 11 विश्वविद्यालयों, 12 कॉलेजों और 19 आईटीआई को एक मंच पर जोड़ा गया है। ‘कैंपस टू मार्केट’ को अब व्यवस्थित रूप से लागू किया गया है, जिससे छात्रों को मेंटरशिप, फंडिंग और बाजार तक पहुंच मिल रही है। वर्तमान में 75,000 से अधिक छात्र और युवा उद्यमिता कार्यक्रमों से जुड़े हैं और 470 से ज्यादा स्टार्टअप्स इनक्यूबेशन में कार्यरत हैं। इन छात्र-स्टार्टअप्स ने 500-600 करोड़ रुपये का राजस्व पैदा किया है और हर स्टार्टअप औसतन 4-5 रोजगार अवसर बना रहा है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि स्कूल स्तर पर एनईईईवी पाठ्यक्रम के तहत 5,000 छात्र टीमों को 20,000 रुपये प्रति टीम की सहायता दी गई है। साथ ही स्टार्टअप युवा फेस्टिवल में शीर्ष 6 स्टार्टअप्स को 10 लाख रुपये की इक्विटी-फ्री ग्रांट और शीर्ष 100 को एक लाख रुपये की मदद दी जा रही है। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार जल्द ही दिल्ली स्टार्टअप नीति लागू करेगी, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में 325 करोड़ रुपये का प्रावधान है और 2035 तक 5,000 स्टार्टअप्स विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

उल्लेखनीय है कि ‘स्टार्टअप युवा फेस्टिवल 2026’ दिल्ली सरकार का प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य दिल्ली को ‘स्टार्टअप कैपिटल ऑफ इंडिया’ के रूप में स्थापित करना है। दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम छात्र-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को कैंपस से बाजार तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों में विकसित इनोवेशन को व्यावसायिक और टिकाऊ उद्यमों में बदलना है। ‘कैंपस टू मार्केट’ पहल के तहत छात्रों को निवेशकों, मेंटर्स और उद्योग विशेषज्ञों के सामने अपने विचार प्रस्तुत करने का अवसर मिला। कार्यक्रम में ज्ञानवर्धक सत्र, पॉलिसी राउंडटेबल और अवार्ड सेरेमनी भी आयोजित की गई। 700 से अधिक आवेदनों में से 60 से ज्यादा स्टार्टअप्स ने स्टार्टअप एक्सपो में भाग लिया, जिनमें से शीर्ष 20 को लाइव पिचिंग का अवसर मिला। पुरस्कार स्वरूप शीर्ष 6 स्टार्टअप्स को 10 लाख रुपये की ग्रांट और शीर्ष 100 स्टार्टअप्स को एक लाख रुपये की ग्रांट दी गई।

मकर संक्रांति , करोड़ाें भक्तों ने किया स्नान, कल के लिए विशेष प्रबंध

0

लखनऊ, 14 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति से एक दिन पहले एकादशी पर्व पर बुधवार को राम नगरी अयोध्या से लेकर काशी और प्रयागराज समेत तमाम नदियों और धार्मिक स्थलों पर लाखों श्रद्धालुओं ने परंपरागत तरीके से स्नान-ध्यान और दान कर पुण्य कमाया। गुरुवार 15 जनवरी को खिचड़ी पर्व मनाया जाएगा। योगी सरकार ने 15 जनवरी को मकर संक्रांति का अवकाश घोषित किया है। पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दी हैं।

मकर संक्रांति के पुण्यकाल के समय स्नान-दान करना और सूर्य देव की उपासना करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। वैसे तो उत्तर प्रदेश में 15 जनवरी को यह पर्व मनाया जाएगा। आज एकादशी पर्व को लेकर रामनगरी अयोध्या में सरयू नदी के विभिन्न घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कड़ाके की ठंड के बावजूद सुबह 4 बजे से ही स्नान शुरू कर दिया। विभिन्न राज्यों से श्रद्धालुओं का पहुंचना यहां कई दिन पहले शुरु हो गया था, लेकिन मंगलवार शाम को श्रद्धालुओं की भीड़ काफी बढ़ गई और अयोध्या में चारों ओर जय श्रीराम के जयकारे सुनाए दे रहे हैं। सरयू में स्नान करने के बाद भक्त रामलला के दर्शन करने के लिए राम मंदिर पहुंच रहे हैं। दर्शन के लिए हनुमानगढ़ी मंदिर में भक्तों की लंबी लंबी लाइनें लगी रहीं।

राम मंदिर में मकर संक्रांति का पर्व गुरुवार को मनेगा

अयाेध्या में स्थित राम मंदिर में मकर संक्रांति का पर्व गुरुवार को मनाया जाएगा। रामलला को ड़ेढ क्विंटल खिचड़ी का भोग अर्पित कर श्रद्धालुओं में बांटा जाएगा। इस अवसर पर मंदिर परिसर में स्थित सूर्य मंदिर में विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। सुबह से ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सूर्य देव की आराधना, हवन और विशेष पूजन होगा। अयाेध्या प्रशासन ने सरयू घाटाें पर स्नान के लिए विशेष प्रबंध किए हैं।

प्रयागराज संगम में माघ मेला

तीर्थराज प्रयाग में संगम की रेती पर चल रहे माघ मेले में मकर संक्रांति दूसरा सबसे बडा स्नान माना जाता है। आज दूसरे स्नान पर्व पर संगम तट पर आस्था का सैलाब उमड़ा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम के विभिन्न घाटों पर आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। यहां देश – विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं ने ब्रह्म मुहूर्त से ही स्नान शुरु कर दिया था और दोपहर एक बजे तक 50 लाख श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। अभी भी श्रद्धालुओं के आने का क्रम लगातार जारी है।

रात 12 बजे के बाद मकर संक्रांति का स्नान

माघ मेले में आज रात 12 बजे के बाद मकर संक्रांति का स्नान पर भी शुरू हो जाएगा। दो दिनों तक चलने वाले मकर संक्रांति के स्नान को लेकर मेला प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल के मुताबिक प्रशासन ने स्नान पर्व की तैयारियां पूरी कर ली हैं। संगम के सभी स्नान घाटों पर जल पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फ्लड कंपनी पीएसी और गोताखोर तैनात किए हैं ताकि श्रद्धालुओं को स्नान में किसी प्रकार की दिक्कत न आने पाए;

वाराणसी में लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

वाराणसी के गंगा घाटों पर आज सुबह शुभ मुहूर्त में भक्तों ने स्नान ध्यान और दान पुण्य का सिलसिला शुरु कर दिया और यह शाम तक जारी रहा । प्रशासन का अनुमान है कि विभिन्न घाटों पर दोपहर तक लगभग 13 लाख लोग आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ 16 घंटे का पुण्यकाल प्रारंभ हुआ है । ऐसे में माना जाता है कि पुण्य विशेष लाभकारी होता है। इसलिए श्रद्धालु स्नान, दान और ध्यान कर रहे हैं। काशी के विभिन्न घाटों में उन श्रद्धालुओं की संख्या अधिक है जो प्रयागराज के माघ मेले से होकर यहां पहुंचे हैं।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश के मथुरा, कानपुर, मेरठ समेत तमाम प्रमुख शहराें के धार्मिक स्थलाें में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ गंगा व अन्य पवित्र नदियाें में स्नान घ्यान कर रहे हैं। यह सिलसिला कल 15 जनवरी शाम तक जारी रहेगा।

आईओबी का तीसरी तिमाही में मुनाफा 56 फीसदी बढ़कर 1,365 करोड़ हुआ

0

नई दिल्‍ली, 14 जनवरी (हि.स)। सार्वजनिक क्षेत्र के इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही के नतीजे का ऐलान कर दिया है। 31 दिसंबर को समाप्त चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में आईओबी का शुद्ध लाभ 56.2 फीसदी बढ़कर 1,365 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में बैंक ने 874 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया था।

इंडियन ओवरसीज बैंक ने बुधवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि अक्टूबर-दिसंबर तीसरी तिमाही के दौरान उसकी कुल आय पिछले वित्‍त वर्ष 2024-25 की समान अवधि के 8,409 करोड़ रुपये से बढ़कर 9,672 करोड़ रुपये हो गई। बैंक का परिचालन लाभ दिसंबर 2024 तिमाही के 2,266 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,603 करोड़ रुपये हो गया। आईओबी के मुताबिक ब्याज आय 7,112 करोड़ रुपये से बढ़कर 8,172 करोड़ रुपये हो गई। चालू वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में शुद्ध ब्याज आय 18 फीसदी बढ़कर 3,299 करोड़ रुपये रही, जो वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में 2,789 करोड़ रुपये थी। साथ ही संपत्ति की गुणवत्ता के मोर्चे पर बैंक की सकल गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) दिसंबर 2025 के अंत तक घटकर कुल ऋण का 1.54 फीसदी रह गई, जो पिछले वित्त वर्ष में 2.55 फीसदी थी।

बैंक के मुताबिक इसी तरह शुद्ध एनपीए यानी फंसा हुआ कर्ज कम होकर 0.24 फीसदी पर आ गया है। बैंक के मुनाफे में यह उछाल फंसे हुए कर्जों में कमी और मुख्य व्यवसाय में सुधार के कारण आया है।

अमृत भारत एक्सप्रेस सुविधा−कनेक्टिविटी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम:मोदी

0

नई दिल्ली, 14 जनवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को आम यात्रियों के लिए रेल यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री ने बुधवार को कहा कि नई अमृत भारत ट्रेनें यात्री सुविधा और कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार लाएंगी। उन्होंने कहा कि इन ट्रेनों से वाणिज्य और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

इससे पहले रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक्स पर बताया था कि नौ नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को शीघ्र ही हरी झंडी दिखाई जाएगी। प्रस्तावित नई सेवाओं में गुवाहाटी (कामाख्या)–रोहतक, डिब्रूगढ़–लखनऊ (गोमती नगर), न्यू जलपाईगुड़ी–नागरकोइल, न्यू जलपाईगुड़ी–तिरुचिरापल्ली, अलीपुरद्वार–एसएमवीटी बेंगलुरु, अलीपुरद्वार–मुंबई (पनवेल), कोलकाता (सांतरागाछी)–तांबरम, कोलकाता (हावड़ा)–आनंद विहार टर्मिनल और कोलकाता (सियालदह)–बनारस शामिल हैं।

अमृत भारत एक्सप्रेस एक नॉन-एसी, लंबी दूरी की स्लीपर ट्रेन है, जिसे विशेष रूप से साधारण यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इन ट्रेनों का किराया लगभग 500 रुपये प्रति 1,000 किलोमीटर रखा गया है और इनमें डायनामिक प्राइसिंग लागू नहीं होगी।

उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2023 में शुरू होने के बाद अब तक 30 अमृत भारत एक्सप्रेस सेवाएं संचालित हो चुकी हैं, जबकि आगामी एक सप्ताह में नौ नई सेवाएं जोड़ी जाएंगी।

जयपुर–बीकानेर एनएच पर ट्रक–कार की टक्कर , छह महिलाओं की मौत

0

सीकर, 14 जनवरी (हि.स.)। जिले में बुधवार शाम सड़क हादसे में छह महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा जयपुर–बीकानेर राष्ट्रीय राजमार्ग पर फतेहपुर के हरसवा गांव के पास शाम बाद हुआ।

पुलिस के अनुसार तेज रफ्तार ट्रक और अर्टिगा कार के बीच आमने-सामने की जबरदस्त भिड़ंत हुई। टक्कर इतनी भीषण थी कि अर्टिगा कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई और कार में सवार लोग उसमें बुरी तरह फंस गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत कार्य शुरू करते हुए कार में फंसे शवों और घायलों को बाहर निकाला।घायलों को फतेहपुर के ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।

थाना अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि अर्टिगा कार लक्ष्मणगढ़ (सीकर) से फतेहपुर की ओर आ रही थी, जबकि ट्रक सीकर की तरफ जा रहा था। कार में सवार सभी लोग लक्ष्मणगढ़ में आयोजित एक शोकसभा में शामिल होकर घर लौट रहे थे। परिवार के सदस्य दो वाहनों में सफर कर रहे थे। इनमें अर्टिगा कार आगे चल रही थी। हादसे में संतोष पत्नी सत्यनारायण, तुलसी देवी पत्नी ललित, मोहनी देवी पत्नी महेश कुमार, इंद्रा पुत्री महेश कुमार, आशा पत्नी मुरारी और चंदा पत्नी सुरेंद्र की मौत हो गई। वहीं, सोनू, वसीम और बरखा गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज हायर सेंटर में जारी है।

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात को सुचारु कराया। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। हादसे के बाद क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुमाया समूह की संपत्तियों को जब्‍त किया

0

नई दिल्‍ली, 14 जनवरी (हि.स)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सुमाया समूह और उससे जुड़ी कंपनियों की 35.22 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को जब्‍त किया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत जांच के सिलसिले में यह कार्रवाई की है।

केंद्रीय जांच एजेंसी के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय ने बुधवार को सुमाया समूह और उससे जुड़े एक मामले में 35.22 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों अस्थायी रूप से अटैच किये जाने की जानकारी दी। इन संपत्तियों में बैंक बैलेंस, डीमैट होल्डिंग्स और म्यूचुअल फंड जैसी चल संपत्तियां तथा दो अचल संपत्तियां हैं। ईडी ने यह जांच धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 200 के तहत शुरू की थी, जो वर्ली पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की गई।

प्राथमिकी में सुमाया इंडस्ट्रीज लिमिटेड, उसके प्रमोटर्स और अन्य व्यक्तियों एवं संस्थाओं पर आरोप है कि उन्होंने भविष्य की ‘नीड टू फीड’ योजना के तहत लाभ दिलाने का झूठा वादा कर लगभग 137 करोड़ रुपये का गबन किया है।

इंफोसिस का तीसरी तिमाही में लाभ 2.2 फीसदी घटकर 6,654 करोड़ रुपये

0

नई दिल्‍ली, 14 जनवरी (हि.स)। देश की सूचना प्रौद्योगिकी आईटी सेवा एवं परामर्श क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इंफोसिस ने चालू वित्‍त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही के नतीजे का ऐलान कर दिया है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में इंफोसिस का एकीकृत शुद्ध लाभ 2.2 फीसदी घटकर 6,654 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्‍त वर्ष की इसी अवधि में कंपनी को 6,806 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था।

इंफोसिस ने बुधवार को शेयर बाजार को दी गई सूचना में कहा कि उसका परिचालन राजस्व अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 8.89 फीसदी बढ़कर 45,479 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्‍त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में 41,764 करोड़ रुपये था। चालू वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही के मुकाबले कंपनी का लाभ 9.6 फीसदी घटा है, जबकि राजस्व में 2.2 फीसदी की वृद्धि हुई। कंपनी ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राजस्व वृद्धि अनुमान को बढ़ाकर स्थिर मुद्रा के आधार पर 3-3.5 फीसदी किया है।

बेंगलुरु मुख्यालय वाली कंपनी इंफोसिस के मुख्‍य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक (एमडी) सलिल पारेख ने कहा, ”कंपनी ने तीसरी तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया, जो यह दर्शाता है कि कैसे ‘इंफासिस टोपाज’ के माध्यम से एंटरप्राइज एआई में हमारे विशिष्ट मूल्य प्रस्ताव लगातार उच्च बाजार हिस्सेदारी दिला रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि ग्राहक तेजी से इंफोसिस को प्रमाणित विशेषज्ञता, नवाचार क्षमताओं और मजबूत डिलीवरी साख वाले अपने एआई साझेदार के रूप में देख रहे हैं। कंपनी ने उन्हें व्यावसायिक क्षमता को उजागर करने और मूल्य प्राप्ति को बढ़ाने में मदद की है।