विस के शीतकालीन सत्र में बाेले मुख्यमंत्री योगी- ये नया उप्र, हर युवा को रोजगार और बेटी-व्यापारी को सुरक्षा

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लखनऊ, 24 दिसंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन अनुपूरक बजट पर पक्ष रखते हुए अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्हाेंने कहा कि अब नए भारत का नया उत्तर प्रदेश है, जहां भ्रष्टाचार और माफिया राज को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि हमने पारदर्शी तरीके से लाखों युवकों को नौकरियां दी और प्रदेश स्वास्थ्य, कानून व्यवस्था, बिजली, कृ़षि उत्पादन, राजस्व समेत हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान बना रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज सदन में समाजवादी पार्टी पर कडे़ प्रहार करते हुए कहा कि `सपा पहले ही उत्तर प्रदेश का बहुत नुकसान कर चुकी है, लेकिन अब उत्तर प्रदेश विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि `हमने योजनाओं में होने वाली लूट को रोका। सपा के लोग इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करते हैं लेकिन सच ताे यह है कि सपा सरकार का जेपीएनआईसी 175 करोड़ का प्रोजेक्ट था लेकिन 860 करोड़ खर्च हो जाने के बाद भी अधूरा है। इसी प्रकार गोमती रिवर फ्रंट 167 करोड़ का प्रोजेक्ट पर 1400 करोड़ खर्च हो गए फिर भी अधूरा है। इसी प्रकार सपा सरकार ने पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के सिविल वर्क के लिए 15 हजार 200 करोड़ रुपये तय किए थे लेकिन हमने एक्सप्रेस वे 11 हजार 400 करोड़ रुपये में अधिक लंबा और चौड़ा बना कर दिखा दिया।’

बना रहे हैं नया उत्तर प्रदेशमुख्यमंत्री योगी ने सदन में कहा कि `उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के शासनकाल में हर जगह भ्रष्टाचार था। हमने सत्ता में आते ही कानून व्यवस्था में सुधार किया, जिसका परिणाम यह हुआ कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में तेजी से सुधार हुआ। मुंबई गए ताे निवेश करने के लिए व्यापारी तैयार नहीं थे लेकिन आज निवेशक प्रदेश में आने के लिए तैयार हैं। कराेड़ाें रुपए के निवेश हुए हैं और कई बड़े प्रस्ताव पाइपलाइन में हैं। अर्थव्यवस्था में कई गुना सुधार हुआ है। हमने उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्यों की सूची से बाहर निकाला है। प्रदेश में सपा सरकार के मुकाबले हमारी सरकार में किए गए आर्थिक सुधारों के कारण ही आज यूपी देश की दूसरे नंबर की अर्थव्यवस्था बन गया है।’

पारदर्शी तरीके से हो रहीं भर्तियांमुख्यमंत्री योगी ने सपा की पिछली सरकार का उल्लेख करते हुए कहा कि `दसवीं, बारहवीं में थर्ड ​डिवीजन पास करने वाले आयोग में कर्ताधर्ता बनाए गए थे और भर्ती से पहले सूची तैयार हो जाती थी। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ जितना सपा ने किया, उतना किसी ने नहीं किया। हमने 9 लाख सरकारी नौकरियां दी हैं लेकिन कहीं भ्रष्टाचार नहीं हुआ है। हमने भर्ती बोर्ड में रिटायर्ड डीजीपी को बैठाया है ताकि नकल माफियाओं की कमर तोड़ी जा सके।’

हम चेहरा देखकर योजनाओं का लाभ नहीं देतेउत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि `हम हर किसी को सरकारी योजनाओं का लाभ दे रहे हैं। किसी का नाम और चेहरा देखकर सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं दे रहे हैं। हम लाखों लोगों को मकान और राशन दे चुके हैं और अभी भी दे रहे हैं लेकिन ​किसी व्यक्ति का चेहरा देख कर मना नहीं करते हैं। किसान निधि के कराेड़ाें रुपए सीधे खाताें में पहुंच रहे हैं। पीएम सूर्यघर याेजनाओं में उप्र आज देश में अग्रणी राज्य है।’

विपक्ष के सुझाव पर करेंगे विचारउत्तर प्रदेश विधानसभा में अनुपूरक बजट पर चर्चा में बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय द्वारा दिए गए विभिन्न सुझावों के लिए आभार जताया और कहा कि `नेता प्रतिपक्ष ने जो सुझाव हमारी सरकार को दिए हैं, अगर वे सत्ता में रहते सपा नेताओं को सुझाव देते तो समाजवादी पार्टी तितर-बितर न होती। मुझे खुशी है कि नेता प्रतिपक्ष ने स्वीकार किया कि प्रदेश में माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्हाेंने कहा कि अब सपा प्रदेश में नहीं लाैटने वाली नहीं है।’

विधायक हो या सामान्य बेटी सबको मिलेगा न्याययोगी सरकार ने कहा कि `बेटी चाहे इस पक्ष की हो या विपक्ष की उसे न्याय हमारी सरकार देगी।’ उन्होंने विधायक पूजा पाल का जिक्र कर कहा कि उन्हें सपा सरकार ने न्याय और सुरक्षा नहीं दी लेकिन हमारी सरकार ने दी। यही नहीं विधायक विजमा यादव को बुलाकर उन्हें सुरक्षा दी। योगी ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता में है कि प्रदेश की हर बेटी, हर व्यापारी, हरेक नागरिक को सुरक्षा मिलनी ही चाहिए ।

बरेली के मौलाना से पूछिए ।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि `कहीं भी किसी को जबरन कब्जा नहीं करने दिया जाएगा। अगर किसी ने कब्जा किया है तो उसे छोड़ा नहीं जाएगा। अगर किसी ने सरकारी जमीन पर मॉल-बाजार बनाया तो गिरेगा और अगर पूछना है तो बरेली के मौलाना से जाकर पूछिए।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि आभार जताना चाहिए कि मोदी जी का कि स्वामित्व योजना के तहत गांव में गरीब परिवार की महिला के नाम जमीन दर्ज करने का कानून पास हुआ लेकिन तब भी समाजवादी पार्टी ने विरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी जमीन गरीबों के लिए है।

अमेठी कांग्रेस काे ढाे रही

सीएम याेगी ने सदन में कांग्रेस पर भी हमला बाेला। उन्हाेंने कहा कि `अमेठी आजादी के बाद से कांग्रेस काे आज भी ढाे रही है लेकिन एक भी मेडिकल काॅलेज तक नहीं दिया। हमारी सरकार ने मेडिकल कालेज दिया और अब वहां पढ़ाई शुरु हाे गई है।’

चाैधरी चरण सिंह की जयंती कार्यक्रम में नहीं आए नेता प्रतिपक्षसीएम याेगी ने कहा कि `चाैधरी चरण सिंह जयंती के अवसर पर विधानसभा के सामने कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष नहीं आए जबकि चाैधरी जी देश के नेता थे। वजह यह है कि सपा हर जगह वाेट बैंक देखती है और इसलिए ये लाेग कार्यक्रम में नहीं आए।’

उल्लेखनीय है कि विधानसभा का शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर से शुरु हुआ था। इस सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुपूरक बजट रखा और इस पर दोनों पक्षों ने अनुपूरक बजट सहित कई मुदृों पर विस्तार से चर्चा की। आज अंतिम दिन मुख्यमंत्री योगी ने अनुपूरक बजट को लेकर अपनी सरकार के विभिन्न कार्यों व योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी।

बहुजन समाज पार्टी के लिए संघर्ष और खुद को साबित करने वाला रहा वर्ष 2025

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लखनऊ, 24 दिसंबर (हि.स.)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लिए वर्ष 2025 काफी संघर्ष और खुद को साबित करने वाला रहा । बसपा प्रमुख सुश्री मायावती इस चुनौती पर खरी उतरने की हर संभव काेशिश करती नजर आईं। विपक्षियों को आड़े हाथों लेने में वे बिल्कुल भी पीछे नहीं रहीं। पार्टी के अंदरूनी कलह के चलते भतीजे आकाश आनंद और उनके ससुर अशाेक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया ताे बड़ा दिल भी दिखाया। उनकी गलतियों को माफ कर उन्हें पुन: पार्टी में वापस भी लिया। भतीजे आकाश को पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक बनाकर उन्हाेंने बिहार चुनाव की जिम्मेदारी दी और इसके सकारात्मक नतीजे भी देखने काे मिले। बिहार में रामगढ़ सीट का मिलना इसका प्रमाण है।

बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन मायावती ने बसपा को कमजोर समझने वाले दलों को अपने समाज की ताकत दिखाने के लिए कार्यकर्ताओं के बल पर लखनऊ में विशाल रैली करके यह संदेश दे दिया है कि उनका कोर वोट बैंक जाटव व दलित अभी भी उनके साथ हैं, भले ही इस समय उनके पास विधानसभा में केवल एक विधायक और मात्र 9 प्रतिशत वोट है लेकिन अभी भी वह किसी भी दल का खेल बिखाड़ने में सक्षम है। वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मैदान में बसपा मजबूती के साथ उतरेगी।

पहले निकाला फिर की भतीजे आकाश की वापसी

मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को 2019 में राष्ट्रीय संयोजक बनाया। वर्ष 2023 में उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी भी घोषित कर दिया था। 2024 के लोकसभा चुनावों की जिम्मेदारी भी सौंपी थी, लेकिन मई 2024 में सीतापुर में एक भाषण के चलते उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ और इसके बाद उन्हें पद से हटा दिया गया था। फिर दाेबारा पार्टी में लिया गया, जिसके बाद पार्टी में अंतर्कलह शुरू हाे गई। मायावती ने दो मार्च 2025 को आकाश और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को सभी पदों से निष्कासित करते हुए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया था। उन्होंने कहा था कि अशोक ने आकाश आनंद का राजनीतिक करियर बर्बाद किया है। बसपा प्रमुख ने यह भी कहा कि पार्टी से बढ़कर उनके लिए काेई रिश्ते-नाते मायने नहीं रखते हैं। मेरे जीते जी मेरा कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा। कुछ माह बाद आकाश और उसके ससुर ने माफी मांगी तो बड़ा दिल रखते हुए बहन मायावती ने माफ करते हुए दोनों को पार्टी में वापस ले लिया। इतना ही नहीं मायावती ने आकाश को पदाेन्नत करते हुए पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक बनाया । यह पद संगठन में राष्ट्रीय अध्यक्ष यानी मायावती के बाद आता है। बिहार चुनाव की जिम्मेदारी भी मिली, जिसमें बसपा को एक सीट मिली।

लाखाें की भीड़ जुटा कर खुद को किया साबित−प्रदेश में लगभग 22 प्रतिशत आबादी वाले इस वर्ग को सभी दल यह संदेश देकर अपने पाले में खींचने का प्रयास कर रहे हैं कि बसपा का अस्तित्व अब समाप्त हो चुका है। पुराने नेता भी पार्टी से चले गए या फिर निकाल दिए गए हैं। इसकी भनक जब बसपा प्रमुख काे लगी ताे उन्हाेंने बसपा संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर 9 अक्टूबर 2025 को लखनऊ में विशाल रैली आयोजित की। इस रैली में लगभग पांच लाख से अधिक की भीड़ जुटी। मंच से उन्होंने जहां प्रदेश की वर्तमान याेगी सरकार की सराहना की तो कांग्रेस-सपा पर हमलावर रहीं। उन्होंने इस रैली के जरिए यह साबित करने की काेशिश की कि आज भी बसपा शोषिताें- पीड़ितों के दिलों पर राज करती है। उन्हाेंने संदेश दिया कि वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मैदान में बसपा मजबूती के साथ उतरेगी। राजनैतिक जानकारों का कहना है कि साल 2025 में जो कुछ हुआ, उसे भूलकर बसपा प्रमुख को आने वाले साल 2026 में और पार्टी के जनाधार को लेकर लेकर सोचना हाेगा। क्योंकि उनके सामने लगातार एक के बाद एक चुनौतियां हैं।राज्यसभा में बसपा का एक मात्र सांसद है, उनका भी कार्यकाल 2026 में समाप्त हाे जाएगा। ऐसे में बसपा काे राजनीति के मैदान में बने रहने के लिए नए सिरेे से अपनी रणनीति बनानी हाेगी। अपने परंपरागत जनाधार काे विश्वास की धार देनी हाेगी, उनके बीच पैठ बनानी हाेगी तभी बसपा कामयाबी के शिखर पर पहुंच सकेगी।

पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय में नवप्रवेशी विद्यार्थियों का शिक्षारंभ व उपनयन संस्कार

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हरिद्वार, 24 दिसंबर (हि.स.)। पतंजलि भारतीय आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान (आयुर्वेद महाविद्यालय) के नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं का शिक्षारम्भ एवं एवं उपनयन संस्कार पतंजलि योगपीठ के आयुर्वेद भवन में सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर स्वामी रामदेव ने कहा कि पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय के विद्यार्थी दीक्षित होकर स्वदेशी चिकित्सा के हमारे ध्येय संकल्प को पूरे विश्व में स्थापित करने का कार्य करेंगे। कहा कालांतर में यज्ञोपवीत, वेद, धर्म व अध्यात्म के नाम पर भ्रांतियाँ समाज में व्याप्त हो रही थी। पतंजलि योगपीठ ने इन सभी भ्रांतियों को समाप्त किया है। हमने किसी भी कुल, वंश, जाति व सम्प्रदाय में पैदा हुए व्यक्ति को समान शिक्षा प्रदान की है।

आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि यज्ञोपवीत मात्र प्रतीक नहीं है, यह हमारे सौभाग्य का पर्व है। कहा दुनिया में आए प्रत्येक मनुष्य पर तीन ऋण होते हैं- पहला देव ऋण, दूसरा ऋषि ऋण और तीसरा पितृ ऋण। यज्ञोपवीत के तीन धागे हमारे तीन ऋणों का प्रतीक हैं, जो हमें सदैव यह स्मरण कराते रहते हैं कि हमें परमात्मा, हमारे पूर्वज ऋषियों व गुरुजनों तथा माता-पिता के ऋण से उऋण होना है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने कर्म से द्विज नहीं है तो जन्म से द्विज होना भी व्यर्थ है। उच्चता, पवित्रता तथा विद्वत्ता को पाने का सभी का समान रूप से अधिकार है।

इस अवसर पर पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनिल यादव, डॉ. गिरिश के.जे., डॉ. राजेश मिश्र, साध्वी देवसुमना, साध्वी देवस्वस्ति, साध्वी देवविभा सहित महाविद्यालय के समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे।

 भागवत का आह्वान : हर हिंदू एकजुट हो…

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– डॉ. मयंक चतुर्वेदी

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का हालिया वक्तव्य उस जटिल और असहज यथार्थ की ओर संकेत करता है, जिसे दक्षिण एशिया की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय समुदाय लंबे समय से या तो नजरअंदाज करता रहा है या फिर सुविधाजनक चुप्पी के सहारे टालता आया है। यह विषय किसी एक विचारधारा, दल या देश की सीमाओं में बंधा हुआ प्रश्न नहीं है, वस्‍तुत: यह एक गहरा मानवीय, सामाजिक और ऐतिहासिक संकट है जिसकी जड़ें उपमहाद्वीप भारत के विभाजन से लेकर आज तक फैली हुई हैं।

बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति को यदि वर्तमान घटनाओं के संदर्भ में देखा जाए तो तस्वीर अधूरी रह जाएगी। इसके लिए इतिहास के पन्नों को पलटना आवश्यक है। वर्ष 1947 में जब भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान अस्तित्व में आया तब वहां हिंदुओं की जनसंख्‍या 22 से 23 प्रतिशत के आसपास थी। यह संख्या किसी भी लोकतांत्रिक ढांचे में एक प्रभावी और निर्णायक उपस्थिति मानी जा सकती थी। किंतु समय के साथ यह अनुपात लगातार घटता चला गया। हिन्‍दुओं के खिलाफ हिंसा के अनेक उदाहरणों से इतिहास भरा पड़ा है।

यही कारण है कि 1971 में बांग्लादेश के स्वतंत्र एक देश के रूप में सामने आने तक हिंदुओं की जनसंख्या घटकर लगभग 13 से 14 प्रतिशत रह गई। इसके बाद भी यह गिरावट थमी नहीं, क्‍योंकि हिन्‍दू हिंसा फिर भी नहीं रुकी। आज विभिन्न जनगणनाओं और अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार बांग्लादेश में हिंदुओं की जनसंख्‍या सिर्फ सात से आठ प्रतिशत के बीच सिमट चुकी है।

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं किसी एक सरकार या राजनीतिक दौर तक सीमित नहीं रहीं। मंदिरों पर हमले, मूर्तियों की तोड़फोड़, धार्मिक आयोजनों के दौरान हिंसा, हिंदू महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और जबरन धर्मांतरण जैसी घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टें यह भी दर्शाती हैं कि अनेक मामलों में दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलती और प्रशासनिक कार्रवाई अक्सर तात्कालिक दबाव को शांत करने तक सीमित रह जाती है। इससे अल्पसंख्यक समुदाय में यह धारणा गहराती है कि राज्य उनके साथ खड़ा नहीं है।

सामाजिक अध्ययनों और मानवाधिकार संगठनों के आकलन बताते हैं कि पिछले सात दशकों में करीब तीन करोड़ हिंदू पूर्वी पाकिस्तान और फिर बांग्लादेश से पलायन करने को विवश हुए हैं। पुनश्‍च ध्‍यान रहे कि यह पलायन रोजगार की तलाश या आर्थिक अवसरों की चाह में नहीं हुआ है, इसके पीछे सिर्फ ओर सिर्फ धार्मिक पहचान के आधार पर होने वाली हिंसा, संपत्ति पर जबरन कब्जा, प्रशासनिक उदासीनता और न्यायिक संरक्षण के अभाव जैसे कारण प्रमुख रहे हैं। यह तथ्य अपने आप में उस राज्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है, जोकि अपने नागरिकों को समान सुरक्षा और अधिकार देने का दावा करती है।

इसी पृष्ठभूमि में डॉ. मोहन भागवत का यह कथन कि बांग्लादेश के हिंदुओं को एकजुट रहना होगा और दुनिया भर के हिंदुओं को उनके समर्थन में आगे आना चाहिए, वास्‍तव में एक भावनात्मक अपील से आगे जाकर सामाजिक यथार्थ की ओर इशारा है। उनका यह कहना कि हिंदुओं का एकमात्र देश भारत है, कूटनीतिक दृष्टि से भले ही संवेदनशील माना जाए, किंतु इसके पीछे छिपा आशय यह है कि भारत स्वयं को एक आधुनिक राष्ट्र-राज्य के रूप में नहीं देख सकता है, क्‍योंकि भारत की पहचान एक सभ्यतागत राष्ट्र के रूप में भी है, जिसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और मानवीय जिम्मेदारियां उसकी राजनीतिक सीमाओं से कहीं आगे तक जाती हैं।

एक तथ्‍य इस संदर्भ में यह भी है कि जब भारत विभाजन हुआ था, तब पाकिस्‍तान में शेष बचे हिन्‍दू अल्‍पसंख्‍यकों को मोहम्‍मद अली जिन्‍ना से लेकर शीर्ष नेतृत्‍व ने यह पूरा भरोसा दिया था कि वे इस इस्‍लामिक राज्‍य में पूरी तरह से सुरक्षित हैं, उनके अधिकार भी सुरक्षित हैं, किंतु समय के साथ ये व्‍यवहार में बिल्‍कुल भी दिखाई नहीं दिया है। अन्‍यथा तभी भारत और पाकिस्‍तान के बीच धर्म के आधार पर जैसा कि देश विभाजन की मांग मुस्‍लिम लीग ने रखी और डारेक्‍ट एक्‍शन के नाम पर हिन्‍दू हत्‍या, हिन्‍दू हिंसा का दुष्‍चर्क चलाया, ऐसे में तो उस आधार पर तभी सभी मुसलमानों को शेष भारत छोड़कर चला जाना था और इसी तरह से नए पाकिस्‍तान से सभी हिन्‍दुओं को भारत में आ जाना था, पर ऐसा नहीं हुआ, क्‍योंकि आगे हिंसा नहीं होगी ये आश्‍वासन दिया गया था। पर यहां तो देखने में यही आ रहा है कि सिर्फ एक तरफा हिंसा बांग्‍लादेश और पाकिस्‍तान में हिन्‍दुओं पर हो रही है। वे पलायन को विवश हैं।

ऐसे में आज आवश्यकता इस बात की है कि भारत और विश्व भर में फैला हिंदू समाज भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से ऊपर उठकर ठोस और शांतिपूर्ण प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करे। शिक्षा, कानूनी सहायता, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तथ्यपरक संवाद और सामाजिक संगठनों के माध्यम से बांग्लादेश के हिंदुओं को सशक्त बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है। यह प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है, किंतु इसके बिना किसी स्थायी समाधान की कल्पना नहीं की जा सकती।

इस आधार पर कहना होगा कि डॉ. भागवत का वक्तव्य इस अर्थ में एक चेतावनी भी है और एक अवसर भी। चेतावनी इसलिए कि यदि आज भी इस समस्या को अनदेखा किया गया तब फिर आने वाले वर्षों में बांग्लादेश में हिंदू उपस्थिति केवल इतिहास की बात बनकर रह जाएगी और अवसर इसलिए कि यदि इस विषय को भावनात्मक उन्माद से निकालकर सामाजिक संगठन, संतुलित कूटनीति और जिम्मेदार वैश्विक सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ाया गया तो हालात में बदलाव की संभावना बन सकती है। इसलिए आज डॉ. भागवत का वक्तव्य संपूर्ण हिन्‍दू समाज के लिए बहुत मायने रखता है। इसके मर्म को जब तक सभी हिन्‍दू नहीं समझेंगे बांग्‍लादेश हो या पाकिस्‍तान अथवा अन्‍य कोई दूसरा देश हर जगह हिन्‍दू आगे भी हिंसा का शिकार होता रहेगा, यह तय मानिए।

राष्ट्रपति ने क्रिसमस की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी

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एक संदेश में राष्ट्रपति ने कहा है, ‘‘क्रिसमस के इस पावन अवसर पर मैं सभी नागरिकों, विशेषकर ईसाई समुदाय से जुड़े भाई-बहनों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।

खुशी और उत्साह का त्योहार क्रिसमस प्यार और करुणा का संदेश देता है। यह हमें मानव कल्याण के लिए प्रभु यीशु मसीह के बलिदान की याद दिलाता है। यह पवित्र अवसर हमें समाज में शांति, सद्भाव, समानता और सेवा के मूल्यों को और मजबूत करने के लिए प्रेरित करता है।

आइए, हम यीशु मसीह के दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लें और दयालुता तथा पारस्परिक सद्भाव को बढ़ावा देने वाले समाज के निर्माण की दिशा में काम करें।”

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा : उपराष्ट्रपति

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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति आवास में सांसद प्रोफेसर (डॉ.) सिकंदर कुमार की लिखी पुस्तक “मोदी युग में भारत का आर्थिक सशक्तिकरण” का विमोचन किया।इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पुस्तक प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की दूरदृष्टि, नेतृत्व और परिवर्तनकारी आर्थिक नीतियों का एक सशक्त प्रमाण है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में देश ने उल्लेखनीय आर्थिक बदलाव और राष्ट्र के आत्मविश्वास में नई वृद्धि देखी है। उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है और साथ ही सबसे तेजी से विकास करने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था भी है।

उपराष्ट्रपति ने बताया कि पुस्तक में दिवालियापन कानूनों, डिजिटल शासन और पारदर्शी बैंकिंग प्रणालियों जैसे प्रमुख संरचनात्मक सुधारों पर प्रकाश डाला गया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ये सुधार मात्र नीतिगत पहल नहीं हैं, बल्कि दशकों पुरानी अक्षमताओं और भ्रष्टाचार को समाप्त करने के उद्देश्य से उठाए गए साहसिक कदम हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” का दृष्टिकोण दक्षता और अनुशासन के एक कारगर मॉडल में तब्दील हो चुका है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लाभार्थियों तक 100 प्रतिशत लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर देते हैं। उन्होंने बताया कि जनधन-आधार-मोबाइल (जेएएम) की त्रिमूर्ति ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण को संभव बनाया है, भ्रष्टाचार को कम किया है और शासन में पारदर्शिता तथा दक्षता को बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि अब तक 47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है।

उपराष्ट्रपति ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को इस युग की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि जीएसटी ने कर संरचना को सरल बनाकर, अनुपालन को बढ़ाकर और सहकारी संघवाद को मजबूत करके भारत को एकीकृत राष्ट्रीय बाजार में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि अंतरराज्यीय चेक पोस्टों को हटाने से माल की आवाजाही सुगम हुई है, जिससे लाखों मानव-घंटे और ईंधन की बचत हुई है। उन्होंने कहा कि जीएसटी को स्वतंत्र भारत में किए गए सबसे बड़े सुधारों में से एक माना जाता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि समावेश पर विशेष ध्यान देने के कारण भारत का आर्थिक सशक्तिकरण हुआ है। डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया जैसी पहल और यूपीआई के तीव्र विस्तार ने नागरिकों, उद्यमियों और छोटे व्यवसायों को मजबूत किया है।

उतार-चढ़ाव के बाद लाल निशान पर बंद हुआ घरेलू शेयर बाजार, सेंसेक्स 116 अंक टूटा

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नई दिल्‍ली, 24 दिसंबर (हि.स)। हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को शेयर बाजार उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में लाल निशान पर बंद हुआ। बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्‍स 116.14 अंक यानी 0.14 फीसदी टूटकर 85,408.70 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्‍टॉक एक्‍सेंचज (एनएसई) का निफ्टी भी 37.45 अंक यानी 0.14 फीसदी अंक की गिरावट के साथ 26,139.70 के स्‍तर पर बंद हुआ।

आज विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और चुनिंदा सेक्टर्स में मुनाफावसूली के चलते निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर बना रहा। एक समय सेंसेक्‍स लगभग 200 अंक बढ़कर 85738.18 के स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, यह तेजी ज्‍यादा देर बरकरार नहीं रही। आज कारोबार में सेंसेक्स के 30 स्टॉक का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। सबसे ज्यादा बिकवाली टीएमपीवी, सन फार्मा, हिंदुस्तान यूनिलीवर, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एशियन पेंट्स जैसे स्टॉक में देखने को मिली है।

दूसरी तरफ, ट्रेंट, मारुति सुजुकी इंडिया, अल्ट्राटेक सीमेंट, बजाज फाइनेंस और पावर ग्रिड जैसे शेयर टॉप गेनर रहे। एशियाई शेयर बाजारों में शामिल दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई 225 सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सकारात्मक दायरे में स्थिर हुए। यूरोपीय बाजारों में मामूली बढ़त देखी गई। अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले भारतीय रुपया 15 पैसे टूटकर 89.78 रुपये प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद।

एक दिन पहले बीएसई का सेंसेक्‍स 42.63 अंक यानी 0.050 फीसदी की गिरावट के साथ 85,524.84 के स्‍तर पर बंद हुआ था। नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 4.75 अंक यानी 0.018 फीसदी बढ़कर 26,177.15 के स्‍तर पर बंद हुआ था।

योगी सरकार यात्रियों की सुरक्षा के लिए सतर्क, सर्दी में सुरक्षित बस संचालन के निर्देश

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कोहरे और कम दृश्यता में नियंत्रित गति, सभी बसों में सुरक्षा उपकरण अनिवार्य

लंबी दूरी की बसों की 13 बिंदुओं पर आउटशेडिंग तथा 31 बिंदुओं पर नियमित भौतिक जांच कराने के निर्देश

लखनऊ, 24 दिसंबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शरद ऋतु और सर्दी के मौसम में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सतर्क है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद में प्रदेश में बस यात्रियों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और निर्बाध परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से परिवहन विभाग द्वारा विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत कोहरे और दृश्यता में कमी जैसी परिस्थितियों में बसों का संचालन अत्यंत सावधानी से किये जाने, रात्रिकालीन सेवाओं को आवश्यकतानुसार सीमित करने और यात्रियों को सुरक्षा उपायों की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।

कोहरे में बसों की गति 40 किमी. प्रति घंटा से अधिक न हो

उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने परिवहन निगम एवं संबंधित अधिकारियों को शरद ऋतु/ठंड के मौसम में बसों के सुरक्षित एवं नियंत्रित संचालन को लेकर विस्तृत आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कोहरे और दृश्यता में कमी जैसी परिस्थितियों में बसों का संचालन अत्यंत सावधानी से किया जाना आवश्यक है और यात्रियों को सुरक्षित यात्रा मुहैया कराना प्रदेश सरकार का दायित्व है।

परिवहन मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि कोहरे की स्थिति में बसों की गति 40 किमी. प्रति घंटा से अधिक न हो, जबकि अत्यधिक कोहरे में बस को किसी सुरक्षित स्थान पर रोककर विजिबिलिटी सामान्य होने पर ही आगे संचालन किया जाए। बस अड्डों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम से लगातार एनाउंसमेंट कर यात्रियों को सुरक्षा उपायों की जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

अनुभवी चालकों की तैनाती सुनिश्चित की जाए

उन्होंने कहा कि घने कोहरे वाले मार्गों पर रात्रिकालीन सेवाओं को आवश्यकता अनुसार सीमित किया जाए तथा रात्रि सेवाओं में अनुभवी, दुर्घटना-रहित और अच्छे ईंधन रिकॉर्ड वाले चालकों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि रात्रि सेवा पर जाने से पूर्व चालक को कम से कम 8 घंटे का विश्राम प्राप्त हुआ हो। 50 प्रतिशत से कम लोड फैक्टर वाली रात्रिकालीन सेवाओं को अस्थायी रूप से स्थगित रखने के निर्देश दिए गए हैं।

चालकों का अल्कोहल टेस्ट अनिवार्य

लंबी दूरी एवं रात्रिकालीन सेवाओं की बसों को मार्ग पर भेजने से पूर्व 13 बिंदुओं पर आउटशेडिंग जांच तथा संचालन के दौरान 31 बिंदुओं पर नियमित भौतिक जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। सभी निगम एवं अनुबंधित बसों में रेट्रो रिफ्लेक्टिव टेप, फॉग लाइट, ऑल वेदर बल्ब, वाइपर और शीशे पूर्ण रूप से कार्यरत होना अनिवार्य किया गया है। मार्ग पर तैनात इंटरसेप्टर एवं प्रवर्तन वाहनों द्वारा निरीक्षण के दौरान ब्रेथ एनालाइजर के माध्यम से अल्कोहल टेस्ट अनिवार्य रूप से कराए जाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

यात्रियों को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

परिवहन मंत्री ने चालकों को तीन प्रकार की सड़कों पर विशेष सावधानी बरतने को कहा है। एक्सप्रेस-वे पर अचानक ठहराव से बचाव, डिवाइडर युक्त सड़कों पर दायीं ओर संचालन तथा बिना डिवाइडर वाली सड़कों पर बायीं ओर संचालन कर दुर्घटनाओं से बचने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने निर्देशित किया कि सभी चालकों एवं परिचालकों को इन दिशा-निर्देशों के संबंध में विशेष प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि संयमित गति और सतर्कता के साथ बसों का संचालन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने दोहराया कि योगी सरकार प्रत्येक नागरिक के जीवन की सुरक्षा के प्रति पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है और यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

अयोध्या में 27 से होगा प्रदेश भर के महापौर का जमावड़ा

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– व्हाट्सएप के माध्यम से उपभोक्ता कर सकेंगे कर का भुगतान

अयोध्या, 24 दिसंबर (हि.स.)। नवाचार में जुटे अयोध्या नगरनिगम ने व्हाट्सएप के माध्यम से उपभोक्ताओं को गृह-जल एवं सीवर कर का बिल पहुंचाने एवं भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। तिलक हाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में नगर आयुक्त श्री जयेंद्र कुमार एवं पार्षदों की मौजूदगी में उन्होंने लैपटॉप पर बटन दबाकर इस सेवा का शुभारंभ किया।

उन्होंने बताया कि बैंक ऑफ़ बड़ौदा के माध्यम से शुरू की गई सेवा में सभी प्रकार की संपत्ति कर जमा करने की सुविधा उपभोक्ताओं को हासिल हो गई है। उन्हें रसीद भी व्हाट्सएप पर ही सुलभ करा दी जाएगी। इससे किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता की आशंका नगण्य हो जाएगी।

उन्होंने बताया कि आगामी 27 एवं 28 दिसंबर को प्रदेश भर के सभी 17 महापौर अयोध्या आएंगे। वह पंचशील होटल में आयोजित सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। वे अयोध्या में किए जा रहे पार्किंग, पार्कों के सुंदरीकरण, स्वच्छता, पेयजल समेत विभिन्न व्यवस्था के नवाचारों से परिचित होंगे और अपने नवाचारों से अयोध्या के पार्षद दल तथा अधिकारियों को परिचित कराएंगे।

नगर आयुक्त ने बताया कि बैंक ऑफ़ बड़ाैदा के सहयोग से व्हाट्सएप के माध्यम से शुरू होने वाली कर वसूली की सुविधा से लोगों को काफी आसानी होगी और नगर निगम में मानव संसाधनों की बचत होगी। उन्होंने एक सवाल के जवाब में बताया कि नगर निगम की आमदनी बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र को भी आमंत्रित किया गया है।

इस मौके पर अपर नगर आयुक्त डॉ. नागेंद्र नाथ एवं भारत भार्गव, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी गजेंद्र कुमार के अलावा पूर्व उप सभापति जयनारायण सिंह रिंकू, पार्षद अनुज दास, अनिल सिंह, बृजेंद्र सिंह, दीप गुप्ता, चंदन सिंह, संतोष सिंह, विकास पाल, धर्मेंद्र मिश्र, सूर्यकुमार तिवारी सूर्या आदि मौजूद थे।

महापौर सम्मेलन के लिए 12 सदस्यीय कमेटी का गठन

आगामी 27 दिसंबर से शुरू होने वाले दो दिवसीय महापौर सम्मेलन के लिए आयोजन समिति का गठन किया गया है, जिसमें 12 पार्षद शामिल हैं। नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश पांडेय ने बताया कि सदस्यों में पार्षद अनुज दास, विशाल पाल, संतोष सिंह, अनिल सिंह, विश्वजीत, विनय जायसवाल, मनीष यादव निखिल, राजकरन, अर्चना श्रीवास्तव, सुमन यादव, सलमान हैदर, बृजेंद्र सिंह शामिल हैं। सलमान हैदर को मीडिया की जिम्मेदारी सौंप गई है।

बॉर्डर के पास बनेगा नया एयरबेस, जमीन अधिग्रहण का रास्ता साफ

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जोधपुर, 24 दिसम्बर (हि.स.)। राजस्थान से लगते भारत-पाक सीमा पर अब एयरबेस बनने का रास्ता खुल गया है। नए एयरबेस से पाकिस्तान के जकोबाबाद, भोलारी ओर रहीम यार खान तक भारतीय फाइटर जेट सेकेंड्स में पहुंच जाएंगे। नए एयरबेस के लिए सादुलशहर (श्रीगंगानगर) तहसील के आसपास के क्षेत्र की जमीन के अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया है।

दरअसल अधिग्रहण के विरोध में 58 किसानों और जमीन मालिकों ने याचिका लगाई थी। राजस्थान हाईकोर्ट ने सुनवाई में सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी ने फॉरवर्ड कंपोजिट एविएशन बेस के लिए भूमि अधिग्रहण को सही ठहराया है। हाईकोर्ट के अनुसार यह रिट याचिका केवल तकनीकी आपत्तियों के सहारे राष्ट्रीय महत्व की रक्षा परियोजना को पटरी से उतारने की कोशिश है। कोर्ट ने अपने रिपोर्टेबल जजमेंट में स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं में व्यक्तिगत हितों पर जनहित भारी पड़ता है। मामला श्रीगंगानगर जिले की सादुलशहर तहसील के लालगढ़ जाटान और आस-पास के क्षेत्र का है। यहां भारत-पाक सीमा के पास रक्षा मंत्रालय की ओर से एक महत्वपूर्ण एयरबेस स्थापित किया जाना है। इस प्रोजेक्ट को ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया है, जो रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। इस प्रोजेक्ट के लिए चक 21 एसडीएस में करीब 130.349 हेक्टेयर निजी भूमि और 2.476 हेक्टेयर सरकारी भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। कोर्ट ने रिकॉर्ड देखकर पाया कि एसआईए की जनसुनवाई की तिथि, अखबारी प्रकाशन, मिनट्स और फोटो सब मौजूद हैं। इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जॉइंट सर्वे, आपत्तियों पर तहसीलदार, अन्य अधिकारियों की रिपोर्ट, भूमि अधिग्रहण अधिकारी का स्पीकिंग ऑर्डर और आरएंडआर संबंधी संयुक्त सर्वे रिपोर्ट यह दर्शाती है कि कानून की धाराओं का पालन किया गया है। इसलिए याचिकाकर्ताओं के प्रोसीजर फॉलो न होने वाले तर्क गलत हैं।

दरअसल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राजस्थान के हवाई ठिकानों से ही पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हमला किया गया था। इसलिए भी पाकिस्तान ने राजस्थान में हमले की कोशिश की थी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से रक्षा मंत्रालय राजस्थान से लगते बॉर्डर और सेना के इंफ्रास्ट्रक्चर को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। नया सादुलशहर एयरबेस केवल पाकिस्तान बॉर्डर से 40 किलोमीटर दूर होगा। श्रीगंगानगर जिले में यह दूसरा एयरफोर्स स्टेशन होगा। इससे पहले सूरतगढ़ एयरफोर्स स्टेशन यहां मौजूद है। राजस्थान-पाकिस्तान बॉर्डर के जिलों पहले से 4 एयरफोर्स स्टेशन ऑपरेशनल हैं।