नई दिल्ली, 25 दिसंबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मेट्रो से यात्रा करके दी अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने 24 दिसंबर 2002 को दिल्ली मेट्रो का शुभारंभ किया था। वे स्वयं दिल्ली मेट्रो के पहले यात्री बने। यह केवल एक उद्घाटन नहीं था, बल्कि दिल्ली के भविष्य को दिशा देने वाला एक ऐतिहासिक क्षण था। उन्होंने कहा कि अटलजी ने मेट्रो को केवल एक ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि आधुनिक सोच, पारदर्शी व्यवस्था और जिम्मेदार शहरी विकास का आधार माना। आज उनकी जयंती पर दिल्ली गेट से लाजपत नगर तक की यह मेट्रो यात्रा उसी दूरदर्शी सोच को श्रद्धांजलि है। यह यात्रा याद दिलाती है कि मजबूत निर्णय और साफ नीयत कैसे आने वाली पीढ़ियों के लिए समाधान बन जाते हैं। सफर के दौरान युवा साथियों और यात्रियों से संवाद का अवसर मिला और मेट्रो के माध्यम से दिल्ली को हो रहे लाभों पर सार्थक बातचीत हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी ने दिल्ली को आज के लिए नहीं, आने वाले कल के लिए गढ़ा। दिल्ली मेट्रो उसी सोच की जीवंत विरासत है, जहां सुशासन, सुविधा और भविष्य की तैयारी एक साथ चलती है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री मोदी ने कहा कि वे जीवन भर मातृभूमि की सेवा में समर्पित रहे। श्री मोदी ने कहा, “उन्होंने गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने के लिए सामाजिक सुधार के साथ राष्ट्रीय चेतना को जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देश में शिक्षा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।”
प्रधानमंत्री ने X पर पोस्ट किया:
“मातृभूमि की सेवा में आजीवन समर्पित रहे भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए समाज सुधार के साथ राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देश के शिक्षा जगत में उनका अतुलनीय योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।”
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक और महान समाज सुधारक भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी को उनकी जयंती पर नमन किया
X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा “बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक और महान समाज सुधारक भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी को उनकी जयंती पर नमन। शिक्षा को समाज सुधार का मूल मंत्र मानने वाले मालवीय जी ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना से भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित आधुनिक शिक्षा के लिए युवाओं को प्रेरित किया और प्रेस को राष्ट्रनिर्माण का माध्यम बनाने में भी अहम योगदान दिया। अस्पृश्यता उन्मूलन के प्रयासों और किसान हितैषी कार्यों के लिए आजीवन संकल्पित महामना का योगदान चिरस्मरणीय रहेगा।”
सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी के 9 जनवरी 2022 के प्रकाश पर्व के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके दो छोटे साहिबजादों की लासानी शहादत को याद करने के लिए 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस घोषित किया था। उसी के अनुरूप गृह मंत्रालय ने सरकारी गजट में अधिसूचना जारी की- साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह द्वारा न्याय के मार्ग पर महान वीरता और सर्वोच्च बलिदान के लिए कृतज्ञ राष्ट्र श्रद्धांजलि स्वरूप हर साल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाया करेगा।
इस तरह 26 दिसंबर 2025 को देश में वीर बाल दिवस मनाया जा रहा है, जो देश के बच्चों और युवाओं को अपने देश के प्रति समर्पण और हर तरह के अन्याय के प्रतिरोध में खड़े होने को प्रेरित करेगा भले ही इसके लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग ही क्यों न करना पड़े।
वीर बाल दिवस के पीछे की कथा के लिए हमें इतिहास के झरोखे से उस दौर में झांकना पड़ेगा, जब दिल्ली के तख्त पर मुगलिया सल्तनत का शासन था।
वैसे तो सिख इतिहास ही न्याय और धार्मिक स्वतंत्रता एवं स्वाभिमान की रक्षा के लिए बलिदानों से भरा पड़ा है लेकिन जिस बलिदान की बात यहां हो रही है वो शायद दुनिया के इतिहास में लासानी ही कहा जाएगा। आठ साल और पांच साल के बच्चों ने निडरता के साथ जुल्मी शासक के समक्ष अपने पूर्वजों की शहादत की गरिमा को बरकरार रखते हुए अपने आपको प्रस्तुत किया और शहादत दी।
गुरु नानक देव ने बाबर के आक्रमण के समय देश के नागरिकों पर हुए जुल्मों-सितम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए निडरता से कहा था-
बाबर तूं जाबर है।
सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन देव को जहांगीर के शासनकाल में गर्म तवे पर बिठाकर और सिर पर गर्म रेत डालते हुए शहीद कर दिया गया था। इसके बाद सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर ने कश्मीरी पंडितों पर हो रहे जुल्मों के प्रतिवाद और व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता को बरकरार रखने की खातिर औरंगजेब के आदेश से दिल्ली के चांदनी चौक में शहादत दी।
अब हम बात करें सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह की, जिन्होंने ऐसे जुल्मी शासकों से टक्कर लेने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों और जातियों से लेकर पांच प्यारों की शुरुआत की और वीर खालसा पंथ स्थापना की। उसके बाद मुगल सेना और कई पहाड़ी राजाओं के साथ गुरुजी की सेना के कई बार युद्ध हुए और हर बार गुरुजी बेहद कम सैनिक होने के बावजूद विजयी रहे। इसीलिए गुरुजी का ये उद्घोष सार्थक नजर आता है-
सवा लाख से एक लड़ाऊं, तबै गोबिन्द सिंह नाम कहाऊं
यानि एक-एक सिख सवा-सवा लाख से लड़ने की क्षमता रखता है।
पंजाब का आनंदपुर साहिब, जो गुरु गोविंद सिंह जी की मुख्य कर्मस्थली रही है, वहीं उन्होंने सुरक्षा के लिहाज से पांच किलों का निर्माण कराया था। सन् 1700 के समय वहां हुई पहली जंग में मुगल सेना ने जीत न पाने के कारण गुरुजी के साथ संधि कर ली थी लेकिन फिर 1702 में एक बड़ी फौज के साथ हमला कर दिया और यह भी लंबा चला। उसके बाद मुगल सेना ने फिर एक संधि की और कसम खाई कि आप यह किला छोड़ कर यहां से चले जाएं और कोई हमला नहीं किया जाएगा।
आनंदपुर साहिब का किला छोड़ते समय जो वादा मुगलों और पहाड़ी राजाओं के साथ हुआ था कि अब किसी पर कोई हमला नहीं करेगा, लेकिन जब गुरु गोबिंद सिंह अपने परिवार और सिख योद्धाओं को लेकर सिरसा नदी के किनारे तक पहुंचे ही थे, तभी सारी कसमें भुलाकर पीछे से उन लोगों ने इनके काफ़िले पर हमला कर दिया।
वहां गुरुजी ने शत्रुओं को ललकारा, जिसे सूफी शायर हकीम अल्ला यार खां जोगी ने बड़े ख़ूबसूरत अंदाज से बयान किया है-
देखा ज्योंही हुजूर ने, दुश्मन सिमट गए,
बढ़ने की जगह खौफ से, नामर्द हट गए,
घोड़े को एड़ी दे के गुरु रण में डट गए,
फ़रमाए बुजदिलों से कि तुम क्यों पलट गए,
अब आओ रण में, जंग के अरमां निकाल लो
तुम, कर चुके हो वार, हमारा संभाल लो।
जब सारा काफ़िला सिरसा नदी के पास था तब उस नदी में भीषण बाढ़ आई हुई थी और आंधी-तूफान भी था। इसी में गुरुजी की माता गुजरी और उनके साथ दो छोटे बेटे जोरावर और फतेह सिंह बिछड़ गए। उसके बाद लाख तलाश करने के बाद भी नहीं मिले।
इस दौरान दो बड़े बेटों और दूसरे साथियों के साथ गुरुजी को तो चमकौर में युद्ध करना पड़ा, जहां दोनों बड़े साहिबजादे अजीत सिंह और जुझारू सिंह बड़ी बहादुरी से युद्ध करते हुए शहीद हो गए।
इधर परेशान छोटे बच्चे बार-बार अपनी दादी से माता-पिता और भाइयों के बारे में पूछ रहे थे। इस बीच उनका घरेलू रसोईया गंगू जो ताउम्र उनके यहां ही पलता रहा, वो भी साथ था लेकिन उसने दगा किया और करीब ही अपने घर सहेड़ी गांव ले गया और फिर सरहिंद के सूबेदार वजीर खान को इनाम के लालच में पकड़वा दिया। उसके बाद उन बच्चों तथा उनकी दादी को एक खंडहर किस्म के ठंडे बुर्ज में कैद कर दिया गया। फिर उन दोनों बच्चों को वजीर खान की अदालत में पेश करने के लिए ले जाया गया।
उन बच्चों को अदालत ले जाने से पहले उनकी दादी ने उन्हें उनके पूर्वजों और दादा गुरु तेग बहादुर की शहादत के बारे में बताते हुए ये ताकीद की थी कि आततायियों के सामने कभी सिर नहीं झुकाना और अपने गौरवशाली इतिहास को धूमिल मत होने देना।
उन छोटे साहिबजादों को जब कचहरी ले जाया जा रहा था तो वहां का बड़ा दरवाजा बंद कर दिया गया था और बिल्कुल छोटा खिड़कीनुमा दरवाजा खुला रखा गया था ताकि वहां जाते हुए छोटे साहबजादे झुक कर ही अंदर प्रवेश करें। लेकिन साहबजादों ने सबसे पहले अपने पैर अंदर किए और फिर तन कर खड़े हो गए और उन्होंने जोर से जयकारा लगाया-
वाहे गुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फ़तेह।
उनकी बुलंद आवाज सुनकर मानो कचहरी की दरो-दीवार कांप उठे। वजीर खान की आंखों में लहू उतर आया। उसने छोटे साहबजादों को कई तरह के लालच दिये और अपना धर्म त्याग कर इस्लाम स्वीकार करने को कहा। छोटे साहबजादों ने साफ़ मना कर दिया। वजीर खान ने तब काजी से फतवा सुनाने के लिए कहा। काजी ने फतवा दिया कि इनकी उम्र बहुत छोटी है और कुरान मजीद के अनुसार इन बच्चों को नहीं मारा जा सकता।
फिर वजीर खान ने उन दोनों को दरबार में उपस्थित मलेरकोटला के नवाब शेर मोहम्मद खान को सुपुर्द करते हुए कहा कि तुम्हारे लिए ये बड़ा अच्छा मौका है, अपने भाई और भतीजे की मौत का बदला ले सकते हो। शेर मोहम्मद खान ने साफ़ कहा कि मेरी लड़ाई गुरु गोविंद सिंह जी के साथ अवश्य है लेकिन मैं इन मासूम बच्चों पर जुल्म नहीं ढा सकता। ये कोई बहादुरी की बात नहीं। मलेरकोटला के नवाब की यह बात सुनने के बाद वहां उपस्थित वजीर खान भयंकर गुस्से में आ गया और उसने क्रोधित होकर काजी को कहा- मैंने तुम्हें फतवा देने को कहा है ये दोषी हैं। तब काजी ने नया फतवा दिया कि इन बच्चों को जिंदा दीवार में चुनवा दिया जाए!
उसी आदेश के अनुसार उस ठंडे बुर्ज से जब सैनिक लेकर जाने लगे थे, उससे पहले दादी माता गुजरी का दर्द शायर ने कुछ यूं बयान किया है – “जाने से पहले आओ, गले से लगा तो लूं
केशों को कंघी कर दूं, जरा मुंह धुला तो लूं
प्यारे, सिरों पे नन्ही-सी कलगी सजा तो लूं,
मरने से पहले तुमको दूल्हा बना तो लूं।”
क्रूर जल्लादों ने उन दो मासूम असहाय निर्दोष बच्चों को दीवार में जिंदा चिनना शुरू कर दिया। जब दीवार छोटे साहबजादे को पूरा ढंकने लगी तो बड़े साहेबजादे की आंखों में आंसू आ गए। ये देखकर छोटे ने कहा- वीर जी, आपकी आंखों में आंसू? क्या आप डर गये हो? तो उसने जवाब दिया कि बड़ा मैं हूं और मुझसे पहले शहीद तुम हो रहे हो। यह सुनकर छोटे साहबजादे ने अपना एक हाथ ऊंचा कर दिया और कहा कि लो वीर जी, पहले शहादत का हक तुम्हारा ही बनता है। और फिर उन दोनों साहिबजादों की शहादत हो गई।
यह समाचार सुनकर बुजुर्ग दादी ने भी अपना शरीर त्याग दिया।
अल्ला यार खां योगी इस सरहिंद की दर्दनाक घटना को सिख राज्य की नींव के रूप में भी देखता है और छोटे साहिबजादों की ओर से कुछ यूं बयान करता है- “हम जान दे के औरों की जानें बचा चले,
सिक्खी की नींव हम हैं सिरों पर उठा चले,
गुरुआई का है किस्सा जहां में बना चले,
सिंघो की सल्तनत का है पौधा, लगा चले
गुरु गोबिंद सिंह के।”
उन दोनों मासूम लेकिन दृढ़ निश्चयी, अपने निश्चय पर अटल रहने वाले महज नौ साल के साहिबजादे जोरावर सिंह और छह साल के फ़तेह सिंह की 26 दिसंबर 1705 को दी गई लासानी शहादत दुनिया के इतिहास में अद्वितीय है।
इसलिए देश का कृतज्ञ होना और इसे वीर बाल दिवस के रूप में स्मृतियों में संजो कर रखना सच्चे अर्थों में श्रद्धांजलि तो है ही, इस बात की सीख भी है कि हर एक की अपनी आस्था और विश्वास है, उसे उसी रूप में हमें स्वीकार और सम्मान देना चाहिए। तभी हम राष्ट्रीय गौरव को अक्षुण्ण बनाए रख सकेंगे।
रोमांटिक कॉमेडी-ड्रामा के नाम पर पेश की गई फिल्म ‘तू मेरी मैं तेरा तू मेरी’ सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे जैसे चर्चित नामों के बावजूद समीर विद्वांस के निर्देशन में बनी यह फिल्म दर्शकों को बांधने में पूरी तरह नाकाम साबित होती है। कमजोर कहानी, फीकी परफॉर्मेंस और बेजान म्यूजिक के चलते हम इसे सिर्फ 1 स्टार की रेटिंग देते हैं।
कहानी
फिल्म की शुरुआत एक भव्य शादी से होती है, जहां रेहान (कार्तिक आर्यन) की एंट्री दिखाई जाती है। शादी की वेडिंग प्लानर होती हैं उनकी मां पिंकी मेहता (नीना गुप्ता)। दूसरी तरफ जैकी श्रॉफ एक रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर के रूप में नजर आते हैं, जिनकी बेटी का किरदार अनन्या पांडे निभा रही हैं। कहानी तब आगे बढ़ती है जब अनन्या क्रोएशिया ट्रिप पर जाती हैं और एयरपोर्ट पर उनकी मुलाकात कार्तिक से होती है। यहीं से जबरन ठूंसा गया फ्लर्ट और बनावटी नोंक-झोंक शुरू हो जाती है। फिल्म का पहला हिस्सा सलमान खान–करिश्मा कपूर की ‘दुल्हन हम ले जाएंगे’ की याद दिलाता है, लेकिन बिना उस फिल्म की मासूमियत और मज़े के। विदेश यात्रा, झगड़े और फिर अचानक प्यार, सब कुछ बेहद प्रेडिक्टेबल है। कहानी में थोड़ा सा भी नयापन नहीं है। सेकंड हाफ में पिता-बेटी के इमोशनल एंगल को जबरदस्ती खींचा गया है और आखिरकार कहानी एक टिपिकल बॉलीवुड हैप्पी एंडिंग पर खत्म हो जाती है, जो किसी तरह का असर नहीं छोड़ती।
परफॉर्मेंस
कार्तिक आर्यन से एक चार्मिंग रोमांटिक परफॉर्मेंस की उम्मीद थी, लेकिन कई सीन में वे ओवरएक्टिंग करते नजर आते हैं। उनके डायलॉग्स और एक्सप्रेशंस जरूरत से ज्यादा लाउड लगते हैं। अनन्या पांडे इमोशनल सीन्स में कमजोर साबित होती हैं, एक्सप्रेशंस और बॉडी लैंग्वेज में गहराई की साफ कमी दिखती है। नीना गुप्ता ठीक-ठाक रहती हैं, लेकिन उनका टेलेंट पूरी तरह इस्तेमाल नहीं किया गया। जैकी श्रॉफ अपने किरदार में जरूर जमे हुए नजर आते हैं, लेकिन उनके पास करने को बहुत कम है।
म्यूजिक
विशाल-शेखर जैसे नामों से अच्छे म्यूजिक की उम्मीद थी, लेकिन फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर खटकता है। गाने न तो कहानी को आगे बढ़ाते हैं और न ही याद रह पाते हैं। कोई भी रोमांटिक ट्रैक ऐसा नहीं है जो थिएटर से निकलने के बाद भी ज़ेहन में गूंजे।
फाइनल वर्डिक्ट
कुल मिलाकर ‘तू मेरी मैं तेरा तू मेरी’ एक बेहद प्रेडिक्टेबल और कमजोर फिल्म बनकर रह जाती है। न इसकी कहानी में दम है, न स्क्रीनप्ले में कसाव और न ही कलाकारों की परफॉर्मेंस इसे संभाल पाती है। कॉन्सेप्ट में भले ही संभावना थी, लेकिन खराब लेखन और खिंचे हुए क्लाइमेक्स ने फिल्म को बोरियत से भर दिया है। सिनेमाघरों में जाकर इसे देखना वक्त और पैसे दोनों की बर्बादी है। बेहतर होगा कि दर्शक इसे ओटीटी रिलीज़ तक इंतजार करके ही देखें।
बीजापुर/रायपुर, 25 दिसंबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के बीजापुर नगर में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई ) ने बीती देर रात भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ताज होटल में छापा मारा है। इस दौरान डाक विभाग से जुड़े चार कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। सीबीआई की टीम ने आरोपितों के पास से 40 हजार रुपये नकद बरामद किए।
अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पकड़े गए आरोपितों में पोस्ट ऑफिस सब डिवीजन इंस्पेक्टर (एसडीआई) शास्त्री कुमार पैंकरा के साथ ही मलोत शोभन, अंबेडकर सिंह और संतोष एंड्रिक शामिल हैं। सीबीआई की टीम चारों आरोपितों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
नई दिल्ली, 25 दिसंबर (हि.स.)। देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व अन्य ने आज सुबह नई दिल्ली के विजय घाट पर स्थापित ‘सदैव अटल’ स्मारक पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित की। स्मृति शेष भाजपा के शीर्ष पुरुष वाजपेयी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीयमंत्री जेपी नड्डा, भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन, दिल्ली मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता आदि ने भी श्रद्धांजलि दी।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने एक्स पर कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी राजनेता, कवि और एकीकरण के प्रतीक थे। उनके शब्दों ने राष्ट्र को प्रेरित किया और दृष्टि ने भविष्य को दिशा दी। उन्होंने कहा कि संवाद, गरिमा और समर्पण से समाज परिवर्तन की सीख अटलजी की अमिट विरासत है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक्स पर कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने अपना जीवन सुशासन और राष्ट्र निर्माण को समर्पित किया। अटल जी प्रखर-वक्ता और ओजस्वी-कवि थे। उनका व्यक्तित्व और नेतृत्व देश के सर्वांगीण-विकास का पथ प्रदर्शक है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक्स पोस्ट में कहा कि अटल जी ने भाजपा की स्थापना कर देशहित और सांस्कृतिक-राष्ट्रवाद को सर्वोपरि रखने वाला विकल्प दिया। अटल जी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने विरासत और विज्ञान को साथ बढ़ाने वाला मॉडल दिया और परमाणु-शक्तिसंपन्न भारत उनकी दृढ़-नीति का परिणाम है।
भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन ने एक्स में कहा कि अटल जी मूल्य आधारित राजनीति और विचारधारा-निष्ठा के स्तंभ थे। अटल जी ने लोकतंत्र को संवाद-संस्कृति दी। जनसेवा को आदर्श बनाया। उनका जीवन राष्ट्र के सर्वांगीण-विकास की प्रेरणा है। नितिन नबीन ने देशवासियों को सुशासन-दिवस की शुभकामनाएं भी दीं।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री मोदी ने कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन सुशासन और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा, “उन्हें न केवल एक प्रखर वक्ता के रूप में बल्कि एक ओजस्वी कवि के रूप में भी हमेशा याद किया जाएगा। उनका व्यक्तित्व, कार्य और नेतृत्व देश के सर्वांगीण विकास का पथ-प्रदर्शक बना रहेगा।”
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री व भाजपा के संस्थापक भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती पर उन्हे कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से नमन किया।
X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा “पूर्व प्रधानमंत्री व भाजपा के संस्थापक भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती पर उन्हे कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से नमन करता हूँ। अटल जी ने भाजपा की स्थापना से भारतीय राजनीति को देशहित और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को सर्वोपरि रखने वाला राजनीतिक विकल्प दिया। भारत को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बनाना हो या सुशासन को चरितार्थ करना हो, उनके नेतृत्व में NDA सरकार ने विरासत व विज्ञान को एकसाथ आगे बढ़ाने का गवर्नेंस मॉडल देश के सामने रखा। अटल जी भारतीय राजनीति में लोकसेवा और संगठन शक्ति के ऐसे सशक्त हस्ताक्षर हैं, जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता।”
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:
“देशवासियों के हृदय में बसे पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी को उनकी जयंती पर सादर नमन। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन सुशासन और राष्ट्र निर्माण को समर्पित कर दिया। वे एक प्रखर वक्ता के साथ-साथ ओजस्वी कवि के रूप में भी सदैव स्मरणीय रहेंगे। उनका व्यक्तित्व, कृतित्व और नेतृत्व देश के चहुंमुखी विकास के लिए पथ-प्रदर्शक बना रहेगा।”
अटलजी हम सभी के लिए प्रेरणा हैं: योगी आदित्यनाथ
लोक भवन में 101वीं जयंती पर अटलजी की प्रतिमा पर मुख्यमंत्री ने किया नमन
लखनऊ,
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी की 101वीं जयंती पर लोक भवन स्थित अटल प्रतिमा पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटलजी की आज पावन जयंती है। अटलजी का विराट व्यक्तित्व प्रेरणास्रोत है। राष्ट्र के विकास में उन्होंने अपन जीवन समर्पित किया। प्रदेशवासियों को सुशासन दिवस की बधाई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अटलजी हम सभी के लिए प्रेरणा हैं। अटलजी ने उत्तर प्रदेश से संसद में कई बार प्रतिनिधित्व किया है। लखनऊ से ही प्रतिनिधित्व करते हुए अटलजी ने प्रधानमंत्री के रूप में देश के विकास को नये विजन के साथ आगे बढ़ाने का काम किया था। यह वर्ष विशेष है। अटलजी की जन्मशती महोत्सव का आयोजन पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ, उनकी कविताओं के काव्य पाठ के साथ, उनके लेखन, पत्रकारिता, संसद और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भाषण पर आधारित अनेक प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
योगी ने कहा कि यह उप्र के लिए गौरव की बात है कि अटलजी की पैतृक भूमि आगरा जनपद के बटेश्वर में है। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा भी कानपुर जनपद से पूरी की। सार्वजनिक जीवन को भी बलरामपुर जिले से प्रारम्भ किया। देश की संसद में सर्वाधिक समय तक उप्र का प्रतिनिधित्व किया। उनका विराट व्यक्तित्व देशवासियों को नयी प्रेरणा प्रदान करता है। योगी ने कहा कि डबल इंजन की सरकार अटलजी की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने के लिए विशाल प्रवाह को निरंतरता देने के लिए लखनऊ में एक राष्ट्र प्रेरणा स्थल का निर्माण किया गया है जिसका प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कर कमलों से राष्ट्र को समर्पित होना है। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, महापौर सुषमा खर्कवाल समेत अन्य लोग मौजूद थे।
भारत सरकार का महिला एवं बाल विकास मंत्रालय कल 26 दिसंबर को राष्ट्रीय स्तर पर वीर बाल दिवस मनाएगा। इस अवसर पर भारत के युवा वीरों के साहस, बलिदान और अनुकरणीय मूल्यों को स्मरण किया जाएगा। इसी दिन विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियाँ हासिल करने वाले बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (पीएमआरबीपी) प्रदान किए जाएंगे।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष बच्चों को प्रदान किया जाने वाला एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है। यह पुरस्कार वीरता,कला एवं संस्कृति,पर्यावरण,सामाजिक सेवा,विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा खेल के क्षेत्रों में असाधारण उत्कृष्टता के लिए प्रदान किया जाता है। वर्ष 2025 में 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 बच्चों का इस सम्मान के लिए चयन किया गया है। यह पुरस्कार भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा 26 दिसंबर 2025 को प्रातः 10:00 बजे,विज्ञान भवन,नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान किया जाएगा।
वीर बाल दिवस 2025 का राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम 26 दिसंबर 2025 को भारत मंडपम,नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। इस राष्ट्रीय आयोजन के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति भी रहेगी, जो बच्चों और युवाओं को संबोधित करेंगे तथा राष्ट्र निर्माण में युवा नागरिकों की भूमिका को रेखांकित करेंगे। यह कार्यक्रम वीरता,दृढ़ता और निस्वार्थ सेवा की प्रेरक कहानियों को प्रस्तुत करेगा,जिससे बच्चों और युवाओं को प्रेरणा मिलेगी तथा विकसित भारत @2047 के अनुरूप सशक्त और जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया जाएगा। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी स्वागत भाषण देंगी।
इस कार्यक्रम में देशभर से स्कूली बच्चे,प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्राप्तकर्ता तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भाग लेंगे। भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत और वीरता की भावना को प्रदर्शित करने वाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियां समारोह का प्रमुख हिस्सा होंगी।
वीर बाल दिवस 2025 के इस राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम का 26 दिसंबर को दोपहर 12:30 बजे से एनआईसी वेबकास्ट,डीडी न्यूज तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारित किया जाएगा, जिससे देशभर में व्यापक सहभागिता सुनिश्चित हो सकेगी।
सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गोविंद सिंह के दोनों छोटे पुत्रों की शहादत को सम्मान देने के लिए हर साल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाया जाता है। यह वही तारीख है जिस दिन उनके दोनों छोटे पुत्रों – साहिबजादे जोरावर सिंह (उम्र 7 वर्ष) और साहिबजादे फतेह सिंह (उम्र 9 वर्ष) को वजीर खान ने जिंदा ही दीवार में चिनवा दिया था। उनके सम्मान में 2022 से वीर बाल दिवस मनाया जाता है। देश में पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान के बाद 26 दिसंबर को सिक्खों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी के साहस और और त्याग को श्रद्धांजलि देने के लिए वीर बाल दिवस दुनियाभर में मनाया जाता है। गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार की शहादत को इतिहास की सबसे बड़ी शहादत माना जाता है। गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों बाबा जोराबर सिंह, बाबा फतेह सिंह और माता गुजरी जी की मानवता की रक्षा के लिए दी गई कुर्बानी की याद में वीर बाल दिवस आयोजित किया जाता है। साहिबजादा जोरावर सिंह जी और साहिबजादा फतेह सिंह जी ने दीवार में जिंदा चुनवा दिए जाने के बाद शहीदी प्राप्त की थी। इन दो महान हस्तियों ने धर्म के महान सिद्धांतों से विचलित होने के बजाय मौत को चुना। गुरु गोविन्द सिंह की तरह उनके बेटे भी साहसी थे। युवा और मासूम लड़के, साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह ने 26 दिसंबर, 1705 को शहादत प्राप्त की, जब उन्हें सरहिंद के मुगल गवर्नर वजीर खान द्वारा बेरहमी से प्रताड़ित किया गया और उनकी हत्या कर दी गई।
ऐतिहासिक घटना के अनुसार संघर्ष की शुरुआत आनंदपुर साहिब किले से हुई। यह वह समय था जब गुरु गोबिंद सिंह और मुगल सेना के बीच कई महीनों तक युद्ध चल रहा था। गुरु जी में गजब का साहस था और वे हार मानने को तैयार ही नहीं थे। उनके हौसले को देखकर औरंगजेब भी सदमे में था। अंत में गुरु जी को हराने के लिए औरंगजेब ने कूटनीति का सहारा लिया। इसलिए, उसने गुरुजी को एक पत्र लिखा “मैं कुरान की कसम खाता हूं, अगर आप आनंदपुर के किले को खाली करते हैं, तो मैं आपको बिना किसी बाधा के यहां से जाने दूंगा।” गुरुजी को कुछ अंदेशा था कि औरंगज़ेब अपनी बात से कभी भी पलट सकता है। फिर भी, वह किला छोड़ने के लिए सहमत हो गए। गुरुजी का अंदेशा सही था। जल्द ही, मुगल सेना ने गुरुजी और उनकी सेना पर हमला कर दिया। सरसा नदी के तट पर एक लंबी लड़ाई हुई और गुरुजी का परिवार बिछड़ गया।
बड़े साहिबजादे गुरूजी के साथ सरसा नदी पार कर चमकौर साहिब गढ़ी पहुंचे। वहीं दो छोटे साहिबजादे जोरावर सिंह और साहिबजादे फतेह सिंह अपनी दादी गुजरी देवी के साथ रवाना हुए। जंगल में तमाम मुश्किलों को पार करते हुए छोटे साहिबजादे अपनी दादी के साथ एक गुफा में रहे। गंगू जो एक ब्राह्मण था और लंगर का सेवक था और उसे इस बात की जानकारी मिली। वह सभी को अपने घर ले आया। पैसे के लालच में गंगू ने गुरुजी को धोखा दिया। पहले गंगू ने माता की अशर्फियां चुराईं और फिर कोतवाल को बताया कि माताजी और साहिबजादे उनके साथ रह रहे हैं। कोतवाल ने साहिबजादों और माताजी को कैद कर लिया। अगली सुबह उन्हें सरहिंद पुलिस थाने ले जाया गया। सरहिंद में साहिबजादों और माताजी को अत्यंत ठंडी जगह पर रखा गया था लेकिन वे डटे रहे और सिर नहीं झुकाया। अगले दिन, नवाब वजीर खान ने साहिबजादों को लुभाने की कोशिश की और उन्हें अपना धर्म बदलने के लिए कहा। लेकिन, उन्होंने मना कर दिया और कहा कि वे अपने धर्म से प्यार करते हैं। इस पर नवाब आगबबूला हो गया और कहा कि उन्हें सजा मिलेगी। मौके पर मौजूद काजी ने फतवा जारी किया। इस फतवे में लिखा था कि ये बच्चे बगावत कर रहे हैं और इन्हें जिंदा दीवार में चुनवा दिया जाना चाहिए।
अगले दिन, कई लोगों ने साहिबजादों से बात की और उन्हें इस्लाम अपनाने के लिए कहा। हालांकि, उन्होंने इनकार कर दिया और अपनी बात पर अड़े रहे। निराश नवाब ने फतवे को अमल में लाने का आदेश दिया। नतीजा यह हुआ कि दोनों को बन रही दीवार में खड़ा कर दिया गया और जल्लाद दीवार बनाने लगे। जब दीवार साहिबजादों के सीने तक पहुंची, तो उन्हें फिर से इस्लाम कबूल करने के लिए कहा गया। लेकिन, साहिबजादे ने फिर मना कर दिया और अपनी बात पर अड़े रहे। कुछ देर बाद दोनों साहिबजादे बेहोश हो गए और शहीद हो गए।
हरिद्वार, 25 दिसंबर (हि.स.)। पतंजलि की ओर से आयोजित समृद्ध ग्राम पतंजलि प्रशिक्षण केंद्र में तीन दिवसीय एकीकृत कृषि क्लस्टर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज समापन आध्यात्मिक ऊर्जा एवं शैक्षणिक प्रभाव के साथ संपन्न हुआ।
प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण समृद्धि के उद्देश्य से एकीकृत एवं सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया गया। जिसमें 150 से अधिक स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों ने आवासीय सुविधा के साथ सक्रिय सहभागिता की।
प्रशिक्षण के अंतिम दिवस का शुभारंभ हवन के साथ हुआ। इसके पश्चात दीप प्रज्वलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि एकीकृत एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियां ही आत्मनिर्भर गांव और समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रकृति के अनुरूप खेती अपनाने और कृषि को बहुआयामी स्वरूप देने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त व्यावहारिक ज्ञान एवं क्षेत्रीय अनुभव के प्रति संतोष व्यक्त किया। इस अवसर पर खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) बहादराबाद मानस मित्तल ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि एकीकृत कृषि मॉडल गांव स्तर की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ किसानों एवं एसएचजी सदस्यों की आजीविका को स्थायी रूप से मजबूत करता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सचिव पर्यावरण एवं वन मंत्रालय नेपाल सरकार गोविंद प्रसाद शर्मा ने सतत कृषि, पर्यावरण संरक्षण एवं सीमा-पार सहयोग पर अपने विचार साझा करते हुए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भविष्य की आवश्यकता बताया। उनके साथ श्री नेपाल सरकार में अवर सचिव भारत खंडेल की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय महत्व प्रदान किया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को आवासीय व्यवस्था के अंतर्गत सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दोनों प्रकार का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण की प्रमुख विशेषताओं में मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर, धरती का डॉक्टर कृषि प्रशिक्षण, तथा एफएमसीजी उत्पादों की गुणवत्ता नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। इन विषयों पर विशेषज्ञों की ओर से विस्तृत तकनीकी सत्र संचालित किए गए, जिससे प्रतिभागियों को आय-वर्धन के नए अवसरों की जानकारी मिली।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम एक बार फिर पतंजलि की एकीकृत, सतत एवं किसान-केंद्रित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो समग्र ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण एवं आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सशक्त कदम है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को शांति, करुणा और आशा से भरे एक सुखद क्रिसमस की शुभकामनाएं दी हैं। श्री मोदी ने कहा, “ईसा मसीह की शिक्षाएं हमारे समाज में सद्भाव को और मजबूत करें।”
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:
“सभी को शांति, करुणा और आशा से भरे एक सुखद क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएं। ईसा मसीह की शिक्षाएं हमारे समाज में आपसी सद्भाव को और अधिक मजबूत करें।“
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी क्रिसमस पर कैथेडेरल चर्च पहुंचे और प्रार्थना की। वहां मौजूद लागों को उन्होंने क्रिसमस की शुभकामनाएं भी दीं।प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी आज दिल्ली के कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्पशन में आयोजित क्रिसमस प्रार्थना सभा में शामिल हुए। श्री मोदी ने कहा, “ इस प्रार्थना सभा में प्रेम, शांति और करुणा का शाश्वत संदेश झलक रहा था। क्रिसमस की भावना हमारे समाज में सद्भाव और सामंजस्य को प्रेरित करे।”