चाइनीज मांझा के निर्माण खरीद फरोख्त काे रोके राज्य सरकार : हाईकोर्ट

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प्रयागराज, 14 जनवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक बार फिर राज्य सरकार को चाइनीज मांझा के निर्माण, खरीद फरोख्त को कड़ाई से प्रतिबंधित करने का आदेश दिया है और कहा है कि यह मानव ही नहीं पक्षियों के लिए भी घातक है।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली तथा न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने जौनपुर के अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव व दो अन्य की जनहित याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा 2015 में चाइनीज मांझा पर प्रतिबंध के निर्देश दिए गए थे। जिसका पालन नहीं किया गया और याचिकाएं दाखिल हो रही हैं।

यह याचिका जौनपुर में चाइनीज मांझा से हुई घटनाओं को लेकर दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिया कि जौनपुर समेत पूरे प्रदेश में चाइनीज मांझा के निर्माण, बिक्री व उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। क्योंकि पहले भी हाईकोर्ट द्वारा आदेश दिया जा चुका है और पूर्व के आदेश के पालन के लिए राज्य सरकार बाध्य है। जब भी पतंग उड़ाना अपने चरम पर हो तब राज्य सरकार की यह जिम्मेदारी है कि चाइनीज मांझा का निर्माण, उपभोग व बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाये। क्योंकि यह मनुष्य व पक्षियों के जीवन के लिए संकटमय है। याचिका पर याचीगण के अधिवक्ता शिवा प्रिया प्रसाद ने बहस की।

कहा गया कि चाइनीज मांझा बनाने के लिए जिस धागे, शीशे के पाउडर व गोंद इत्यादि पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है वो इसको रेजर के ब्लेड की तरह तेज धार वाला बना देते हैं। जो शरीर के किसी भी हिस्से को कपड़ा पहनने के बावजूद काट सकती है। इससे मानव जीवन, जानवरों, पक्षियों का जीवन लगातार संकट में बना हुआ है और लोग घायल हो रहे हैं। यह मांझा जानलेवा है। कहा गया कि 11 दिसम्बर 2025 को अपनी बच्ची को स्कूल से छोड़कर आ रहे अध्यापक संदीप तिवारी की शास्त्री ब्रिज पर चाइनीज मांझा से गला कटने से मृत्यु हो गई। हाईकोर्ट ने 19 नवम्बर 2015 को एक जनहित याचिका में राज्य सरकार को आदेश दिया था कि प्रदेश के सभी जिले के कलेक्टर को निर्देश देकर चाइनीज मांझा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए लेकिन आदेश के बावजूद जिले में बिक्री व उपभोग जारी रहा। अध्यापक के अलावा 15 सितम्बर 2015 को उत्तम दुबे की भी चाइनीज मांझा से गला कटने मौत हो चुकी है।

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