सीतारमण ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री से की मुलाकात

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ईएफटीए-टीईपीए समझौतों और सहयोग बढ़ाने पर चर्चा

ओस्लो, 18 फरवरी (हि.स)। केंद्रीय वित्‍त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को यहां नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-ईएफटीए तथा टीईपीए समझौतों के क्रियान्वयन पर बातचीत की। दोनों देशों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

वित्त मंत्रालय ने ‘एक्‍स’ पोस्‍ट पर जारी बयान में बताया कि बैठक के दौरान उच्च तकनीक विनिर्माण, कार्बन कैप्चर और भंडारण, स्टार्टअप्स, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया गया। नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने इस वर्ष प्रस्तावित प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी के नॉर्वे दौरे को लेकर उत्साह जताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इस यात्रा से भारत-नॉर्वे सहयोग को और मजबूती मिलेगी।

इससे पहले निर्मला सीतारमण ने नॉर्वे के जाने-माने मुख्‍य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) और निवेशकों के साथ गोलमेज बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में भारत के राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) के सीईओ और सीआईआई के अध्यक्ष ने भी हिस्सा लिया।

नॉर्वे में व्यापार और निवेश समुदाय के 35 से ज्‍यादा सीईओ और टॉप लेवल के पार्टिसिपेंट्स के साथ बातचीत करते हुए वित्‍त मंत्री सीतारमण ने कहा कि नॉर्वे के उनके ऑफिशियल दौरे में इंडिया को एक निवेश गंतव्य और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था के तौर पर दिलचस्प और सकारात्‍मक चर्चा हुई है।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 भी नागरिकों और कंपनियों के लिए रेगुलेटरी और कम्प्लायंस का बोझ कम करने पर भारत सरकार के रिफॉर्म फोकस को दिखाता है। इस दौरान राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) के सीईओ ने एक प्रेजेंटेशन दिया, जिसमें भारत की ग्रोथ और रिफॉर्म की कहानी और दोनों देशों के बीच खास सेक्टर्स में निवेश के मौकों की संभावना और स्कोप पर रोशनी डाली गई।

मंत्रालय के मुताबिक गोलमेज बैठक में रिन्यूएबल्स, कार्बन कैप्चर, रेयर अर्थ्स, फाइनेंशियल सर्विसेज़, एडवांस्ड इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग और शिप बिल्डिंग और शिप रिपेयर समेत मैरीटाइम इकोसिस्टम के अलग-अलग पहलुओं सहित खास सेक्टर्स में बिज़नेस और इन्वेस्टमेंट को-ऑपरेशन के मौजूदा और संभावित मौकों पर चर्चा हुई। इसमें शामिल प्रतिभागियों ने भारत में प्रेडिक्टेबल पॉलिसी और मैक्रोइकोनॉमिक माहौल की तारीफ की और सरकार के रिफॉर्म की कोशिशों और रफ़्तार को माना।

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