इतिहास में 15 जनवरी : भारत–नेपाल भीषण भूकंप की दर्दनाक याद

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15 जनवरी का दिन इतिहास के पन्नों में भारत और नेपाल के लिए एक त्रासदी के रूप में दर्ज है। वर्ष 1934 में इसी दिन आए विनाशकारी भूकंप ने व्यापक तबाही मचाई थी। इस भूकंप का केंद्र भारत के बिहार क्षेत्र और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों के आसपास था, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 8.4 मापी गई।

भूकंप के तेज़ झटकों से शहरों और गांवों में इमारतें धराशायी हो गईं। बिहार के कई हिस्सों में सड़कें, पुल और घर पूरी तरह नष्ट हो गए, वहीं नेपाल में भी भारी जन-धन की हानि हुई। इस प्राकृतिक आपदा में अनुमानित रूप से लगभग 11 हजार लोगों की जान चली गई, जबकि असंख्य लोग घायल और बेघर हो गए।

1934 का यह भूकंप उस दौर की सबसे भयावह प्राकृतिक आपदाओं में गिना जाता है। सीमित संसाधनों और संचार व्यवस्था के अभाव के कारण राहत और बचाव कार्य भी अत्यंत कठिन रहा। इस त्रासदी ने न केवल तत्कालीन जनजीवन को झकझोर दिया, बल्कि भविष्य में भूकंप-रोधी निर्माण और आपदा प्रबंधन की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।

आज भी 15 जनवरी की यह तारीख हमें प्रकृति की अपार शक्ति और उससे निपटने के लिए सतर्कता, वैज्ञानिक सोच और मजबूत आपदा प्रबंधन तंत्र की अहमियत की याद दिलाती है।

महत्वपूर्ण घटनाचक्र

1759 – लंदन स्थित मोंटेगुवे हाउस में ब्रिटिश संग्रहालय की स्थापना हुई।

1784 – एशियेटिक सोसायटी ऑफ बंगाल की स्थापना।

1934 – बिहार में जबरदस्त भूकंप से करीब 20 हजार लोगों की मौत।

1949 – के. एम. करियप्पा भारतीय थल सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ बने। तब से 15 जनवरी को सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है।

1949 में फील्ड मार्शल के. एम. करियप्पा ने जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान ली थी।

1965 – भारतीय खाद्य निगम की स्थापना।

1975 – पुर्तगाल ने अंगोला की आजादी के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किये।

1986 – थल सेना के प्रथम कमांडर इन चीफ के एम करियप्पा (सेवानिवृत्त) को फील्ड मार्शल की पदवी दी गई।

1986 : इंडियन एयरलाइंस की एक वाणिज्यिक यात्री उड़ान को पहली बार केवल महिला चालक दल ने संचालित किया।

1988 – भारत के पूर्व गेंदबाज नरेंद्र हिरवानी ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने पहले टेस्ट मैच में ही 16 विकेट लिए।

1992 – बुल्गारिया ने बाल्कन के देश मैसिडोनिया को मान्यता दी।

1998 – ढाका में त्रिदेशीय भारत, बांग्लादेश तथा पाकिस्तान का शिखर सम्मेलन प्रारम्भ।

1999 – ‘एनी फ्रैंक घोषणा पत्र’ पर हस्ताक्षर करने वाले प्रथम विश्व नेता संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव कोफी अन्नान बने, पाकिस्तान में सभी नागरिक प्रशासनिक कार्य सेना को हस्तांतरित।

2001 : विकिप‍ीडिया लॉन्‍च किया गया।

2006 – ब्रिटिश हाईकोर्ट ने क्वात्रोच्चि के दो बैंक खातों पर से प्रतिबंध हटाने का आदेश दिया।

2007 – सद्दाम के सौतेले भाई एवं इराकी अदालत के पूर्व प्रमुख फांसी पर चढ़ाये गये।

2008 – सरकारी क्षेत्र की कंपनी गैस अथोरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड (गेल) के बोर्ड ने महाराष्ट्र के दाभोल से बंगलुरु तक गैस पाइप लाइन बिछाने के प्रोजेक्ट को मंज़ूरी दी।

2008 – उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने ‘गंगा र्क्सप्रेस वे परियोजना’ का शिलान्यास किया।

2008 – प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चीन यात्रा के दौरान भारत-चीन सीमा विवाद पर बातचीत की गई।

2008 – खगोलविदों ने धरती से 25 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर की आकाश गंगा के जीवन के लिये जरूरी तत्त्व खोजने का दावा किया।

2009 – दादा साहेब फाल्के पुरस्कार विजेता व प्रसिद्ध फिल्म निर्माता तपन सिन्हा का निधन।

2009 – फिल्म स्लमडॉग मिलेनियर को बाफ्टा पुरस्कार की श्रेणियों में स्थान मिला।

2010 – तीन घंटे से भी अधिक की अवधि वाला शताब्दी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण लगा।

2013 – सीरिया की अलेप्पो यूनिवर्सिटी में रॉकेट हमले में 83 लोगों की मौत तथा 150 लोग घायल।

2016 – पश्चिमी अफ्रीकी देश बुर्किना फासो में ऑगाडोगू के होटल में आतंकवादी हमले में 28 लोगों की मौत तथा 56 लोग घायल।

2020 – आईसीसी ने भारतीय क्रिकेट टीम के (सीमित ओवरों के फॉर्मेट) रोहित शर्मा को वर्ष का सर्वश्रेष्ठ वनडे क्रिकेटर चुना।

2020 – विराट कोहली को ‘आइसीसी स्प्रिट ऑफ क्रिकेट अवॉर्ड ऑफ द ईयर’ चुना गया।

2020 – रूस के प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव ने अपने मंत्रिमंडल के साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

2020 – भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अपना 145वां स्थापना दिवस मनाया। यह दिवस पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा मनाया गया।

2020 – आईपीएस अधिकारी आनंद प्रकाश माहेश्वरी ने दुनिया की सबसे बड़ी अर्धसैनिक बल ‘केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल’ के नए महानिदेशक के रूप में पदभार संभाला।

जन्म

1856 – अश्विनी कुमार दत्त – भारत के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और देश भक्त।

1888- सैफ़ुद्दीन किचलू- पंजाब के स्वतंत्रता सेनानी।

1899 – ज्ञानी गुरमुख सिंह मुसाफ़िर – भारतीय राजनीतिज्ञ और पंजाबी भाषा के विख्यात साहित्यकार थे।

1921- बाबासाहेब भोसले – राजनीतिज्ञ, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री।

1926 – खाशाबा जाधव – भारत के ऐसे पहले कुश्ती खिलाड़ी थे, जिन्होंने हेलसिंकी ओलम्पिक में कांस्य पदक जीता था।

1932 – जगन्नाथ पहाड़िया – राजस्थान के भूतपूर्व नौवें मुख्यमंत्री रहे हैं।

1934 – वी. एस. रमादेवी – भारत की प्रथम महिला मुख्य चुनाव आयुक्त थीं।

1938 – चुनी गोस्वामी – प्रसिद्ध भारतीय फ़ुटबॉलर थे।

1946 – हरप्रसाद दास – उड़िया भाषा के प्रसिद्ध निबंधकार, कवि और स्तम्भकार हैं।

1947 – संचमान लिम्बू – सिक्किम के भूतपूर्व चौथे मुख्यमंत्री थे।

1956- मायावती – राजनीतिज्ञ।

1957- भानुप्रिया अभिनेत्री।

1961- सरदूल सिकंदर – पंजाबी भाषा के लोक और पॉप संगीत से जुड़े प्रसिद्ध गायक तथा अभिनेता थे।

1982- नील नितिन मुकेश – भारतीय अभिनेता हैं, जो हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध गायक नितिन मुकेश के पुत्र हैं।

निधन

1761 ई. – सदाशिवराव भाऊ – भारतीय इतिहास में प्रसिद्ध एक मराठा वीर थे।

1990 – आर. आर. दिवाकर – भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के राजनीतिज्ञ थे।

1998 – गुलजारीलाल नन्दा – भारत के भूतपूर्व कार्यकारी प्रधानमंत्री।

2004 – मोहम्मद सलीम – 16वीं लोकसभा में सांसद थे।

2009 – तपन सिन्हा – प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक।

2012 – होमाई व्यारावाला – भारत की प्रथम महिला फ़ोटो पत्रकार।

2014 – नामदेव ढसाल – मराठी कवि, लेखक और मानवाधिकार कार्यकर्ता थे।

2015 – रामेश्वर ठाकुर- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में से एक थे।

महत्वपूर्ण दिवस

-थल सेना दिवस।

ट्रंप का दावा-ईरान में 12,000 प्रदर्शनकारी मरे, मदद भेजने की घोषणा

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वाशिंगटन, 14 जनवरी (हि.स.)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान की इस्लामिक सरकार के आदेश पर वहां प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसा की जा रही है। मरने वालों की संख्या बढ़कर 12,000 हो गई है। ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि वह मदद भेज रहे हैं। कुछ देर पहले की गई इस घोषणा में यह साफ नहीं किया गया है कि यह मदद किस प्रकार की होगी।

ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट में इस सारे घटनाक्रम पर अहम जानकारी दी गई है। इसमें ट्रंप प्रशासन की हलचल के अलावा ईरान के निर्वासित राजकुमार रजा पहलवी के हवाले से भी स्थिति पर टिप्पणी की गई है। पहलवी ने मंगलवार को कहा कि ईरान में अशांति के कारण मरने वालों की संख्या हाल के दिनों में बढ़ गई है। उन्होंने अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने का आग्रह किया।

फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार पहलवी ने कहा, “दुखद खबर यह है कि पिछले दो दिनों में मरने वालों की संख्या बढ़ गई है। यह 9/11 के आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों की संख्या से चार गुना ज्यादा है। अब तक जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार कम से कम 12,000 लोग मारे गए हैं। उन्होंने कहा, ” निहत्थे प्रदर्शनकारियों को मारने के लिए सैन्य हथियारों, एके-47, बख्तरबंद ट्रकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके शव बुलडोजर से उठाए जा रहे हैं।”

ईरान इंटरनेशनल के संपादकीय बोर्ड ने सूत्रों और मेडिकल डेटा की समीक्षा के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि आठ और नौ जनवरी की रात विरोध प्रदर्शन के दौरान कम से कम 12,000 लोग मारे गए। इस पर नीदरलैंड, स्पेन और फिनलैंड सहित कई यूरोपीय देशों ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई का विरोध करने के लिए ईरान के राजदूतों को तलब किया।

ईरान के मौजूदा हालात से आहत वहां के सर्वोच्च सुन्नी धर्मगुरु मौलवी अब्दुल हामिद ने मंगलवार को देश भर के शहरों में प्रदर्शनकारियों की हत्या की निंदा की और चेतावनी दी कि ऐसे आदेश देने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। उन्होंने एक्स पर कहा, “तेहरान और देश के अन्य शहरों में कुछ ही दिनों में हजारों प्रदर्शनकारियों का नरसंहार दुखद है। इस घटना ने ईरान को दुख और गुस्से में डुबो दिया है और दुनिया भर आजादी पसंद लोगों की अंतरात्मा को गहरी चोट पहुंचाई है। ऐसा आदेश देने वाला परलोक में भी ईश्वरीय दंड का हकदार होगा।”

इस बीच अमेरिकी प्रतिनिधि क्लाउडिया टेनी ने मंगलवार को एक्स पर एक तस्वीर पोस्ट की। इसमें ईरान के सर्वोच्च नेता ली खामेनेई की तस्वीर को सिगार सुलगाने के लिए जलाया जा रहा है। इस तरह की विरोध वाली तस्वीरें जमकर वायरल हो रही हैं।

न्यूयॉर्क की रिपब्लिकन हाउस सदस्य ने कहा, “अगर आपके पास हैं तो उन्हें जलाओ।”

उत्तरी माली में नाइजर नदी में नाव डूबी, 38 की मौत

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बमाको (माली), 14 जनवरी (हि.स.)। उत्तरी माली के टिम्बकटू में नाइजर नदी में एक फेरी नाव (बोट) चट्टानों से टकराकर डूब गई। इस हादसे में दर्जनों लोगों की मौत हो गई। स्थानीय अधिकारियों और मृतकों के रिश्तेदारों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि यह हादसा गुरुवार को डिरे शहर में हुआ। स्थानीय अधिकारियों ने अभी तक आधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या जारी नहीं की है, लेकिन इलाके के निवासी और पूर्व नेशनल असेंबली के डिप्टी अल्काइडी टूरे ने 38 लोगों की मौत हो गई और 23 को बचा लिया गया।

अमेरिका के एबीसी न्यूज चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, डिरे नवासी मूसा अग अल्मोबारक ट्राओरे ने बताया कि उन्होंने इस हादसे में अपने परिवार के 21 सदस्यों को खो दिया।

कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि नाव में किसान सवार थे। यह हादसा रात को हुआ। इस इलाके में अल-कायदा के आतंकवादियों के हमलों को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों के कारण रात को डॉकिंग पर प्रतिबंध लगा है। ट्राओरे ने कहा कि नाव का चालक सुबह तक इंतजार नहीं करना चाहता था और उसने दूसरी जगह किनारे आने की कोशिश की, जहां नाव चट्टानों से टकराकर डूब गई।

माली अपने पड़ोसी बुर्किना फासो और नाइजर के साथ मिलकर कई दशकों से आतंकवादियों से लड़ रहा है। अल-कायदा समर्थित जमात नुसरत अल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन ( समूह के आतंकवादी माली के टिम्बकटू इलाके में सक्रिय हैं। नाइजर नदी पर फेरी नावों से जुड़े हादसे आम बात हैं।

सिंगापुर के प्रधानमंत्री ने तमिलों को पोंगल की शुभकामनाएं दीं

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सिंगापुर, 14 जनवरी (हि.स.)। सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने तमिल समुदाय को पोंगल पर्व की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ” हमारा तमिल समुदाय जिस पोंगल पर्व को मनाता है, वह परिवार के साथ एकजुट होने, कृतज्ञता व्यक्त करने, अपनी पारंपरिक जड़ों का सम्मान करने और आने वाले आशावादी वर्ष का स्वागत करने का उपयुक्त समय है।”

सिंगापुर के प्रधानमंत्री ने कहा, ”इस अवसर पर मैं सभी को पोंगल की शुभकामनाएं देता हूं। पोंगल पर्व की भावना का अनुभव करने के लिए लिटिल इंडिया या इंडियन हेरिटेज सेंटर में कुछ समय अवश्य बिताएं।”

उल्लेखनीय है कि भारत के तमिलनाडु में पोंगल पर्व कल ताई थिरुनाल के रूप में मनाया जाएगा। इस अवसर पर प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए पारंपरिक तरीके से नए मिट्टी के बर्तन में पोंगल बनाकर खुशी और उत्साह के साथ त्योहार मनाया जाता है। तमिलनाडु में पोंगल पर्व चार दिन तक (भोगी, थाई पोंगल, मट्टू पोंगल और काणुम पोंगल) धूमधाम से मनाया जाता है। इस क्रम में आज भोगी पर्व मनाया जा रहा है।

एमपी में बच्चों काे एलर्जी में देने वाले अल्मॉन्ट कफ सिरप की बिक्री पर रोक

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– अल्मॉन्ट सिरप में भी मिला जहरीला केमिकल, जिससे छिंदवाड़ा में गई थी 25 से ज्यादा बच्चों की जान

जबलपुर/भोपाल, 13 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश में बच्चों को एलर्जी में दिए जाने वाले अल्मॉन्ट किड सिरप की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। मंगलवार को राज्य सरकार ने इसको लेकर एडवाइजरी जारी कर दी है। दरअसल, इस सिरप में भी जहरीला इंडस्ट्रियल केमिकल (खराब एथलीन ग्लायकॉल) मिला है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से गाड़ियों के कूलेंट में किया जाता है। कोल्ड्रिफ कफ सिरप में भी यही जहरीला कैमिकल मौजूद था, जिसके सेवन के बाद मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में किडनी फेल होने से 25 से ज्यादा मासूमों की जान चली गई थी।

मध्य प्रदेश ड्रग कंट्रोलर दिनेश श्रीवास्तव ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि अल्मॉन्ट किड सिरप में जहरीला केमिकल मिलने के बाद तेलंगाना सरकार ने इसे अपने राज्य में बैन कर दिया और अन्य राज्यों को भी इसकी जानकारी भेजी है। तेलंगाना से नोटिस सभी राज्यों के पास शनिवार को आ गया था। इसके बाद इसे आगे बढ़ाते हुए हमने राज्य के हर जिले में मौजूद ड्रग इंस्पेक्टर को जानकारी भेजी है। साथ ही संबंधित सिरप को सीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पूरे राज्य में यह प्रक्रिया चल रही है।

उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने अल्मॉन्ट किड सिरप को लेकर एडवाइजरी जारी करते हुए स्टाक और बिक्री पर रोक लगा दी है। जबलपुर में भी ड्रग इंस्पेक्टर ने सभी मेडिकल दुकान संचालकों को निर्देश दिए हैं कि अगर कहीं पर इस सिरप को रखा है, तो उसे जमा कर दें। हालांकि ड्रग इंस्पेक्टर का कहना है कि अभी तक जिले में स्टाक होने की जानकारी नहीं मिली है।

गौरतलब है कुछ माह पहले मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कफ सिरप कांड देशभर की सुर्खियों में छाया हुआ था। यहां कोल्ड्रिफ कफ सिरप के सेवन के बाद किडनी फेल होने से 25 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई थी। इस दौरान राज्य सरकार ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप की जांच कराई थी, जिसमें केमिकल डायएथिलीन ग्लाइकॉल पाए जाने की पुष्टि हुई थी। अब वही जहरीला केमिकल बच्चों को एलर्जी में दिए जाने वाले अल्मॉन्ट किड सिरप में मिला है।

तेलंगाना औषधि नियंत्रण प्रशासन ने बच्चों को दी जाने वाली अल्मॉन्ट-किड सिरप पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं। विभाग ने इस संबंध में अर्जेंट एडवाइजरी जारी करते हुए बताया कि इस सिरप में इथाइलीन ग्लाइकॉल नामक अत्यंत जहरीला रसायन पाया गया है। यह कार्रवाई केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन से प्राप्त लैब रिपोर्ट के आधार पर की गई है।

तेलंगाना सरकार की रिपोर्ट में यह भी पुष्टि हुई है कि बिहार स्थित कंपनी ‘ट्रिडस रेमेडीज’ द्वारा निर्मित बैच नंबर एएल-24002 की यह दवा मिलावटी और जानलेवा है। यह सिरप आमतौर पर बच्चों में एलर्जी, फीवर और अस्थमा के इलाज के लिए डॉक्टरों द्वारा लिखी जाती है। मामला सामने आने के बाद मध्य प्रदेश के सभी जिलों का खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग भी अलर्ट मोड पर है। दवा के विक्रय पर रोक लगाने के लिए दवा विक्रेताओं को निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, संबंधित दवा का कोई स्टॉक फिलहाल किसी के पास नहीं मिला है।

जबलपुर केमिस्ट एवं ड्रग एसोसिएशन के पूर्व सचिव चंद्रेश जैन ने बताया कि अल्मॉन्ट सिरप का बैच नंबर एएल-24002, जिसे प्रतिबंधित किया गया है, जबलपुर के किसी भी मेडिकल स्टोर या आसपास के जिलों में फिलहाल उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि एडवाइजरी जारी की गई है कि यदि किसी दुकान पर यह सिरप मौजूद हो, तो उसे तुरंत सरेंडर कर दिया जाए। ड्रग इंस्पेक्टर देवेंद्र जैन ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से निर्देश मिले हैं कि जिले की हर मेडिकल शॉप पर जांच की जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं अल्मॉन्ट सिरप की बिक्री नहीं हो रही है। साथ ही डीलरों से भी जानकारी जुटाई जा रही है कि यदि एएल-24002 बैच का सिरप स्टॉक में हो, तो उसे तुरंत अलग कर लिया जाए।

अमेरिका ने लेबनान, मिस्र −जॉर्डन में मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े संगठनों को आतंकी घोषित किया

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वॉशिंगटन, 13 जनवरी (हि.स.)। अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए लेबनान, मिस्र और जॉर्डन में मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े तीन संगठनों को आतंकवादी संगठन घोषित किया है। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जारी कार्यकारी आदेश के तहत शुरुआती कार्रवाई के रूप में उठाया गया है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बयान में कहा कि यह निर्णय उन मुस्लिम ब्रदरहुड इकाइयों की गतिविधियों और क्षमताओं को समाप्त करने की दिशा में पहला कदम है, जो अमेरिका के लिए खतरा मानी जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन इस दिशा में आगे भी सख्त कदम उठाता रहेगा।

निर्णय के तहत अमेरिकी विदेश विभाग ने लेबनानी मुस्लिम ब्रदरहुड को ‘विदेशी आतंकवादी संगठन’ और ‘विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी’ (एसडीजीटी) की श्रेणी में रखा है। इसके साथ ही संगठन के प्रमुख मोहम्मद फवजी तक़्कोश को भी एसडीजीटी घोषित किया गया है।

अमेरिकी वित्त विभाग ने मिस्र और जॉर्डन की मुस्लिम ब्रदरहुड इकाइयों को एसडीजीटी के रूप में नामित किया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन दोनों संगठनों पर हमास को भौतिक और वित्तीय सहायता देने के आरोप हैं।

रुबियो ने कहा कि यह कार्रवाई एक व्यापक और सतत अभियान की शुरुआत है, जिसका उद्देश्य दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़ी हिंसक और अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका प्रतिबंधों और अन्य उपायों के जरिए इन संगठनों पर दबाव बनाए रखेगा।

इन नामांकन के बाद संबंधित संगठनों और व्यक्तियों पर कड़े कानूनी और आर्थिक प्रतिबंध लागू होंगे। इनमें अमेरिकी नागरिकों के साथ लेन-देन पर रोक, संपत्तियों को फ्रीज करना और अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर पाबंदियां शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य आतंकी नेटवर्क की फंडिंग और संचालन क्षमताओं को कमजोर करना है।

यह घोषणा राष्ट्रपति ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश के बाद आई है, जिसमें अमेरिकी एजेंसियों को ऐसे संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे, जिन्हें अमेरिकी सुरक्षा हितों के लिए खतरा माना जाता है।

नदियों की स्वच्छता -जलीय जैवविविधता संरक्षण प्राथमिकता :सीआर पाटिल

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देहरादून, 13 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने मंगलवार को कहा कि नदियों की स्वच्छता और जलीय जैवविविधता का संरक्षण देश की राष्ट्रीय प्राथमिकता है।

देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) परिसर में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने राष्ट्रीय नदी अनुसंधान केन्द्र का लोकार्पण करते हुए कहा कि यह केन्द्र नदियों और मीठे पानी के पारिस्थितिकीय तंत्रों से जुड़े वैज्ञानिक अनुसंधान को सुदृढ़ करेगा औए नदी संरक्षण के राष्ट्रीय प्रयासों को मजबूती देगा।

पाटिल ने गंगा नदी को भारत की सांस्कृतिक, पारिस्थितिक एवं आर्थिक जीवनरेखा बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय नदी अनुसंधान केन्द्र से प्रारंभ हुए प्रयास देश की सिमटती जैवविविधता के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने संस्थान से जुड़े वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को इस राष्ट्रीय दायित्व के लिए बधाई दी।

इस अवसर पर उन्होंने गंगा भवन का भी लोकार्पण किया और संस्थान की प्रयोगशालाओं का निरीक्षण किया। बाद में गंगा सभागार में आयोजित संवाद कार्यक्रम में गंगा संरक्षण, जलीय जैवविविधता, सामुदायिक सहभागिता और आजीविका आधारित संरक्षण मॉडलों पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने गंगा नदी में जलीय जीवों के संरक्षण के लिए डॉल्फिन रेस्क्यू वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधरोपण भी किया।

इस अवसर पर संस्थान के प्रेक्षागृह में भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक द्वारा स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया गया। वहीं, डीन एवं परियोजना की नोडल अधिकारी डॉ. रूचि बडोला ने एनएमसीजी–डब्ल्यूआईआई गंगा एवं जैवविविधता संरक्षण परियोजना के अंतर्गत अब तक की उपलब्धियों एवं भावी कार्ययोजना पर प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन किया गया, जिनमें “गंगा बेसिन में अत्यंत संकटग्रस्त घड़ियाल की जनसंख्या स्थिति एवं संरक्षण कार्ययोजना, ‘मिलेट्स फोर लाइफ’ पुस्तक और टीएसए फाउंडेशन इंडिया की ओर से तैयार की गई कछुआ संरक्षण से संबंधित रिपोर्ट शामिल है। साथ ही, इंडियन स्किमर संरक्षण परियोजना का औपचारिक शुभारम्भ किया गया और कछुआ संरक्षण परियोजना की जानकारी भी साझा की गई।————

दिल्ली में पांच दिवसीय ‘कला यात्रा 2026’ का भव्य शुभारंभ

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‘कला यात्रा’ केवल एक आयोजन नहीं बल्कि परंपरा की स्मृति और नवीनीकरण के साहस का उत्सवः डॉ सोनल मानसिंह

​नई दिल्ली, 13 जनवरी (हि.स.)। ​राजधानी दिल्ली के सांस्कृतिक परिदृश्य में मंगलवार की शाम कामानी ऑडिटोरियम में पांच दिवसीय ‘नए कोरियोग्राफी महोत्सव-कला यात्रा 2026’ का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम दिल्ली सरकार के कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग और ‘सेंटर फॉर इंडियन क्लासिकल डांसेज’ (श्री कामाख्या कलापीठ) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया है।

इस मौके पर पद्म विभूषण से सम्मानित नृत्यांगना डॉ. सोनल मानसिंह ने कहा कि ‘कला यात्रा’ केवल एक आयोजन नहीं बल्कि परंपरा की स्मृति और नवीनीकरण के साहस का उत्सव है।

​महोत्सव का आगाज डॉ. सोनल मानसिंह के निर्देशन और कोरियोग्राफी में तैयार नृत्य-नाट्य ‘अमृत-मंथन’ से हुआ। इस प्रस्तुति में पौराणिक समुद्र मंथन के जरिए समाज के अंतर्द्वंद्व: धर्म-अधर्म और सद्-असद् को बेहद प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। भव्य मंच-सज्जा और कलाकारों के जीवंत अभिनय ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।

​दिन की दूसरी प्रस्तुति ‘इंटरनेशनल कथकली सेंटर’ द्वारा पेश की गई। ‘अथिजीवनम’ नामक इस कथकली नाटक ने पर्यावरण संरक्षण और मानवीय लोभ से धरती को बचाने का मार्मिक संदेश दिया। गुरु टी.बी. जगदीशन के निर्देशन में प्रस्तुत इस कथकली नृत्य-नाट्य का विषय मानव लोभ से पृथ्वी की रक्षा था। रंगीन वेशभूषा, सशक्त अभिनय और पारंपरिक संगीत के साथ 400 वर्ष पुरानी इस कला-शैली ने पर्यावरण संरक्षण का गहन संदेश दिया। प्रस्तुति के उपरांत कलाकारों को सम्मानित किया गया।

यह महोत्सव 13, 14, 15, 28 और 29 जनवरी तक चलेगा। इस दौरान देशभर की 10 प्रतिष्ठित नृत्य संस्थाएं अपनी नवीन कोरियोग्राफी पेश करेंगी। ​इसका उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय नृत्य की शुद्धता को बनाए रखते हुए उसमें नए प्रयोगों को मंच देना है।

माघ मेले के सेक्टर पांच में लगी आग, कोई हताहत नहीं

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प्रयागराज, 13 जनवरी (हि.स.)। प्रयागराज के माघ मेले के सेक्टर पांच में झूंसी थानाक्षेत्र के संगम लोवर चौराहा स्थित नारायण शुक्ल धाम में मंगलवार की शाम शार्ट सर्किट से आग लग गई। हालांकि अग्निशमन विभाग एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्काल आग पर काबू पा लिया, जिससे किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

माघ मेला प्रभारी (पुलिस अधीक्षक) नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि जिले के थरवई थानाक्षेत्र के गारापुर गांव निवासी भरत शंकर शुक्ला माघ मेला के सेक्टर पांच के झूंसी थानाक्षेत्र संगम लोअर चौराहे के पास नारायण शुक्ला धाम शिविर में मंगलवार की शाम शार्ट सर्किट से आग लग गई। घटना की सूचना 17:45 बजे प्राप्त होते ही घटनास्थल के निकट ड्यूटी पर तैैनात दो-पहिया फायर वाहन तत्काल मौके पर पहुंचे। इसके बाद दो मिनट के भीतर फायर सर्विस के कुल 06 वाहन घटनास्थल पर पहुंच गए तथा तत्परता से अग्निशमन कार्यवाही प्रारम्भ की। इस आगजनी की घटना में 02 छोलदारियां जलने की सूचना है, लेकिन किसी भी प्रकार की जनहानि अथवा अन्य संपत्ति की क्षति नहीं हुई है। फायर सर्विस की त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई से आग पर पूर्णतः काबू पा लिया गया है। स्थिति पूर्ण रूप से नियंत्रण में है।

मेले की हर व्यवस्था और सिस्टम को किया गया अपडेट

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार माघ मेले की सुरक्षा व्यवस्था काे लेकर बराबर नजर बनाए हुए है और हर प्रकार की व्यवस्था काे पुख्ता कर रही है। माघ मेला शुरू होने के बाद अग्नि शमन विभाग के वाहनों को रवाना करने के दौरान एडीजी फायर पद्मजा चौहान ने जानकारी देते हुए बताया था कि महाकुंभ में हुई आगजनी की घटना को देखते हुए टीम का रिस्पांस टाइम को और करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा था कि अब अग्नि शमन का दस्ति दो मिनट में घटनास्थल पर पहुंच जाएगा। मंगलवार को कुछ ऐसा ही देखने में आया। आग लगने की सूचना पर दो मिनट में मोटरसाइकिल सवार अग्निशमन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पा लिया।

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