दिल्ली विधानसभा का सत्र विकास कार्यों की प्रगति, प्रशासनिक दक्षता पर रहेगा केंद्रित

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नई दिल्ली, 28 दिसंबर (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि इस शीतकालीन सत्र का विशेष महत्व है। सत्र में विकास कार्यों की प्रगति, प्रशासनिक दक्षता और वित्तीय अनुशासन जैसे विषयों के केंद्र में रहने की संभावना है। सीमित अवधि और बढ़ती जन अपेक्षाओं के बीच यह सत्र विस्तृत बहसों की बजाय केंद्रित विधायी समीक्षा के रूप में सामने आने की संभावना है।

विधानसभा अध्यक्ष ने आज एक बयान में बताया कि शीतकालीन सत्र का औपचारिक आरंभ 5 जनवरी को पूर्वाह्न 11 बजे दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के अभिभाषण से होगा, जिसके पश्चात सदन की नियमित कार्यवाही प्रारंभ होगी। यह सत्र 8 जनवरी तक चलेगा। उद्घाटन दिवस पर कार्यवाही पूर्वाह्न 11 बजे प्रारंभ होगी, जबकि शेष दिनों में बैठकें दोपहर 02 बजे से आरंभ होंगी।

उन्होंने शीतकालीन सत्र के दौरान रचनात्मक सहभागिता के महत्व पर बल देते हुए कहा कि विधायी समीक्षा और सार्थक बहस लोकतांत्रिक शासन को सुदृढ़ करने के मूल आधार हैं। उन्होंने सदस्यों से अनुशासन, तैयारी और प्रक्रियाओं के पालन के साथ जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने की अपेक्षा व्यक्त की, जिससे सरकार से स्पष्टता प्राप्त हो सके और सूचित निर्णय-निर्माण को बढ़ावा मिले।

उन्होंने बताया कि सत्र के दौरान नियम-280 के अंतर्गत विशेष उल्लेखों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहने की संभावना है। संख्या और विषयवस्तु पर निर्धारित सीमाओं के चलते, ये विशेष उल्लेख प्रशासनिक कमियों और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को सटीक रूप से उजागर करने का माध्यम बनेंगे। उठाए गए विषय आगामी वर्ष की विधायी प्राथमिकताओं के संकेत भी देंगे। सत्र में प्रश्नकाल पर विशेष जोर रहेगा, जो लगातार तीन दिनों तक आयोजित किया जाएगा। स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, जल, परिवहन, वित्त और शहरी विकास जैसे प्रमुख सेवा-प्रदाय विभागों से संबंधित प्रश्नों के माध्यम से सदस्य शासन से समयबद्ध और स्पष्ट उत्तर प्राप्त करने का प्रयास करेंगे।

गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की जनता के लिए यह सत्र केवल राजनीतिक संवाद तक सीमित नहीं रहेगा। सदन में उठाए गए प्रश्नों और दिए गए उत्तरों से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन कितना प्रभावी है, संसाधन सही लाभार्थियों तक पहुंच रहे हैं या नहीं। ऐसे समय में जब जनता की अपेक्षाएं सरकार से उच्च हैं, विधानसभा की कार्यवाही स्पष्टता और भरोसे का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरती है।

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