राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भुवनेश्वर में ओडिशा विधान सभा के सदस्यों को संबोधित किया

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उड़ीसा विधान सभा के सदस्यों के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ( फोटो पीबीआई)

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने गुरूवार को भुवनेश्वर में ओडिशा विधान सभा के सदस्यों को संबोधित किया।राष्ट्रपति ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि ओडिशा तेज़ी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, जनजातीय और अन्य वंचित समूहों के विकास, आवास, आपदा प्रबंधन आदि क्षेत्रों में कई नई पहल करने के लिए ओडिशा सरकार की सराहना की। उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से ओडिशा में औद्योगीकरण की प्रक्रिया एक नया आकार ले रही है।

ओडिशा विधानसभा के सदस्यों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति को पुरानी यादें ताज़ा हो गईं। उन्होंने कहा कि कई वर्षों के बाद, इस जगह की पुरानी यादें ताज़ा हो गई हैं। एक विधायक के रूप में उन्होंने इस सदन में प्रश्न पूछे थे और एक मंत्री के रूप में उन्होंने विधायकों के प्रश्नों के उत्तर दिए थे।

राष्ट्रपति ने कहा कि ओडिशा ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस भूमि ने चंद्रशोक से धर्मशोक के रूप में परिवर्तन देखा है। उन्होंने आगे कहा कि ओडिशा के आदिवासी समुदायों ने विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष करके देश के लिए एक मिसाल कायम की है।

राष्ट्रपति ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ओडिशा में महिला सशक्तिकरण की एक प्राचीन परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि ओडिशा विधानसभा में महिलाओं के प्रतिनिधित्व का एक लंबा इतिहास रहा है। आज़ादी से पहले और बाद में, ओडिशा में ऐसी कोई विधानसभा नहीं रही जहाँ महिलाओं का प्रतिनिधित्व न रहा हो। उन्होंने कहा कि ओडिशा की महिलाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करके देश को गौरवान्वित किया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि ओडिशा के गठन की शताब्दी 2036 में मनाई जाएगी। यदि सभी हितधारक 2036 तक समृद्ध ओडिशा के निर्माण के लिए मिलकर काम कर सकें, तो यह 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने में ओडिशा का सबसे बड़ा योगदान होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी लोग ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ काम करेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि विधायक जनता के प्रतिनिधि होते हैं। ओडिशा की जनता को उनसे अपार आशा और विश्वास है और उन्होंने उन्हें एक बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपी है। सभी विधायकों का कर्तव्य है कि वे नागरिकों की उम्मीदों पर खरा उतरें, उनके सपनों को साकार करें और उनके चेहरों पर मुस्कान लाएँ।

राष्ट्रपति ने कहा कि प्रकृति ने ओडिशा को हर प्रकार की सम्पदा से नवाज़ा है। यहाँ प्रचुर मात्रा में खनिज भंडार, वन और जल संसाधन के साथ-साथ मानव संसाधन भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। ओडिशा का पर्यावरण कृषि, उद्योग और वाणिज्य के विकास के लिए अत्यंत अनुकूल है। इन सभी लाभों का लाभ उठाकर, ओडिशा को देश का अग्रणी राज्य बनाया जा सकता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि यह तकनीक का युग है। जनप्रतिनिधि होने के नाते, विधायकों के अनेक प्रशंसक और अनुयायी होते हैं। वे यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि वे क्या कहते हैं और क्या करते हैं। उनके शब्द और आचरण, दोनों ही अमूल्य हैं। विधायक सदन के अंदर और बाहर क्या कहते हैं और कैसे कहते हैं, यह सभी जानते हैं। उन्होंने कहा कि उनका आचरण और वचन ऐसे होने चाहिए कि उनका अनुसरण करके उनके प्रशंसक और अनुयायी समाज और राज्य के निर्माण में योगदान दे सकें।इस अवसर पर उन्होंने भुवनेश्वर परिसर स्थित राजभवन परिसर में नवनिर्मिर्त अथिति गृह कलंग अतिथि निवास का भी उदघाटन किया।

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