
बाल मुकुन्द ओझा
इंटरनेशनल माइंड बॉडी वेलनेस डे यानि अंतर्राष्ट्रीय मन-शरीर कल्याण दिवस हर साल 3 जनवरी को दुनियाभर में मनाया जाता है। आज की भागदौड़ भरी लाइफ स्टाइल में शरीर और मन के बीच सामंजस्य स्थापित करना काफी कठिन हो आया है। ऐसे में ये दिन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण एक है। इस दिन का इतिहास मशहूर ज्ञानी हिप्पोक्रेट्स से जुड़ा हुआ है। हिप्पोक्रेट्स को प्राकृतिक चिकित्सा के संस्थापक का दर्जा दिया गया है और उनकी की गई खोज आज भी दुनियाभर में मौजूद है और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही है। हिप्पोक्रेट्स का मानना है कि स्वस्थ शरीर से हमें एक स्वस्थ दिमाग की प्राप्ति होती है।
शरीर को स्वस्थ और फिट रखने की कोशिशें एक बार फिर परवान पर है। हेल्दी डाइट, एक्सरसाइज, अच्छी नींद आदि आदतें हम रोजाना के जीवन में अपनाएं। शारीरिक गतिविधियां फिट और हेल्दी रहने के लिए जरूरी है कि आप रोजाना फिजिकल एक्टिविटी के लिए समय निकालें और अपनी सेहत का ख्याल रखें। फिजिकल एक्टिविटी, जैसे कि एक्सरसाइज, योग और वॉक न केवल हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है बल्कि हमारे मानसिक और समग्र स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी है। जब आप शारीरिक रूप से एक्टिव रहते हैं, तो शरीर की ऊर्जा बढ़ती है। जिसे “हैप्पी हार्मोन” भी कहा जाता है। यह हार्मोन हमें खुश और संतुष्ट महसूस कराता है, जिससे तनाव और एंग्जायटी जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं।
देश में 54 प्रतिशत लोगों की शारीरिक गतिविधियां करने में कोई रुचि नहीं है और 10 फीसदी से कम लोग मनोरंजन के तौर पर शारीरिक गतिविधियां करते हैं। आईसीएमआर डेटा में इस बात का खुलासा हुआ है। आजकल आर्थराइटिस जैसी जोड़ों की बीमारियां उम्र तक सीमित नहीं रह गई हैं बल्कि शारीरिक रूप से काम न करना भी इस बीमारी के बोझ को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के आंकड़ों बताते हैं कि 54.4 फीसदी लोगों की शारीरिक गतिविधियां करने में रुचि नहीं है। इस सरकारी एजेंसी द्वारा की गई स्टडी के अनुसार लोग यात्रा और मनोरंजन से जुड़ी शारीरिक गतिविधियों के मुकाबले काम में ज्यादा समय बिताते हैं। आलसी जीवनशैली, कसरत न करना या प्रोफेशनल की देखरेख के बिना कसरत करने से युवाओं के जोड़ों के लिगामेंट में दिक्कतें होने लगती हैं। चिकित्सकों का कहना है फिजिकली एक्टिव रहना, न केवल हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारता है बल्कि हमारे समग्र स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है। नियमित फिजिकल एक्टिविटी मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, तनाव को कम करने और जीवन को बेहतर बनाने में सहायक होती है। ऐसे में लोगों को अपनी पसंद के अनुसार फिजिकल एक्टिविटी में खुद को बिजी रखना चाहिए।
तेज चलना, बागवानी या भारोत्तोलन आपका वजन कम करने के अलावा आपको खुश भी रख सकते हैं। शोध में इसका खुलासा हुआ है कि आपकी शारीरिक गतिविधियों की निरंतरता और उन्हें करने की क्षमता आपकी खुशी के स्तर को बढ़ाती है। शोधकर्ताओं के एक दल ने पाया कि एक सप्ताह में एक बार शारीरिक श्रम करने वाला एक सामान्य वजन का वयस्क बिना शारीरिक श्रम के पूरा सप्ताह गुजारने वाले समान वजन के वयस्क की अपेक्षा 1.4 गुना ज्यादा खुश रहा जबकि सामान्य से अधिक वजन का वयस्क 1.5 गुना ज्यादा खुश रहा।
बदलती जीवनशैली के चलते दफ्तर में घंटों बैठे रहकर काम करने और फिर घर में निष्क्रिय जीवन जीने से हमारे शरीर में जंग लगने लगा है और हम बीमारियों का आसान शिकार बनते जा रहे हैं। यह स्थिति तब और भी ज्यादा बिगड़ जाती है जब उम्र 25 पार करती है। 40 की उम्र में आते-आते ज्यादातर लोग आजकल बेहद अनफिट हो जाते हैं। ऐसे में कोलेस्ट्रॉल लेवल के बढ़ने, ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल के नॉर्मल न रह पाने, हड्डियों के भुरभुरा होने, मसल्स में तकलीफ होने, तनाव, डिप्रेशन, मोटापा आदि जैसी समस्याएं घर करने लगती हैं। डिप्रेशन तनाव, चिंता और उदासी का बहुत बड़ा कारण बनता है, जो जल्द ही आपके जीवन पर असर करना शुरू कर देता है। इससे पहले की यह गंभीर रूप धारण कर लें डिप्रेशन निपटने के उपाय करने चाहिए। अवसाद से निपटने का सबसे प्रभावी और प्राकृतिक तरीका शारीरिक गतिविधि है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर 5 में से 1 वयस्क और 5 में से 4 किशोर शारीरिक गतिविधियां नहीं करते, जिससे हेल्थ केयर पर 54 अरब डॉलर का सीधा असर पड़ रहा है।

बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
डी 32, मॉडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
