लंबे संघर्ष और हड़ताल के लिए तैयार रहें बैंककर्मी- डी के सिंह

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👉पांच दिवसीय बैंकिंग की मांग को लेकर बैंक कर्मियों का प्रदर्शन

लखनऊ। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले आज सार्वजनिक क्षेत्र के बैंककर्मियों ने केंद्र सरकार द्वारा “पांच दिवसीय बैंकिंग” लागू न करने के विरोध में हजरतगंज स्थित इंडियन बैंक की शाखा के सामने जोरदार प्रदर्शन और सभा की। फोरम के जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि इस मुद्दे पर फोरम ने अखिल भारतीय आंदोलन प्रारंभ कर दिया है।

कामरेड डी के सिंह (महामंत्री, एनसीबीई) ने कहा कि बैंककर्मियों पर बढ़ते हुए तनाव और दबाव के चलते “पांच दिवसीय बैंकिंग” शीघ्र लागू होनी चाहिए और ऐसा न होने पर बैंक कर्मी लंबे संघर्ष और हड़ताल के लिए तैयार है।

काम. वाई के अरोड़ा, आर एन शुक्ला, मनमोहन दास, एस के संगतानी, संदीप सिंह, वी के माथुर, विशाखा वर्मा आदि बैंक नेताओं ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब आर.बी.आई., एल.आई.सी. व जनरल इंश्योरेंस आदि में पांच दिवसीय कार्य दिवस प्रणाली लागू है तो फिर बैंककर्मियों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों?

सभा को विभिन्न घटक दलों के बैंक नेताओं काम. एस डी मिश्रा, शकील अहमद, लक्ष्मण सिंह, बी डी पांडे, विभाकर कुशवाहा, यू पी दुबे, मनीष कांत, ललित श्रीवास्तव आदि ने भी संबोधित किया.

अनिल तिवारी (मीडिया प्रभारी) ने बताया कि आगामी 30 दिसंबर को केनरा बैंक (आंचलिक कार्यालय, गोमती नगर), बैंक ऑफ़ इंडिया (चौक शाखा), यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया (कपूरथला शाखा) तथा सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया (हजरतगंज शाखा) पर बैंककर्मियों द्वारा संयुक्त प्रदर्शन किया जाएगा.

लखनऊ में बिजली संविदा कर्मियों का विरोध प्रदर्शन

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा अपने स्वयं के आदेश का उल्लंघन कर 33/11 के वी विद्युत उपकेन्द्रो के परिचालन व अनुरक्षण कार्य में तैनात लगभग 15000 बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों की छटनी करने, छटनी के उपरान्त मानक निर्धारित करने हेतु मानक समिति का गठन करने,अपने स्वयं के आदेश 18-9-2025 का पालन करते हुए कार्य के अनुरूप अनुबंध न करने, वेतन रुपया 18000 निर्धारित न करने, मार्च 2023 में हटाए गए कर्मचारियों को कार्य पर वापस न लेने, घायल कर्मचारियों का कैशलेस इलाज न कराने एवं घायल कर्मचारियों द्वारा उपचार में व्यय की गई धनराशि को संविदाकारों के बिल से काटकर भुगतान न करने, 55 वर्ष का हवाला देकर अनुभवी कर्मचारियों को कार्य से हटाने, वर्टिकल व्यवस्था लागू करने, जांच अधिकारियों द्वारा दी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर भ्रष्ट ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई न करने, मीटर रीडरों को न्यूनतम वेतन के हिसाब से वेतन का भुगतान न करने तथा स्मार्ट मीटर लगने की स्थिति में मीटर रीडरों को कार्य से हटाने के खिलाफ संगठन द्वारा 26 नवंबर 2025 को शक्ति भवन लखनऊ पर शान्ति पूर्वक विरोध प्रदर्शन किया गया।

विरोध प्रदर्शन के दौरान निदेशक (कार्मिक प्रबंधन एवं प्रशासन) शक्ति भवन लखनऊ कि अध्यक्षता में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन व संगठन पदाधिकारियों के बीच बैठक वार्ता हुई ।इसमे सहमति बनी थी कि पावर कॉरपोरेशन के आदेश 15 मई का उलंघन कर किसी भी कर्मचारी को कार्य से नहीं हटाया जाएगा, 55 वर्ष का हवाला देकर हटाए गए कर्मचारियों को रिक्त स्थानों पर तैनात किया जाएगा, वर्टिकल व्यवस्था लागू होने पर किसी भी कर्मचारी को कार्य से नहीं हटाया जाएगा।

उर्जा मंत्री के निर्देश पर पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन द्वारा दिनांक 18-9-2025 को किए गए आदेश का पालन करते हुए मार्च 2023 में हटाए गए कर्मचारियों को कार्य पर वापस लिया जाएगा, घायल कर्मचारियों द्वारा उपचार में व्यय किए गए धनराशि कि जांच कराकर संविदाकारों के बिल से काट कर भुगतान किया जाएगा, मीटर रीडिंग का कार्य कर रहे कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन से कम वेतन देने कि जांच कराई जाएगी।

किन्तु 29 नवम्बर 2025 को पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन द्वारा जारी किया गया कार्यवृत्त दिनांक 26 नवम्बर 2025 को बैठक वार्ता में बनी सहमति के अनुरूप न होने के कारण संगठन द्वारा 23 दिसम्बर 2025 को प्रदेश के भिन्न-भिन्न जनपदों में विरोध प्रदर्शन किया गया तथा विरोध प्रदर्शन के दौरान पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन द्वारा दिनांक 29 नवम्बर 2025 को जारी किए गए कार्यवृत्त कि प्रति का दहन किया गया।

लखनऊ जनपद में शाम 4 बजे रैली निकाल कर मुख्य अभियन्ता, मध्य जोन, चौक लेसा लखनऊ कार्यालय पर पहुंच कर विरोध प्रदर्शन किया गया और पावर कॉरपोरेशन प्रबन्धन द्वारा दिनांक 29 नवम्बर 2025 को जारी कार्यवृत्त कि प्रति का दहन किया गया।

चुनिंदा किसानों को ट्रैक्टर की चाबी सौंपना सम्मान नहीं, बल्कि दिखावटी राजनीति :लोकदल

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लखनऊ ।पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की जयंती के अवसर पर लोकदल नेताओं ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस मौके पर लोकदल नेता सुनील सिंह ने चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते हुए कहा कि चौधरी साहब किसान, गांव और खेत-खलिहान की आत्मा थे और उन्होंने अपना पूरा जीवन किसानों के हक और सम्मान के लिए समर्पित कर दिया।

सुनील सिंह ने कहा कि आज चौधरी चरण सिंह की जयंती पर सरकार बड़े-बड़े आयोजन कर रही है, लेकिन किसानों के नाम पर उनकी विरासत का राजनीतिक और निजी लाभ के लिए उपयोग किया जा रहा है। यदि सरकार वास्तव में चौधरी साहब की विचारधारा पर चल रही होती, तो किसान आज खाद के लिए लाइन में, गन्ना भुगतान के लिए दफ्तरों के चक्कर और फसल के दाम के लिए बाजार में भटकने को मजबूर न होता।

सुनील सिंह ने किसान सम्मान दिवस पर सरकार के उस बयान— “किसान ऊर्जा प्रवाहित करता है तो धरती सोना उगलती है” —पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे काव्यात्मक कथन जमीनी सच्चाई नहीं बदलते। धरती तब ही सोना उगलेगी, जब किसान को उसकी फसल का पूरा दाम, समय पर भुगतान और सुरक्षा मिलेगी।


सुनील सिंह ने कहा कि चौधरी चरण सिंह मानते थे कि जब तक किसान समृद्ध नहीं होगा, देश आगे नहीं बढ़ सकता। आज उनकी जयंती को सरकारी कार्यक्रमों और फोटो सेशन तक सीमित कर दिया गया है, जबकि उनकी सोच के अनुरूप नीतियां लागू नहीं हो रहीं।

चुनिंदा किसानों को ट्रैक्टर की चाबी सौंपना सम्मान नहीं, बल्कि दिखावटी राजनीति है। असली सवाल आज भी जस का तस है—
सभी फसलों पर कानूनी एमएसपी कब मिलेगी?
गन्ना भुगतान समय पर क्यों नहीं हो रहा?
खाद-बीज की कालाबाजारी पर रोक क्यों नहीं?
आवारा पशुओं से फसल सुरक्षा की स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं?
चौधरी चरण सिंह की असली नमन तभी होगी, जब किसान को उसकी मेहनत का पूरा मूल्य, सम्मान और सुरक्षा मिलेगी।

जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक जयंती पर होने वाले आयोजन किसानों की नजर में खोखली ही रहेगा। सिंह ने आगे कहा कि सरकार चौधरी चरण सिंह की सोच से भटक चुकी है,
चौधरी चरण सिंह मानते थे कि जब तक किसान समृद्ध नहीं होगा, देश आगे नहीं बढ़ सकता। लेकिन आज सरकार नाम पर और काम में उपेक्षा की नीति अपना रही है। चौधरी साहब की छवि को किसानों के नाम पर भुनाना, उनकी आत्मा के साथ अन्याय है।

जब तक किसान को उसकी मेहनत का पूरा मूल्य, सुरक्षा और सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक ऐसे आयोजन दिखावटी किसान सम्मान ही माने जाएंगे। सरकार यदि वास्तव में किसान हितैषी है तो उसे भाषण नहीं, नीतिगत फैसलों से जवाब देना होगा।

शैफाली वर्मा की तूफानी पारी से भारत ने श्रीलंका को फिर हराया, टी20 सीरीज में दो -शून्य की बढ़त

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विशाखापत्तनम, 23 दिसंबर (हि.स.)। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने श्रीलंका के खिलाफ खेले गए पांच मैचों की टी20 सीरीज के दूसरे मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए 7 विकेट से जीत दर्ज की। एसीए-वीडीसीए क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए इस मैच के साथ ही टीम इंडिया ने सीरीज में 2-0 की मजबूत बढ़त बना ली है। इससे पहले भारत ने पहला टी20 भी 8 विकेट से अपने नाम किया था।

टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने श्रीलंका को निर्धारित 20 ओवर में 9 विकेट पर 128 रन तक सीमित कर दिया। भारतीय गेंदबाजों ने कसी हुई लाइन-लेंथ के साथ गेंदबाजी करते हुए श्रीलंकाई बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। श्रीलंका की ओर से हर्षिता समरविक्रमा ने सबसे ज्यादा 33 रन बनाए, जबकि कप्तान चामरी अथापथु ने 31 रन की पारी खेली। हसीनी परेरा ने 22 रन का योगदान दिया, लेकिन शीर्ष और मध्यक्रम का कोई भी बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सका। भारत की ओर से वैष्णवी शर्मा और श्री चरणी ने 2-2 विकेट लिए, जबकि क्रांति गौड़ और स्नेह राणा को 1-1 सफलता मिली।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत आक्रामक रही। ओपनर शैफाली वर्मा ने एक बार फिर अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से दर्शकों का दिल जीत लिया। उन्होंने मात्र 34 गेंदों में 202 से अधिक के स्ट्राइक रेट से नाबाद 69 रन बनाए, जिसमें 12 चौके शामिल थे। स्मृति मंधाना ने 14 रन बनाए, जबकि जेमिमा रोड्रिग्स ने 26 रनों की तेज पारी खेली। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 10 रन जोड़े। भारत ने 11.5 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया।

श्रीलंका की ओर से मल्की मदारा, काव्या कविंदी और कविशा दिलहारी ने एक-एक विकेट लिया, लेकिन उनकी गेंदबाजी भारत की आक्रामक बल्लेबाजी के सामने बेअसर रही।

इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने सीरीज में दबदबा बना लिया है। अब सीरीज का तीसरा मुकाबला 26 दिसंबर को तिरुवनंतपुरम में खेला जाएगा, जहां टीम इंडिया की नजरें जीत दर्ज कर सीरीज पर कब्जा जमाने पर होंगी।

इतिहास के पन्नों में 25 दिसंबर : सुशासन और राष्ट्रनिर्माण को समर्पित एक ऐतिहासिक दिन

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25 दिसंबर भारतीय इतिहास में एक विशेष महत्व रखता है। यह दिन एक ओर सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाता है, तो दूसरी ओर महान शिक्षाविद् और राष्ट्रनिर्माता महामना मदन मोहन मालवीय की जयंती के रूप में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर वर्ष 2014 से 25 दिसंबर को सुशासन दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की गई। इस दिन का उद्देश्य देश में पारदर्शी, जवाबदेह और जनकल्याणकारी शासन व्यवस्था को बढ़ावा देना है। अटल बिहारी वाजपेयी अपने दूरदर्शी नेतृत्व, लोकतांत्रिक मूल्यों और सुशासन के लिए जाने जाते हैं। उनके विचार आज भी नीति-निर्माण और प्रशासन के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

इसी दिन, वर्ष 1861 में जन्मे महामना मदन मोहन मालवीय भारतीय शिक्षा और राष्ट्रनिर्माण के महान स्तंभ रहे हैं। उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की स्थापना कर देश को शिक्षा का एक मजबूत केंद्र दिया। स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ-साथ वे भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और स्वदेशी चेतना के प्रबल समर्थक थे।

इस प्रकार 25 दिसंबर सुशासन, शिक्षा और राष्ट्रसेवा के आदर्शों को आत्मसात करने का दिन है, जो हमें महान विभूतियों के विचारों को अपनाकर देश के विकास में योगदान देने की प्रेरणा देता है।

महत्वपूर्ण घटनाचक्र

1763 – भरतपुर के महाराजा सूरजमल की हत्या।

1771 – मुगल शासक शाह आलम द्वितीय मराठाओं के संरक्षण में दिल्ली के सिंहासन पर बैठे।

1892 – स्वामी विवेकानंद कन्याकुमारी में समुद्र के मध्य स्थित चट्टान पर तीन दिन तक साधना की।

1924 – पहला अखिल भारतीय कम्युनिस्ट कॉन्फ्रेंस कानपुर में संपन्न।

1946 – ताईवान में संविधान को अंगीकार किया गया।

1947 – पाकिस्तानी सेना ने झनगड़ को कब्जे में ले लिया था।

1962 – सोवियत संघ ने नोवाया जेमल्या क्षेत्र में परमाणु परीक्षण किया।

1974 – रोम जा रहे एयर इंडिया के विमान बोइंग 747 का अपहरण।

1977 – हॉलीवुड के प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता चार्ली चैपलिन का निधन।

1991 – राष्ट्रपति मिखाइल एस. गोर्बाचोव के त्यागपत्र के साथ ही सोवियत संघ का विभाजन एवं उसका अस्तित्व समाप्त।

1998 – रूस एवं बेलारूस द्वारा एक संयुक्त संघ बनाये जाने संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर।

2002 – चीन और बांग्लादेश के बीच रक्षा समझौता।

2005 – मॉरीशस में 400 वर्ष पूर्व विलुप्त ‘डोडो’ पक्षी का दो हज़ार वर्ष पुराना अवशेष मिला।

2007 – कनाडा के प्रसिद्ध जॉज पियानोवादक और संगीतकार आस्कर पीटरसन का निधन।

2012 – दक्षिणी कजाकिस्तान के शिमकेंट शहर में एन्टोनोव कम्पनी का एएन-72 विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ जिसमें 27 लोगों की मौत हो गई।

2014 – सुशासन दिवस – पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के रूप में 25 दिसंबर को ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जो 2014 से शुरू हुआ।

जन्म

1642 – आइजैक न्यूटन – महान गणितज्ञ, भौतिक वैज्ञानिक, ज्योतिर्विद एवं दार्शनिक थे।

1861 – मदनमोहन मालवीय – महान् स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ, शिक्षाविद और एक बड़े समाज सुधारक भी थे।

1872 – गंगानाथ झा – संस्कृत भाषा के प्रकाण्ड पंडित, जिन्होंने हिन्दी, अंग्रेज़ी और मैथिली भाषा में दार्शनिक विषयों पर उच्च कोटि के मौलिक ग्रन्थों की रचना की।

1876 – मुहम्मद अली जिन्ना – ब्रिटिशकालीन भारत के प्रमुख नेता और ‘मुस्लिम लीग’ के अध्यक्ष।

1880 – मुख़्तार अहमद अंसारी – एक प्रसिद्ध चिकित्सक, प्रसिद्ध राष्ट्रवादी मुस्लिम नेता, जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में भाग लिया।

1919 – नौशाद, प्रसिद्ध संगीतकार

1923 – धर्मवीर भारती, हिन्दी साहित्यकार का जन्म प्रयाग में।

1924 – अटल बिहारी वाजपेयी – भारत के दसवें प्रधानमंत्री।

1925 – सतीश गुजराल, प्रसिद्ध चित्रकार

1927 – राम नारायण – भारतीय संगीतज्ञ हैं।

1928 – कपिला वात्स्यायन – भारतीय कला की प्रमुख विद्वान् थीं।

1930 – मोहन रानाडे – गोवा की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता सेनानी थे।

1936 – एन. धरम सिंह – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ थे, जो कर्नाटक के भूतपूर्व मुख्यमंत्री रहे।

1938 – माणिक वर्मा – भारतीय कवि थे।

1944 – मणि कौल, फ़िल्म निर्देशक।

1952 – अजॉय चक्रवर्ती – भारतीय हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीतकार, गीतकार, गायक और गुरु हैं।

1959 – रामदास आठवले – भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो महाराष्ट्र से हैं।

1970 – इम्तियाज अनीस – भारतीय घुड़सवार खिलाड़ी रहे हैं।

1978 – मनोज कुमार चौधरी, सेप कोन्सुल्तंत इंजिनियर का जन्म प्रयाग (इलाहाबाद) में हुआ।

निधन

1846 – स्वाति तिरुनल – त्रावणकोर, केरल के महाराजा तथा दक्षिण भारतीय कर्नाटक संगीत परंपरा के सर्वोत्कृष्ट संगीतज्ञों में से एक।

1942 – सिकन्दर हयात ख़ान – स्वतंत्रता पूर्व औपनिवेशिक काल में पंजाब राज्य के प्रधानमंत्री थे।

1959 – प्रेम अदीब – भारतीय अभिनेता।

1972 – चक्रवर्ती राजागोपालाचारी – भारत के अंतिम गवर्नर जनरल का तमिलनाडु की राजधानी मद्रास(अब चेन्नई)।

1994 – ज्ञानी ज़ैल सिंह – भारत के भू.पू. राष्ट्रपति।

2004 – नृपेन चक्रबर्ती – मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राजनीतिज्ञ थे।

2005 – सरत चन्द्र सिन्हा – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता और असम के मुख्यमंत्री थे।

2009 – अजीत नाथ राय – भारत के भूतपूर्व 14वें मुख्य न्यायाधीश थे।

2011 -सत्यदेव दुबे- नाटककार, पटकथा लेखक, फ़िल्म व नाट्य निर्देशक।

2015 – साधना – भारतीय सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री।

महत्वपूर्ण दिवस

क्रिसमस : यह ईसाई धर्म का सबसे महत्वपूर्ण उत्सव है।

तीन दिवसीय वेस्ट मटेरियल वर्कशॉप का दूसरा दिन

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संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के ‘स्वच्छता एक्शन प्लान’ के अंतर्गत, ललित कला अकादेमी, क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ द्वारा अपने परिसर में तीन दिवसीय ‘वेस्ट मटेरियल वर्कशॉप’ के दूसरे दिन कला विशेषज्ञ डॉ. किरण भारद्वाज के निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला में मुख्य आकर्षण कनाडा से आए हुए दो कलाकार सौम्या और सुरम्या रही।इन्होंने कलाकारों और विद्यार्थियों साथ मिलकर पुराने कलश एवं गमलों पर गणेश, मानव कृतियां, पोर्ट्रेट इत्यादि को बनाकर स्वच्छ भारत में कला के योगदान का संदेश दिया । कलाकारों ने पुराने कलश एवं गमलों पर कपड़े की वेस्ट कतरनों को सुई धागे से सिलते हुए सुंदर आकृतियां बनाईं । वर्कशाप का आयोजन 22 दिसंबर से 24 दिसंबर, 2025 तक किया जा रहा है |

इस अवसर पर क्षेत्रीय सचिव, ललित कला अकादेमी, लखनऊ ने कहा—“इस कार्यशाला का आयोजन स्वच्छता एक्शन प्लान (Swachhata Action Plan) के उपलक्ष्य में किया जा रहा है। इस वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य ‘कचरे से समृद्धि (Waste to Wealth) की अवधारणा को बढ़ावा देना है। कलाकार और प्रतिभागी बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं का उपयोग करके सुंदर कलाकृतियां बनाएंगे। इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज में स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करना और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना प्राथमिकता है। महात्मा गांधी के स्वच्छता के दृष्टिकोण को कला के माध्यम से जीवंत करना इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है ।

यह कार्यशाला 24 दिसंबर तक जारी रहेगी, इसमें नगर के कई कलाकारों के अतिरिक्त कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स लखनऊ विश्वविद्यालय, ललित कला विभाग, डॉ. शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय, गोयल इंस्टिट्यूट आदि संस्थानों के छात्र कलाकृतियों का निर्माण कर के स्वच्छता की भावना को जनमानस तक पहुंचा रहे हैं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले सिफी के चेयरमैन राजू वेगेसना

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लखनऊ, 23 दिसंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश को डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के वैश्विक मानचित्र पर अग्रणी बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार निरंतर ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में सिफी टेक्नोलॉजीज के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर राजू वेगेसना ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर भेंट कर प्रदेश में एआई आधारित डिजिटल परिवर्तन और लखनऊ व नोएडा में प्रस्तावित ‘एआई सिटीज़’ के विकास को लेकर विस्तृत चर्चा की। इस अवसर पर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले समय में शासन, उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला है। उत्तर प्रदेश सरकार मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से एआई आधारित निवेश और नवाचार को प्रोत्साहित कर रही है।

तीन वर्षों में निवेश दोगुना करने की योजना

सिफी के चेयरमैन राजू वेगेसना ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि बीते पांच वर्षों में सिफी ने उत्तर प्रदेश में लखनऊ और नोएडा में अत्याधुनिक डेटा सेंटर्स की स्थापना के लिए ₹12,000 करोड़ से अधिक का निवेश किया है तथा अगले 3 वर्षों में इस निवेश को दोगुना करने की योजना है। उन्होंने बताया कि लखनऊ में सिफी का AI एज डेटा सेंटर शीघ्र ही पूरी तरह तैयार हो जाएगा, जबकि इसके समीप एक बड़े हाइपरस्केल AI कैंपस की भी योजना है।

गूगल, मेटा और ओरेकल जैसे वैश्विक टेक दिग्गज रणनीतिक साझेदार

नोएडा में सिफी उत्तर भारत के सबसे बड़े एआई डेटा सेंटर कैंपस ‘नोएडा-02’ का संचालन कर रहा है, जिसके साथ एक अतिरिक्त AI कैंपस विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही सिफी का पहला ग्रीन हाइपरस्केल डेटा सेंटर ‘नोएडा-01’ वर्तमान में 100 से अधिक एंटरप्राइज, सरकारी और हाइपरस्केल ग्राहकों को सेवाएं प्रदान कर रहा है। मुलाकात में यह भी बताया गया कि लखनऊ और नोएडा के दोनों AI क्लस्टर्स को सिफी के राष्ट्रीय फाइबर नेटवर्क के माध्यम से जोड़ा जाएगा, जिससे हाई-स्पीड और लो-लेटेंसी AI वर्कलोड्स को सुचारु रूप से संचालित किया जा सकेगा। राजू वेगेसना ने मुख्यमंत्री को यह भी जानकारी दी कि सिफी के डेटा सेंटर बिजनेस में गूगल, मेटा और ओरेकल जैसे वैश्विक टेक दिग्गज रणनीतिक साझेदार हैं, जो उत्तर प्रदेश की वैश्विक तकनीकी पहचान को और मजबूत करेंगे।

एचसीएल कर रही है पहले से काम

बता दें कि AI के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश सरकार पहले से HCL Tech के साथ मिलकर काम कर रही है। HCLSoftware के AI आधारित समाधान से जनसुनवाई (IGRS) प्रणाली में 60–70 प्रतिशत तक मैनुअल प्रयास घटा है और शिकायत निस्तारण समय लगभग 2 मिनट रह गया है, जो सुशासन का एक प्रभावी मॉडल है।

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला मामले के आरोपित क्रिश्चियन मिशेल की जमानत की शर्तों में आंशिक रुप से बदलाव की अनुमति

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नई दिल्ली, 23 दिसंबर (हि.स.)। दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला मामले के आरोपित क्रिश्चियन मिशेल की जमानत की शर्तों में आंशिक रुप से बदलाव करने की अनुमति दे दी है। स्पेशल जज संजय जिंदल ने क्रिश्चियन मिशेल को पासपोर्ट तुरंत जमा किए बिना ही रिहा करने का आदेश दिया है, लेकिन फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (एफआरआरओ) को निर्देश दिया है कि वो ये सुनिश्चित करें कि मिशेल देश छोड़कर नहीं भागे।

कोर्ट के इस आदेश से मिशेल की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन वो देश छोड़कर नहीं जा सकता है। कोर्ट ने मिशेल को पांच लाख रुपये के जमानती लाने की छूट देते हुए पांच लाख रुपये का व्यक्तिगत बेल बांड और पांच लाख रुपये की नकदी जमा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने जमानत की बाकी शर्तें पूर्ववत ही रखी हैं। सीबीआई के मामले में सुप्रीम कोर्ट से 18 फरवरी को जमानत मिलने के बाद राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 07 मार्च को जमानत की शर्तों में तीसरी शर्त हर 15 दिन में सीबीआई के जांच अधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रुप से पेश होने का आदेश दिया था। कोर्ट ने मिशेल को अपना मोबाइल नंबर जांच अधिकारी को उपलब्ध कराने और गवाहों को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करने का आदेश दिया था।

कोर्ट ने 22 दिसंबर को मिशेल की मांग करने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

कोर्ट मिशेल को अगस्ता मामले से जुड़े मनी लांड्रिंग के मामले में रिहा करने का आदेश दे चुकी है। सुनवाई के दौरान मिशेल की ओर से कहा गया कि उसने सीबीआई औऱ ईडी के मामले में अधिकतम सजा काट ली है। उन्होंने कहा कि इस मामले में पिछले 12 साल से जांच पूरी नहीं हुई है। मिशेल पिछले सात सालों से जेल में बंद है। उन्होंने कहा कि हिरासत से रिहा होने के बाद मिशेल ट्रायल में हिस्सा लेगा।

मिशेल को अगस्ता हेलीकॉप्टर घोटाला मामले में सीबीआई और ईडी दोनों के मामले में जमानत मिल चुकी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 4 मार्च को मिशेल को मनी लाउंड्रिंग मामले में जमानत दी थी। सीबीआई से जुड़े मामले में मिशेल को सुप्रीम कोर्ट पहले ही जमानत दे चुका है। लेकिन मिशेल ने बेल बांड नहीं भरा है। उसका पासपोर्ट हिरासत के दौरान ही एक्सपायर हो गया।

दरअसल, अगस्ता वेस्टलैंड से 12 हेलीकॉप्टरों की खरीद के मामले में 3600 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला दर्ज किया गया है। सीबीआई के मुताबिक मिशेल ने इस घोटाले की कुछ रकम 2010 के बाद हासिल किया और कुछ 2010 के बाद। 3600 करोड़ रुपये के इस घोटाले में ईडी ने मिशेल को जनवरी 2019 में गिरफ्तार किया था। मिशेल को दुबई से प्रत्यर्पित कर 4 दिसंबर 2018 को भारत लाया गया था। 23 अक्टूबर 2020 को कोर्ट ने सीबीआई की ओर से दायर पूरक चार्जशीट पर संज्ञान लिया था। चार्जशीट में 13 को आरोपी बनाया गया है। 19 सितंबर 2020 को सीबीआई ने पूरक चार्जशीट दाखिल किया था। चार्जशीट में क्रिश्चियन मिशेल, राजीव सक्सेना, अगस्ता वेस्टलैंड इंटरनेशनल के डायरेक्टर जी सापोनारो और वायुसेना के पूर्व प्रमुख एसपी त्यागी के रिश्तेदार संदीप त्यागी समेत 13 को आरोपित बनाया गया है।

जनजातीय समुदाय राष्ट्र के निर्माण में अपने योगदान और क्षमता को नहीं पहचानते: किरन रिजिजू

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​नई दिल्ली, 23 दिसंबर (हि. स.)। केन्द्रीय संसदीय एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्र के निर्माण में जनजातीय समुदाय का योगदान अतुलनीय है, फिर भी वे अक्सर अपने योगदान और सामर्थ्य को नहीं पहचानते।

किरन रिजिजू ने यह बात आज नई दिल्ली स्थित ​इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में “भारतीय जनजातीय समाज (शिक्षित एवं सशक्त भूमिका में आत्मनिर्भरता की ओर)” नामक पुस्तक विमोचन के दौरान कही। इस पुस्तक की लेखिका डॉ. स्वीटी तिवारी हैं।

मंत्री ने कहा, “जनजातीय समुदाय ने राष्ट्र के निर्माण में व्यापक भूमिका निभाई है, लेकिन विडंबना यह है कि हम, जनजातीय लोग, स्वयं अपने इस गौरवशाली योगदान और अपनी असीमित क्षमताओं को पहचानने में पीछे रह गए हैं।”

उन्होंने धर्मांतरण के प्रयासों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अगर आप आदिवासियों के बीच में जाकर उनकी सेवा के नाम पर उनका धर्मांतरण करेंगे, तो उनकी पहचान बदल जाएगी। उनके सशक्तिकरण के नाम पर आप उनके कल्चर को कमजोर कर देंगे। मूल रूप से, आदिवासी की पहचान अगर आप खत्म कर देंगे तो फिर सेवा का कोई मतलब नहीं होता है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि आदिवासियों के लिए उनकी पहचान और सम्मान दोनों बहुत महत्त्वपूर्ण हैं।

जनजातीय समाज के प्रति बरती गई उपेक्षा को उजागर करते हुए, समाजशास्त्री एवं शिक्षिका डॉ. स्वीटी तिवारी ने कहा, ​”हम ‘गंगा-जमुनी तहज़ीब’ की बात करते हैं, लेकिन ‘गंगा-दामोदर तहज़ीब’ बात नहीं करते।” उन्होंने कहा कि घोर अंधकार में भी जनजातीय समाज की लौ क्षीण नहीं हुई।

​यह आयोजन आईजीएनसीए के जनपद सम्पदा विभाग द्वारा ‘ज्ञानपथ शृंखला’ के अंतर्गत किया गया था।

इस मौके पर मुख्य अतिथि किरन रिजिजू, राष्ट्रीय जनजातीय समाज के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य, सदस्य डॉ. आशा लकरा, अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय सदस्य सुरेश कुलकर्णी, आईजीएनसीए के प्रमुख प्रो. के. अनिल और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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पेसा महोत्सव का ऊर्जा से भरपूर पेसा रन और दिनभर चले आदिवासी खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आयोजनों के साथ शुभारंभ हुआ

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आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आज से दो दिवसीय पेसा महोत्सव (23-24 दिसंबर 2025) का शुभारंभ प्रतिष्ठित रामकृष्ण बीच पर पेसा दौड़ के साथ हुआ। पेसा महोत्सव पंचायती राज मंत्रालय द्वारा मनाया जाने वाला एक वार्षिक उत्सव है, जो पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 के तहत जनजातीय समुदायों के स्वशासन और सशक्तिकरण का जश्न मनाता है, जिसमें पारंपरिक खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अधिनियम के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाती है।

पेसा रन के बाद पेसा महोत्सव का औपचारिक उद्घाटन श्रीमती मुक्ता शेखर, संयुक्त सचिव, ग्रामीण विकास मंत्रालय, डॉ. बिजय कुमार बेहरा, आर्थिक सलाहकार, ग्रामीण विकास मंत्रालय और श्री वी.आर. कृष्णा तेजा मैलावरपु, आयुक्त एवं निदेशक (पंचायत राज एवं ग्रामीण विकास), आंध्र प्रदेश सरकार ने किया। इस कड़ी में दिन भर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। आयोजन में शिल्प बाजार और खाद्य महोत्सव सहित प्रदर्शनी स्टालों में आदिवासी हस्तशिल्प और स्थानीय व्यंजन प्रदर्शित किए गए। कबड्डी और तीरंदाजी प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। कबड्डी के सेमीफाइनल मैच दिन भर चले और तीरंदाजी प्रतियोगिताएं क्वालीफाइंग, एलिमिनेशन और मेडल राउंड के माध्यम से आगे बढ़ीं।

सुबह आयोजित पेसा दौड़ में सभी आयु वर्ग के लोगों, विशेषकर आदिवासी युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दौड़ को अर्जुन पुरस्कार विजेता और प्रसिद्ध भारतीय तीरंदाज सुश्री ज्योति सुरेखा वेन्नम ने पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती मुक्ता शेखर, आंध्र प्रदेश राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान एवं पंचायती राज आयुक्त श्री मुत्यालाराजू रेवु, पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास आयुक्त एवं निदेशक श्री वी.आर. कृष्ण तेजा मैलावरपु, अतिरिक्त आयुक्त डॉ. एम. सुधाकर राव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हरी झंडी दिखाकर शुरू किया। अधिकारियों ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए पेसा की भावना और अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों के अधिकारों, सामुदायिक संसाधनों और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करने तथा ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के पहले दिन के दूसरे भाग में कई पेसा राज्यों की टीमों ने आदिवासी खेलों का प्रदर्शन किया, जिसमें चोलो, येदु पेनकुलता, गेडी दौद, रस काशी, उप्पन्ना बारेलू, पिथूल, सिकोर, मल्लखंबा और चक्की खेल जैसे पारंपरिक स्वदेशी खेल प्रस्तुत किये गये। ये आदिवासी समुदायों की समृद्ध खेल विरासत को दर्शाते हैं।

इसके साथ ही अल्लूरी सीताराम राजू जिले के अंतर्गत दस पीईएसए ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाएं आयोजन की गईं, जिनमें ग्राम सभाओं को सुदृढ़ बनाने, भूमि हस्तांतरण रोकने, लघु वन उत्पादों के स्वामित्व, लघु खनिजों पर नियंत्रण, सामुदायिक संसाधनों और लघु जल निकायों के प्रबंधन, मादक पदार्थों और साहूकारी प्रथा पर नियंत्रण तथा रीति-रिवाजों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे विषयगत क्षेत्रों पर चर्चा की गई।