
जयपुर, 19 फ़रवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान इलेक्ट्रॉनिक एवं इंस्ट्रूमेंट्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के पद पर बृजेश दीक्षित की नियुक्ति को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने केन्द्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम चयन बोर्ड के अध्यक्ष व भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव को नए सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया आरंभ करने के निर्देश देते हुए चयन प्रक्रिया में राज्य के मुख्य सचिव को भी शामिल करने को कहा है। जस्टिस अशोक कुमार जैन ने यह आदेश पुरुषोत्तम नारायण शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि रील में राज्य सरकार की 49 फीसदी हिस्सेदारी है और यह केन्द्र व राज्य सरकार का संयुक्त उपक्रम है। रीको का प्रबंध निदेशक पार्ट टाइम निदेशक होने के नाते रील का चैयरमेन है और रीको का संचालन राज्य सरकार करती है। ऐसे में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे यह स्पष्ट होता हो कि चयन प्रक्रिया में मुख्य सचिव को शामिल किया गया हो।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद ने कहा कि राज्य सरकार के साथ संयुक्त उपक्रम होने के बावजूद रील के प्रबंध निदेशक की चयन प्रक्रिया में मुख्य सचिव को शामिल नहीं किया। राज्य का उपक्रम होने के नाते चयन प्रक्रिया में सीएस का शामिल होना आवश्यक है। ऐसे में बृजेश दीक्षित की चयन प्रक्रिया अवैध है। इसके अलावा जब चयन प्रक्रिया निर्धारित हो तो दूसरे तरीके अपनाकर चयन नहीं किया जा सकता। इसलिए प्रबंध निदेशक की नियुक्ति को अवैध घोषित किया जाए। वहीं केन्द्र सरकार व अन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरडी रस्तोगी व अन्य ने कहा कि रील राज्य की परिभाषा में नहीं आती है। ऐसे में याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट के बजाए केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण में याचिका दायर करनी चाहिए थी। याचिकाकर्ता चयन प्रक्रिया में शामिल रहा है और याचिका भी देरी से पेश हुई है। इसलिए याचिका को खारिज किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने रील के प्रबंध निदेशक की नियुक्ति को रद्द कर दिया है।
