बांग्लादेश में लोकतंत्र या हिंसक भीड़ तंत्र का राज

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बाल मुकुन्द ओझा

बांग्ला देश में लोकतंत्र की बहाली पर सवालिया निशान लगा है। यहाँ अभी भी भीड़तंत्र का शासन चल रहा है।  हिंसक भीड़ का शिकार एक के बाद एक हिन्दू हो रहा है। दीपू दास के बाद सप्ताहभर में एक और हिन्दू युवक अमृत मंडल को पीट पीट कर मार डाला गया। अब तो वहां स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के बारे में सोचना भी खतरे से खाली नहीं है। शेख़ हसीना की सरकार के हटने के बाद से बांग्लादेश में स्थिति बेहद  ख़राब हुई है। चुनी हुई सरकार वहां है नहीं, सर्वत्र अराजकता का बोलबाला है। कानून के राज की सरेआम धज्जियां उड़ रही है। पुलिस मूक बनी है।

बांग्ला देश में हिन्दू परिवारों पर कातिलाना हमले की ख़बरें रोंगटे खड़े कर देने वाली है। बांग्लादेश में बदलते राजनीतिक परिदृश्य में भीड़ हिंसा एक बड़ी संकट के रूप में उभरी है। कट्टरपंथी तत्व लगातार हिंदू परिवारों के घरों को निशाना बना रहे है। इसके विरोध में भारत में  हिंदू संगठन यूनुस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। पिछले सप्ताह एक भीड़ ने कथित धर्म की निंदा के आरोप में मध्य मयमनसिंह में 28 वर्षीय हिंदू फैक्ट्री कार्यकर्ता दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या कर दी और शव को चौराहे पर आग के हवाले कर दिया, जिससे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुआ। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस बात के सबूत मिले हैं कि बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ लोगों को भड़काने के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI का हाथ है। इसी बीच 17 साल के निर्वासन के बाद पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान बांग्ला देश लौट गए है। उनकी यह वापसी फरवरी में होने वाले अहम आम चुनावों से ठीक पहले हुई है, ऐसे चुनाव जो भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।

 यह देखा गया है कि,  पाकिस्तान और बांग्ला देश में जब भी कोई सियासी घटनाक्रम होता है उस दौरान उपद्रवी कट्टरपंथी तत्व अल्पसंख्यकों पर सबसे पहले हमले शुरू कर देते है। दोनों मुस्लिम देशों में हिंदू आबादी हमेशा निशाने पर रही है। यही वजह है कि वहां साल-दर-साल हिंदुओं की आबादी घटती जा रही है। विशेषकर हिन्दू और हिंन्दू मंदिर उनके निशाने पर होते है। हम बात कर रहे है बांग्ला देश के सियासी घटनाक्रम पर जहां एक छात्र नेता को कुछ नकाबपोश हमलावरों द्वारा मौत के घाट उतारने के बाद हिंदुओं के ऊपर अत्याचार शुरू हो गया है। बांग्लादेश में जगह-जगह पर हिंदू मंदिरों और हिंदू समुदाय पर हमले की खबरें आ रही हैं। अल्पसंख्यक अधिकार संगठनों का दावा है कि 2024-25 के दौरान हजारों हिंसा-घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें मंदिरों पर हमले, संपत्ति को नुकसान और  जानलेवा हिंसा के मामले शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट से पता चलता है कि हिंदुओं के घरों और मंदिरों को निशाना बनाया गया है। हिंदुओं को जान बचाने के लिए छिपना पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदुओं को घरों से निकाल कर पीटा जा रहा है। उनकी दुकानों में लूटपाट की जा रही है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर सालों से हमले होते आ रहे हैं। हिंदुओं के मंदिर, घर, दुकानों, पांडाल में तोड़फोड़ और लूटपाट की खबरें सामने आती रही हैं। हिन्दू इलाकों में भयावह चीख पुकार मची है कि उसे सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो जाएं। खौफ में जी रहे हिन्दू सवाल पूछ रहे हैं कि वो जाए तो कहां जाएं। कट्टरपंथियों ने हिन्दुओं के घरों में ऐसी तबाही मचाई की पीड़ित परिवार रोते बिलखते दिखे।  बांग्लादेश में कई जगहों पर हिन्दुओं के रिहायशी इलाके में भीड़ ने हमला कर दिया, इस दौरान हिन्दुओं की घरों को जला दिया गया और जमकर तोड़फोड़ की गई।  जिसके बाद हिन्दू समुदाय वहां अपनी जान की हिफाज़त की गुहार लगाता नज़र आया। आज़ादी के बाद पाकिस्तान और बांग्ला देश में सैंकड़ों हिन्दू मंदिरों को नेस्तनाबूद कर दिया गया। दोनों ही इस्लामिक देशों में हिंदू संस्कृति संकट में है। हाल यह है कि हिंदुओं को मंदिरों में पूजा करने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। इन देशों में अल्पसंख्यक की महिलाओं के साथ रेप, मर्डर जैसी घटनाएँ आए दिन सामने आती रहती हैं।

अल्पसंख्यकों की जिंदगी पाकिस्तान और बांलादेश दोनों में नर्क है। यहां पर आए दिन हिंदू परिवारों के साथ उत्पीड़न का मामला आता रहता है। हिंदूओं को जबरन इस्लाम कबूल करने पर मजबूर किया जाता है। हिंदू बेटियों का धर्म परिवर्तन कर जबरन मुस्लिम पुरुषों से निकाह कराया जाता है। आए दिन हिंदू लड़कियों के साथ रेप के मामले सामने आते रहते हैं। विभाजन के समय पाकिस्तान में 23 प्रतिशत हिंदू-सिख थे आज घटकर 2 प्रतिशत बचे हैं। बांग्लादेश में भी अब पाकिस्तान जैसे हालात उत्पन्न  होते जा रहे हैं। एक स्टडीज के मुताबिक बांग्ला देश में 1951 में हिंदुओं की आबादी 23 प्रतिशत थी, जो 2017 में घटकर 9 फीसदी रह गई। अब तो ओर भी कम हो गई है।  इस दौरान हिंदू महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न के कई मामले भी सामने आए।  एक आंकड़े के मुताबिक बीते समय बांग्लादेश में 200 से अधिक हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया था। इस स्टडी के अनुसार, इन 10 वर्षों के दौरान हिंदुओं के खिलाफ हमलों में एक हज़ार से अधिक घरों और 800 दुकानों और व्यवसायों को निशाना बनाया गया और उनमें तोड़फोड़ और आगजनी की गई। इस दौरान हिंदू मंदिरों, मूर्तियों और पूजा स्थलों में तोड़फोड़ और आगजनी के दो हज़ार से अधिक मामले दर्ज किए गए। ऑल पाकिस्तान हिंदू राइट्स मूवमेंट के एक सर्वे के अनुसार, साल 1947 में जब भारत-पाकिस्तान अलग हुए तो पाकिस्तान के हिस्से में 428 मंदिर मौजूद थे. मगर 1990 के बाद इनमें 408 मंदिरों को रेस्टोरेंट, होटल, दफ्तर, सरकारी स्कूल या मदरसे में तब्दील कर दिया गया। पाकिस्तान में अब केवल 22 हिंदू मंदिर ही बचे हुए हैं। पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में सबसे ज्यादा 11 मंदिर हैं। इसके अलावा, पंजाब में चार, पख्तूनख्वा में चार और बलूचिस्तान में तीन मंदिर है।

बाल मुकुन्द ओझा

वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार

डी 32, मॉडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर

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