उक्रांद ने किया उत्तराखंड के गांधी बड़ोनी को याद

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नैनीताल, 24 दिसंबर (हि.स.)। उत्तराखंड क्रांति दल की नैनीताल इकाई ने बुधवार को नैनीताल नगर कार्यालय में उत्तराखंड के गांधी कहे जाने वाले इंद्रमणि बड़ोनी की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने बड़ोनी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्पांजलि अर्पित की।

केसी उपाध्याय की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल ने बड़ोनी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे गांधीवादी विचारधारा के अनुयायी थे और समाज के लिए समर्पित राजनीति में विश्वास रखते थे। उनका मानना था कि राजनीति में पद से नहीं, बल्कि समाज की भलाई और जनता की लड़ाई लड़ने से वास्तविक प्रतिष्ठा मिलती है। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में बड़ोनी के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता, उन्हीं के मूल्यों, सिद्धांतों और आदर्शों के कारण राज्य आंदोलन अपने लक्ष्य तक पहुंच सका।

उन्होंने हाल ही में नैनीताल के समीप मंगोली क्षेत्र में मूल निवासियों की जमीनों पर अतिक्रमण का मामला उठाते हुए शासन-प्रशासन की चुप्पी को चिंताजनक बताया और कहा कि उक्रांद अब चुप नहीं बैठेगा।

उन्होंने प्रदेश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति और बढ़ती बेरोजगारी पर भी चिंता जताई। कार्यक्रम को वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश पांडे, लीलाधर फुलारा, मनोज साह और सज्जन साह ने भी संबोधित किया। संचालन मदन सिंह बगड़वाल ने किया।

इस अवसर पर धीरेन्द्र बिष्ट, चंद्र प्रकाश साह, संजय गुप्ता, नंदन सिंह, खीमराज बिष्ट, लीला बोरा सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

उत्तराखण्ड निर्माण में नींव का पत्थर हैं महानायक इंद्रमणि बडोनी का संघर्ष: प्रो बत्रा

हरिद्वार, 24 दिसंबर (हि.स.)। महानायक इंद्रमणि बडोनी की 100वीं जयन्ती पर एसएमजेएन कॉलेज परिवार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्राचार्य प्रो सुनील बत्रा सहित प्राध्यापकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों तथा छात्र-छात्राओं ने इंद्रमणि बडोनी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।

इस अवसर पर प्रो सुनील बत्रा ने कहा कि महानायक इंद्रमणि बडोनी का संघर्ष ही उत्तराखण्ड राज्य निर्माण में नींव का पत्थर बना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले उत्तराखंड के वीर सपूत इंद्रमणि बडोनी का विचार था कि आदमी की पहचान उसकी अपनी संस्कृति और परंपरा से ही होती हैं।

उत्तराखण्ड आंदोलन के सूत्रधार इन्द्रमणि बडोनी की आंदोलन में भूमिका वैसी ही थी जैसी आजादी के संघर्ष के दौरान भारत छाड़ो आंदोलन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधीवादी ने निभायी थी। इसी कारण अमरीकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने स्व.इन्द्रमणि बडोनी को पहाड के गॉधी की उपाधि दी थी।

कार्यक्रम में डॉ मनमोहन गुप्ता, प्रो जेसी आर्य, प्रो विनय थपलियाल, डॉ सुषमा नयाल, डॉ शिव कुमार चौहान, डॉ मोना शर्मा, डॉ लता शर्मा, डॉ विजय शर्मा, वैभव बत्रा, दिव्यांश शर्मा, डॉ हरीश चंद्र जोशी, डॉ मीनाक्षी शर्मा, कार्यालय अधीक्षक मोहन चंद्र पाण्डेय, विवेक चंद्र उनियाल सहित अनेक छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

बांग्‍लादेशरू चिंताजनक हैं हिंसक वारदातें !

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बांग्लादेश में इंक़िलाब मंच आंदोलन के 32 वर्षीय अग्रणी नेता शरीफ़ उस्मान हादी की हत्या के बाद उग्र प्रदर्शन − हिंसा और आगजनी की वारदातों में कई अखबारों के कार्यालय निशाना बनाए गए तो मैमनसिंह जिले के भालुका में फैक्ट्री से लौट रहे 25 वर्षीय दीपू चंद्र दास को तौहीन.ए.मजहब के आरोप में पीटकर मारने और फिर पेड़ से लटकाकर जलाने के शर्मनाक कृत्‍य को अंजाम दिया। फसादियों ने रात के एक बजे लक्ष्‍मीपुर के सदर इलाके में पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता बिलाल हुसैन के घर को पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इस बेहद शर्मनाक और अमानवीय हरकत में बिलाल की सात वर्षीय बेटी आयशा अख्तर जलकर मर गई जबकि बिलाल उसकी सोलह साल की बेटी सलमा अख्तर और चौदह साल की बेटी सामिया अख्तर झुलस गए। पत्रकारों को निशाना बनाने और कार्यालयों पर हमला करने के चलते 21 दिसंबर 2025 को 27 वर्ष में पहली बार दैनिक प्राथोम आलो प्रकाशित नहीं हुआ। इससे पूर्व गुस्‍साई भीड ने द डेली स्‍टार प्रोथोम आला और न्‍यू ऐज के कार्यालयों में तोडफोड की। फर्नीचर दस्‍तावेज और उपकरण सडकों पर फैंक कर आग लगादी। मीडिया के 25 लोग चार घंटे तक छत पर फंसे रहे। फायरब्रिगेड के कर्मचारियों ने आग पर काबू पाते हुए उन्‍हें बचाया। कट्टरपंथियों का आरोप है कि ये अख्‍बार शेख हसीना हुकूमत का पक्ष करते हैं। उन्होंने भारतीय उच्‍चायोग के बाहर प्रदर्शन कर भारत विरोधी नारे लगाए। ऐसे ही नारे हादी के जनाज़े की नमाज़ के दौरान जिसमें अंतरिम सरकार के सलाहकार मोहम्मद यूनुस और आर्मी चीफ जनरल वकार.उज.जमा शामिल हुए थे लगाए गए। शैक्षिक संस्‍थान सियासत की जद में आए और देश में अस्थिरता की स्थिति पैदा हो गई। भीड़ को नियंत्रण करने और कानून व्‍यवस्‍था बनाए रखने के लिए बांग्लादेश बार्डर गार्ड के जवानों को तैनात किया गया।
जुलाई 2024 में बांग्लादेश में छात्रों की अगवाई वाले आंदोलन के रहनुमा शरीफ उस्मान हादी की 18 दिसंबर को सिंगापुर के अस्‍पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। उन्होंने 12 दिसंबर को ढाका के बिजॉय नगर इलाके में मोटर साइकिल सवार दो नकाबपोश बंदूकधारियों ने सिर में गोली मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। वह इसी निर्वाचन क्षेत्र से आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने वाले थे। हादी की मौत की खबर फैलते ही उनके समर्थक और कट्टरपंथी कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतर कर आगजनी, तोड़फोड़ और लक्षित हमले शुरू कर दिए। ढाका , राजशाही − चटगाँव आदि शहरों में हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। गुस्साई भीड़ और प्रदर्शनकारी खुलना और चटगाँव में भारतीय उच्चायोग की ओर बढ़े ࣳ जाकिर हुसैन रोड पर पुलिस बैरिकेड्स तोड़ दिए और धरना देते हुए नारेबाजी की। पुलिस ने भीड हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोडेे , लाठी चार्ज किया और गिरफ़्तारियां कीं। अंतरिम सरकार के सलाहकार मोहम्मद यूनुस के शरीफ उस्मान हादी की मौत की पुष्टि के बाद हालात बेकाबू हुए। दर्शनकारियों के गुस्से का अंदाजा इसी से लग जाता है कि उन्होंने राजशाही में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर्रहमान के पहले से तबाह पुश्तैनी और ऐतिहासिक घर को बुलडोजर से गिरा दिया। भीड़ ने अवामी लीग के शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी नोफेल और सांसद हबीब हसन के भाई के घर समेत कई नेताओं के घरों पर हमला कर उन्हें फूंक दिया। दंगाइयों ने धान मंडी स्थित बांग्लादेश के प्राचीन और समृद्ध सांस्कृतिक संगठनों में से एक छायानट को आग लगा दी , जिससे किताबें , संगीत उपकरण और अन्‍य सांस्‍कृतिक व दुर्लभ चीज़ें नष्ट हो गईं। मोहम्मद यूनुस के ऐलान के बाद 20 दिसंबर 2025 को एक दिनी शोक के साथ सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय झंडा झुका रहा। दूसरी ओर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि शरीफ़ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा और अशांति की नई लहर इस बात का सबूत है कि देश में स्थिरता अभी बहुत दूर है। हादी की हत्या के बाद वहां अफ़रा.तफ़री , तोड़फोड़ , आगजनी , संपत्ति को नुकसान भारत विरोधी नारे , प्रदर्शन , अशांति और अस्थिरता का माहौल है। हालाँकि ࣳ यह बात भी छिपी नहीं है कि 2024 में शेख हसीना सरकार का तख्‍तापलट के बाद से राजनीतिक हिंसा में सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं। अल्पसंख्यकों को भी निशाना बनाया जा रहा है। ऐसा लगता है कि 12 फरवरी 2026 को आम चुनावों की घोषणा करने वाले मोहम्मद यूनुस कट्टरपंथियों और अराजकता फैलाने वालों के सामने बेबस हो गए हैं। यह स्थिति बांग्लादेश के लिए अच्छी नहीं कही जा सकती। देश में जानबूझकर अशांति फैलाई जा रही है और साजिश के तहत भारत विरोधी भावनाओं को भड़काया जा रहा है , ताकि चुनावों को असुरक्षित बताकर टाला जा सके। इससे कट्टरपंथी मजबूत होंगे और अंतरिम सरकार को सत्ता में बने रहने का बहाना मिल जाएगा। राजनीतिक व आर्थिक अस्थिरता और मनोवैज्ञानिक व सामाजिक चिंता की स्थिति नागरिकों को हिंसा और तबाही की ओर ले जा रही है। शेख हसीना वाजिद ने छात्र आंदोलन को कुचलने के लिए एक तानाशाह की तरह ताकत का बेजा इस्तेमाल किया , जिसका नतीजा यह निकला कि छात्र उनके खिलाफ पंक्तिबद्ध होते गए। आंदोलन और प्रदर्शनों के चलते उन्‍हें न सिर्फ अपनी सत्‍ता गंवानी पडी , बल्कि भारत में शरण लेने पर मजबूर होना पडा। छात्र आंदोलन और उसके नेतृत्‍व ने अंतरिम तौर पर हुकूमत की बागडोर अर्थशास्‍त्री मोहम्‍मद यूनुस को सौंप दी। यूनुस सरकार हिंसा और नफरत के खिलाफ होने का दावा करती है , लेकिन शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद भी हो रहे प्रदर्शन ࣳ रैलियां ࣳ हिंसा और हत्याओं का सिलसिला इस दावे को नकारता है। हादी की हत्या के बाद इसमें पुनरू तेजी आई। शेख हसीना के खिलाफ अवामी इंकिलाब ने हादी को लोकप्रिय बना दिया था। उन्‍हें कट्टरपंथी और भारत विरोधी करार दिया गया। शेख हसीना वाजिद को भारत में पनाह मिलने के बाद बांग्लादेश में भारत विरोधी भावना और रुझान खतरनाक हद तक बढ़ा है। शेख हसीना की वापसी की मांग भी गई। हादी के हमलावरों पर सरहद पार कर भारत में घुसने का भी आरोप है। भारतीय उच्‍चायोग पर हमले की कोशिश को भी इसी नज़रिए से देखा जा रहा है। बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले हिंसात्‍मक वारदातें अंतरिम सरकार के लिए चिंता की बात है।


एम ए कंवल जाफरी

वरिष्ठ पत्रकार

दीपू चंद्र दास की हत्या पर तसलीमा नसरीन का तीखा हमला, ईशनिंदा कानून खत्म करने की मांग

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कोलकाता, 24 दिसंबर (हि.स.)। बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश के मयमनसिंह में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की नृशंस हत्या की कड़ी निंदा करते हुए एक बार फिर ईशनिंदा कानूनों को समाप्त करने की मांग दोहराई है। उन्होंने कहा कि ईशनिंदा के नाम पर हो रही हिंसा को जायज ठहराने के लिए इन कानूनों का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है और अब समय आ गया है कि समाज इसे अपराध की श्रेणी से बाहर घोषित करे।

अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रतिक्रिया देते हुए तसलीमा नसरीन ने कहा कि ईशनिंदा के आरोप में अब तक कई लोगों को भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डाला गया या जिंदा जला दिया गया। अब यह स्पष्ट रूप से स्वीकार किया जाना चाहिए कि ईशनिंदा कोई अपराध नहीं है और जो लोग इसके नाम पर हिंसा करते हैं, वही असली अपराधी हैं और उन्हें सख्त सजा मिलनी चाहिए।

तसलीमा नसरीन ने बार-बार हो रही भीड़ हिंसा की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि केवल आरोप के आधार पर लोगों की जान ली जा रही है। उन्होंने धार्मिक कट्टरता के बढ़ते खतरे, ईशनिंदा प्रावधानों के दुरुपयोग और बांग्लादेश में धर्मनिरपेक्ष आवाजों तथा अल्पसंख्यकों पर मंडरा रहे गंभीर संकट को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि एक सभ्य देश में ईशनिंदा कोई अपराध नहीं हो सकती। इस तरह की हिंसा को समाप्त करने के लिए ऐसे कानूनों की जरूरत है जो निर्दोषों की हत्या करने वालों को दंडित करें, न कि भीड़ को उकसाने का माध्यम बनें।

तसलीमा नसरीन ने दीपू चंद्र दास की हत्या को एक साजिश करार देते हुए कहा कि एक मामूली विवाद के बाद सहकर्मी द्वारा लगाए गए झूठे आरोप ने हिंसा का रूप ले लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दीपू पुलिस संरक्षण में था, तब भीड़ उसे कैसे अपने कब्जे में लेने में सफल हो गई। उन्होंने इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए और निष्क्रियता अथवा सांठगांठ की आशंका जताई।

उन्होंने कहा कि दीपू पूरी तरह निर्दोष था और केवल एक आरोप ने हिंसा के उन्माद को जन्म दे दिया। तसलीमा ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति को बेहद असुरक्षित बताते हुए कहा कि गरीब लोगों के पास न देश बचा है, न सुरक्षा और न ही कहीं शरण लेने का विकल्प। दीपू अपने परिवार का एकमात्र सहारा था और उसके परिजनों के पास भारत भागने तक के साधन नहीं थे।

तसलीमा नसरीन ने एक बार फिर आरोप लगाया कि अलग-अलग सरकारें राजनीतिक फायदे के लिए धर्म का इस्तेमाल करती रही हैं और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा करने वालों को सजा दिलाने में लगातार विफल रही हैं।——————–

भारत को बांग्लादेश से सभी तरह के रिश्ते खत्म कर देने चाहिए : राजीव महाना

कानपुर, 24 दिसंबर (हि.स)। भारत को बांग्लादेश से सभी तरह से रिश्तों को खत्म कर देना चाहिए, क्योंकि वहां पर जिस तरह से भीड़ ने हिन्दू युवक की पीट पीटकर निर्मम हत्या की है उससे भारत के हिंदू समाज में रोष है। यहा बातें बुधवार को विश्व हिन्दू परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष राजीव महाना ने कही। इस दाैरान विहिप ने बांग्लादेश के पांचवें मुख्य सलाहकार मो. यूनुस का पुतला फूंककर आक्रोश जाहिर करते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की पिटाई के बाद जलाकर मारने के विरोध में आज देश भर में हिन्दू संगठन, विहिप कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में जनपद के रामादेवी चौराहे पर दर्जनों विहिप कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचार के खिलाफ विराेध दर्ज कराया। इससे पूर्व कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश और यूनुस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रामादेवी से एचएएल टाउनशिप तक एक विशाल रैली निकाली।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं के साथ अत्याचार किए जा रहे हैं। अब तो हद हो गई जब एक फैक्टरी में मजदूरी कर रहे युवक को बाहर खींचकर पहले तो उसे पीटा गया और फिर उसे आग के हवाले कर दिया गया। ऐसे में भारत को बांग्लादेश से सभी रिश्ते खत्म करते कर देने चाहिए। साथ ही हमारी मांग है कि इस घटना में संलिप्त सभी आरोपितों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए।

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बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के विरोध में बंगाल के लैंड पोर्ट्स पर उग्र प्रदर्शन, कई जगह पुलिस से झड़प

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कोलकाता, 24 दिसंबर (हि.स.)। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के एक युवक की हत्या के विरोध में बुधवार को पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़े कई लैंड पोर्ट्स पर जोरदार प्रदर्शन हुए। हिंदू संगठनों और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े कार्यकर्ताओं ने इन घटनाओं को लेकर आक्रोश जताया और सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराया।

हावड़ा जिले में स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब पुलिस ने भाजपा के एक जुलूस को हावड़ा ब्रिज की ओर बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो बाद में झड़प में बदल गई। पुलिस के अनुसार, सामान्य जनजीवन और यातायात व्यवस्था को बाधित होने से बचाने के लिए जुलूस को रोका गया।

हावड़ा पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विरोध के नाम पर किसी को भी आम लोगों की आवाजाही में बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी और कानून व्यवस्था बिगाड़ने की किसी भी कोशिश से सख्ती से निपटा जाएगा। पुलिस के रोकने के बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिससे हालात और बिगड़ गए। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारी आक्रामक हो गए थे, जिसके चलते भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी।

उत्तर 24 परगना जिले के पेट्रापोल और घोजाडांगा लैंड पोर्ट्स, मालदा के मनोहरपुर मुचिया और कूचबिहार के चांग्राबांधा लैंड पोर्ट पर सनातनी ऐक्य परिषद के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का आरोप लगाते हुए कड़ा विरोध जताया।

उत्तर 24 परगना में भाजपा विधायक अशोक कीर्तनिया के नेतृत्व में जयंतिपुर बाजार से पेट्रापोल सीमा की ओर जुलूस निकाला गया। सीमा के जीरो प्वाइंट के पास सीमा सुरक्षा बल ने बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ तीखा रोष व्यक्त किया।

अशोक कीर्तनिया ने कहा कि जब तक बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकार सुनिश्चित नहीं होते, तब तक सीमा व्यापार को निलंबित रखा जाना चाहिए ताकि वहां की सरकार को सख्त संदेश दिया जा सके। इसी तरह के विरोध प्रदर्शन घोजाडांगा लैंड पोर्ट पर भी देखने को मिले।

हालांकि पेट्रापोल क्लीयरिंग एजेंट्स एसोसिएशन के सदस्य कार्तिक चक्रवर्ती ने बताया कि प्रदर्शन सड़क तक सीमित रहे और व्यापारिक क्षेत्र में सीमा सुरक्षा बल की कड़ी निगरानी होने के कारण सीमा व्यापार प्रभावित नहीं हुआ।

मालदा के मनोहरपुर सीमा क्षेत्र में हिंदू समुदाय के लोगों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों खोल और करतल के साथ प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विरोध के दौरान पश्चिम बंगाल पुलिस ने बल प्रयोग किया और महिलाओं तथा पुरुषों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया।

उल्लेखनीय है कि, 18 दिसंबर को बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले के बालुका इलाके में कथित ईशनिंदा के आरोप में 25 वर्षीय रेडीमेड गारमेंट्स फैक्ट्री कर्मचारी दीपु चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी और बाद में उसके शव को जला दिया गया था। इस घटना के बाद से कोलकाता समेत राज्य के कई जिलों में हिंदू समुदाय और भाजपा द्वारा लगातार विरोध मार्च निकाले जा रहे हैं।

मंगलवार को भी सैकड़ों लोगों ने कोलकाता में बांग्लादेश के उप उच्चायोग तक मार्च करने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में बेकबागान इलाके में रोक दिया। बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। ——————–

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के विरोध में हिंदू सेना का ज्ञापन, उपायुक्त से की हस्तक्षेप की मांग

पूर्वी सिंहभूम, 24 दिसंबर (हि.स.)। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे अत्याचार के मामलों को लेकर हिंदू सेना के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा और इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। संगठन ने प्रशासन से इस गंभीर विषय पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार तक मामला पहुंचाने की मांग की।

ज्ञापन में हिंदू सेना की ओर से कहा गया है कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ लगातार हो रही घटनाएं अत्यंत गंभीर और चिंताजनक हैं, जिन पर तत्काल और प्रभावी कदम उठाया जाना आवश्यक है। संगठन ने आग्रह किया कि इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाने के लिए उचित पहल की जाए।

प्रतिनिधिमंडल ने इसके साथ ही जमशेदपुर में रह रहे विदेशी नागरिकों के नियमानुसार सत्यापन की मांग की। संगठन का कहना था कि जो लोग अवैध रूप से निवास कर रहे हैं, उनके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।

हिंदू सेना के सदस्यों ने कहा कि हिंदुओं के विरुद्ध किसी भी प्रकार के अत्याचार को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और इस दिशा में राज्य और केंद्र सरकार को मिलकर शीघ्र व प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

इस मौके पर हिंदू सेना के अजीत सिंह (भीम सिंह), द्वीपल विश्वास, संजीव आचार्य, ललन चौहान, संजीव सिंह, राहुल दुबे, माधव सिंह, विकास शर्मा, उमेश ठाकुर सहित संगठन के कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।

अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस उड़ान भरने को तैयार, सरकार से मिली मंजूरी

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नई दिल्‍ली, 24 दिसंबर (हि.स)। देश के नागरिक उड्डयन बाजार में नई प्रतिस्पर्धा शुरू होने वाली है। भारत में दो नई एयरलाइंस कंपनियां अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस जल्द ही उड़ान भरने के लिए तैयार हैं। इन कंपनियों को नागर विमानन मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मिल गया है।

नागर विमानन मंत्रालय से अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस को उड़ान भरने की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। इन दो कंपनियों के अलावा उत्तर प्रदेश की कंपनी शंख एयर को भी पहले ही एनओसी मिल चुका है। इनके 2026 में परिचालन शुरू करने की संभावना है। सरकार ने विमानन क्षेत्र में भारत ने एविएशन में प्रतिस्पर्धा करने की कोशिश में नई एयरलाइंस को मंजूरी दी है। इससे कुछ बड़े प्लेयर्स के दबदबे वाले इस सेक्टर में और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा कि भारतीय विमानन क्षेत्र में अधिक विमानन कंपनियों को प्रोत्साहित करना मंत्रालय का प्रयास रहा है, जो सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में से एक है। इस समय देश में फिलहाल नौ घरेलू विमानन कंपनियां नियमित सेवा दे रही हैं।उन्होंने कहा कि ‘उड़ान’ जैसी योजनाओं ने स्टार एयर, इंडिया वन एयर और फ्लाई91 जैसी छोटी विमानन कंपनियों को देश के भीतर क्षेत्रीय संपर्क में अहम भूमिका निभाने में सक्षम बनाया है और भविष्य में वृद्धि की और भी गुंजाइश है।

नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसी) के अनुसार एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, इंडिगो और सार्वजनिक क्षेत्र की अलायंस एयर के अलावा अन्य विमानन कंपनियां अकासा एयर, स्पाइसजेट, स्टार एयर, फ्लाई91 और इंडियावन एयर हैं। गो फर्स्ट तथा जेट एयरवेज सहित कई विमानन कंपनियों ने पिछले कुछ साल के दौरान कर्ज के बोझ तले दबकर अपनी उड़ान सेवाएं बंद कर दी हैं। क्षेत्रीय विमानन कंपनी फ्लाई बिग ने अक्टूबर में नियमित उड़ानें निलंबित कर दी थीं। इंडिगो एयरलाइन और एयर इंडिया समूह (एयर इंडिया व एयर इंडिया एक्सप्रेस) की घरेलू बाजार में 90 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी है।

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भारतीय तटरक्षक बल ने गोवा शिपयार्ड में विकसित अपने पहले प्रदूषण नियंत्रण पोत – समुद्र प्रताप को अपने बेड़े में शामिल किया

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भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) की 2 पीसीवी परियोजना के तहत 23 दिसंबर 2025 को पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत (पीसीवी)- समुद्र प्रताप (यार्ड 1267) को अपने बेड़े में शामिल किया। 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटकों से युक्त इस पोत काआईसीजी बेड़े में शामिल होना सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहलों के दृष्टिकोण को सुदृढ़ करता है।

‘समुद्र प्रताप’ भारतीय तटरक्षक बल का स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित पहला प्रदूषण नियंत्रण पोत है। यह तटरक्षक बल के बेड़े का सबसे बड़ा पोत है, जो तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता और पहुंच को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाता है। 114.5 मीटर लंबा और 16.5 मीटर चौड़ा, 4,170 टन विस्थापन क्षमता वाला यह पोत अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित है, जिसमें 30 मिमी सीआरएन-91 तोप, एकीकृत अग्नि नियंत्रण प्रणाली से लैस दो 12.7 मिमी स्थिर रिमोट-नियंत्रित तोपें, स्वदेशी रूप से विकसित एकीकृत ब्रिज सिस्टम, एकीकृत प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली, स्वचालित विद्युत प्रबंधन प्रणाली और एक उच्च क्षमता वाली बाहरी अग्निशमन प्रणाली शामिल हैं।

प्रदूषण नियंत्रण पोत भारतीय तटरक्षक बल का पहला ऐसा पोत है जो डायनामिक पोजिशनिंग क्षमता (डीपी-1) से लैस है और इसे एफआईएफआई-2/एफएफवी-2 प्रमाणन प्राप्त है। यह तेल रिसाव का पता लगाने के लिए उन्नत प्रणालियों से सुसज्जित है, जैसे कि ऑयल फिंगरप्रिंटिंग मशीन, जाइरो स्टेबलाइज्ड स्टैंडऑफ एक्टिव केमिकल डिटेक्टर और पीसी लैब उपकरण, जो विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और उसके बाहर व्यापक प्रदूषण प्रतिक्रिया अभियानों को चला सकता हैं। यह उच्च परिशुद्धता संचालन करने, गाढ़े तेल से प्रदूषकों को पुनर्प्राप्त करने, संदूषकों का विश्लेषण करने और दूषित पानी से तेल को अलग करने में सक्षम है।

दीक्षांत समारोह में डीआईजी वीके परमार, पीडी (एमएटी), आईसीजी; श्री ब्रजेश कुमार उपाध्याय, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, जीएसएल और आईसीजी तथा जीएसएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

राहुल गांधी ने कुलदीप सेंगर को मिली जमानत को बताया निराशाजनक

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नई दिल्ली, 24 दिसंबर (हि.स.)। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उन्नाव दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा पाए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से मिली जमानत को निराशाजनक बताया है।

राहुल गांधी ने महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना के एक्स पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए लिखा कि क्या एक गैंगरेप पीड़िता के साथ ऐसा व्यवहार उचित है। क्या उसकी गलती सिर्फ इतनी है कि वह न्याय के लिए अपनी आवाज उठा रही है। जब अपराधी को जमानत मिलती है और पीड़िता को अपराधियों जैसा व्यवहार झेलना पड़ता है, तो यह न्याय नहीं बल्कि अन्याय है।

उन्नाव दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे सेंगर को दिल्ली उच्च न्यायालय ने चार शर्तों के साथ जमानत दी है। हालांकि अभी सेंगर जेल में ही रहेगा, क्योंकि दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में भी 10 साल की सजा हुई थी। इस मामले में उसकी जमानत याचिका पर 28 दिसंबर को फैसला आना है।

उल्लेखनीय है कि सेंगर को ट्रायल कोर्ट ने 2019 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। छह साल से अधिक समय बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को उन्हें सशर्त जमानत दी। फैसले के विरोध में पीड़िता, उसकी मां और सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने इंडिया गेट पर धरना दिया, जिन्हें देर रात दिल्ली पुलिस ने वहां से हटा दिया था।

उधर पूर्व BJP विधायक कुलदीप सेंगर को जमानत मिलने पर उन्नाव (UP) की रेप पीड़िता ने कहा –

‘’देश की बेटियां कैसे सुरक्षित रहेंगी? ऐसे रेप के आरोपियों को बरी कर दिया जाएगा। जजमेंट को सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ। ऐसा लगा कि मैं सुसाइड कर लूं’’

सीएम धामी ने सांकरी में किया केदारकांठा विंटर टूरिज्म महोत्सव का शुभारंभ

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उत्तरकाशी, 24 दिसंबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकशी जिले के सांकरी में आयोजित विंटर फेस्टिवल का विधिवत शुभारंभ करते हुए पर्यटक दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सांकरी केवल एक गांव नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति का जीवंत संग्रहालय है। पहली बार सांकरी आगमन पर मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों के स्नेह और उत्साह के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यहां की पारंपरिक लकड़ी की वास्तुकला, लोकगीत, लोकनृत्य और सरल पहाड़ी जीवनशैली उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महोत्सव उत्तराखंड की आस्था, संस्कृति, परंपरा और स्वाभिमान का उत्सव होने के साथ-साथ “विकास भी–विरासत भी” की सोच को साकार करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शीतकालीन यात्रा के आह्वान के बाद केदारकांठा,हर्षिल,औली,मुनस्यारी और सांकरी जैसे क्षेत्रों में शीतकालीन पर्यटन को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है, जिससे सीमांत गांवों में पलायन रुक रहा है और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शीतकालीन पर्यटन से लोक कलाकारों, हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजनों और स्थानीय उत्पादों को नया बाजार मिलेगा। युवा ट्रेकिंग गाइड, होम-स्टे, होटल और पर्यटन से जुड़े कार्यों के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में तेजी से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों, कानून व्यवस्था और पारदर्शिता को मजबूत कर रही है। समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून, सख्त भू-कानून और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति से उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने जनता से शीतकालीन पर्यटन को जन आंदोलन बनाने और उत्तराखंड को समृद्ध व आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग का आह्वान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विंटर फेस्टिवल में विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का भी अवलोकन किया।

कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय विधायक दुर्गेश लाल ने मुख्यमंत्री को क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न मांगों का एक मांग पत्र सौंपा। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायक द्वारा एक विस्तृत एवं लंबी सूची सौंपी गई है,जिसे वह अपने साथ ले जा रहे हैं। सभी मांगों का परीक्षण कर यथा संभव घोषणाओं में शामिल किया जाएगा। तटाउ महाविद्यालय सड़क मार्ग को भी घोषणा में सम्मिलित करेंगे।

क्षेत्रीय विधायक दुर्गेश्वर लाल ने कहा कि हरकीदून, केदारकांठा, भराड़सर, देवक्यारा, चांईशील और सरूताल जैसे विश्वप्रसिद्ध पर्यटन स्थलों का मुख्य केंद्र बिंदु पर्यटन नगरी सांकरी है।

इस अवसर पर अध्यक्ष जिला पंचायत रमेश चौहान, जिलाध्यक्ष भाजपा नागेंद्र चौहान, दर्जा राज्य मंत्री जगत सिंह चौहान, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान, पूर्व विधायक मालचंद, ब्लाक प्रमुख रणदेव राणा, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा सतेंद्र सिंह राणा, मंडल अध्यक्ष शांकरी राजीव कुंवर, मोरी प्रेम चौहान,पुरोला रामचंद्र पंवार, ओबीसी मोर्चा चंडी प्रसाद बेलवाल, परशुराम जगूड़ी, भगत सिंह रावत, सुरेंद्र सिंह देवजानी, मुकेश टम्टा, लोकेंद्र कंडियाल, जगमोहन सिंह, कृपाल राणा, नारायण सिंह चौहान, त्रेपन सिंह राणा आदि उपस्थित रहे।

आकाश एनजी मिसाइल ट्रायल सफलतापूर्वक पूर्ण

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नई दिल्ली। भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में बुधवार को एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी रूप से विकसित नई पीढ़ी की आकाश-एनजी (Akash-NG) सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। यह परीक्षण ओडिशा के तट पर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से किया गया, जहां मिसाइल ने अपने सभी निर्धारित लक्ष्यों को सटीकता से भेदा।

सूत्रों के अनुसार, आज सुबह किए गए इस परीक्षण में आकाश-एनजी मिसाइल ने अपनी उन्नत तकनीकी विशेषताओं का शानदार प्रदर्शन किया। मिसाइल ने हवा में उड़ते हुए एक निर्धारित लक्ष्य को सटीक रूप से निशाना बनाया और पूर्व निर्धारित मापदंडों पर खरी उतरी। DRDO के वैज्ञानिकों ने बताया कि परीक्षण के दौरान मिसाइल की गति, सटीकता, और नियंत्रण प्रणाली का बेहतरीन प्रदर्शन देखने को मिला।
रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने इस सफलता को भारत की आत्मनिर्भर रक्षा तैयारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। परीक्षण के दौरान विभिन्न राडार सिस्टम, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम और टेलीमेट्री स्टेशनों ने मिसाइल की पूरी उड़ान का डेटा रिकॉर्ड किया।
आकाश-एनजी मिसाइल भारतीय वायु सेना और थल सेना के लिए विकसित की गई अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली है। यह मिसाइल पुरानी आकाश मिसाइल की तुलना में कहीं अधिक उन्नत और सक्षम है। आकाश-एनजी मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 70-80 किलोमीटर तक है और यह 2.5 मैक की गति से उड़ान भरने में सक्षम है। यह दुश्मन के लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों, ड्रोन और अन्य हवाई खतरों को प्रभावी ढंग से नष्ट कर सकती है। नई पीढ़ी की इस मिसाइल का वजन पुरानी आकाश मिसाइल की तुलना में काफी कम है, जिससे इसकी गतिशीलता और तैनाती में आसानी होती है। आकाश-एनजी में अत्याधुनिक रडार आधारित एक्टिव सीकर लगाया गया है, जो लक्ष्य को स्वचालित रूप से ट्रैक करता है और उच्च सटीकता के साथ निशाना साधता है। इसमें ‘फायर एंड फॉरगेट’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
यह मिसाइल प्रणाली एक साथ कई हवाई लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है, जो इसे आधुनिक युद्ध परिदृश्य में अत्यंत उपयोगी बनाती है। आकाश-एनजी को सभी मौसम स्थितियों में संचालित किया जा सकता है, चाहे दिन हो या रात, बारिश हो या धुंध।
आकाश-एनजी मिसाइल प्रणाली भारत की वायु रक्षा क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाती है। यह मिसाइल विशेष रूप से पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर तैनाती के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां हवाई खतरों की संभावना बनी रहती है। इस मिसाइल की तैनाती से भारतीय सेना दुश्मन के हवाई हमलों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकेगी।
स्वदेशी निर्माण का गौरव
आकाश-एनजी मिसाइल पूरी तरह से भारत में विकसित और निर्मित है, जो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की बड़ी उपलब्धि है। इस मिसाइल के विकास में भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) और देश की अन्य रक्षा कंपनियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
DRDO के चेयरमैन ने इस सफलता पर वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई देते हुए कहा कि यह परीक्षण भारत की उन्नत मिसाइल तकनीक की क्षमता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस मिसाइल को भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल किया जाएगा।(सोनेट)

विधान परिषद में विपक्षी दल के सदस्यों का हंगामा, केशव मौर्य ने कहा- सच सुनने का साहस दिखाओ

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लखनऊ, 24 दिसंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में शीतकालीन सत्र के दौरान बुधवार को विधान परिषद में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आरक्षण मुद्दे पर जवाब देते समय विपक्षी दल के सदस्य भड़क गए और वेल में आकर हंगामा करने लगे। इस बीच उप मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है।

दरअसल विधान परिषद में शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन की कार्यवाही काफी हंगामेदार रही। यहां उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य कार्यवाही के दौरान सदन में लेखपाल में आरक्षण की गड़बड़ी को लेकर विपक्ष के सवालों का जवाब दे रहे थे। उनके जवाब से असंतुष्ट विपक्षी दल के सदस्यों ने वेल में आकर नारेबाजी शुरू कर दी और वेल में आ गए। विपक्ष के हंगामा किए जाने पर सत्ता पक्ष के सदस्यों के बीच गर्मागर्मी देखने को मिली।

इस हंगामे के बीच उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पिछड़ों के हक से खिलवाड़ नहीं होने देंगे। आरक्षण में गड़बड़ी नहीं होने देंगे। दोषी अधिकारियों पर भी कार्रवाई करेंगे। सच सुनने का साहस दिखाओ। हिम्मत है तो सच सुनिए। वहीं ,उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर विपक्षी सदस्यों ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) आरक्षण विरोधी सरकार है।

दरअसल विधान परिषद में शीत कालीन सत्र के अंतिम दिन की कार्यवाही काफी हंगामेदार रही। यहां उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य कार्यवाही के दौरान सदन में लेखपाल में आरक्षण की गड़बड़ी को लेकर विपक्ष के सवालों का जवाब दे रहे थे। उनके जवाब से असंतुष्ट विपक्षी दल के सदस्यों ने वेल में आकर नारेबाजी शुरू कर दी और वेल में आ गए। विपक्ष के हंगामा किए जाने पर सत्ता पक्ष के सदस्यों के बीच गर्मा-गर्मी देखने को मिली। इस हंगामे के बीच उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पिछड़ों के हक से खिलवाड़ नहीं होने देंगे। आरक्षण में गड़बड़ी नहीं होने देंगे। दोषी अधिकारियों पर भी कार्रवाई करेंगे। सच सुनने का साहस दिखाओ। हिम्मत है तो सच सुनिए।

वहीं उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर विपक्षी सदस्यों ने कहा कि बीजेपी आरक्षण विरोधी सरकार है।